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DRDO ने रचा इतिहास-बनाया मानवरहित विमान की सफल उड़ान

नई दिल्ली. डिफेंस रिसर्च एंड डवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने शुक्रवार को अपने पहले स्वदेशी मानव रहित विमान की सफल उड़ान से इतिहास रच दिया। कर्नाटक ने चित्रदुर्ग में पूरी तरह से ऑटोनॉमस प्लेन ने सटीकता के साथ उड़ान पूरी की और परफैक्ट तरीके से जमीन पर लैण्ड हुआ। डीआरडीओ के इस मिशन को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भारत का एक अहम कदम बताया है।
भारत ने बनाया मानवरहित  प्लेन
आधिकारिक बयान के अनुसार यह उड़ान भविष्य के मानवरहित विमानों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण तकनीकियों को साबित करने के मामले में एक बड़ी कामयाबी मिली है। यह सामरिक रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्म निर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। बयान में कहा गया है कि इस मानवरहित प्लेन को वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (एडीई) बेंगलुरू की ओर से डिजाइन और विकसित किया गया है जो डीआरडीओ की एक प्रमुख रिसर्च लैब है। यह विमान एक छोटे टर्बोफैन इंजन द्वारा ऑपरेट होता है।  विमान के लिए उपयोग किए जाने वाले एयरफ्रेम, अंडर कैरिज और फ्लाइट कंट्रोल स्वदेशी तौर पर विकसित है।  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर DRDO  को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह मानवरहित विमानों की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है और इससे सेना में आत्मनिर्भर भारत का मार्ग भी प्रशस्त होगा ।

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पेंशन कर्मचारियों को नहीं, जबकि जनप्रतिनिधि और जनसेवकों मिल रहा है 3-3 पेंशन का लाभ

भोपाल. पूरे देश में कर्मचारियों की पेंशन को लेकर बहस हो रही है जबकि जनसेवक या जनप्रतिनिधि 3-3 पेंशन का लाभ ले रहे हैं, अभी हाल ही में अग्निवीरों की पेंशन का मुद्दा सुर्खियों में है कि उन्हें पेंशन दी जाये, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लेकिन उन ‘‘माननीयों’’ से कोई कुछ नहीं पूछ रहा है जो जनसेवक विधायक के साथ सांसद की भी पेंशन ले रहे है। इस विषय को लेकर ‘‘माननीयों’’ के बीच से ही वरूण गांधी ने मोर्चा खोल दिया है। जिसके बाद से फिर पेंशन व्यवस्था कठघरे में है। मध्यप्रदेश में पेंशन की यह व्यवस्था विधायकों के ही हाथों से तय होती है।
पहले 5 साल पूर्ण होने पर ही विधायक रहने पर ही मिलती
पहले 5 वर्ष पूर्ण होने पर पेंशन ही मिलती थी, 2008 से पहले तक 5 वर्ष विधायक रहने पर ही पेंशन का लाभ मिलता था। लेकिन नियम बदल दिये गये। 2008 के बाद मप्र विधानसभा ने नियम बदल दिये और इसे 6 माह कर दिया। यह व्यवस्था भी सिर्फ 4 वर्ष चलीं। 2012 में नया प्रावधान आया कि चुनाव जीतने और निर्वाचन का प्रमाण-पत्र मिलते ही वह पेंशन का हकदार होगा।
जीत का प्रमाण पत्र मिलते ही पेंशन हकदार माननीय
ऐसा पता चला है कि पूर्व विधायक-पूर्व सांसद के साथ मीसाबंदी अथवा रिटायर्ड अधिकारी भी पेंशन एक साथ ‘‘माननीयों’’ द्वारा ली जा रही है मेडीकल भत्ता 15 हजार रूपये पूर्व विधायकों को अतिरिक्त मिल रहे हैं। विधायकों ने पिछले 14 वर्षो में 3 बार नियम बदल दिये हैं। ताजा प्रावधान के अनुसार चुनाव परिणाम आने के ठीक बाद जैसे ही उसे निर्वाचित होने का प्रमाण-पत्र मिलते ही पेंशन का हकदार हो जाता है।
मप्र का आर्थिक बोझ बढ़ रहा 800 विधायकों की पेंशन से
मध्यप्रदेश में इस वक्त 800 पूर्व विधायकों को पेंशन मिल रही है इनमें से 20 प्रतिशत ऐसे हैं, जो पूर्व विधायक की पेंशन तो ले रहे, इसके अलावा मीसाबंदी, पूर्व सांसद अथवा सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी की पेंशन भी उन्हें मिल रही है। पूर्व विधायकों में इस वक्त सबसे अधिक पेंशन पूर्व मंत्री गौरीशंकर शेजवाल को मिल रही है जो 59 हजार रूपये है।
रूस्तम सिंह को 2 लाख पेंशन
वर्तमान में रूस्तम सिंह को 2 लाख पेंशन मिल रही है विधायक की पेंशन के साथ-साथ पूर्व आईपीएस अधिकारी भी पेंशन ले रहे हैं, यह लगभग 2 लाख रूपये हैं। ऐसे कई नेता विधायक व सांसद की दोंनों की पेंशन का लाभ रहे हैं।
पूर्व सांसद और गृहसचिव डॉ. भागीरथ प्रसाद 1.5 लाख रूपये पेंशन
1975 बैंच के सीनियर आईएएस अधिकारी रहे और बाद में सांसद चुने गये। इन्हें भी पूर्व अधिकारी व पूर्व सांसद की मिलाकर 1.5 लाख रूपये से ज्यादा पेंशन मिल रही है।
पूर्व वित्तमंत्री राघव जी को मिल रहा है 3 पेंशन का लाभ
विधायक -सांसद के साथ मीसाबंदी की पेंशन भी ले रहे, पूर्व विधायक की 38,200 रूपये पेंशन एवं 15 हजार रूपये मेडीकल भत्ता और पूर्व सांसद की 25 हजार रूपये पेंशन का लाभ रहे हैं।
लाभ के लिये विधानसभा -संसदों के बीच नहीं बहस होती, पलभर पास होते हैं विधेयक
जब भी विधायकों एवं सांसदों के लाभ मुद्दा विधानसभा सदन और संसदों के बीच लाया जाता है तो विधायक -सांसद टेबिल थप-थपाकर पास कर लेते हैं जबकि जनता के मुद्दों को लेकर 3-3 दिन तक बहस चलने के बाद भी कई बार सदन से पास नहीं होते हैं मुद्दे।
संसदीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि
तत्कालीन सांसद नानाजी देशमुख ने लिखा है कि एक सांसद पर 5 वर्ष में करोंड़ों रूपये खर्च होते हैं। एक तरह से उनकी बात सही थी। नेता इसके बाद भी पेंशन व सुविधाओं के नाम पर काफी पैसा लेते हैं। यदि फिर भी पेंशन चाहिये तो एक पेंशन लें।
सुभाष कश्यप, संसदीय मामलों के जानकार

