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डेढ़ साल हालात बदलने की संभावना फिर से नरोत्तम की सत्ता में होगी वापिसी, आगे मजबूत राजयोग के संकेत

भोपाल. मध्यप्रदेश की विधानसभा 6 बार परचम लहराने वाले विधायक, सबसे ताकतवर मंत्रियों में शुमार, बीजेपी के बड़े रणनीतिकार…फिर भी दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिला। आखिर ऐसा क्या हुआ कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम अंतिम समय तक चर्चा में रहने के बावजूद पार्टी ने किसी और पर भरोसा जताया। क्या यह सिर्फ राजनीतिक समीकरणों का फैसला था। या समय ने भी उनका साथ छोड़ दिया। इन सवालों के जवाब तलाशन के लिये एक वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य और भोपाल स्थित मठ संस्थान के संचालक एवं ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम से नरोत्तम मिश्रा की जन्म कुंडली का विश्लेषण कराया। कुंडली में उस वक्त की ग्रह दशा, टिकट कटने के पीछे ज्योतिषीय वजह को लेकर जो बातें सामने आई। वह काफी दिलचस्प हैं ज्योतिषाचार्य का दावा है कि मौजूदा ग्रह स्थिति भले ही प्रतिकूल रही हो। लेकिन कुण्डली में सत्ता और राजनीतिमें दोबारा मजबूत वापिसी के याग भी स्पष्ट दिखाई दे रहे है।

आशुतोष तिवारी के लिए वोट मांगते समय नरोत्तम मिश्रा भावुक हो गए।

10 जुलाई को आखिर क्या हुआ
10 जुलाई को बीजेपी ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिये आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस फैसले ने सभी राजनीतिक अटकलों को पलट दिया। क्योंकि पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। नरोत्तम मिश्रा ने चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था और लगातार क्षेत्र में बैठकें कर रहे थे। लेकिन पार्टी ने अंतिम समय में आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया। टिकट कटने के बाद नरोत्तम समर्थकों ने दतिया में प्रदर्शन करते हुए हाइवे जाम किया और बाद में नरोत्तम मिश्रा ने स्वयं सामने आकर कार्यकर्त्ताओं से शांत रहने और आशुतोष तिवारी को जिताने की अपील की।
पंडित गौैतम के अनुसार डॉ. नरोत्तम मिश्रा का जन्म 15 अप्रैल 1960 को ब्रह्ममुहूर्त के समय, सूर्योदय काल में अश्विनी नक्षत्र के अंतिम चरण में हुआ था। उनका कहना है कि जन्म के समय चन्द्रमा मेष राशि में तथा सूर्य वृश्चिक राशि क प्रभाव में था। इसी आधार पर तैयार जन्मपत्री में वर्तमान समय में गुरू महादशा प्रभावी है।
2023 से शुरू हुई गुरु महादशा
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक डॉ. मिश्रा की जन्मकालीन दशा केतु से शुरू हुई, जिसके बाद क्रमशः शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल और राहु की महादशाएं चलीं। उनका दावा है कि वर्ष 2023 में राहु महादशा समाप्त होने के बाद गुरु महादशा प्रारंभ हुई, जिसके दौरान वर्तमान में शनि का अंतर चल रहा है। उनके अनुसार यही समय राजनीतिक और व्यक्तिगत चुनौतियों का कारण बन रहा है।
बुध और शनि से बढ़ रहीं चुनौतियां
पं. गौतम का कहना है कि वर्तमान में गुरु महादशा में बुध तथा शनि के प्रभाव से पराक्रम में कमी, अनावश्यक व्यय, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और विरोधियों की सक्रियता बढ़ने के योग बन रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मंगल और राहु की परस्पर दृष्टि कुंडली में षड्यंत्र योग का निर्माण कर रही है, जिसके कारण राजनीतिक विरोध और विवाद की स्थितियां लगातार बनी रह सकती हैं।

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