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2.53 करोड़ रूपये की ठगी के मामले में सुप्रीम कोर्ट जमानत की शर्त पर लगी रोक, रामकृष्ण मिशन आश्रम के हाईकोर्ट -सुप्रीम कोर्ट में आरोपी

ठगी के शिकार रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव सचिव स्वामी सुप्रदिप्तानंद का फाइल फोटो

ग्वालियर. रामकृष्ण आश्रम मिशन से हुई 2 करोड़ 53 लाख रूपये की साइबर ठगी के मामले में नया मोड़ आ गया है। आरोपी गुरजीत सिंह ने हाईकोर्ट में कहा है कि उसके खाते में 15 लाख 19 हजार रूपये आये थे। वह यह राषि जमा करने के लिये तैयार है। इसके आधार पर 28 जनवरी 2026 को उसे सशर्त जमानत देने का आदेश दिया गया था। आरोपी ने बाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि उसके खाते में 15.19 लाख नहीं बल्कि मात्र 2.89 लाख रूपये ही आये थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा दी गयी जमानत की शर्त पर फिलहाल रोक लगा दी है। संबंधित पक्षों कमा नोटिस जारी कर दिया है।
ऐसे हुई ठगी 2.53 करोड़ रूपये
आश्रम के सचिव स्वामी सुप्रदिप्तानंद को 17 मार्च 2025 को एक कॉल आया। जिसमें कॉलर ने स्वयं को नासिक पुलिस का अधिकारी बताया था। उसने मनी लॉन्ड्रिंग केस में नाम आने का डर दिखाया और फर्जी दस्तावेज व बैंक डिटेल भेजकर भरोसा दिलाया। ठग ने जांच के नाम पर आश्रम के खाते की जानकारी ली और धीरे-धीरे 2 करोड़ 52 लाख 99 हजार रूपये अलग-अलग एकाउंट में ट्रांसफर करवा ली। आरोपी ने भरोसा दिलाया था कि जांच पूरी होने पर रकम वापिस कर दी जायेगी।
मामले में पुलिस अब तक नागदा, उज्जैन, दिल्ली, नोएडा, प्रयागराज और गुजरात से 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें बैंक मैनेजर, कैशियर सहित कई लोग शामिल हैं। हाल ही में हरदा से पकड़े गए आरोपी के खाते में 4.95 लाख रुपए ट्रांसफर हुए थे। यह मामला ग्वालियर की अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी में से एक माना जा रहा है। मुख्य आरोपी गुरजीत सिंह फिलहाल जेल में ही बंद है।

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MP में डेढ़ गुनी महंगी होगी रजिस्ट्री, जमीन की कीमतों में औसतन 16 प्रतिशत वृद्धि

ग्वालियर. नए वित्तीय वर्ष में देशभर में बदलावों के बीच मध्य प्रदेश में भी कई नए नियम लागू होंगे। प्रदेश में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री महंगी होगी। रजिस्ट्री कराने वालों पर तिहरी मार पडेगी। विभिन्न जिलों की कलेक्टर गाइडलाइन में हजारों लोकेशन पर 5 से लेकर 300 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। आरसीसी स्ट्रक्चर निर्माण की कीमत बढाई गई है। अब रही कसर तो गाइडलाइन के साथ लागू उपबंध पूरी कर देंग। इससे रजिस्ट्री डेढ गुनी महंगी होगी। प्रदेश में जमीन की कीमतों में औसतन 16 प्रतिशत वृद्धि होगी।
प्रदेश में एक लाख से अधिक लोकेशन में से करीब 65 हजार स्थानों पर रेट बढे है। सबसे ज्यादा वृद्धि इंदौर में 300 प्रतिशत तो भोपाल में 180 प्रतिशत तक रेट बढेंगे। बुधवार से रजिस्ट्री के लिए नए रेट के आधार पर ही जमीन के मूल्य का आकन होगा। आरसीसी स्ट्रक्चर वाले मकानों की निर्माण लागत 1000 रुपए प्रति वर्ग मीटर बढेगी। लग्जरी सुविधाओं वाले अपार्टमेंट जिनमें स्विमिंग पूल, जिल, जकूजी आदि होंगे, रजिस्ट्री के लिए उनके मूल्य का आकलन उस क्षेत्र की सामान्य गाइडलाइन 10 प्रतिशत बढाकर किया जाएगा।
इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में निर्माण लागत 14000 रुपए प्रति वर्गमीटर रहेगी। अन्य नगर निगम क्षेत्रों में निर्माण लागत 13 हजार रुपए, नगर पालिका क्षेत्रों में 11 हजार, नगर पंचायत क्षेत्रों में 9 हजार और ग्रामीण क्षेत्रों में 7 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर लगेगी।