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CM शिवराज-सिंधिया के दो मंत्रियों में ‘सीट फिक्सिंग’

भोपाल. पंचायत चुनाव 2022 में सिंधिया के समर्थक मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के भाई हीरा सिंह भी किस्मत आजमाने उतरे हैं। उनका ख्वाब सागर की जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठना है। इसके लिए उन्होंने जिला पंचायत सदस्य की राहतगढ़ सीट (वार्ड नंबर 4) चुनी। यहां एक, दो नहीं 13 और उम्मीदवार मैदान में उतर गए। इसमें एक तो मंत्री भूपेंद्र सिंह के भतीजे अशोक सिंह बामोरा हैं। अशोक निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष दिव्या सिंह के पति भी हैं। यह देख गोविंद सिंह के भाई हीरा का समीकरण गड़बड़ा गया।

मंत्रियों ने हाथ मिलाया, सब के हाथ-पैर फुल गए
भाई हीरा सिंह का ख्वाब पूरा करने के लिए अंतत: मंत्री गोविंद सिंह को ‘पंचायत’ करना ही पड़ी। चर्चा है कि मंत्री भूपेंद्र सिंह के साथ सीट फिक्सिंग हुई। तय हुआ कि भूपेंद्र सिंह के भतीजे इस सीट से अपना नाम वापस ले लेंगे, ताकि हीरा सिंह चुनाव जीत सके। इसके बदले सागर नगर निगम महापौर के कैंडिडेंट के लिए फ्री हैंड मिल गया। यानी जो भूपेंद्र सिंह कहेंगे, महापौर सीट पर वही नाम फाइनल होगा। फिर क्या था, जब मंत्री तक पीछे हट गए तो दूसरे उम्मीदवार कहा टिकते। नाटकीय ढंग से 12 अन्य उम्मीदवारों ने भी नाम वापस ले लिए और हीरा सिंह निर्विरोध जिला पंचायत सदस्य बन गए हैं। अब वे अध्यक्ष का ख्वाब देख रहे हैं।

