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टीम इंडिया एशिया कप खेलने पाकिस्तान नहीं जाएगी

नई दिल्ली. टीम इंडिया एशिया कप खेलने पाकिस्तान नहीं जाएगी। इसकी पुष्टि एशिया क्रिकेट काउंसिल (ACC) के प्रेसिडेंट जय शाह ने की है। उन्होंने कहा कि 2023 एशिया कप न्यूट्रल वेन्यू पर खेला जाएगा। इसका साफ मतलब है कि अब पाकिस्तान एशिया कप का मेजबान भी नहीं होगा। भारत ने आखिरी बार 2008 में पाकिस्तान में मुकाबला खेला था। इसके बाद 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों के बाद भारतीय टीम पाकिस्तान नहीं गई है। तब से दोनों टीमें न्यूट्रल वेन्यू पर ही खेलती आई हैं, वो भी ICC और ACC के इवेंट में। दोनों के बीच आखिरी द्विपक्षीय सीरीज 2012-13 में खेली गई थी। दिवाली से एक दिन पहले यानी 23 अक्टूबर को भारत-पाकिस्तान की टीमें टी-20 वर्ल्ड कप में आमने-सामने होंगी।

जय शाह ने क्या कहा
एशिया क्रिकेट काउंसिल के प्रेसिडेंट ने मंगलवार को AGM के बाद कहा, ‘एशिया कप 2023 न्यूट्रल वेन्यू पर खेला जाएगा। सरकार हमारी टीम के पाकिस्तान जाने की अनुमति पर फैसला करती है या नहीं, इस पर हम कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। 2023 एशिया कप के लिए यह तय किया गया है कि टूर्नामेंट एक न्यूट्रल वेन्यू पर आयोजित किया जाएगा।’ कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) टीम इंडिया को पाकिस्तान भेजने के लिए तैयार है।

 

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यूक्रेन-रूस युद्ध के 8 माह बाद बारूद के ढेर पर दुनिया, तबाही, लाशें, खौंफ के साये में जिन्दगियां

नई दिल्ली. इसी वर्ष फरवरी माह की बात है। रूस की तरफ से यूक्रेन की सीमा पर सैनिकों की तैनाती की जा रही थी। आशंका जताई जा रही थी कि रूस आक्रमण कर सकता है। लेकिन पुतिन सैन्य अभ्यास की बात कर रहे थे। 24 फरवरी 2022 का वह मनहूस दिन, जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण कर दिया। दुनिया भर में हलचल बढ़ गयी। रूस के ताबड़तोड़ हमले से ऐसा लग रहा था कि पुतिन काफी जल्दबाजी में हैं और एक सप्ताह में युद्ध निर्णायक साबित होगा। लेकिन आज 8 माह बीत जाने के बाद भी युद्ध जारी है और लड़ाई खत्म होने का नाम नहीं ले रही है बल्कि लगातार पुतिन की तरफ से परमाणु हमले की धमकी दी जा रही है। हम पड़ताल करने की कोशिश करेंगे कि युद्ध के 236 दिनों बाद क्या हैं हालात।
युद्ध में तबाही होती है, विनाश होता है, जिंदगियां खत्म होती है और हजारों परिवार बेघर हो जाते हैं। किसी मां की गोद उजड़ जाती है तो किसी सुहागन का सुहाग, किसी का भाई तो किसी की बहन, कितने ही बेटे और बेटियों के सिर से मां-बाप का साया उठ जाता है। युद्ध कितना भयावह हो सकता है। इसका अंदाजा दुनिया को सेकेण्ड वर्ल्ड वॉर से लग चुका है, जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु बम गिराया गया था। पलभर में लाखों जिंदगियां उजड़ गयी थीं और जो बचे वह अपगंता के शिकार हो गये यूक्रेन‘-रूस युद्ध एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर आ चुका है।

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चीन जा रहे ईरानी प्लेन में बम की खबर, प्लेन को भारतीय वायुसेना के 2 सुखोई फायटर जेट ने घेरा

