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MP में UCC की तैयारी तेज, CM मोहन यादव ने गृह विभाग को दिया 6 महीने का अल्टीमेटम

भोपाल. मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी तेज कर दी है। सरकार का लक्ष्य इस ऐतिहासिक कानून को इस साल दिवाली तक अमलीजामा पहनाने का है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गृह विभाग को अगले छह महीनों के भीतर विधेयक का मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया है। इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए जल्द ही एक राज्य स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें कानूनी विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति उत्तराखंड और गुजरात द्वारा लागू किए गए यूसीसी कानूनों का गहन अध्ययन करेगी।
शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी
दिसंबर 2022 में, तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने का संकल्प लिया था। हालांकि, विधानसभा चुनावों की व्यस्तता के कारण यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी। अब मोहन यादव सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए उत्तराखंड मॉडल का विश्लेषण शुरू कर दिया है, जो 27 जनवरी 2025 से देश में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है।
क्या हैं यूसीसी की विशेषताएं?
लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण
समान नागरिक संहिता का सबसे क्रांतिकारी प्रभाव महिलाओं की स्थिति पर पड़ेगा। यह कानून धर्म से ऊपर उठकर सभी महिलाओं को समान अधिकार देता है। इसमें बेटियों को पिता की संपत्ति में बेटों के समान अधिकार प्राप्त होगा। साथ ही तलाक की प्रक्रिया अब मजहबी परंपराओं के बजाय कानूनी और पारदर्शी होगी, जिससे महिलाओं का शोषण रुकेगा। इसके अलावा तलाक के बाद गुजारा भत्ता पाने के नियम सभी के लिए एक समान और स्पष्ट होंगे, जिससे महिलाओं का भविष्य सुरक्षित होगा।
वैवाहिक कुरीतियों पर अंकुश
एक से ज्यादा शादी करने की प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगेगा। यह नियम समाज में महिलाओं को बढ़ावा देगा। विवाह का अनिवार्य पंजीकरण होने से धोखाधड़ी और बाल विवाह जैसे मामलों में कमी आएगी। समान नागरिक संहिता आधुनिक सामाजिक बदलावों को भी कानून के दायरे में लाता है। इसके तहत लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को जिला प्रशासन के पास अपनी जानकारी दर्ज करानी होगी। इससे सुरक्षा और जवाबदेही तय होगी। साथ ही लिव-इन संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को ‘अवैध’ नहीं माना जाएगा। उन्हें कानूनी मान्यता और माता-पिता की संपत्ति में पूर्ण अधिकार मिलेगा। हिंदू जागरण मंच जैसे संगठनों का मानना है कि ‘लव-जिहाद’ और ‘भूमि-जिहाद’ जैसी समस्याओं पर लगाम कसने के लिए समान नागरिक संहिता एक प्रभावी हथियार साबित होगा।

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