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मुसलमान बन ज्ञानवापी परिसर में दाखिल हुआ हरिहर पांडेय

वाराणसी. उत्तरप्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद पर विवाद दिनों दिन गहराता जा रहा है। हाल ही में खत्म हुए सर्वे की लीक रिपोर्ट का हवाला देकर कहा जा रहा है कि मस्जिद में मंदिर के कई प्रमाण मिले हैं। ऐसे में एक शख्स ऐसा भी है जो मस्जिद से मंदिर के प्रमाण जुटाने के लिये मुस्लिम बन ज्ञानवापी में प्रवेश किया। हम बात कर रहे है। हरिहर पांडे की। इस मसले पर हरिहर पांडेय ने बताया कि ज्ञानवापी में क्या देखा था।
ज्ञानवापी में देखे मंदिर के प्रमाण
1991 के ज्ञानवापी मुकदमे के मुख्य पक्षकार हरिहर पांडेय ने बताया कि 1991 में मंदिर के सबूतों को एकत्र करने के लिये मुस्लिम बन ज्ञानवापी परिसर में पहुंचे थे। उन्होंने कहा था कि वह बाबा विश्वनाथ के पक्ष में सबूत एकत्र करने ज्ञानवापी परिसर में गये थे। हरिहर ने कहा कि उस समय मैं रात 1 बजे जालीदार टोपी पहनकर ज्ञानवापी परिसर में मैंने मंदिर का ढांचा देखा। मैंने अपनी आंखों से मंदिर के सबूत देखे और कोर्ट को आकर बताया।
ज्ञानवापी परिसर में आंखों देखी
हरिहर पांडेय ने बताया कि मैंने कलश, कमल, हाथी, मगरमच्छ की आकृतियां अपनी आंखों से देखी है। मंदिर के मलबे के पत्थरों को ढक कर रखा गया है और उसके ऊपर इमारत बनायी गयी है। मलबा हटाना चाहिये, मलबा हटेगा तो ज्योतिर्लिंग दिखेगा। परिसर में कई श्विलिंग मिलेंगे।

ज्ञानकूप और ज्ञानवापी का क्या है अर्थ
ळरिहर पांडेय ने बताया है कि देश की जनता को यह भी पता होना चाहिये। कि ज्ञानकूप और ज्ञानवापी का अर्थ क्या है, उन्होंने कहा है कि जब शिवजी….पार्वती जी के साथ काशी आये तो स्वयंभू ज्योतिर्लिंग के जलाभिषेक के लिये जल की आवश्यकता थी, तो शिवजी ने अपने त्रिशूल से ज्ञानकूप बनाया और फिर जलाभिषेक किया। पार्वती जी को इसी स्थान पर शिवजी ने ज्ञान दिया। इसीलिये यह परिसर ज्ञानवापी कहलाता है।

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इलेक्ट्रिक कार बेहद तूफानी और स्पोर्ट्स लुक में बेहद खूबसूरत लुक में बाजार में उतारी

नई दिल्ली. टेक्नोलॉजी मार्केट का पूरा हुलिया बदल दें यह घटना हर रोज नहीं होती और यही आज की तारीख में इलेक्ट्रिक वाहन कर रहे हैं। जहां कुछ कार निर्माता इस काम को असंभव समझते हैं। वहीं कुछ को इसमें सफलता मिल रही है। मसलन पॉर्श, (Porsche) जो लाजबाव स्पोर्ट्स कारें बनाने के लिये दुनियाभर में मशहूर है। पॉश ने हाल ही में इलेक्ट्रिक वाहनों के बाजार में प्रवेश किया है और एक बेहद दमदार इलेक्ट्रिक कार टायकान न (Taycan) पेश की है। कम्पनी की पहली इलेक्ट्रिक कार होने के बावजूद पॉर्श टायकान (Porsche Taycan)  ने कंपनी की आइकॉनिक 9 नवम्बर 2011 में ग्लोबल मार्केट की बिग्री में पीछे छोड़ दिया हे। हमें हाल ही में टायकान इलेक्ट्रिक कार को दिल्ली-एनसीआर में चलाने का मौका मिला है।