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कोर्ट ने राजेंद्र भारती को तिहाड़ जेल भेजा, भूमि विकास बैंक घोटाले में विधायक राजेन्द्र भारती दोषी

दतिया. मध्यप्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती को दिल्ली एमपी, एमएलए कोर्ट ने भूमि विकास बैंक जुड़े मामले में बुधवार को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 धोखाधड़ी के तहत दोषी ठहराते हुए सख्त रूख अपनाया है। इस फैसले को राज्य की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली MP-MLA कोर्ट ने भूमि विकास बैंक से जुड़े मामले में बुधवार को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने उन्हें IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट ने राजेंद्र भारती को तिहाड़ जेल भेज दिया है।
विधायक राजेन्द्र भारती ने अपनी मां के नाम से बैंक में 10.50 लाख रूपये की एफडी 3 साल के लिये कराई थी। जिस पर 13.50% रूपये ब्याज मिल रहा था। आरोप है कि बाद में इस एफडी की अविध में बदलाव कर उसे 3 वर्ष से बढ़ाकर 15 साल कर दिया गया।
इसी मामले को लेकर बैंक के कर्मचारी नरेंद्र सिंह ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। कोर्ट ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसे धोखाधड़ी का मामला माना और केस दर्ज करने के आदेश दिए।

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ज्योतिरादित्य सिंधिया की जिद, 5 पद तो देने होंगे

भोपाल. निकायों में एल्डरमेन की नियुक्ति वाली पहली सूची तो जारी हो चुकी है लेकिन निगम मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों पर फंसे पेच दूर नहीं हो पा रहे है। इस रूकावट के पीछे सिंधिया गुट के पांच नाम बताए जा रहे है। इनमें पूर्व मंत्री इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसोदिया, ओपीएस भदौरिया, गिरिराज दंडोतिया और पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल का नाम है।
सिंधिया के साथ दल बदल भाजपा में आए थे
मध्य प्रदेश की राजनीति के वे नाम है जो सिंधिया के साथ दल बदल कर भाजपा में बेहिचक आए थे बाद में इनमें से कुछ को टिकट नहीं मिली तो कुछ हाशिये पर चले गए। सूत्रों के अनुसार सिंधिया इनको जगह दिलवाना चाहते है। पूर्व में वे जगह दिलाने में सफल भी रहे।
सिंधिया की जिद, पद तो देने होंगे
सूत्रों का कहना है कि इस मामले को लेकर सिंधिया का साफ कहना है कि ये वहीं नेता है जो संकट के समय दलबदल करते हुए कांग्रेस छोडकर भाजपा में शामिल हुए थे। ऐसे में इन संकट तारने वालों को पद देना ही होगा। इधर बीजेपी की ओर से इन राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर हो रही देरी को जहां विपक्ष को एक बार फिर बीजेपी पर वार का मौका मिल गया है वहीं राजनीतिक एक्सपर्ट्स इस देरी को महत्वपूर्ण बता रहे है।

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लश्कर क्षेत्र में स्थित बेशकीमती लगभग  7 बीघा सरकारी जमीन अतिक्रमण मुक्त कराई 