महान एयरलाइंस के विमान की ग्वांग्झू में सुरक्षित लैंडिंग हो गई है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. ईरान की एक फ्लाइट में बम मिलने की खबर के बाद हड़कम्प मच गया । यह प्लेन भारतीय वायुक्षेत्र में था। भारत ने प्लेन को दिल्ली में उतारने की अनुमति नहीं दीं सूचना मिलने के साथ ही भारतीय वायुसेना भी अलर्ट पर आ गयी। वायुसेना ने पंजाब और जोधपुर एयरबेस से 2 सुखोई विमान फ्लाइट के पीछे लगा दिये। ऐसा बताया जा रहा है कि एयरक्राफ्ट की ओर से दिल्ली एयरबेस में उतरने की अनुमति मांगी गयी थी। लेकिन अनुमति देने से मना कर दिया गया और इसके बाद 2 सुखोई विमानों को इसके पीछे तैनात किये गये। हालांकि बाद में प्लेन में किसी भी तरह का कोई बम न मिलने के बाद इसे चीन की ओर जाने की अनुमति दी गयी।
सुरक्षा एजेंसियां चीन की ओर जाने वाले रास्ते पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और भारतीय वायुसेना ने हवाई स्टेशनों और विमानन इकाईयों को अलर्ट पर रखा गया हे। भारतीय एजेंसियों द्वारा अभी भी हवाई जहाज को बारीकी से ट्रैक किया जा रहा है।

ग्वांग्झू में सुरक्षित लैंड

ईरान से लेकर हिन्दुस्तान और चीन तक अफरातफरी मचाने वाले ईरान के विमान W581 ने आखिरकार अपने गंतव्य ग्वांग्झू में सुरक्षित लैंड कर लिया है।  इसी के साथ ईरान, पाकिस्तान, हिन्दु्स्तान और चीन की सुरक्षा एजेंसियों ने राहत की सांस ली है।  ईरान के महान एयर ने एक बयान जारी कर कहा है कि विमान तय समय पर ग्वांग्झू पहुंच गया है। फ्लाइटरडार 24 की डाटा के अनुसार ये विमान दिल्ली पर लैंड करने की कोशिश कर रहा था और अपने निर्धारित ऊंचाई से नीचे आ रहा था।  इसे देखकर तुरंत एयरफोर्ट को अलर्ट कर दिया गया।  सुखोई के 2 विमानों ने आसमान में ही इस विमान को घेर लिया।

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भारत से पाक और चाइना कांपेंगे थर-थर, F-21 फायटर जेट को लेकर यूएस से भारत को ऑफर

नई दिल्ली. फायटर जेट F-21  अमेरिका (US)  की हथियार निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने इंडियन एयरफोर्स (Indian Air Force) को नये फाइटर जेट F-21  को सौंपने की तैयारी की शुरूआत कर दी है। आपको बता दें कि गुजरात के गांधीनगर में आयोजित होने वाले डिफेंस एक्सपो में लॉकहीड मार्टिन के फाइटर जेट F-21  की झलक दिखाई देगी। डिफेंस एक्सपो में फाइटर जेट के अलावा भी कंपनी के कई रक्षा उत्पाद दिखेंगे। फाइटर जेट एफ-21 भारत में बनाया जायेगा। फाइटर जेट F-21  तकनीकी तौर पर एक एडवांस विमान होगा। आईये फायटर जेट F-21  की खासियत के बारे में जानते हैं।

आपको बता दें कि लॉकहीड मार्टिन और टाटा मिलकर भारत में फायटर जेट F-21 को मिलकर तैयार करेंगे। इसमें इंडियन एयरफोर्स (Indian Air Force) की जरूरतों का ध्यान रखा जायेगा। लॉकहीड मार्टिन और टाटा, हैदराबाद में एयरस्ट्रर्क्स लिमिटेड (TLMAL)  फसिलिटी में फायटर जेट एफ-21 का निर्माण करेंगे। भारत सरकार का यह प्रयास मेक इन इंडिया के प्रयासों को आगे बढ़ायेगा।

आज जान लें कि फायटर जेट F-21 की पहली झलक लॉकहीड मार्टिन ने वर्ष 2019 में दिखाई दी थी। लॉकहीड मार्टिन ने कहा था कि इंडियर एयरफोर्स की खास जरूरतों के अनुसार, फायटर जेटF-21 का निर्माण किया जायेगा। फाइटर जेट F-21 में 12 हजार घंटे तक उड़ान भरने की क्षमता है।

जानकारी के अनुसार, फायटर जेट F-21 के रिपयर, ओवरहॉलिंग और मेटेनेंस का काम भारत में होगा। इंडियर एयरफोर्स के हिसाब से तैयार हुआ। फायटर जेट F-21 बेस्ट साबित हो सकता है। फाइटर जेट F-21 को F-16 हका अपग्रेडेड वर्जन बताया जा रहा हहै। पाकिस्तान के F-16 है।

