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नो वर्क नो पे -कर्मचारी की गलती नहीं होने पर लागू नहीं किया जा सकता-हाईकोर्ट

हाईकोर्ट का फैसला-जल संसाधन विभाग में 14 साल पुराने प्रकरण में 1990 से वेतन निर्धारण कर पेंशन संशोधन के निर्देश
ग्वालियर- मप्र हाई कोर्ट ने जल संसाधन विभाग से जुड़े एक विवाद में महत्वपूर्ण आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि कर्मचारी की कोई गलती नहीं है और उसे उच्च पद पर कार्य करने से वंचित रखा गया, तो ‘नो वर्क नो पे’ का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति आनंद सिंह बरारावत की सिंगल बेंच ने रघुराज शर्मा एवं अन्य की 2012 से लंबित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
दरअसल, याचिकाकर्ता वर्ष 1979 से दैनिक वेतनभोगी पंप ऑपरेटर के रूप में कार्यरत थे और 1987 में उन्हें नियमित किया गया। वर्ष 1990 में कनिष्ठ एवं समान स्थिति वाले कर्मचारियों को उच्च वेतनमान वाले ट्यूबवेल ऑपरेटर पद पर नियमित कर दिया गया, जबकि याचिकाकर्ताओं को लाभ से वंचित रखा गया।न्यायालय के पूर्व आदेश के पालन में विभाग ने 2012 में याचिकाकर्ताओं को 24 मार्च 1990 से ट्यूबवेल ऑपरेटर पद का लाभ तो प्रदान कर दिया, लेकिन ‘नो वर्क नो पे’ सिद्धांत लागू करते हुए उन्हें उस अवधि के वेतन-एरियर से वंचित रखा।
न्यायालय ने इसे विधि अनुरूप नहीं माना। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के के.वी. जानकीरमन प्रकरण सहित अन्य निर्णयों का उल्लेख कर कहा कि जहां कर्मचारी की कोई त्रुटि नहीं हो और विभागीय कारणों से उसे उच्च पद पर कार्य करने से रोका गया हो, वहां ‘नो वर्क नो पे’ लागू नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता अपने कनिष्ठ कर्मचारियों के समान स्थिति में थे और उन्हें भी 24 मार्च 1990 से ही ट्यूबवेल ऑपरेटर के पद का लाभ मिलना चाहिये था। ऐसे में केवल ‘‘नो वर्क नो पे’’ के आधार पर मौट्रिक लाभ से वंचित रखना गलत है। इसी आधार पर न्यायालय ने याचिका का स्वीकार करते हुए राज्य शासन को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ताओं का वर्ष 1990 से ट्यूबवेल ऑपरेटर पद के अनुसार वेतन निर्धारण किया जाये तथा उत्पन्न एरियर का भुगतान किया जाये। चूंकि याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसलिये उनके पीपीओ एवं जीपीओ का पुनरीक्षण कर पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति का लाभ भी संशोधित किया जाये।

 

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आगरा धर्मान्तरण के प्रकरण में भोपाल में दाऊद अहमद की प्रॉपर्टी कुर्क, कनाडा से भारत की तैयारी शुरू