ग्वालियर-शासकीय जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिये  बुधवार को जिला प्रशासन की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। नगर निगम के मदाखलत दस्ते की मशीनों की मदद से लश्कर तहसील में स्थित पटवारी हलका कोटा लश्कर क्षेत्र में लगभग 7 बीघा बेशकीमती सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटवाया। अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीन की कीमत सरकारी गाइडलाइन के अनुसार लगभग 20 करोड़ रुपए आंकी गई है। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर एसडीएम लश्कर नरेन्द्र बाबू यादव के नेतृत्व में गई संयुक्त टीम द्वारा यह कार्रवाई अंजाम दी गई।
तहसीलदार महेश कुशवाह ने बताया कि पटवारी हलका कोटा लश्कर के अंतर्गत शासकीय भूमि के विभिन्न सर्वे क्रमांक की लगभग साढ़े 6 बीघा जमीन स्वास्थ्य विभाग को सरकारी अस्पताल बनाने के लिये आवंटित थी। इस जमीन पर स्थानीय निवासियों ने बेजा कब्जे कर लिए थे। इसी तरह 3 अन्य सर्वे क्रमांक के अंतर्गत नाले के किनारे स्थित लगभग 10 बिस्वा शासकीय जमीन पर भी अवैध अतिक्रमण कर लिया गया था। ये सभी अतिक्रमण बुधवार को मशीनों की मदद से ध्वस्त कराकर स्वास्थ्य विभाग को फिर से कब्जा दिला दिया गया है।
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जनगणना-2027 -पूरी मुस्तैदी व गंभीरता के साथ करें जनगणना संबंधी संवैधानिक दायित्व का निर्वहन – कलेक्टर 

बाल भवन में 82 फील्ड ट्रेनर्स का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू 
ग्वालियर –  हम सबके लिये गर्व की बात है कि हमें विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक कार्य जनगणना करने का सुअवसर मिला है। जनगणना का कार्य पूरी तरह संवैधानिक है। इसलिये पूरी गंभीरता व मुस्तैदी के साथ इस संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करें। यह बात कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी रुचिका चौहान ने बाल भवन में बुधवार से शुरू हुए तीन दिवसीय फील्ड ट्रेनर्स प्रशिक्षण सत्र के उदघाटन अवसर पर प्रशिक्षण ले रहे अधिकारियों से कही।
इस प्रशिक्षण में 82 अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। प्रशिक्षण के बाद इन अधिकारियों द्वारा जनगणना कार्य के लिये संलग्न किए गए प्रगणकों व सुपरवाइजर्स को प्रशिक्षित किया जायेगा। फील्ड ट्रेनर्स प्रशिक्षण के उदघाटन सत्र के दौरान नगर निगम आयुक्त एवं ग्वालियर शहर के प्रमुख जनगणना अधिकारी संघ प्रिय, जिला जनगणना अधिकारी अनिल बनवारिया व अपर आयुक्त नगर निगम मुनीष सिकरवार, जनगणना कार्यालय भोपाल से आए राकेश मीणा एवं मुख्य प्रशिक्षक एसबी ओझा उपस्थित थे।
जनगणना पूरी तरह संवैधानिक, जानकारी देना अनिवार्य 
जनगणना का कार्य पूरी तरह संवैधानिक है। भारतीय संविधान में 32 बार जनगणना का उल्लेख आया है। सभी को जनगणना से संबंधित जानकारी देना अनिवार्य है। संविधान के अनुच्छेद-246, जनगणना अधिनियम 1948 व जनगणना नियम 1990 के तहत जनगणना का कार्य किया जा रहा है।
प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना 
भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत ग्वालियर जिले में भी दो चरणों में जनगणना होगी। प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) कार्य मध्यप्रदेश में 01 मई से 30 मई 2026 तक किया जायेगा। इस चरण का उद्देश्य द्वितीय चरण अर्थात जनसंख्या गणना के लिये मास्टर फ्रेम तैयार करना है। जनगणना के द्वितीय चरण का काम फरवरी 2027 में होगा।
प्रथम चरण में इन 34 बिंदुओं की जानकारी होगी संकलित 
जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकान गणना का काम किया जायेगा। जिसमें 34 बिंदुओं में जानकारी संकलित होगी। इसमें भवन व मकान नम्बर सहित मकान की स्थिति, परिवार क्रमांक, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग, मकान किराए का है अथवा स्वयं का, कमरों की संख्या, परिवार के विवाहित दम्पत्तियों की संख्या, पेयजल के मुख्य स्त्रोत, पेयजल स्त्रोतों की उपलब्धता, प्रकाश का मुख्य स्त्रोत, शौचालय की सुगमता, शौचालय का प्रकार, गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था, परिसर के अंदर स्नान की सुविधा, रसोई घर व एलपीजी-पीएनजी कनेक्शन, खाना पकाने के लिये प्रयुक्त मुख्य ईंधन, रेडियो/ट्रांजिस्टर व टेलीविजन की उपलब्धता, इंटरनेट सुविधा, लेपटॉप/कम्प्यूटर की उपलब्धता, टेलीफोन, मोबाइल फोन व स्मार्ट फोन इत्यादि की उपलब्धता, साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, मोपेड, कार, जीप व वैन, परिवार द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले अनाज, मसलन चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का व अन्य खाद्यान्न एवं मोबाइल फोन इत्यादि जानकारी शामिल है।
प्रत्येक प्रगणक व पर्यवेक्षक को मानदेय के रूप में मिलेंगे 25 – 25 हजार रुपए 
जनगणना-2027 का कार्य करने वाले प्रगणकों व पर्यवेक्षकों को भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा आकर्षक मानदेय प्रदान किया जायेगा। प्रत्येक प्रगणक व पर्यवेक्षक को दोनों चरणों में जनगणना से संबंधित कार्य के लिये कुल मिलाकर 25 – 25 हजार रुपए मानदेय के रूप में प्रदान किए जायेंगे।
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आज से 218 तक महंगा हुआ कॉमर्शियल सिलेंडर

