एलिवेटेड रोड की वजह से स्वर्ण रेखा की हो रही सीवर लाइन डैमेज
स्वर्ण रेखा-मुरार में 111 नालों की गंदगी
ग्वालियर-स्वर्ण रेखा में बन रहे एलिवेटेड रोड के कारण क्वालियर और दक्षिण विधानसभा की अधिकतर सीवर लाइनें डैमेज हो गई हैं। इसी कारण 111 नालों का गंदा पानी सीधे स्वर्ण रेखा और मुरार नदी में गिर रहा है। इसका असर एसटीपी पर भी पड़ रहा है। 145 एमएलडी क्षमता वाले जलालपुर एसटीपी में रोज सिर्फ 70 एमएलडी सीवर पहुंच रहा है, जबकि 65 एमएलडी क्षमता वाले लाल टिपारा एसटीपी में करीब 60 एमएलडी पानी पहुंच रहा है। दोनों नदियों में सीवर मिलने मेन लाइन पानी की नहीं हो रही है। इस कारण बारिश में पानी घरों और नालों के जरिए घरों तक पहुंच रहा है। इससे लोगों के बीमार होने का खतरा है।
इसे… काम का दावा है कि ट्रैफिक किए गए 120 एमएलडी पानी को रोज सिंचाई और खेती के लिए जल संसाधन विभाग को दिया जाता है। अब शासन के निर्देश पर निगम ट्रीटेड पानी रेलवे और उद्योगों को देने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए टीशियरी ट्रीटमेंट प्लांट पीपीपी मॉडल पर लगाने की योजना है। वहीं प्रदेश के नगरीय प्रशासन विभाग ने ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, मुरैना, दतिया, गुना, उज्जैन, विदिशा, सतना, सागर, रीवा, रतलाम, खंडवा सहित 64 शहरों से सीवर के पानी के रियूज का प्लान मांगा है। एसटीपी के पानी में सीवर के पानी को साफ करने के बाद गुणवत्ता की रोज जांच होती है।
बेंजाताल: क्षमता 1 MLD, नौकायन में उपयोग
एलिवेटेड स्वर्ण रेखा में पानी भरकर नौकायन के लिए लगाया गया था। पर्याप्त पानी नहीं मिला तो ट्रीटेड पानी बेंजाताल में डालना शुरू किया। पहले पंप से टंकियों में पानी भरकर पेड़ों तक पहुंचाया जाता था, अब वह पंप भी हटा दिया गया है।
निगम को पानी लेने और देने में हर साल 2 करोड़ की बचत
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री शैलेंद्र सिंह के मुताबिक, निगम ट्रीटेड पानी से जल संसाधन विभाग को पानी देता है। इसके बदले 56 पैसे प्रति घनमीटर की दर से भुगतान होता है। इसी पर निगम ट्रीटेड पानी जल संसाधन विभाग को देता है। निगम को सालाना 2 करोड़ रुपए की बचत होती है। गर्मी में पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए भी ट्रीटेड पानी दिया जाता है।
स्वर्ण रेखा: इतने नालों का गंदा पानी शहर के बीच बह रहा
स्वर्ण नदी में, देवघर रोड, विनय नगर, शर्मा फार्म हाउस, इंदिरा नगर, राजा मंडी, महल मोहल्ला, हजारी ब्रिज, समतापुरा, तानसेन नगर, गायत्री नगर, दौलतपुरा, रवि नगर, लक्ष्मीबाई फूल, शिंदे की छावनी, जिंसी, सूबे की गोठ, न्यू शांतिनगर और जयराम साहब।

