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पेंशन कर्मचारियों को नहीं, जबकि जनप्रतिनिधि और जनसेवकों मिल रहा है 3-3 पेंशन का लाभ

भोपाल. पूरे देश में कर्मचारियों की पेंशन को लेकर बहस हो रही है जबकि जनसेवक या जनप्रतिनिधि 3-3 पेंशन का लाभ ले रहे हैं, अभी हाल ही में अग्निवीरों की पेंशन का मुद्दा सुर्खियों में है कि उन्हें पेंशन दी जाये, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लेकिन उन ‘‘माननीयों’’ से कोई कुछ नहीं पूछ रहा है जो जनसेवक विधायक के साथ सांसद की भी पेंशन ले रहे है। इस विषय को लेकर ‘‘माननीयों’’ के बीच से ही वरूण गांधी ने मोर्चा खोल दिया है। जिसके बाद से फिर पेंशन व्यवस्था कठघरे में है। मध्यप्रदेश में पेंशन की यह व्यवस्था विधायकों के ही हाथों से तय होती है।
पहले 5 साल पूर्ण होने पर ही विधायक रहने पर ही मिलती
पहले 5 वर्ष पूर्ण होने पर पेंशन ही मिलती थी, 2008 से पहले तक 5 वर्ष विधायक रहने पर ही पेंशन का लाभ मिलता था। लेकिन नियम बदल दिये गये। 2008 के बाद मप्र विधानसभा ने नियम बदल दिये और इसे 6 माह कर दिया। यह व्यवस्था भी सिर्फ 4 वर्ष चलीं। 2012 में नया प्रावधान आया कि चुनाव जीतने और निर्वाचन का प्रमाण-पत्र मिलते ही वह पेंशन का हकदार होगा।
जीत का प्रमाण पत्र मिलते ही पेंशन हकदार माननीय
ऐसा पता चला है कि पूर्व विधायक-पूर्व सांसद के साथ मीसाबंदी अथवा रिटायर्ड अधिकारी भी पेंशन एक साथ ‘‘माननीयों’’ द्वारा ली जा रही है मेडीकल भत्ता 15 हजार रूपये पूर्व विधायकों को अतिरिक्त मिल रहे हैं। विधायकों ने पिछले 14 वर्षो में 3 बार नियम बदल दिये हैं। ताजा प्रावधान के अनुसार चुनाव परिणाम आने के ठीक बाद जैसे ही उसे निर्वाचित होने का प्रमाण-पत्र मिलते ही पेंशन का हकदार हो जाता है।
मप्र का आर्थिक बोझ बढ़ रहा 800 विधायकों की पेंशन से
मध्यप्रदेश में इस वक्त 800 पूर्व विधायकों को पेंशन मिल रही है इनमें से 20 प्रतिशत ऐसे हैं, जो पूर्व विधायक की पेंशन तो ले रहे, इसके अलावा मीसाबंदी, पूर्व सांसद अथवा सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी की पेंशन भी उन्हें मिल रही है। पूर्व विधायकों में इस वक्त सबसे अधिक पेंशन पूर्व मंत्री गौरीशंकर शेजवाल को मिल रही है जो 59 हजार रूपये है।
रूस्तम सिंह को 2 लाख पेंशन
वर्तमान में रूस्तम सिंह को 2 लाख पेंशन मिल रही है विधायक की पेंशन के साथ-साथ पूर्व आईपीएस अधिकारी भी पेंशन ले रहे हैं, यह लगभग 2 लाख रूपये हैं। ऐसे कई नेता विधायक व सांसद की दोंनों की पेंशन का लाभ रहे हैं।
पूर्व सांसद और गृहसचिव डॉ. भागीरथ प्रसाद 1.5 लाख रूपये पेंशन
1975 बैंच के सीनियर आईएएस अधिकारी रहे और बाद में सांसद चुने गये। इन्हें भी पूर्व अधिकारी व पूर्व सांसद की मिलाकर 1.5 लाख रूपये से ज्यादा पेंशन मिल रही है।
पूर्व वित्तमंत्री राघव जी को मिल रहा है 3 पेंशन का लाभ
विधायक -सांसद के साथ मीसाबंदी की पेंशन भी ले रहे, पूर्व विधायक की 38,200 रूपये पेंशन एवं 15 हजार रूपये मेडीकल भत्ता और पूर्व सांसद की 25 हजार रूपये पेंशन का लाभ रहे हैं।
लाभ के लिये विधानसभा -संसदों के बीच नहीं बहस होती, पलभर पास होते हैं विधेयक
जब भी विधायकों एवं सांसदों के लाभ मुद्दा विधानसभा सदन और संसदों के बीच लाया जाता है तो विधायक -सांसद टेबिल थप-थपाकर पास कर लेते हैं जबकि जनता के मुद्दों को लेकर 3-3 दिन तक बहस चलने के बाद भी कई बार सदन से पास नहीं होते हैं मुद्दे।
संसदीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि
तत्कालीन सांसद नानाजी देशमुख ने लिखा है कि एक सांसद पर 5 वर्ष में करोंड़ों रूपये खर्च होते हैं। एक तरह से उनकी बात सही थी। नेता इसके बाद भी पेंशन व सुविधाओं के नाम पर काफी पैसा लेते हैं। यदि फिर भी पेंशन चाहिये तो एक पेंशन लें।
सुभाष कश्यप, संसदीय मामलों के जानकार

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