आगरा-भोपाल। यूपी के आगरा से शुरू हुए धर्मान्तरण सिंडिकेट मामले में पुलिस ने अभी तक की सबसे बड़ी कार्यवाही की है। सिंडिकेट के मुख्य आरोपी और फडिंग के स्त्रोत दाऊद अहमद पर शिकंजा कसते हुए आगरा पुलिस ने भोपाल स्थित उसकी संपतित को कुर्क कर लिया हे। अभी पुलिस उसे विदेश से भारत लाने की तैयारी में जुट गयी है। इस पूरे मामले में अब इंटरनेशनल कनेक्शन ओर फंडिंग नेटवक्र की जांच भी तेज कर दी गयी है।
आगरा पुलिस ने भोपाल के गांधीनगर थाना इलाके स्थित रिलायबल हाईटेक सिटी में दाऊद अहमद के घर पर पहुंचकर कुर्की की कार्यवाही पूरी की है। इससे पहले सीआरपीसी की धारा 82 के तहत नोटिस चस्पा किया गया था। लेकिन अदालत में पेश नहीं होने पर अभी तक धारा 83 के तहत संपत्ति कुर्क कर दी गयी है।
दाऊद कनाड़ा में छिपा
आगरा पुतिलस का मकसद साफ है कि आरोपी या उसका परिवार अभी संपत्ति बेचकर फरार न हो सके। पुलिसिया सूत्रों के अनुसार पिछले 3 वर्षो से दाऊद अहमद में कनाड़ा में मौजूद है। उसे भारत लाने के लिये आगरा पुलिस यूपी सरकार के गृह विभाग से पत्राचार कर रही हे। ताकि सीबीआई के माध्यम इंटरपोल से रेडकॉर्नर नोटिस जारी कराया जा सके।
इसके साथ ही एमएलएटी यानी म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी के तहत भी कार्यवाही की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इस पूरे मामले में एक बड़ा इंटरनेशनल कनेक्शन भी सामने आ रहा है। दाऊद अहमद का संबंध कनाड़ा के ब्राम्पटन इस्लामिक सेंटर बताया जा रहा हे।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा जुलाई 2025 में हुआ था. जब आगरा के सदर क्षेत्र से दो सगी बहनें लापता हो गई थीं. । जांच में सामने आया कि दोनों एक संगठित गिरोह के संपर्क में आ गई थीं. पुलिस ने उन्हें कोलकाता से बरामद किया, जिसके बाद इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ.इस मामले में अब तक 14 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. गिरोह का मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान दिल्ली में सक्रिय था, जबकि उसकी सहयोगी आयशा गोवा से नेटवर्क चला रही थी.पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस सिंडिकेट को विदेशों खासतौर पर कनाडा और यूएई से फंडिंग मिल रही थी. जांच में दाऊद अहमद को इस फंडिंग का अहम स्रोत बताया गया. पुलिस ने दाऊद अहमद की गिरफ्तारी के लिए भोपाल में दबिश भी दी, लेकिन वह हाथ नहीं आया. अदालत के आदेश के बावजूद पेश न होने पर अब सख्ती बढ़ा दी गई है. थाना सदर बाजार में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 209 के तहत एक और मुकदमा भी दर्ज किया गया है.इस पूरे ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने कई लड़कियों को इस गिरोह के चंगुल से मुक्त भी कराया है. यानी साफ है कि पुलिस आयुक्त दीपक कुमार के नेतृत्व में आगरा से हुए खुलासे के बाद अब यह मामला इंटरनेशनल नेटवर्क और फंडिंग तक जा पहुंचा है. फिलहाल, आगरा पुलिस इस सिंडिकेट को जड़ से खत्म करने के लिए आगे भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी में हे।

 

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ग्वालियर में बिना अनुमति के अवैध कॉलोनियों विकसित कर रहे 17 कॉलोनाइजर पर FIR दर्ज