गौरतलब है कि अमेरिकी रक्षा उत्पाद निर्माण कंपनी लॉकहीड मार्टिन रक्षा, सुरक्षा उपकरणों और एयरोस्पेस की बड़ी कंपनियों में शुमार हैं। 114 फाइटर जेट F-21 की डील की कीमत लगभग 10,674 करोड़ रूपये हो सकती है। फाइटर जेट F21 में मॉडर्न टेक्नोलॉजी का उपयोग हुआ है।

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Chimera Anti-Drone Gunदुश्मन ड्रोन मार गिराने वाली गन तैयार, भारत में बनी ताकतवर एंटी ड्रोन गन

नई दिल्ली. भारतीय कम्पनी गोदरेज (Godrej) ने फ्रांसीसी कंपनी (CERBAIR) सरबेयर के साथ मिलकर एंटी-ड्रोनगन (Anti-Drone Gun) बनाई है। इस गन के पूरे सिस्टम को कोई भी जवाने अपने साथ लेकर किसी भी जगह आ जा सकता है। इसका नाम है चिमेरा 100- (Chimera 100)

Chimera Anti-Drone Gun
चिमेरा गन की सहायता से 4 से 5 किमी दूर से आ रहे ड्रोन, यूएवी आदि को डिटेक्ट किया जा सकता है। उसे मारकर गिराया जा सकता है। यह वीवीआईपी सिक्योरिटी और सीमा पर ड्रोन हमलों से बचने में मदद करेगी। यह एक कम्पलीट काउंटर ड्रोन सॉल्यूशन है।

Chimera Anti-Drone Gun
चिमेरा गन की सहायता से आप अपनी ओर आते हुए ड्रोन का रेडियो फ्रिक्वेंसी जाम कर देते हैं। यानी यह एंटी- ड्रोनगन दुश्मन के ड्रोन को सिग्नल को जाम कर देता है जिससे उसे उड़ाने वाले के संपर्क टूट जाता है इसके बाद ड्रोन स्वयं नीचे गिर जाता है।

Chimera Anti-Drone Gun
इसे लेकर चलने वाले जवान के शरी पर एक बैकपैक में पूरा सिस्टम लगा होता है जिसका एंटीना दूर से ही आते हुए ड्रोन को डिटेक्ट कर लेता है उसे पहचानता है कि वह ड्रोन या अनमैन्ड एरियन व्हीकल निगरानी वाला ड्रोन है या फिर हमला करने वाला। इसके बाद उसे ट्रैक करके उसे निष्क्रिय कर देता है।

Chimera Anti-Drone Gun
इस ड्रोन सिस्टम को किसी VVIP  की रैली के दौरान या बड़े कार्यक्रम के दौरान किसी इमारत के ऊपर भी तैनात किया जा सकता है। इससे सुरक्षा का स्तर बढ़ जाता है। इससे आप किसी भी दशा में घूमकर दुश्मन ड्रोन पर हमला कर सकते हैं।

Chimera Anti-Drone Gun
यह ड्रोन की तस्वीर, मैप और लोकेशन का भी पता चल जायेगा। अगर यह निकट भविष्य में भारतीय सेना के पास आता है तो इसे पाकिस्तान और चीन की सीमाओं के पास तैनात किया जा सकता है।

Chimera Anti-Drone Gun
चिमेरा 100 एंटी ड्रोन गन की सहायता से पाकिस्तानी और चीनी ड्रोन को मार गिराया जा सकता है। इसका उपयोग सियाचिन जैसे इलाकों में भी किया जा सकता है। गोदरेज ने इसे फ्रांसीसी कंपनी सरबेयर से लायसेंस लेकर भारत में बनाया है।

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Ram Mandir के गर्भगृह में जिस जगह स्थापित होनी है भगवान राम की मूर्ति, सामने आयी तस्वीर

