ग्वालियर में बिना अनुमति के अवैध कॉलोनियों विकसित कर रहे 17 कॉलोनाइजर पर FIR दर्ज
ग्वालियर. अवैध कॉलोनियों के खिलाफ जिला प्रशासन और पुलिस ने सख्त रूख अपनाते हुए बड़ा अभियान चलाया है। शुक्रवार-शनिवार की रात बिजौली इलाके सहित आसपास के गांवों में कार्यवाही करते हुए 17 अवैध कॉलोनियों पर एफआईआर दर्ज की गयी है। धनेली, करगंवा, रतवाई, सुनारपुरा, बेरजा, बरैठा हसनपुरा और महाराजपुरा इलाके इस कार्यवाही के दायरे में रहे। पुलिस ने बिल्डर और कॉलोनाईजरों के खिलाु मध्यप्रदेश ग्राम पंचायतराज एवं स्वराज अधिनियम 1993 के तहत प्रकरण्सा दर्ज कराये गये है। अधिकारियों के मुताबिक पिछले 10 दिनों में अवैध कॉलोनियों पर कार्यवाही हो चुकी है। आरोपियों की तलाश में पुलिस जुटी है।
ळाइवे से जुड़े गांवों में जमीन की कीमत बढ़ने के बाद प्रॉपर्टी व्यापारियों ने बड़े पैमाने पर जमीन खरीदकर अवेध कॉलोनियां विकसित कर दी है।इन परियोजनाओं के लिये नजूल विभाग में एनओसी, टीएंडसीपी और नगर निगम की अनुमति नहीं ली गयी है। जल्दबाजी में प्लॉट ओर डुप्लेक्स बेचकर खरीदारों को गुमराह किया गया और हाल ही में शहर में 100 से ज्यादा कॉलोनियों को अवैध घोषित किया जा चुका है।
इन इलाकों में दर्ज हुई FIR
बिजौली थाना क्षेत्र में करगंवा, धनेली, सुनारपुरा, रतवाई और बेरजा गांवों में अलग-अलग कॉलोनाइजरों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। वहीं महाराजपुरा थाना क्षेत्र के लक्ष्मणगढ़, खेरिया केसर और बरैठा इलाके में भी अवैध कॉलोनी काटने पर कार्रवाई की गई। कई मामलों में पटवारियों की शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
बिना सुविधा बेचे गए प्लॉट
जांच में सामने आया कि अधिकांश कॉलोनियां बिना स्वीकृत नक्शे और बुनियादी सुविधाओं के विकसित की गईं। सड़क, पानी और बिजली जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं होने के बावजूद प्लॉट बेचे गए, जिससे खरीदारों को आर्थिक नुकसान की आशंका है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध कॉलोनियों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। अन्य संदिग्ध कॉलोनियों की जांच जारी है और आगे भी अभियान जारी रहेगा। प्रशासन ने नागरिकों से जमीन या प्लॉट खरीदने से पहले सभी दस्तावेज और वैध अनुमतियों की जांच करने की अपील की है। बिना अनुमति विकसित कॉलोनियों में निवेश करने से कानूनी और आर्थिक जोखिम हो सकता है।

