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भारत के न्यूक्लीयर पॉवर प्लांट से जुड़ी फाइलों में सेंधमारी, गोपनीय जानकारी डार्क वेब पर पोस्ट

नई दिल्ली एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रेन समवेयर ग्रुप वर्ल्ड लीक्स ने डार्क वेब पर भारत के सबसे पड़े परमाणु ऊर्जा संयुत्र कुडनकुलम न्यूक्लीयर पॉवर प्लांट से जुड़े हजारों कागजात अपलोड किये हैं। इन कागजातों में संयंत्र के कुछ हिस्सों के कथित ब्लूप्रिंट, सप्लायर्स की जानकारी, बैठकों के ब्यौरे और बीमा के दस्तावेज शामिल बताये जा रहे है।
वर्ल्ड लीक्स का दावा है कि यह डेटा अनिल अंबानी अंबानी के रिलायंस इंफ्रस्ट्रक्चर का है। हालांकि इन दस्तावेजों की प्रामणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है। रिपोर्ट के अनुसार, रिलायसं ग्रुप ने स्वीकार किया है कि तीसरे पक्ष के डेटा सेंटर सर्विस प्रोवाइडर वायओटीटीए (योटा) के सर्वर पर उसके डेटा में आंशिक सेंध की गयी थी। कम्पनी ने कहा है कि इसघटना की जानकारी सरकार को दे दी गयी है। लेकिन यह नहीं बताया है कि कौना सा डेटा प्रभावित हुआ।
आपको बता दें कि कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र भारत के 7 परमाणु संयंत्रों में सबसे बड़ा और पीएम नरेन्द्र मोदी की देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की योजना महत्वपूर्ण हिस्स है। रिलायस इंफ्रास्ट्रक्चर इस परियोजना की यूनिट -3 और यूनिट-4 के बुनियादी ढांचे के निर्माण का ठेकेदार है। दोनों इकाईयों के 2027 तक चालू होने की उम्मीद है। इनसे संयुक्त रूप से 2 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन होगा।
सूत्रों के अनुसार, NPCIL इस घटना को लेकर रिलायंस के संपर्क में है और भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In भी मामले की जांच कर रही है. हालांकि, परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE), CERT-In, NPCIL और प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
बता दें कि वर्ल्ड लीक्स वही रैनसमवेयर ग्रुप है, जिसने पहले नाइकी और टाटा समूह को भी निशाना बनाया था।  जून में इस ग्रुप ने दावा किया था कि उसने टाटा समूह से चुराए गए डेटा के बदले 15 लाख डॉलर की फिरौती मांगी थी। उसके अनुसार, फिरौती न मिलने पर उसने डेटा सार्वजनिक कर दिया था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में साइबर हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। साइबर सुरक्षा कंपनी Surfshark के अनुसार, पिछले वर्ष 2.89 करोड़ भारतीय खातों का डेटा लीक हुआ, जिससे भारत दुनिया में डेटा उल्लंघनों के मामले में तीसरे स्थान पर रहा।  बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब कुडनकुलम संयंत्र का नाम किसी साइबर घटना से जुड़ा हो।   2019 में भी इस संयंत्र के प्रशासनिक नेटवर्क पर उत्तर कोरिया से जुड़े एक हैकर समूह के मैलवेयर का पता चला था।

 

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