Porsche Taycan Review

यह है डिजायन
इस कार को पहली नजर देखते ही आप समझ जाते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहनों की डिजाइन में कंपनियां कितनी आगे बढ़ चुकी है। दिखने में यह इलेक्ट्रिक कार बेहद खूबसूरत है और आपको बिलकुल भी अंदाजा नहीं होगा कि यह इलेक्ट्रिक पॉवर से चलने वाली कार है। टायकॉन को पॉर्श की फैमिली डिजाइन पर तैयार किया गया है जिसका बूट शानदार इंवर्टेड एल-शेप-पॉइंट एलईडी लाइट्स से लैस है और इसके अलावा यूनीक फ्लश डोर हैंडल्स, सेंसर आधारित चार्जिंग पोटर््स कार के दोनों साइड दिये गये हैं। कार की झुकती हुई छत इसके पिछले हिस्से से मिलती है जहां एक लाइट पूरे पिछले हिस्से को घेरती दिखाई देती है। कार का कलर भी आपको बेहद आकर्षित करता है।

Porsche Taycan Review
शानदार है फीचर्स
पॉर्श टायकान में 16.8 इंच का मुड़ा हुआ इंस्ट्रूमेंट डिस्प्ले दिया गया है जो आज तक हमें किसी कार में दिखाई नहीं देता है। इसके अलावा कार के केबिन में 4 और स्क्रीन दिये गये हैं। जिनमें एक सेंट्रल टनल पर, 2 डैशबोर्ड पर और एक कार के पिछले हिस्से में दिया गया है। वैसे तो टायकान में 4 लोगों की बैठक व्यवस्था है। लेकिन रिक्वेस्ट पर इस कार को 5 सीटर में भी बदला जा सकता है। हालांकि यह कार 5 सीटर होने पर उतनी आरामदायक नहीं रह जाती है। खासतौर पर पिछले यात्रियों के लिये । कार के साथ आपको बहुत सारा बूट स्पेस नहींे मिलता है। हालांकि इसके अगले हिस्से में इंजन नहीं लगा है जहां आप थोड़ा लगेज रख सकते है।

Porsche Taycan Review

इलेक्ट्रिक बेहद खूबसूरत और ताकतवर
कार का टॉप मॉडल टर्बो एस 761 हॉर्सपॉवर और 1050 एनएम पीक टॉर्क जनरेट करता है। इस आंकड़े के साथ यह भारत की सबसे तेजर स्पीड इलेक्ट्रिक कार बनाती है। दूसरी ओर सबसे टायकॉन रियर-व्हील ड्राइव सेटअप के साथ आती है जो 408 हॉर्सपॉवर क्षमता वाली है। टायकान 4एस 530 हॉर्सपावर बनाती है। वहीं इसका टर्बो वेरियेंट 680 हॉर्सपॉवर जनरेट करता है। आपको बता दें कि एंट्री लेवल को छोड़कर इस इलेक्ट्रिक सुपरकार के सभी वेरियेंट ऑल-व्हील ड्राइव सिस्टम के साथ आते हैं।

फैसला आपका
पॉर्श टायकान की शुरूआती एक्सशोरूम कीमत 1 करोड़ 50 लाख रूपये है। जो इसके टॉप मॉडल के लिये 2.31 करोड़ रूपये तक आती है। कम्पनी ने इस इलेक्ट्रिक सुपर कार को 7 वेरियेंट, 2 बॉडी टाइप और 2 तरह के के बैटरी पैक्स के साथ पेश किया है। कुल मिलाकर यह कार बहुत महंगी जरूर है लेकिन इसे खरीदना कोई बेवकूफी नहीं होगी। बतौर इलेक्ट्रिक कार इसका परफॉर्मेंस जबरदस्त है और स्टाइल के मामले में भी यह कार लाजबाव है। इस कार को खरीदने के लिये भले ही आपको बहुत बड़ी रकम खर्च करनी होती है। लेकिन इसे चलाकर आपको पता लगता है कि यह एक पैसा वसूल कार है। इसके अलावा यह पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाती है।

 

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श्रीनगर में CRPF कैंप के पास आतंकी हमला, एक जवान शहीद, एक की हालत गंभीर

जम्मू कश्मीर.  श्रीनगर के मैसूमा के लाल चौक इलाके में CRPF के दो जवानों पर आतंकवादियों ने हमला किया था, जिसमें एक जवान शहीद हो गया। वहीं दूसरा जवान अस्पताल में भर्ती है, जिनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। हमलावर AK-47 से लैस थे। बताया जा रहा है कि घटना से कुछ दूरी पर CRPF का कैंप है। यह कैंप एक मंदिर की सुरक्षा में लगा हुआ है।