नई दिल्ली. आज 1 अप्रैल है, नए वित्त वर्ष की शुरूआत कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के महंगे होने से हुई है। सरकारी तेल कंपनियों ने इसके दाम 218 रुपए तक बढा दिए है। जानकारी के अनुसार तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर 218 तक महंगा कर दिया है। चेन्नई में ये सबसे महंगा 2246.50 रुपए में मिलेगा। दिल्ली में इसकी कीमत 2078.50 हो गई है। वहीं अब इसके असर देखने को मिल रहे है। कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च बढेगा। ऐसे में वें चाय, नाशते और थाली महंगी कर सकते है। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है।
रेल टिकट 8 घंटे पहले तक ही कैसिंल होगी
ट्रेन छूटने से 8 घंटे पहले तक टिकट रद करने पर ही रिफंड मिलेगा। पहले यह समय 4 घंटे था। जानकारी के अनुसार समय पर टिकट कैंसिल नहीं कर पाने पर पैसों का नुकसान होगा। रिफंड के नियमों को सख्त करने से आम यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढेगी।

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UP की महिला की याचिका खारिज-दूसरे राज्य के सर्टिफिकेट पर आरक्षण का लाभ नहीं ले सकते, जन्म से तय होती है जाति, शादी से नहीं बदलेगी-हाईकोर्ट

ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में साफ कर दिया है कि दूसरे राज्य में जारी ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) प्रमाण पत्र के आधार पर एमपी में आरक्षण का लाभ नहीं ले पायेंगे। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि विवाह के आधार पर महिला को पति की जाति का आरक्षण लाभ नहीं मिलेगा। यह मामला अर्चना दांगी का है जो कि मूल रूप से जालौन (यूपी)की निवासी है। उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा 20185 में पास की थी। लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान उनका चयन इस आधार पर निस्त कर दिया गया कि उनका ओबीसी प्रमाण पत्र उत्तर प्रदेश से जारी किया गया था। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि दांगी जाति यूपी और एमपी दोनों ओबीसी श्रेणी में शामिल है। विवाह के बाद वह मध्यप्रदेश की निवासी हो गयी है। इसलिये उन्हें यहां आरक्षण का लाभ मिलना चाहिये।
जाति जन्म से तय, निवास या शादी से नहीं-हाईकोर्ट
राज्य शासन की ओर हाईकोर्ट में दलील दी गयी है कि जाति का निर्धारण जन्म से होता है, न कि शादी या निवास बदलने से, दूसरे राज्य से जारी जाति प्रमाण पत्र पर मध्यप्रदेश में मान्य नहीं होता हे। हाईकोर्ट ने कहा है कि यह मुद्दा पहले ही सुप्रीम कोर्ट और अन्य न्यायालयों द्वारा स्पष्ट किया जा चुका है। हाईकोर्ट ने दोहराया है कि कोई भी व्यक्ति दूसरे राज्य में जाकर अपनी जाति का आरक्षण का फायदा साथ नहीं ले जा सकता है। भले ही दोनों राज्यों में सूचीबद्ध हो।
शादी के बाद सामाजिक पहचान बदल सकती है, आरक्षण नहीं
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विवाह के बाद महिला पति की जाति का सामाजिक हिस्सा बन सकती है, लेकिन आरक्षण का लाभ नहीं ले सकती, क्योंकि आरक्षण सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन पर आधारित होता है, जो जन्म से तय होता है। इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए संबंधित अधिकारियों के फैसले को सही और विधिसम्मत बताया।