ग्वालियर. अवैध कॉलोनियों के खिलाफ जिला प्रशासन और पुलिस ने सख्त रूख अपनाते हुए बड़ा अभियान चलाया है। शुक्रवार-शनिवार की रात बिजौली इलाके सहित आसपास के गांवों में कार्यवाही करते हुए 17 अवैध कॉलोनियों पर एफआईआर दर्ज की गयी है। धनेली, करगंवा, रतवाई, सुनारपुरा, बेरजा, बरैठा हसनपुरा और महाराजपुरा इलाके इस कार्यवाही के दायरे में रहे। पुलिस ने बिल्डर और कॉलोनाईजरों के खिलाु मध्यप्रदेश ग्राम पंचायतराज एवं स्वराज अधिनियम 1993 के तहत प्रकरण्सा दर्ज कराये गये है। अधिकारियों के मुताबिक पिछले 10 दिनों में अवैध कॉलोनियों पर कार्यवाही हो चुकी है। आरोपियों की तलाश में पुलिस जुटी है।
ळाइवे से जुड़े गांवों में जमीन की कीमत बढ़ने के बाद प्रॉपर्टी व्यापारियों ने बड़े पैमाने पर जमीन खरीदकर अवेध कॉलोनियां विकसित कर दी है।इन परियोजनाओं के लिये नजूल विभाग में एनओसी, टीएंडसीपी और नगर निगम की अनुमति नहीं ली गयी है। जल्दबाजी में प्लॉट ओर डुप्लेक्स बेचकर खरीदारों को गुमराह किया गया और हाल ही में शहर में 100 से ज्यादा कॉलोनियों को अवैध घोषित किया जा चुका है।
इन इलाकों में दर्ज हुई FIR
बिजौली थाना क्षेत्र में करगंवा, धनेली, सुनारपुरा, रतवाई और बेरजा गांवों में अलग-अलग कॉलोनाइजरों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। वहीं महाराजपुरा थाना क्षेत्र के लक्ष्मणगढ़, खेरिया केसर और बरैठा इलाके में भी अवैध कॉलोनी काटने पर कार्रवाई की गई। कई मामलों में पटवारियों की शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
बिना सुविधा बेचे गए प्लॉट
जांच में सामने आया कि अधिकांश कॉलोनियां बिना स्वीकृत नक्शे और बुनियादी सुविधाओं के विकसित की गईं। सड़क, पानी और बिजली जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं होने के बावजूद प्लॉट बेचे गए, जिससे खरीदारों को आर्थिक नुकसान की आशंका है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध कॉलोनियों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। अन्य संदिग्ध कॉलोनियों की जांच जारी है और आगे भी अभियान जारी रहेगा। प्रशासन ने नागरिकों से जमीन या प्लॉट खरीदने से पहले सभी दस्तावेज और वैध अनुमतियों की जांच करने की अपील की है। बिना अनुमति विकसित कॉलोनियों में निवेश करने से कानूनी और आर्थिक जोखिम हो सकता है।

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समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ का जिले में कराया जा रहा है भौतिक सत्यापन

ग्वालियर, – समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ग्वालियर जिला प्रशासन द्वारा वेयर हाउसों का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के निर्देश पर शनिवार को अधिकारियों की टीम ने विभिन्न वेयर हाउसों का निरीक्षण कर उपार्जित गेहूँ की गुणवत्ता और मात्रा का भौतिक मिलान किया।
सत्यापन के दौरान वेयर हाउसों में उपलब्ध गेहूँ की वास्तविक मात्रा का अभिलेखों में दर्ज विवरण से मिलान किया गया, ताकि उपार्जन प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे। इस अभियान के अंतर्गत ग्राम गधोटा एवं पिछोर स्थित वेयर हाउसों सहित जिले के अन्य गोदामों का निरीक्षण किया गया।
कलेक्टर रुचिका चौहान ने निर्देश दिए हैं कि समर्थन मूल्य उपार्जन से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं की नियमित निगरानी जारी रखी जाए और कहीं भी अनियमितता पाए जाने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए।
उल्लेखनीय है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी क्रम में ग्वालियर जिला प्रशासन उपार्जन केंद्रों से लेकर भंडारण व्यवस्था तक सतत निगरानी रखी जा रही है।
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स्वर्ण रेखा में सीवर संधारण एवं मिट्टी हटाने का कार्य तेजी के साथ प्रारंभ 

