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MP में प्रमोशन का इंतजार कर रहे लाखों सरकारी कर्मचारियों को झटका

भोपाल. प्रदेश में वर्ष 2016 से अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति रुकी हुई है। इसे शुरू करने के लिए सरकार ने नए नियम तो बनाए लेकिन ये भी कोर्ट में उलझ गए। हाई कोर्ट जबलपुर में इस पर सुनवाई पूरी हो गई थी और निर्णय सुरक्षित रख लिया गया था। यह जारी होता, इसके पहले ही सुनवाई करने वाले मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति हो गई। ऐसे में अब पहले नई बेंच गठित होगी और फिर एक बार सुनवाई होगी। इसमें समय लग सकता है, जिसका असर नई भर्तियों पर भी पड़ेगा, क्योंकि जब तक कर्मचारी पदोन्नत नहीं होंगे तब तक नए पद उपलब्ध नहीं होंगे।
सामान्य वर्ग की आपत्ति और सुरक्षित निर्णय का पेच
बता दें, पदोन्नति का रास्ता निकालने के लिए सरकार ने सभी पक्षों से विचार-विमर्श कर नए नियम तैयार किए। सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने इस पर आपत्ति उठाते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसकी सुनवाई की। सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया। सरकार की ओर से नए नियम के पक्ष में तर्क रखे गए। सभी को सुनने के बाद 17 फरवरी को निर्णय सुरक्षित रख लिया गया। तब से ही यह लंबित है। जबकि, सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि सामान्य परिस्थितियों में सुरक्षित रखे गए निर्णय को 90 दिनों से अधिक लंबित नहीं रहना चाहिए। इससे सरकार और कर्मचारियों में उम्मीद जागी थी कि जून के प्रथम सप्ताह में निर्णय सुना दिया जाएगा, लेकिन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद पेच फंस गया।
मई 2016 से ठप हैं पदोन्नतियां
प्रदेश में पदोन्नतियां मई 2016 से रुकी हैं, क्योंकि हाई कोर्ट ने पदोन्नति नियम 2002 को निरस्त कर दिया था। तब से ही पूरी व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है। सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए उच्च पद का प्रभार तो दिया, लेकिन इससे अधिकारी-कर्मचारियों को कोई वित्तीय लाभ प्राप्त नहीं हुआ। वहीं, नियुक्तियां प्रभावित हो गईं क्योंकि पद रिक्त नहीं हुए।

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ग्वालियर में स्कूटी को टक्कर मारने वाले कार चालक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया

ग्वालियर. ग्वालियर के बिजौली थाना क्षेत्र में एक हिट एंड रन की घटना में दो मासूम बच्चों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। एक तेज रफ्तार कार ने स्कूटी को टक्कर मार दी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी कार चालक को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना 6 जून की रात गणेशपुरा इलाके में हुई। गणेशपुरा निवासी एक परिवार होटल से खाना खाकर स्कूटी से घर लौट रहा था। तभी हाईवे पर पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार यूपी नंबर की सफेद कार ने स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कूटी सवार पांचों लोग उछलकर सड़क पर जा गिरे। कार चालक मौके से फरार हो गया। हादसे का वीडियो भी सामने आया है।


इलाज अभी भी जारी, डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताई
हादसे में स्कूटी सवार रवि राजे, नरेंद्र सिंह, अजय सिंह और दो बच्चे निशांत राजे व गर्वित राजे गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। इलाज के दौरान 5 वर्षीय निशांत राजे और 6 वर्षीय गर्वित राजे ने दम तोड़ दिया। दोनों बच्चे गणेशपुरा के रहने वाले थे। रवि राजे, नरेंद्र सिंह और अजय सिंह का इलाज अभी भी जारी है और डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर बताई है।
पुलिस ने आरोपी चालक को गिरफ्तार कर किया
बिजौली पुलिस ने अज्ञात कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सीसीटीवी फुटेज में यूपी नंबर की कार स्पष्ट दिख रही थी। पुलिस ने टोल प्लाजा और हाईवे के अन्य कैमरों की भी जांच की, जिसके बाद आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है। एसडीएम ने घटना को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी है। पुलिस आगे की विवेचना कर रही है।

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राज्यसभा चुनाव में MP के तीनों निर्विरोध जीते BJP के उम्मीदवार

