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MP में अब पेट्रोल-डीजल नहीं गन्ने की मिठास से दौड़ेंगी गाड़ियां

भोपाल. सडक परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन के उपयोग को कानूनी मंजूरी देने के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस क्रांति में बडी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। आने वाले समय में प्रदेश की सडकों पर गाडियां पेट्रोल-डीजल से नहीं बल्कि खेतों में लहलहाने वाले गन्ने के रस से बने एथेनॉल से दौडती नजर आएंगी। भारत सरकार के इस फैसले से मध्य प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों के लिए समृद्धि के नए द्वार खुलने जा रहे है।
प्रदेश के इन जिलों को होगा फायदा
एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने की फसल और चीनी उत्पादन के बाद बचे उप-उत्पाद मोलासेस से तैयार होने वाला एक प्रकार का अल्कोहल है। मध्य प्रदेश का एक बडा हिस्सा गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है।

महाकौशल और निमाड क्षेत्रः नरसिंहपुर प्रदेश् का सबसे बडा गन्ना उत्पादक जिला, छिंदवाडा, बुरहानपुर, खंडवा और खरगोन जैसे जिलों में गन्ने की बंपर पैदावार होती है।
मालवा और चंबल क्षेत्रः उज्जैन, धार और ग्वालियर-दतिया के बेल्ट में भी किसान बडे पैमाने पर गन्ना उगाते है। अब तक किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए केवल चीनी मिलों या स्थानीय गुड और खांडसारी उद्योग पर निर्भर रहना पडता था जहां अक्सर भुगतान में देरी और सही दाम न मिलने की समस्या होती थी लेकिन एथेनॉल की मांग 100 प्रतिशत होने से अब गन्ने की सीधी खपत एथेनॉल प्लांटों में होगी।

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