ग्वालियर -कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर स्वर्ण रेखा नाले में संचालित सीवर लाइन की सफाई एवं एलीवेटेड रोड निर्माण के कारण एकत्र हुई मिट्टी को हटाने का कार्य तेजी के साथ प्रारंभ हो गया है। एलीवेटेड रोड निर्माण की एजेंसी द्वारा हनुमान बांध से भी सीवर लाइन की सफाई एवं मिट्टी को हटाने का कार्य प्रारंभ किया गया है।
उल्लेखनीय है कि कलेक्टर ने गतदिवस नगर निगम एवं एलीवेटेड रोड निर्माण की एजेंसी के प्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देश के परिपालन में कार्यपालन यंत्री ब्रिज निर्माण के नेतृत्व में निर्माण एजेंसी द्वारा सफाई का कार्य प्रारंभ किया गया।
कार्यपालन यंत्री ब्रिज निर्माण जोगिन्दर ने बताया कि स्वर्ण रेखा में सीवर लाइन की सफाई का कार्य करने के साथ-साथ निर्माण एजेंसी के माध्यम से निर्माण के दौरान एकत्र हुई मिट्टी को हटाने का कार्य तेजी के साथ प्रारंभ कर दिया गया है। जहां पर भी सीवर लाइन चौक है उसे खोलने के साथ – साथ सीवर लाइन के संधारण का कार्य भी किया जा रहा है।
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हाईकोर्ट की अवमानना के मामले में कोष एवं लेखा संयुक्त संचालक और पेंशन अधिकारी को गिरफ्तारी वारंट से तलब

ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक पेंशन प्रकरण के मामले में सख्ती दिखाई हुए 2 ट्रेजरी अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के निर्देश दिये है। दरअसल, यह मामला पेंशन के साथ मिलने वाली ब्याज राशि के भुगतान में देरी और हाईकोर्ट के पुराने आदेश का पालन नहीं करने से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान भिंड के एसपी डॉ. आसित यादव हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मौजूद रहें। उन्होंने बताया कि पीपीओ पेंशन आदेश जारी कर दिया गया है। लेकिन प्रशासनिक मंजूरी नहीं मिलने से बयाज का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उसके आदेश का पालन नहीं करना बेहद गंभीर बात है। जिन ट्रेजरी अधिकारियों को हाईकोर्ट में आना था, लेकिन वह भी उपस्थित नहीं हुए है।
ट्रेजरी अधिकारियों को गिरफ्तारी वारंट से तलब
इसी वजह से हाईकोर्ट ने ग्वालियर-चम्बल संभाग के कोष एवं लेखा के संयुक्त संचालक प्रमोद सक्सेना और भिंड के ट्रेजरी अधिकारी व जिला पेंशन अधिकारी अर्चना त्रिपाठी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के निर्देश दिये है। कोर्ट ने भिंड एसपी को आदेश दिये है कि दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार कर अगली सुनवाई में हाईकोर्ट के सामने पेश किया जाये। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।

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स्वच्छता पखवाड़ा- ग्वालियर किला में के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मिलकर परिसर में साफ-सफाई की

ग्वालियर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) एवं रेलवे स्प्रिंग फैक्ट्री, सिथौली द्वारा स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत शनिवार को संयुक्त रूप से किला परिसर में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान दोनों संस्थाओं के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मिलकर परिसर की साफ-सफाई की तथा स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता का संदेश दिया। परिसर में फैले कचरे, विशेषकर single-use plastic (एकल उपयोग प्लास्टिक) को एकत्रित किया गया तथा उसे निर्धारित स्थान पर सुरक्षित रूप से निस्तारित किया गया। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया कि परिसर में प्लास्टिक कचरा इधर-उधर न फैले और स्वच्छ वातावरण बना रहे।
इस कार्यक्रम में एएसआई के सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद् शशिकांत राठौर, संरक्षण सहायक श्याम मुरारी सक्सेना, कुणाल शर्मा, उद्यान सहायक मनोज कुमार मीणा तथा रेलवे स्प्रिंग फैक्ट्री, सिथौली के मुख्य कार्य प्रबंधक (CWM) शिवाजी कदम एवं सहायक कार्य प्रबंधक (AWM) धनंजय रहालकर सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने श्रमदान कर परिसर को स्वच्छ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस अवसर पर शिवाजी कदम द्वारा “स्वच्छ भारत” एवं “स्वच्छ स्मारक” का नारा देकर सभी को स्वच्छता बनाए रखने हेतु प्रेरित किया गया। उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्वच्छता बनाए रखने की शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों एवं सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ एवं संरक्षित रखना तथा आमजन में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

