ग्वालियर के चिडि़याघर में आयेगा नया मेहमान रॉयल बंगाल टाइगर
ग्वालियर. गांधी प्राणी उद्यान में जल्द ही नया मेहमान एक रॉयल बंगाल टाइगर आने वाला है। देहरादून से ढाई साल का यह बाघ एनीमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत ग्वालियर लाया जा रहा है। इसका उद्देश्य बाघों की अगली पीढ़ी तैयार करना और चिडि़याघर में जेनेटिक विविधता बनाये रखना है। इस आदान-प्रदान के तहत ग्वालियर के तल्लैयापुर से एक बाघ देहरादून चिडि़याघर भेजा जायेगा। जिसके बदले में ग्वालियर को यह युवा रॉयल बंगाल टायगर मिलेगा। तकनीकी प्रक्रियायें पूरी हो चुकी है। चिडि़याघर प्रबंधन के अनुसार वर्तमान में गांधी प्राण उद्यान में करीब 10 बाघ है। इनमें कुछ मादा बाघों की आयु 13-14 वर्ष तक पहुंच चुकी है। भविष्य में बाघों की नयी पीढ़ी तैयार करने के लिये एक नयी ब्लडलाइन के बाघ को शामिल करना आवश्यक माना जा रहा है।
देहरादून से आने वाला युवा बाघ यहां के मौजूदा बाघों के साथ प्रजनन में भाग लेगा, जिससे स्वस्थ और जेनेटिक रूप से विविध संतति मिलने की संभावना बढ़ेगी। यह आदान-प्रदान पुरानी ब्लडलाइन से जुड़े खतरों से बचने के लिए किया जा रहा है।
जंगल में बाघ विभिन्न क्षेत्रों में विचरण करते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से उनका आनुवंशिक आदान-प्रदान होता रहता है। इसके विपरीत, चिड़ियाघरों में बाघों की संख्या सीमित होती है और प्रजनन नियंत्रित तरीके से कराया जाता है। लंबे समय तक एक ही परिवार या ब्लडलाइन के बाघों के बीच प्रजनन से आनुवंशिक विविधता कम होने का जोखिम रहता है। इसी कारण देश के विभिन्न चिड़ियाघरों के बीच बाघों का आदान-प्रदान किया जाता है।