इससे पहले, सोमवार को साउथ कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों ने 2 मजदूरों को गोली मार दी, जिसके बाद दोनों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि दोनों मजदूरों की पहचान कर ली गई है। दोनों बिहार के रहने वाले हैं।

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हिन्दू नववर्ष 2022: जानिए भारतीय नववर्ष को मनाने के पीछे ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक रहस्य-आशुतोष महाराज

सम्भवतः आपमें से बहुत से पाठकगण यह शुभकामना पढ़कर चौंक गए होंगे। यही सोचकर कि यह तो अप्रैल का माह है। फिर नववर्ष कैसा!! पर क्या आप जानते हैं, भारत की मिट्टी से उठती सौंधी खुशबू, आकाश के नक्षत्र-तारे, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड आपको इस महीने की 1 तारीख को नववर्ष की बधाइयाँ दे रहा है? भारत का गौरवमयी अतीत, हमारे महामहिम मनीषी, पूर्वज और उनकी ज्ञान-विज्ञान सम्पन्न धरोहरें- सभी इसी दिन हम पर नववर्ष के आशीष लुटा रहे हैं! भारतीय विक्रम-संवत् के अनुसार इस चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा याने 1 अप्रैल को ही हमारा और आपका अपना, स्वदेशी नया साल शुरु हो रहा है।
संभवतः आपको यह भी न पता हो कि हमारे भारत का एक निजी कैलन्डर और काल-गणना भी है, जिसे ‘भारतीय संवत्सर’ या ‘विक्रमी संवत्’ कहते हैं। लगभग 2054 वर्ष पूर्व भारत के एक महान सम्राट महाराज विक्रमादित्य ने प्राचीनतम अथवा वैदिक काल-गणना के आधार पर इस संवत् की स्थापना की थी। यह कैलन्डर शुरु से ही 12 माह का था तथा सूर्य और चंद्रमा- दोनों पर आधारित एक सर्वोत्तम वैज्ञानिक नमूना था। विश्व के सभी कैलन्डरों से पूर्व इस विक्रमी संवत्सर का निर्माण हो गया था। विक्रम संवत् के अनुसार नववर्ष का श्री गणेश चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को माना गया है। ब्रह्माण्ड पुराण का वर्णन है कि यही वह दिन है, जब सृष्टि सृजन की लीला शुरु हुई।
भारतीय संवत् के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर नवीनता की छटा अपने आप ही प्रत्यक्ष हो जाती है। एक नहीं, अनेक युक्तियाँ इस दिन को वर्ष का पहला दिवस घोषित करती हैं। चैत्र शुक्ल के आते-आते कड़कती ठंड के तेवर ढीले पड़ चुके होते हैं। बर्फीली हवाएँ बसन्त की बयार बन जाती हैं। श्री कृष्ण गीता में कहते हैं- ‘समस्त ऋतुओं में मैं बसन्त हूँ।’ चैत्र शुक्ल को इसी सर्वप्रिय, सर्वश्रेष्ठ ऋतुराज का पूरी प्रकृति पर राज हो जाता है। इसी के साथ प्रकृति का कण-कण, नव उमंग, उल्लास और प्रेरणा के संग, अंगड़ाई भर उठता है। यह चेतना, यह जागना, यह गति- यही तो नववर्ष के साक्षी हैं!
सामाजिक चेतना- उत्सवमयी! वैसे भी देखा जाए, तो चैत्र नक्षत्र के चमकते ही कश्मीर से लेकर केरल तक, भारत में उत्सवों के नगाड़े बज उठते हैं। इसी दिन नवरात्रों का भी शुभारम्भ होता है और भारत भर में माँ जगदम्बा के जयकारे गूँज उठते हैं। अतः चैत्र शुक्ल पर ही भारत की सामाजिक चेतना नववर्ष में प्रवेश करती है। अध्यात्म बल की धनी! चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ‘शुभ मुहूर्त’ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इस दिन नक्षत्रों की दशा, स्थिति और प्रभाव उत्तम होता है। चैत्र शुक्ल को विशेष रूप से प्रजापति और सूर्य नामक तरंगों की बरखा होती है। ये सूक्ष्म तरंगें अध्यात्म बल की बहुत धनी और उत्थानकारी हुआ करती हैं।