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पुराना आयकर कानून 1961 की जगह लेगा नया कानून, आज से नया टैक्स कानून लागू, एचआरए सहित 8 नये नियम

नई दिल्ली. केन्द्र सरकार ने टैक्स की शब्दावली को सुगम बनाने और टैक्स सिस्टम को आसान बनाने के लिये नया टैक्स इनकम टैक्स कानून लागू कर दिया है। जो 1 अप्रैल 202़6 से लागू किया गया है। यह कानून पुराने आयकर कानून 1961 की जगह लेगा और इस कानून के तहत कई नियमों में बदलाव किये गये है। एचआरए क्लेम करने से लेकर आईटीआर डेड लाईन और आईटीआर भरने के लिये ईयर सहित 10 बड़े बदलाव किये हैं। फॉर्म 16 और अन्य इनकम सर्टिफिकेट में भी बदलाव किया है।
नये कानून में तहत क्या-क्या बदलाव किया गया है
1-आईटीआर की डेडलाइन
नये कानून के तहत आईटीआर भरने की डेडलाइन में भी बदलाव किया है। आईटीआर-1 और आईटीआर-2 जमा करने के लिये अंतिम डे टमें बदलाव नही किया है। जो कि 31 जुलाई है। लेकिन आईटीआर-3 और आईटीआर-4 के लिये डेडलाइन 31 अगस्त के लिये कर दिया गया है।
2-टैक्स ईयर
आईटीआर भरने के बीच फायनेंशियल ईयर (एफवाय) और असेंसमेंट ईयर (एवाय) को समाप्त कर दिया गया है। इसे सुगम बनाते हुए सिर्फ एक ईयर टैक्स ईयर रखा गया है। पहले फायनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर को लेकर कई कंफ्यूजनप होते थे अब इसे चेंज कर दिया गया है।
3-एफ एंड ओ ट्रेडर्स के लिये अधिक टैक्स
नये कानून के तहत शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिये भी नियम बदला है। सिक्योरिटीज ट्रांसजेक्शन टैक्स (एसटीटी) में वृद्धि के साथ डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग अधिक महंगा होगया है। फ्यूचर और ऑप्शन (एफएंड ओ) के तहत सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शन प्रीमियम पर टैक्स और ऑप्शन पर एक्साइज 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़कर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया हे।
3-एचआरए क्लेम के लिये भी नियम
मकान किराया भत्ता (एचआरए) का फायदा पहले की तरह मिलता रहेगा। लेकिन कुछ शर्ते भी रख दी गयी है। कर्मचारियों का ेअब अपने मकान मालिक का पेन कार्ड और किराये के लिये भुगतान का वैध प्रमाण पत्र जमा करना होगा। कुछ प्रकरणोंमें एचआरए का दावा करते वक्त मकान मालिक की पूरी जानकारी जिसमें पैन नम्बर और किराये की राशि भी शामिल है, देना अनिवार्य होगा। एक और बड़ा बदलाव दावे को लेकर हो चुका है। मुंबई, चैन्नई, दिल्ली और कोलकाता के साथ-साथ बेंगलुरू, हैदराबाद, पूणे और अहमदाबाद जैसे शहरों को भी अब 50प्रतिशत एचआरए छूट की कैटेगरी में रखा गया है। पुराने कानून के तहत मेट्रो शहरों को ही यह फायदा मिलता था। नये कानून के तहत नोएडा और गुरूग्राम जैसी जगहों पर रहने वाले लोग 40 प्रतिशत एचआर पर टैक्स पर छूट क्लेम कर सकते हैं।
4- गिफट और वाउचर पर छूट
कम्पनी के गिफ्ट कार्ड, वाउचर और कूपन पर वार्षिक टैक्स फ्री लिमिट हर कर्मचारी 5 हजार रूपये बढ़ाकर 15 हजार रूपये कर दी गयी है। यह लाभ पुरानी और नयी दोनों टैक्स व्यवस्थाओं के तहत दिया जायेगा।
5- एज्यूकेशन एलाउंस में छूट
पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत बच्चों के भत्तों में बड़ी वृद्धि की गयी है। एज्यूकेशन अलाउंस हर बच्चा 100 रूपये सेबढ़ाकर 63 हजार रूपये प्रतिमाह कर दिया गया है। जबकि छात्रावास अलाउंस 300 रूपये से बढ़कार 9 हजार रूपये प्रति माह कर दिया गया है।
6- शेयर वायबैक पर अलग होगा टैक्स
पहले स्लैब रेट्स पर अनुमानित डिविडेंड के तौर पर टैक्स लगाया जाता था। लेकिन अब कैपिटल गेन के तहत टैक्स लगाया जायेगा। इसका मतलब है कि अब आपको अधिक टैक्स भी देना पड़ सकता है। पर्सनल प्रमोटर्स पर यह लगभग 30 प्रतिशत टैक्स लगेगा। जबकि कम्पनी के प्रमोटर पर लगभग 22 प्रतिशत का टैक्स लगेगा। रिटेल निवेशक पर होल्डिंग्स टाइम के हिसाब से एसटीसीजी या एलटीसीजी टैक्स लगाया जा सकता हैं।
7- पैन नम्बर में बदलाव
केवल आधार कार्ड के आधार पर पैन कार्ड के लिये आवेना अब मान्य नहीं है। आवेदकों को इसके साथ अुछ और दस्तावेज का उपयोग करना होगा। इसके साथ ही एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रूपये से ज्यादा या उससे अधिक के कैश जमा राशि, 5 लाख रूपये कसे ज्यादा वाहनों की खरीद, होटलों या कार्यक्रमों के लिये 1 लाख रूपये से अधिक का भुगतान और 20 लाख रूपये से ज्यादा की अचल संपत्ति लेन-देन पर पैन अनिवार्य कर दिया गया है।
8- इनकम टैक्स फॉर्म
अब फॉर्म 16 की जगह पर फॉर्म 130 दिया जायेगा। फॉर्म 16ए की जगह पर फॉर्म 131, फार्म 26एएस की जगह पर फॉर्म 168, फॉर्म 24क्यू की जगह फॉर्म 138 और फॉर्म 26क्यू की जगह पर फॉर्म 140 दिया जायेगा। इसी तरह से बाकी फॉर्म के नाम में बदलाव किया गया है। हालांकि इनके काम में कोई बदलाव नहीं है। सिर्फ नाम ही चेंज हुआ है।

