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ज्योतिष के माध्यम से सर्वांगीण सुख -राघव ऋषि

ग्वालियर ऋषि सेवा समिति ग्वालियर के तत्वधान में चल रही सनातन धर्म मंदिर प्रांगण में संगीतमय विष्णु महापुराण कथा का रसपान करा रहे पूज्य राघव ऋषि जी ने दिव्य रहस्य बताते हुए कहा कि, हर मनुष्य का जीवन नवगृहों के अनुसार चलायमान होता है। मनुष्य को गृहों की प्रतिकूलता को अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक है कि ज्योतिष शास्त्र के साथ ज्योतिष के मर्मज्ञ का आश्रय ले। वास्तव में सात प्रत्यक्ष गृह हर मनुष्य के हरपल, हरक्षण के कार्यो की निगरानी रखते हैं यह भगवान के पार्षद के रूप में यथाक्रम तथा फल प्राप्ति कराते हैं। सूर्य से आत्म तत्व, चन्द्र से मन, मंगल से ओज तत्व, बुध से वाणी, गुरू से ज्ञान शुक्र से ऐश्वर्य, शनि से सुख व दुख के सभी ग्रहों अहर्निश मनुष्य के पाप पुण्य के अनुसार सुख व दुख देते हैं। अतः अपने जीवन को सजाने संवारने के लिए ज्योतिष जैसे दिव्य नेत्र का आश्रय अवश्य ले लेना चाहिए।
भरतो पाख्यान का वर्णन करते हुए पूज्य श्री ने बताया कि जीव को जब तक यह ज्ञात नहीं होता कि वह कौन है किस लिए इस धराधाम में आया है तब वह जाने अजाने कितने ही पाप कर बैठता है। जिसका परिणाम उसे दुख के रूप में मिलता है।किन्तु यही जीव जब सत्य का ज्ञान कर पाता है तब उसे मानव रूप में जन्म पाने का महत्व ज्ञात हो जाता है यह हम सब की दशा है। इसलिए सही दशा की ओर मार्ग प्रशस्त कर लेना चाहिए। भरत जी को भी अनेकों कष्ट हुए अंततः उन्हें परमात्मा की कृपा से अपने जीवन का उद्देश्य क्या है। जानकर एक मात्र उन्हीं की बनाई गई परम्परा में जीवनयापन करने लगे।
षोडश संस्कारों का वर्णन कर पूज्य श्री ने बताया कि, भारत वर्ष ही एक ऐसी भूमि है जहां षोडश संस्कारों को माता पिता व सगे संबंधियों के द्वारा सम्पन्न कराया जाता है यह भारत संस्कार धानीके नाम से भी जाना जाता है। ‘‘मेरे देवता मुझको देना सहारा’’ मोहक भजन सौरभ जी ने सुनाकर भक्तों को भाव विभोर किया।
आरती में महेश अग्रवाल, नारायण स्वरूप शर्मा, अम्बरीष गुप्ता, यशवीर शर्मा, उमेश उप्पल, आनंदमोहन अग्रवाल, देवेन्द्र तिवारी, हरिओम मिश्रा, बद्रीप्रसाद गुप्ता, रामसिंह तोमर, कमल अग्रवाल, प्रमोद गर्ग, मनोज अग्रवाल, मनीष बंसल, हरीओम मिश्रा, चन्द्रप्रकाश शुक्ला, मनोज अग्रवाल, (सुचि सोया) दाल बाजार, गोपी शरण जी अग्रवाल, व अन्य गणमान्य भक्त श्रृद्धाुओं ने भगवान की आरती उतारी , उपस्थित रहे।

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