श्री राम जन्मभूमि पर निर्माण कार्य जारीअयोध्या. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। दर्जनों कारीगर दिन-रात मंदिर निर्माण के कार्य में जुटे हुए हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब रामलला के गर्भगृह की वह तस्वीर भी जारी कर दी है। जिसका लम्बे समय से रामभक्तों को इंतजार था।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उस जगह की तस्वीर जारी की है। जहां भगवान राम की मूर्ति स्थापित की जानी है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से जारी तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि विशाल बलुआ पत्थरों से बनाये जा रहे मंदिर को बेहतरीन नक्काशी के साथ तैयार किया जा रहा है। ट्रस्ट की तस्वीरों में रामलला के गर्भगृह पर केसरिया रंग का झण्डा लहराता दिख रहा है। जिस पर भगवान राम की तस्वीर भी छपी है। इसके बगल में लाल सफेद रंग का करीब 5 फीट ऊंचा स्ट्रक्चर रखा है। ट्रस्ट के मुताबिक उस स्ट्रक्चर जितनी ऊंची भगवान राम की मूर्ति गर्भगृह में स्थापित की जायेगी।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उस जगह की तस्वीर जारी की है जहां भगवान राम की मूर्ति स्थापित की जानी है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर जारी तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि विशाल बलुआ पत्थरों से बनाए जा रहे मंदिर को बेहतरीन नक्काशी के साथ तैयार किया जा रहा है. ट्रस्ट की तस्वीरों में रामलला के गर्भगृह पर केसरिया रंग का झंडा लहराता दिख रहा है जिस पर भगवान राम की तस्वीर भी छपी है. इसके बगल में लाल सफेद रंग का लगभग पांच फीट ऊंचा स्ट्रक्चर रखा है. ट्रस्ट के अनुसार उस स्ट्रक्चर जितनी ऊंची भगवान राम की मूर्ति गर्भगृह में स्थापित की जाएगी.

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कूनो नेशनल पार्क- चीताओं की प्रत्येक हरकत हो रही कैमरों में कैद, टास्क फोर्स रख रहा है नजर

श्योपुर. कूनो नेशनल पार्क में वर्ल्डलाइफ फोटोग्राफर शिवांग मेहता और निशांत कपूर ज्वाइंट टीम ने चीता को मॉनीटर करने के लिये ट्रैप कैमरे लगाये है। यह काम उन्होंने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की देखरेख में किया है। चीताओं को उनकी टीम लगातार ट्रैप कैमरों की मदद से चीता एक एक एक्टिविटी के फोटो कैद कर रहे है तथा उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। चीताओं पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी सत्त नजर बनाये हुए हैं। इस ऐतिहासिक परियोजना से जुडे होने के लिये हम टीम के सदस्यों ने सोशल मीडिया पर गर्व का विषय बताने के साथ-साथ राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और मध्यप्रदेश के वन विभाग की टीम को बधाई भी दी है।
आपको बता दें कि चीतों को भारत में वापिस लाने के लिये इतना पसीना बहाया गया है। इस टीम में डॉ. झाला, डॉ. मलिक और राजेन्द्र ने पूरी फील्ड टीम द्वारा बहुत बड़ा कार्य किया गया है। चीता प्रोजेक्ट पर शिवांग मेहता और निशांत कपूर की टीम पिछले एक माह पूर्व काम कर रही है। दोनों बाड़े में प्रधानमंत्री को कवर करने के लिये दो-दो ट्रैप कैमरे लगाये हैं। प्रवीण चंदलिया ने बताया कि हमारी टीम ट्रैप कैमरे लगाने के लिये एक माह पहले से काम कर रही है। हमारी टीम ने अत्याधिक दबाव और तनावपूर्ण स्थितियों में काम किया है।

चीतों के लिये बनाया टास्क फोर्स, चीतों के बदलाव पर नजर
कूनो नेशनल पार्क में चीतों के बदलाव और व्यवहार पर बारीकी से नजर रखने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा टास्क फोर्स का गठन किया गया है जिसमें प्रमुख सचिव, वन अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव पर्यटन शिवशेखर शुक्ला, एनटीसीए के आईजी डॉ. अमित मलिक, प्रदेश के वन बल प्रमुख आरके गुप्ता, प्रधान मुख्य वन संरक्षक जेएस चौहान और राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के मेम्बर अभिलाष खांडेकर शामिल किये गये हैं। वहीं, वन्यप्राणी मुख्यालय में पदस्थ अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सेन को टास्क फोर्स का संयोजक सदस्य बनाया गया है।
कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ प्रकाशकुमार वर्मा ने कहा है कि चीतों में पहले दिन से ही एक्टिवनेस देखी जा रही हैै। इनमें 5 मादा और 3 नर चीते हैं। जिन्हें 6 अलग-अलग बाड़ों में रखा गया है। इनमें 2 बाड़ों में 2-2 चीते क्वारंटाइन किये गये हैं। जबकि 4 बाड़ों में 1-1 चीते को रखा गया है। कूनो के डीएफओ वर्मा ने बताया है कि चीतों के हेल्थ चेकअप से लेकर उन्हें भोजन देने की व्यवस्था में 3 नामीबियाई वेटेरियन और 2 माधव नेशनल पार्क के वेटेरियन लगे हैं। कूनो नेशनल पार्क में चीतों को आये एक सप्ताह पूरा हो चुका है। चीते अब धीरे-धीरे यहां के वातावरण में एडजस्ट होने लगे हैं।