 

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ग्वालियर ट्रेजरी में 10 दिन के भीतर लगे 171 करोड़ रूपये के बिल, देर से मिलेगा वेतन

ग्वालियर. मौजूदा वित्तीय वर्ष में मंगलवार 31 मार्च को समाप्त हो गया है। अंतिम दिन मंगलवार को जिला कोषालय में भुगतािन के लिये बहुत ही कम बिल पहुंचे। वहीं पंजीयन कार्यालय में भीड़ रही। दस्तावेज पंजीयन का काम रात 10 बजे के बाद तक चला। 1 अप्रैल को ट्रेजरी में कामकाज नहीं किया जायेगा। रजिस्ट्रार कार्यालय में पर भी नयी गाइड लाइन को लेकर होमवर्क चलेगा। इस वजह से अगले 2 दिन यहां काम बन्द सा रहेगा। सीनियर कोषालय अधिकारी अरबिंद शर्मा ने बताया है कि पिछले 10 दिन में करीब 171 करोड़ रूपये के बिल लगे है। यह अन्य महिनों की तुलना में अधिक रहे हैं।
मंगलवार को संख्या 95 तक रही। उन्होंने कहा कि नए वित्त वर्ष का बजट 1 अप्रैल के बाद आएगा। इसलिए अप्रैल में मिलने वाला वेतन 1-2 दिन देरी से मिल सकता है। इससे लगभग 35 हजार अधिकारी-कर्मचारी प्रभावित होंगे। वहीं जिला पंजीयक अशोक शर्मा ने कहा कि रात 10 बजे तक 700 से ज्यादा दस्तावेज पंजीयन हो चुके थे। इससे विभाग को 18 करोड़ से ज्यादा राजस्व मिला। इस बार लगभग 8 हजार रजिस्ट्री कम हुई हैं, सालाना लक्ष्य भी करीब 150 करोड़ कम रहा है।