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पटेल नगर से लेकर स्टेट बैंक के किनारे बन रहे नाले की इंजीनियरिंग पर हो रहे सवाल खड़े, बन रहा ऊंचा-नीचा नाला

ग्वालियर. पटेल नगर से लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय तक तैयार की जा रही रोड के किनारे बन रहे नाले की इंजीनियरिंग पर सवाल खडे हो रहे है। इस नाले की चौडाई से लेकर ऊंचाई तक से क्षेत्रीय लोग परेशान है। कहीं आरसीसी का नाला तैयार किया जा रहा है तो कहीं नाले के अंदर ही पाइप बिछाए जा रहे है। इस नाले की ऊंचाई कुछ इस प्रकार हो गई है कि वर्षा के दौरान सडक पर गिरन वाला पानी तो नाले में चला जाएगा लेकिन नाले के ऊपर गिरने वाला पानी गलियों में भरने की संभावना बनी हुई है। इस नाले की पूर्व में भी निगमायुक्त से शिकायत की जा चुकी है।
दरअसल नगर निगम द्वारा वर्षा के दिनों में जलभराव के कारण जर्जर हो चुकी पटेल नगर से लेकर स्टेट बैंक के रीजनल कार्यालय तक की सडक को 2.86 करोड में जलभराव मुक्त करने का प्रोजेक्ट बनाया गया है। केंद्र सरकार के 15वें वित्त आयोग से मिले अनुदान की राशि में से इस सडक को तैयार कराया जा रहा है। सडक के दोनों ओर बरसात के पानी की निकासी के लिए यू शेप नाले का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा इस सडक का लेवल भी एक जैसा बनाया जाना है। पटेल नगर तिराहे की तरफ ये सडक ऊंची है और कैलाश विहार की तरफ पहुंचने पर सडक का लेवल नीचा हो जाता है। इसके चलते इस सडक पर जलभराव के पाइंट बन जाते है। इसी प्रकार आगे चलने पर आयकर कार्यालय के सामने रोड नीची हो जाती है जबकि स्टेट बैंक के सामने फिर से यह ऊपर की ओर जाती है। कुछ इसी प्रकार से सडक के बगल में नाले की स्थिति हो गई है। यहां कैलाष विहार के लिए जाने वाली रोड पर नाले के नीचे पाइप लगाया गया है तो वहीं अनुपम नगर को जाने वाली रोड पर भी नाले में पाइप बिछाए जा रहे है। इस के पीछे अधिकारियों का तर्क है कि गलियों में वाहनों के आवागमन के दौरान नाला क्षतिग्रस्त न हो इसके लिए सुरक्षा की द्रष्टि से नीचे पाइप बिछाया गया है इस कार्य का ठेका एचएनएस कंस्ट्रक्शन को दिया गया है।
निगमायुक्त की दी समय सीमा भी बीती
इस नाले की लंबाई भी सांप की चाल जैसी हो गई है। पूर्व में आरटीआई कार्यकर्ता राकेश कुशवाह ने भी इस मामले की शिकायत निगमायुक्त से की थी। शिकायत में उन्होंने उल्लेख किया था कि नाले के टेढेपन के कारण सडक की चौडाई कहीं ज्यादा तो कहीं कम हो गई है। इसके अगले दिन अधिकारियों ने निरीक्षण भी किया था और सडक की नपाई की गई थी। वहीं कुछ स्थानों पर स्थानीय लोगों के विरोध के कारण इस सडक का काम धीमी गति स ेचल रहा है। निगमायुक्त ने 29 फरवरी तक एक तरफ की रोड पर डामरीकरण करने के निर्देश दिए थे लेकिन यह समय सीमा बीतने के बाद भी एक तरफ सिर्फ गिट्टी बिछाने का काम ही हो पाया है।

 

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