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के रूख के बाद मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव के परिणाम निर्विरोध तय हो गये हैं। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्ष्ी नटराज का नामांकन पत्र रिटर्निंग अधिकारी के खारिज किये जाने के बाद राज्य की तीसरी राज्यसभा सीट पर मुकाबला भी समाप्त हो गया है। नामांकन प्रक्रिया के दौरान, भाजपा ने कांग्रेस उम्मीदवार पर हलफनामे में आपराधिक मामले/कोर्ट नोटिस की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था। आपत्तियों की जांच और सुनवाई के बाद उनका नामांकन निरस्त कर दिया। इसके साथ ही भाजपा के तीनों उम्मीदवार तरूण चुघ, रजनीशअग्रवाल और महेश केवट का निर्विरोध राज्यसभा सांसद निर्वाचित हो गये है। भाजपा के तीनों उम्मीदवार जीत का प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है। भाजपा के तीनों उम्मीदवासर निर्विरोध राज्यसभा पहुंच गये है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चंदूकर की पीठ ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका में रिटर्निंग अधिकारी के नामांकन रद्द करने के आदेश पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान अदालत को दखल नहीं देना चाहिये। हालांकि मीनाक्षी के एडवोकेट अभिेषक मनु सिंघवी ने दलील दी है कि अदालत चुनाव होने दें और रिजल्ट घोषित करने पर अपने आदेश का कैप लगा दें। लंकिन अदालत ने दलील दरकिनार कर दी है।

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कलेक्ट्रेट में तहसीलदार का रीडर 20 हजार रूपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

ग्वालियर. कलेक्ट्रेट की तीसरी मंजिल स्थित न्यायालय तहसीलदार वृत गिरवाई के कमरा नम्बर 307 फरियादी जितेन्द्र पांडे पिदले 1 साल से नामांकन कराने के लिये चक्कर लगा रहे थे। नामांकन की 2 फाइलें खारिज कर दी गयी। तहसीलदार रमाशंकर सिंह के रीडर अनिल पुलवारिया ने व्हाट्स एप कॉल कर नामांकन के एवज में 40 हजार रूपये की डिमांड की थी। फरियादी जितेन्द्र पांडे ने इसकी शिकायत आर्थिक अपराध ब्यूरों (ईओडब्ल्यू) में एसपी दिलीप तोमर से की। एसपी ने डीएसपी शेलेन्द्र कुशवाह की अगुआई में एक टीम बनाकर भेजा और जैसे ही फरियादी जितेन्द्र पांडे को पहली किश्त 20 हजार तहसीलदार की रीडर अनिल पुलवारिया को सौंपी वैसे ईओडब्ल्यू की टीम रीडर को दोनों हाथ पकड़ लिये। टीम ने पानी से हाथ धुलवाये तो पानी का रंग बदल गया। रीडर के बयानों के आधार पर तहसीलदार को भी सह आरोपी बनाये जाने की संभावना है।
रंगे हाथों छापा मार कार्यवाही का डीएसपी शैलेन्द्र कुशवाह, टीआई मदनमोहन मालवीय, लॉ ऑफीसर अनिल कुमार अपनी टीम के साथ कार्यवाही को अंजाम दिया है।

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अवैध रेत खनन रोकन में असफल TI निलंबित, सबलगढ थाना प्रभारी जांच पूरी होने तक रहेगी लाइन अटैच

मुरैना. एसपी धर्मराज मीणा ने सबलगढ़ थाना टीआई राजकुमारी परमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। टीआई पर अवैध रेत खनन रोकने, जुआ फड़ पर कार्यवाही करने में लापरवाही बरतने और प्रशासनिक अधिकारियों को सहयोग नही ंदेने के गंभीर आरोप है। निलंबन की इस कार्यवाही के बाद उन्हें पुलिस लाइन में अटैच कर दिया है। जिला प्रशासन और पुलिस इस वक्त अवैध रेत उत्खनन व परिवहन को रोकने के लिये संयुक्त रूप से सख्त अभियान चला रहे हैं। इसके बावजूद सबलगढऋ थाना इलाके में माफियाओं पर कार्यवाही का आंकड़ा बेहद कम रहा है। हाल ही में शहर के अन्दर अवैध रेत परिवजन करते वाहनों के कुछ वीडियो सामने आये थे। इसके अलावा, सबलगढ़ किले पर सरेआम जुआ खेलने का एक वीडियो भी सामने आया था। लेकिन स्थानीय पुलिस ने इन मामलों में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
प्रशासनिक अधिकारियों के असहयोग का आरोप
एसपी धर्मराज मीणा को सबलगढ़ थाना टीआई की लगतार शिकायतें मिल रही थी। अवैध गतिविधियों पर नरमी बरतने के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्यवाही के बीच टीआई पर प्रशासनिक अधिकारियों को पर्याप्त सहयोग न देने की भी शिकायत है।
लगातार मिल रही इन्हीं गभीर शिकायतों और ड्यूटी में लापरवाही को देखते हुए एसपी ने यह सख्त कदम उठाया है। एसपी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि थाना प्रभारी राजकुमारी परमार को कार्यवाही के प्रति उदासीनता बरतने पर निलंबित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक इस पूरे मामले की विभागीय जांच पूरी नहीं हो जाती है तब तक टीआई पुलिस लाइन में ही अटैच रहेगी।

