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निगम-मंडल की नियुक्तियों में ग्वालियर-चम्बल का दबदबा, सिंधिया को नहीं मिला महत्व

भोपाल. मध्यप्रदेश में निगम मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्तियां जारी है। अभी तक अध्यक्ष और सदस्य मिलाकर 60 नियुक्तियां हो चुकी है। संगठन और सरकार का दावा है कि इनसे जातिगत संतुलन, क्षेत्रीय असंतोष और पुराने -नये नेताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गयी। मगर ऐसा नजर नहीं आता है। एनालिसिस करें तो अध्यक्ष पद को लेकर ग्वालियर-चम्बल को अधिक महत्व मिला है। यहां अध्यक्ष और सदस्य मिलाकर कुल 16 नियुक्तियां हुई है। जबकि सिंधिया समर्थकों को कम मौका मिला है। मालवा में अध्यक्ष और सदस्यों को मिलाकर 20 नियुक्तियां की गयी है। जिसमें अध्यक्षाों की संख्या कम है।
निगम मंडल और प्राधिकरणों में सवर्ण नेताओं को अध्यक्ष बनाया है। जबकि 5 में एससी-एसटी नेताओं को मौका मिला है। ओबीसी और एसटी की एक-एक महिला नेता को अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया है। जानकारों के अनुसार यह नियुक्त्यिां अगले साल के नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव और 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर की गयी। कुछ नेताओं को एडजस्ट करने के लिये क्राइटेरिया भी दरकिनार किया गया है। ं

अध्यक्ष पद पर ब्राह्मण और ठाकुर नेताओं की संख्या ज्यादा

जातिगत आधार पर अध्यक्ष पद पर ब्राह्मण और ठाकुर नेताओं की संख्या ज्यादा है। 8 में से 4 जगह यादव नेताओं को अध्यक्ष बनाया गया। केपी यादव को नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष बनाया गया, जिन्होंने 2019 में सिंधिया को गुना-शिवपुरी सीट से हराया था। 2024 में उनका टिकट काट दिया गया।महेंद्र यादव अपेक्स बैंक के प्रशासक बने, जो पहले बीज निगम के अध्यक्ष थे और तोमर समर्थक माने जाते हैं। विजय यादव चित्रकूट विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष बने। कुशवाहा और बघेल समुदाय को प्रतिनिधित्व देकर ओबीसी वोट बैंक साधने की कोशिश की गई।

 

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