BJP की रणनीति-फुटबॉल मैच, 1 लाख से अधिक बैठकें, बंगाल में भाजपा के खेला की कहानी
नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार जो हुआ है। वह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि सुनियोजित और बेहद बारीकी से तैयार किये गये अभियान का परिणाम है। लम्बे समय तक कठिन मानी जाने वाली जमीन पर भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह बहूमत का मार्ग बनाया है। उसके पीछे केवल बड़ी रैलियां नहीं, बल्कि गली-गली, बूथ-बूथ और घर-घर तक पहुंची रणनीति काम कर रही थी। इस पूरी रणनीति के केन्द्र में थे संगठन के 2 बड़े चेहरे सुनील बंसल और चुनाव प्रीाारी भूपेन्द्र यादव, जिनके साथ सह प्रभारी विप्लवकुमार देव ने जमीन का पूरा तंत्र खड़ा किया है। बंगला की इस जीत की कहानी को अगर समझना है तो इसे केवल राजनीतिक नजरिये से नहीं, बल्कि कैम्पेन इंजीनियरिंग के रूप में देखना होगा। जहां पर हर कदम योजनाबद्ध था और हर गतिविधि का सीधा लक्ष्य मतदाता तक पहुंचना।
फुटबॉल मैच: बंगाल की नब्ज पकड़ने की कोशिश
बंगाल में फुटबॉल केवल खेल नहीं, भावना है। BJP ने इस भावना को समझा और उसे अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया। राज्यभर में फुटबॉल मैच आयोजित कराए गए। जिनके जरिए युवाओं को सीधे जोड़ा गया। यह सिर्फ खेल आयोजन नहीं था, बल्कि एक एंट्री पॉइंट था। जहां से पार्टी युवाओं के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराती गई। इन मैचों के दौरान संवाद, संपर्क और संदेश तीनों एक साथ चलते रहे. इससे पार्टी को उन इलाकों में भी पहुंच मिली, जहां पारंपरिक राजनीतिक गतिविधियां सीमित थीं।
पर्दे के पीछे की जोड़ी: बंसल-यादव का माइक्रो मैनेजमेंट
इस पूरी रणनीति की असली ताकत थी पर्दे के पीछे काम कर रही टीम। सुनील बंसल ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर फोकस किया, जबकि भूपेंद्र यादव ने चुनावी रणनीति को व्यापक दिशा दी। इन दोनों के बीच तालमेल ने अभियान को एक मशीन की तरह चलाया. जहां हर स्तर पर स्पष्ट योजना और जिम्मेदारी तय थी। सह प्रभारी बिप्लब कुमार देब ने नॉर्थ-ईस्ट के अनुभव को बंगाल में लागू किया, जिससे जमीनी स्तर पर तेजी से विस्तार संभव हुआ।