 

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कलेक्टर-एसपी ने देर रात चंबल के कुल्हाड़ा घाट पर मारा छापा, रेत माफियाओं में हड़कंप

मुरैना. चंबल नदी से रेत के अवैध खनन एवं अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अधिकारी रतजगा कर रहे है। कलेक्टर-एसपी कभी रात में हाईवे पर वाहनों की चेकिंग करवा रहे है तो कभी चंबल के घाटों पर पहुंच रहे है। बीती रात 2 बजे कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड और एसपी धर्मराज मीना नगरा थाना क्षेत्र के कुल्हाडा घाट पर पहुंचे। इससे पहले अंबाह के कुथियाना घाट का निरीक्षण किया।
औचक निरीक्षण के दौरान कलेक्टर जांगिड अवैध रेत खनन गतिविधियों, रेत परिवहन व्यवस्था, सुरक्षा मानकों तथा शासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं शर्तों के पालन की जानकारी घाट पर तैनात वनटीम व पुलिस बल से ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि खनन कार्य पूरी पारदर्शिता एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित किए जाएं तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
एसपी धर्मराज मीणा ने पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि रेत घाटों एवं परिवहन मार्गों पर नियमित निगरानी रखी जाए तथा अवैध परिवहन, ओवरलोडिंग एवं नियमों के उल्लंघन के मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन एवं पुलिस का संयुक्त अमला लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहकर कानून व्यवस्था एवं खनिज नियमों के पालन को सुनिश्चित करेगा।

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जीवाजी विश्वविद्यालय कार्य परिषद की 4 घंटे चली बैठक में कई अहम निर्णय, गेस्ट फैकल्टी मानदेय वृद्धि पर बनेगी समिति

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय में कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य की अध्यक्षता में कार्य परिषद (EC) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। करीब चार घंटे तक चली इस बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं अधोसंरचना विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में कुलसचिव राजीव मिश्रा सहित कार्य परिषद के सदस्य उपस्थित रहे। विभिन्न प्रस्तावों पर विचार-विमर्श के बाद कई अहम निर्णयों को मंजूरी प्रदान की गई।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी का मानदेय बढ़ाने का रहा। इस संबंध में सदस्यों ने वर्तमान मानदेय को अपर्याप्त बताते हुए वृद्धि की आवश्यकता पर जोर दिया। विस्तृत अध्ययन एवं सुझाव प्रस्तुत करने के लिए दो दिनों के भीतर एक समिति गठित करने का निर्णय लिया। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर आगामी बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत संचालित कुछ महाविद्यालयों के स्थानांतरण से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। सदस्यों ने संबंधित कॉलेजों की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। इस विषय पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद आगे की कार्रवाई किए जाने का निर्णय लिया गया।
विश्वविद्यालय परिसर में स्थित गेस्ट हाउस के नवीनीकरण (रिनोवेशन) को भी कार्य परिषद की स्वीकृति मिल गई। लंबे समय से गेस्ट हाउस के आधुनिकीकरण और सुविधाओं के विस्तार की मांग की जा रही थी। स्वीकृति मिलने के बाद भवन में आवश्यक मरम्मत, सौंदर्यीकरण और आधुनिक सुविधाएं विकसित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
बैठक में विश्वविद्यालय के प्रमुख सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों के केंद्र गालव सभागार की स्थिति पर भी चर्चा हुई। परिषद ने सभागार में एयर कंडीशनिंग सिस्टम, प्रकाश व्यवस्था तथा कुर्सियों की मरम्मत एवं रखरखाव कार्यों को मंजूरी प्रदान की। अधिकारियों का मानना है कि इन कार्यों के पूरा होने के बाद सभागार में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
ईसी सदस्य के प्रस्ताव विरोध में कुलगुरू
28 अप्रैल को कार्य-परिषद की बैठक में बिंदु क्रमांक 20 पर किये जा रहे संशोधन पर ईसी सदस्य प्रदीप शर्मा ने आपत्ति दर्ज कराई है। जबकि बिंदु क्रमांक 20 में संशोधन के प्रस्ताव लाया गया था। इसमें बाहरी व्यक्ति का नाम बतौर एक्सपर्ट जोड़ने का मामला था। इसमें अधिनियम 1973 की कंडिका 1 (5) सरासर उल्लंघन बताया गया है। यह प्रस्ताव कार्य परिषद के सदस्य प्रदीप शर्मा द्वारा लाया गया था।
भवन समिति का गठन
अध्यक्ष ’कुलगुरू, सदस्य -कलेक्टर, नगर निगम के अधीक्षण यंत्री, पीडब्ल्यूडी से अधीक्षण यंत्री, पीडब्ल्यूडी के कार्यपालनयंत्री, सदस्य -कुलसचिव, कार्य परिषद् द्वारा नामित किये 2 ईसी सदस्य, सदस्य- विश्वविद्यालय यंत्री और पदेन सचिव आदि को शामिल किया गया है।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में बीएससी कॉलेज से संबंधित छात्रों को राहत दी गई। परिषद ने निर्णय लिया कि जिन विद्यार्थियों ने फीस अथवा अन्य भुगतान बैंकिंग माध्यम से किए हैं, उन्हें बैंक स्टेटमेंट के आधार पर भुगतान का प्रमाण मानते हुए आवश्यक मान्यता प्रदान की जाएगी। इससे उन छात्रों को राहत मिलेगी जिनके पास भुगतान की अन्य रसीदें उपलब्ध नहीं हैं।
बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के विकास कार्यों, वित्तीय मामलों, शैक्षणिक गतिविधियों और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर भी चर्चा की गई। सदस्यों ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव प्रस्तुत किए।
कार्य परिषद की बैठक में ईसी सदस्य प्रदीप शर्मा, मनु, रितु नामधारी, प्रमोद सक्सेना, प्रो. महापात्रा, गणेश दुबे, प्रो. बापट सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में लिए गए निर्णयों को विश्वविद्यालय के विकास और छात्रों के हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी जीरो हुई, 22% से 30% मिलाने पर टैक्स नहीं लगेगा

