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दतिया की पहचान-बिना सीमेंट का सतखंडा महल, मंदिर और छतरियां और भव्य महल स्वर्णिम इतिहास की देता है गवाही

दतिया. बुन्देलखंड का ऐतिहासिक शहर दतिया भले ही दतिया की पहचान शक्तिपीठ श्री पीताम्बरा पीठ की वजह देश -विदेश में हो, लेकिन यह शहर 16वीं-17वीं शताब्दी की समृद्ध स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत का आज भी संजाये है। वर्ष 1616 में अस्तित्व मंें आये इस शहर के चारों तरफ स्थित भव्यमहल, मंदिर और छतरियां इसके स्वर्णिम इतिहास की गवाह है।
दतिया की पहचान का सबसे प्रमुख प्रतीक वीरसिंह पैलेस (सतखंड महल) है, जो बिना सीमेंट और लोहे के केवल पत्थर और ईटों से निर्मित 7 मंजिला अद्भुत संरचना है। वहीं, शहर के बीचों बीच स्थित राजगढ़ पैलेस बुन्देली वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। 17वीं शताब्दी में बने इस महल में कभी कलेक्ट्रेट संचालित किया जाता था। इसके विशाल आंगन, भव्य दरबार हॉल और मेहराव दार खिड़किया उस दौर की भव्यता को दर्शाती है। हालांकि, वर्तमान में संरक्षण के अभाव में यह धरोहर जर्जर होती जा रही है।
गामा पहलवान से जुड़ा दतिया का इतिहास
दतिया के राजघराने का योगदान खेल जगत में भी रहा है। ऐसा बताया जाता है कि महाराजा भवानी सिंह के समय विश्व प्रसिद्ध गामा पहलवान का लालन-पालन भी यहीं हुआ है। उन्हें कुश्ती के दांव-पेंच सिखाये गये। जिनके दम पर उन्होंनंे अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है।
महाराजा गोविंद सिंह-शौर्य और साहस की मिसाल
महाराज भवानी सिंह के बाद महाराजा गोविंद सिंह जू देव ने दतिया की गद्दी संभाली थी। उन्हें अपने समय का विश्व के श्रेष्ठ शिकारियों में गिना जाता था उस दौर में उन्होंने क्षेत्र में आतंक मचाने वाले जंगली जानवरों का शिकार कर जनता को राहत दिलाई थी। किले में आज भी उनके शिकार के अवशेष संरक्षित है। जो उस वक्त के शौर्य और पराक्रम की कहानी बयान करते हैं। विश्व विरासत दिवस पर दतिया की यह ऐतिहासिक विरासत न केवल गौरव का विषय है बल्कि इसके संरक्षण की आवश्यकता की भी याद दिलाती है ताकि आने वाली पीढि़या भी इस समृद्ध धरोहर से परिचित हो सके।
दतिया केवल ऐतिहासिक इमारतों का शहर नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था का भी प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित अवध बिहारी मंदिर, बिहारी जी मंदिर, नंद किशोर मंदिर और हनुमानगढ़ी जैसे मंदिरों के कारण इसे ‘लघु वृंदावन’ भी कहा जाता है। भरतगढ़ किले को लोकदेवता लाला हरदौल की जन्मस्थली माना जाता है, जिनके प्रति आज भी लोगों में गहरी श्रद्धा है।

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