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सऊदी अरब में ऑयल डिपो पर आतंकी हमला

सऊदी अरब. सऊदी अरब के शहर जेद्दा में फार्मूला-वन रेस से पहले एक तेल डिपो पर आतंकी हमला हुआ है। हमले के बाद डिपो में भीषण आग लग गई। यह डिपो सऊदी ऑयल कंपनी आरामको का है। यमन के हूती विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। जानकारी के अनुसार यह घटना जेद्दा तेल डिपो पर इसी तरह के हमले के कुछ दिनों बाद हुई है।
हूती विद्रोहियों ने शुक्रवार सुबह ही धमकी दी थी कि वो सऊदी अरब में हमले तेज करेंगे। इसके कुछ देर बाद यमन की ओर से सऊदी अरब की तरफ रॉकेट दागा गया। इसे सऊदी एयरफोर्स के बैलेस्टिक डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया।

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आतंकियों का मददगार अब्दुल करीम एटीएस ने दबोचा

भोपाल. खुफिया एजेंसी के इनपुट्स पर भोपाल एटीएम ने अब्दुल करीम को नटेरन से गिरफ्तार कर लिया है। यह आतंकियों का मददगार था। अब्दुल करीम आतंकियों से सारंगपुर मदरसे में मिला था। अब्दुल करीम की मदद से ही आतंकी मध्यप्रदेश में प्रवेश किये थे।
अब्दुल करीम आतंकियों को लोगों से मिलवाने में मदद करता था। बंगलादेशी आतंकियों के भोपाल में रहने-खाने में भी करीम मदद कर था। अब्दुल करीम की मदद से ही आतंकी प्रदेश में स्लीपर सेल का नेटवर्क तैयार कर रहे थे। दरअसल, भोपाल में पकड़े गये जमात-ए-मुजाहिद्दीन के आतंकियों से जब पूछताछ की गयी तो अब्दुल करीम का नाम सामने आया। एटीएस ने नटेरन से आरोपी को गिरफ्तार किया। मामले में विदिशा एसपी मोनिका शुक्ला ने बताया है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

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आगरा -दिल्ली हाइवे पर ट्रक में लगी आग, ड्रायवर और क्लीनर से कूंद कर बचाई जान

आगरा. वाटर वर्क्स के पास हाईवे पर कूड़ा ले जाने वाले नगरनिगम का ट्रक आग का गोला बन गया। ट्रक में अचानक आग लगने से हाईवे पर अफरा-तफरा मच गयी। ड्रावयर और निगम कर्मी ने ट्रक को बीच सड़क पर रोककर अपनी जान बचाई। फायरबिग्रेड ने आग बुझायी। इस दौरान यातायात को रोक दिया गया।

क्या है पूरा मामला

ट्रक से कूदकर बचाई जान

आगरा-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाटर वर्क्स के पास बुधवार सुबह करीब पौने 11 बजे नगर निगम के कूड़ा उठाने वाले ट्रक में आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कूडे़ के ढेर से धुआं उठ रहा था। देखते ही देखते धुएं ने आग का रूप ले लिया। ट्रक के केबिन में बैठे निगम कर्मी और चालक को आग लगने की जानकारी नहीं थी। लोगों ने उन्हें ट्रक में आग लगने के बारे में बताया। इस पर उन्होंने बीच सड़क में ट्रक रोका औैर उसमें से कूदकर अपनी जान बचाई। चंद मिनटों में ट्रक धूं-धूंकर जलने लगा। बीच हाईवे पर ट्रक जलने के कारण यातायात रोक दिया गया। फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। थोड़ी देर में दमकल की गाड़ियां आ गईं। जब तक ट्रक में लगा आग बुझाई जाती, तब तक ट्रक पूरी तरह जल उठा था। करीब आधे घंटे तक हाईवे पर यातायात रूका रहा।

ट्रक कुबेरपुर जा रहा था
क्ुबेरपुर में नगरनिगम की लैंडफिल साइट है। यहां पर पूरे /शहर का कूड़ा का डाला जाता है। यह ट्रक भी वहीं जा रहा था, तभी इसमें आग लग गयी। अभी आग लगने की वजह का पता नहीं चल पाया है। ऐसा माना जा रहा है कि कूड़े में पहले से आग लगी होने के कारण से ही हादसा हुआ हो।

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