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प्रधानमंत्री ने श्योपुर के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में अपने जन्म-दिवस पर छोड़े थे चीते चीतों पर होगी प्रतियोगिता

ग्वालियर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पिछले दिनों देशवासियों का सबसे अधिक ध्यान चीतों ने आकर्षित किया। चीतों के आने पर देश के कोने-कोने से लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त की। 130 करोड़ भारतवासी खुश हैं, गर्व से भरें हैं, यह भारतवासियों के प्रकृति प्रेम का प्रतीक है। लोगों का एक सामान्य सवाल यह है कि हमें चीतों का देखने का अवसर कब मिलेगा। प्रधानमंत्री ने देश के लोगों में जिज्ञासा का विषय बने कूनो के चीतों पर आज अपने “मन की बात” कार्यक्रम में देशवासियों से चर्चा की।


उल्लेखनीय है कि देश में चीतों की पुनर्स्थापना के लिए प्रधानमंत्री की पहल पर श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान का चयन किया गया था। प्रधानमंत्री ने अफ्रीका से आए चीतों को अपने जन्म-दिवस 17 सितम्बर को श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। मुख्यमंत्री द्वारा भारत में चीतों के पुर्स्थापन के लिए मध्यप्रदेश को चुनने के लिए प्रधानमंत्री का आभार मानते हुए इसे वाईल्ड लाइफ की सबसे बड़ी घटना निरूपित किया है।
एक टॉस्कफोर्स का गठन यह देखने के लिए किया गया है कि नए माहौल में चीते कितने घुल-मिल पाए हैं। इसी आधार पर कुछ महीने बाद निर्णय लिया जाएगा कि लोग चीते कब देख पाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आप सबको कुछ-कुछ काम सौंप रहा हूँ। इसके लिए “मॉय गव” के प्लेटफार्म पर एक प्रतियोगिता की जाएगी, जिसमें लोगों से कुछ शेयर करने का मैं आग्रह करता हूँ। आपको यह बताना है कि चीतों को लेकर हम जो अभियान चला रहे हैं, उस अभियान का नाम क्या होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि क्या हम चीतों के नामकरण के बारे में भी सोच सकते हैं। यह तय कर सकते हैं कि इनमें से हर एक चीते को, किस नाम से बुलाया जाए। यह नाम अगर परंपरागत स्वरूप के हों तो अच्छा रहेगा, क्योंकि अपने समाज, संस्कृति, परंपरा और विरासत से जुड़ी हुई कोई भी चीज हमें सहज ही अपनी ओर आकर्षित करती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आप यह भी बताएँ कि इंसानों को पशुओं के साथ कैसा व्यवहार रखना चाहिए। हमारे मूलभूत कर्त्तव्यों में भी पशुओं के प्रति सम्मान पर बल दिया गया है। प्रधानमंत्री ने इस प्रतियोगिता में सभी लोगों से भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि यह भी हो सकता है कि प्रतियोगिता में पुरस्कार स्वरूप चीतों को देखने का पहला अवसर आपको ही मिल जाए।

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कूनों में आये चीतों का एक सप्ताह पूरा, नामीबिया से हो रही है मॉनीटरिंग, माहौल में हो रहे एडजस्ट

श्योपुर. कूनो नेशनल पार्क में पिछले 17 सितम्बर को पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा छोड़े गये 8 चीतों को एक सप्ताह पूरा हो चुका है। चीते अपने नये घर कूनो में एडजस्ट होने लगे हैं। चीतों का वायटल पैरामीटर सामान्य है। उन पर 3 नामीबियाई विशेषज्ञों समेत 5 वेटेरियन निगरानी रख रहे हैं। चीतों को खान में भैंस का गोश्त दिया जा रहा है। चीते भरपूर नींद लेकर बाड़े में चहलकदमी कर रहे हैं। पार्क प्रबंधन चीतों के सामान्य व्यवहार से संतुष्ट है। चीतों की मॉनीटरिंग नामीबिया से की जा रही है। पार्क प्रबंधन पलप ल नजर रखकर रिपोर्ट प्रतिदिन केन्द्र सरकार को भेज रहे हैं।