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ईरान जो माइंस होर्मुज में बिछा रहा है वह कितनी खतरनाक, जहाज के टकराने पर कितना नुकसान हो सकता है

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में ऐलान किया है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एंटी माइन ऑपरेशन्स शुरू करेंगे। यह हिस्सा समुद्री यातायात के बहुत जरूरी है। अमेरिका और इजराइल के बीच फरवरी के आखिर में शुरू हुए युद्ध के बाद ईरान ने इस खाड़ी को जहाजों के लिये बन्द कर दिया गया है। ईरान ने छोटी नावों से माइंस बिछाई हैं क्योंकि उसके बड़े जहाज अमेरिकी और इजरायली हमलों में नष्ट हो चुके हैं। अभी यह नहीं पता है कि कितनी माइंस बिछाई गयी है। लेकिन ईरान ने एक रास्ता खुला रखा है जिससे वह जहाज गुजर सकें जो टोल दे दें।
न्यूयॉक टाइम्स के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि ईरान स्वयं अपनी बिछायी मांस का पूरा नक्शा नहीं ढूंढ पा रहा है। उन्हें हटाने की क्षमता भी नहीं है। यह माइंस ईरान के पास मौजूद कई हथियारों में सिर्फ एक है। इसके अलावा सस्ते ड्रोन, एंटी-शिप मिसाइलें और तेज हमलेवाली छोटी नावें भी है।
यह माइंस कितने बड़े जहाज को उड़ा सकती है
म्हाम 3 माइन का रेंज लगभग 3 मीटर है। यह सेंसर्स से जहाज को 3 मीटर की दूरी महसूस कर लेती है। फिर कुछ मीटर दूर से फट जाती है। 120 किमी विस्फोटक के साथ यह बड़े जहाजों जैसे सुपरटैंकर, कार्गो शिप या डेस्ट्रॉयर को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
क्या ईरान को माइंस का नक्शा देना आवश्यक
अंर्तराष्ट्रीय कानून कहता है कि माइंस का उपयोग अंर्तराष्ट्रीय खाड़ी को बेकार करने के लिये नहीं किया जा सकता है। लेकिन ईरान दावा करता है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का कुछ भाग उसके क्षेत्रीय पानी में आता है। अमेरिका और ईरान दोनों 1994 के यूएन लॉ ऑफ द सी में शामिल नहीं है। अभी युद्ध विराम है। लेकिन दोनों के बीच सशस्त्र संघर्ष चल रहा है। इसलिये यह साु नहीं है कि ईरान अमेरिका का माइंस का पूरा नक्शा देगा या नहीं। खासकर जब अमेरिका भी अपना सैन्य ब्लॉकेड लगा रहा है। कुल मिलाकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में माइंस की समस्या दुनिया के लिये बड़ी चुनौती है। अमेरिका की अनक्रूड तकनीक मदद कर सकती है। लेकिन खतरे अभी भी बने हुए हैं।

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MP के 4 जिलों में स्कूलों की छुट्टी, 30 अप्रेल तक अवकाश

