MP में बिजली उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ, अगले 5 साल के टैरिफ की प्रक्रिया शुरू
भोपाल. मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले अगले पांच साल के बिजली टैरिफ से जुडी प्रक्रिया शुरू हो गई है। मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी की तरफ से पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी और मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के लाइन लॉस को बढाते हुए नई याचिका मप्र विद्युत नियामक आयोग को भेजी गई है। याचिका के आधार पर मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने मल्टी ईयर टैरिफ के लिए प्रस्तावित नियम-शर्तों पर उपभोक्ताओं से 1 सितंबर तक आपत्ति और सुझाव मांगे है।
इस प्रक्रिया में वितरण हानि का प्रस्तावित स्तर सबसे अहम बिंदुओं में है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के लिए वितरण हानि 14 प्रतिशत से बढाकर 23 प्रतिशत और मध्य क्षेत्र के लिए 24.5 प्रतिशत करने का प्रोजेक्शन दिया गया है। ऐसे में सवाल है कि इसका भविष्य के बिजली बिल पर कितना असर पडेगा, हालांकि वितरण हानि का आंकडा बढने का अर्थ सीधे बिजली दर बढना नहीं है। टैरिफ निर्धारण में बिजली खरीद लागत, ट्रांसमिशन व वितरण खर्च, संचालन-रखरखाव, पंूजीगत निवेश और राजस्व आवश्यकता सहित कई घटकों का परीक्षण होता है, इसके बाद आयोग अंतिम टैरिफ तय करता है फिर भी अधिक हानि को स्वीकार किए जाने से बिजली आपूर्ति की कुल लागत और टैरिफ गणना पर असर पडना तय है।
बिजली वितरण हानि केवल लाइन में तकनीकी नुकसाल तक सीमित नहीं है। तकनीकी हानि में लाइन, ट्रांसफार्मर और नेटवर्क की क्षमता से जुडे नुकसान आते है जबकि बिजली चोरी, मीटरिंग, बिलिंग और राजस्व वसूली से जुडी कमियां वाणिज्यिक हानि को प्रभावित करतीहै। स्मार्ट मीटरिंग से खपत की निगरानी और बिलिंग दक्षता बढ सकती है लेकिन पुरानी लाइन, ओवरलोडिंग और कमजोर नेटवर्क में सुधार भी जरूरी है।