2 विशेषज्ञ 3 दिन पूर्व लौट चुके हैं

कूनो नेशनल पार्क में एक सप्ताह पूर्व नामीबिया से पहुंचे 8 चीते नये वातावरण में फिट हो रहे है। नामीबिया से आये 5 विशेषज्ञों में से 2 विशेषज्ञ 3 दिन पूर्व लौट चुके हैं। लेकिन 3 विशेषज्ञ डॉ. एलाय, डॉ. बाट और डॉ. एना चीतों के स्वास्थ्य से लेकर उनके खान-पान का पूरा ध्यान रख रहे हैं। इन विशेषज्ञों के साथ माधव नेशनल पार्क के वेटेरियन डॉ. ओमकार अचल और डॉ. जितेन्द्र जाटव भी चीतों की देखभाल कर रहे हैं।
यह टास्क फोर्स लगातार कूनो नेशनल पार्क में चीतों के व्यवहार और बदलाव पर नजर रखे हुए हैं। एक वीक पूरा होने के बाद टास्क फोर्स ने रिपोर्ट बनाना शुरू कर दिया है। टास्क फोर्स की रिपोर्ट पर यह भी तय होगा कि क्वारंटाइन बाड़े से चीतों को बड़े बाड़े और फिर जंगल में खुला कब छोड़ा जाना हैं। इसके अलावा पार्क में पर्यटना शुरू करने और उसे व्यवस्थित करने का निर्णय भी इस फोर्स के सदस्य लेंगे। अनुमान लगाया जा रहा है कि चीता देखने आने वाले पर्यटकों के लिये जनवरी 2023 से पार्क खोला जा सकता है।
चीतों के लिये बनाया टास्क फोर्स, चीतों के बदलाव पर नजर
कूनो नेशनल पार्क में चीतों के बदलाव और व्यवहार पर बारीकी से नजर रखने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा टास्क फोर्स का गठन किया गया है जिसमें प्रमुख सचिव, वन अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव पर्यटन शिवशेखर शुक्ला, एनटीसीए के आईजी डॉ. अमित मलिक, प्रदेश के वन बल प्रमुख आरके गुप्ता, प्रधान मुख्य वन संरक्षक जेएस चौहान और राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के मेम्बर अभिलाष खांडेकर शामिल किये गये हैं। वहीं, वन्यप्राणी मुख्यालय में पदस्थ अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सेन को टास्क फोर्स का संयोजक सदस्य बनाया गया है।
कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ प्रकाशकुमार वर्मा ने कहा है कि चीतों में पहले दिन से ही एक्टिवनेस देखी जा रही हैै। इनमें 5 मादा और 3 नर चीते हैं। जिन्हें 6 अलग-अलग बाड़ों में रखा गया है। इनमें 2 बाड़ों में 2-2 चीते क्वारंटाइन किये गये हैं। जबकि 4 बाड़ों में 1-1 चीते को रखा गया है। कूनो के डीएफओ वर्मा ने बताया है कि चीतों के हेल्थ चेकअप से लेकर उन्हें भोजन देने की व्यवस्था में 3 नामीबियाई वेटेरियन और 2 माधव नेशनल पार्क के वेटेरियन लगे हैं। कूनो नेशनल पार्क में चीतों को आये एक सप्ताह पूरा हो चुका है। चीते अब धीरे-धीरे यहां के वातावरण में एडजस्ट होने लगे हैं।

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हुए हाउस अरेस्ट, सुब्रमण्यम स्वामी के ट्विट से फैली सनसनी

चीन. राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लेकर सोशल मीडिया पर तेजी से अफवाह फैल रही है कि उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। यह दावा किया जा रहा है कि ज बवह शंघाई सहयोग संगठन में चीन की तरफ से शामिल होने के लिये ताशकंद गये हुए थे। उसी बीच उन्हें सेना के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। हालांकि इस दावे की अभी तक कोई पुष्अि नहीं हुई है।

हाल ही में जब शी जिनपिंग उजबेकिस्तान के समरकंद एससीओ समिट में थे, तभी उन्हें सेना के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। हालांकि अब तक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और न ही वहां के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने इसका खंडन किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर # XiJinping हैशटैग पर हजारों की संख्या में ट्वीट किए जा रहे हैं। BJP  नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी के ट्वीट के बाद ये सवाल तेजी से उठ रहा है। हालांकि उन्होंने एक और ट्वीट में लिखा है कि इस अफवाह की जांच की जानी चाहिए कि शी जिनपिंग बीजिंग में नजरबंद हैं।

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