भोपाल. मध्य प्रदेश में गर्मी के तेवर और तीखे हो गए है। गर्म हवाओं और बढते तापमान ने दिनभर लोगों को बेहाल कर दिया है। मौसम विभाग ने अभी लू की आधिकारिक स्थिति से इनकार किया है लेकिन हालात लू जैसे महसूस होने लगे है। राजधानी भोपाल में भी पारा 41.7 डिग्री पर पहुंच गया है और रात में भी जमकर तपी। खास बात ये है कि पहली बार हवाओं में तेज गर्माहट साफ महसूस की गई जिसने लोगों की परेशानी और बढा दी। वहीं मोसम विभाग का अनुमान है कि 30 अप्रैल तक तापमान और बढेगा और लू की स्थिति बन सकती है। ऐसे में स्कूलों के लिए भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। भीषण गर्मी के कारण प्रदेश के 4 जिलों में स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है।
शिक्षा विभाग भी स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए सक्रिय
जानकारी के अनुसार मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए प्रदेश का शिक्षा विभाग भी स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए सक्रिय हो गया है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि आउटडोर असेंबली को सीमित किया जाए या इसे छायादार स्थानों पर कराया जाए। किसी भी हाल में खुले में कक्षाएं न लगाई जाएं। शिक्षा विभाग ने स्कूलों में वॉटर बेल सिस्टम पर भी जोर दिया है। स्कूलों से स्टूडेंट को पानी पीते रहने की सलाह देने को कहा गया है। इसके लिए हर 45 से 60 मिनट में घंटी बजाकर स्टूडेट्स को पानी पीने की याद दिलाने के निर्देश भी दिए गए है।
जबलपुर, दमोह, रतलाम: नर्सरी से पांचवीं- 30 अप्रेल तक अवकाश, पन्ना: 6वीं से 8वीं तक 30 अप्रेल तक अवकाश
भीषण तपिश को देखते हुए कई जिलों के स्कूलों में छोटी कक्षाओं का अवकाश घोषित किया गया है। जबलपुर, दमोह, रतलाम जिलों में नर्सरी से पांचवीं कक्षाओं तक 30 अप्रेल तक अवकाश घोषित किया गया है। पन्ना जिले में स्कूलों में 6वीं से 8वीं क्लास तक 30 अप्रेल तक अवकाश दिया गया है। नर्सरी से 5वीं तक छुट्टी पहले से घोषित है।

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ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर सिंधिया के समर्थकों की भीड़ में दबी बच्ची, रोती-बिलखती रही

भीड़ के पैरों के नीचे दबने से रोती हुई मासूम बच्ची पिता की गोद में - Dainik Bhaskarग्वालियर. शहर में चार दिवसीय प्रवास पर देर रात ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री सिंधिया के स्वागत के लिए पहुंचे समर्थक एक बार फिर मर्यादा भूल गए। केंद्रीय मंत्री के स्वागत की होड में उन्होंने स्टेशन पर मौजूद यात्रियों के साथ धक्का-मुक्की करनी शुरू कर दी। समर्थकों की भीड में ही एक छोटी बच्ची फंसकर दब गई जिसे उसके पिता ने किसी तरह से बचाया। भीड को नियंत्रित करने में आरपीएफ व जीआरपी के जवान पूरी तरह से नाकाम नजर आए। केंद्रीय मंत्री सिंधिया के स्वागत के लिए समर्थक नारेबाजी कर रहे थे। उन्हें माला पहनाने की होड भी समर्थकों के बीच मच गर्ठ। इस दौरान समर्थकों ने प्लेटफॉर्म पर खडे बाकी यात्रियों के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी जिस्से स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई। इसी भीडभाड में प्लेटफॉर्म पर मौजूद एक छोटी बच्ची भी फंस गई।
जैसे-तैसे पिता ने बच्ची को बचाया
अचानक भीड में फंसने से बच्ची रोती-चिल्लाती रही लेकिन सिंधिया समर्थक स्वागत में ही जुटे रहे। जैसे तैसे बच्ची के पिता ने अपनी बेटी को बचाया। इस दौरान बच्ची को हल्की चोटें भी आई है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर मौजूद पुलिस प्रशासन भीड को नियंत्रित नहीं कर सका।
जानकारी के अनुसार केंद्रीय मंत्री सिंधिया देर रात को ट्रेन मार्ग से ग्वालियर पहुंचे। रेलवे स्टेशन पर केंद्रीय मंत्री के स्वागत के लिए समर्थकों की भारी भीड जुअ गई। चूंकि वर्तमान में स्टेशन पुनर्विकास कार्य के चलते प्लेटफॉर्म पर काम चल रहा है जिससे जगह-जगह बेरीकेडिंग और टीनशेड लगे है। इस वजह से प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के लिए भी जगह कम बचती है।