नई दिल्ली. केंद्र सरकार 22 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिले पेट्रोल पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगी। ई20, यानी 20 प्रतिशत एथनॉल मिले पेट्रोल पर कोई राहत नहीं दी गई है। केंद्र सरकार ने देश में क्रूड ऑयल, यानी कच्चे तेल के एम्पोर्ट को कम करने और क्लीन एनर्जी को बढावा देने के लिए यह कदम उठाया है।
पेट्रोल में 22 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिला होगा
भारत सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर पेट्रोल में हाई लेवल एथेनॉल ब्लेंडिंग को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त कर दिया है। इसके तहत जिस पेट्रोल में 22 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिला होगा उस पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। इस टैक्स छूट के दायरे में पेट्रोल के चार नए वेरिएंट्स- ई22, ई25, ई27 और ई30 शामिल होंगे। यह पहली बार है जब सरकार ने ई20 से ऊपर के ब्लेंड्स के लिए इतने बडे फाइनेंशियल सपोर्ट, यानी फिस्कल इंसेंटिव देने की घोषणा की है।
क्या होता है एथेनॉल
एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जो स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाडियों में इको-फ्रैंडली फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है लेकिन स्टार्च कॉन्टेनिंग मटेरियल्स जैसे मक्का, सडे आलू कसावा और सडी सब्जियों से भी एथेनॉल तैयार किय जा सकता है।

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भैंस खरीदने के लिये दोस्त के घर गई 55 लाख रूपये की चोरी, लड़की वालों पर शक, 17 दिन बाद खुला चोरी का राज

मुरैना. नंदपुरा गांव में एक सेवानिवृत्त फौजी के घर से 55 लाख रूपये की चोरी का मामला सामने आया था। मामले का सबसे चौकाने वाला पहलू यह है कि चोरी का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि फौजी का जिगरी दोस्त निकाला है। उसने सिर्फ एक लाख रूपये की भैंस खरीदने के लालच में एक शातिर इमानी गैंग से दोस्त के घर की मुखबिरी कर दी। देवगंढ़ थाना पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता (दोस्त) समेत गैंग के 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से चोरी का पूरा सामान भी बरामद कर लिया गया है।

मुरैना पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे 55 लाख का सामान भी बरामद कर लिया है। - Dainik Bhaskar
क्या है मामला
सेवानिवृत्त फौजी विष्णु सिकरबार के बेटे (जो स्वयं सेना में हैं) के लिये 22 मई को भिंड से लड़की वाले रिश्ता लेकर आये थे। सुबह 11 -5 बजे तक घर में मेहमान नवाजी और चर्चा का दौर चला। मेहमानों के जाने के लगभग 1 घंटे के बाद जब फौजी विष्णु सिकरवार भीतर गये तो उन्हें अपनी लायसेंसी बन्दूक गायब मिली। जब पूरे घर की तलाशी ली गयी तो उनके होश उड़ गये। घर में मायके आयी उनकी 2 विवाहित बेटियों के गहने, बक्से और लगभग 1.50 लाख नगद गायब थे। छत पर जाने पर पीछे के खेत में टूटे हुए सूटकेस पड़े मिले। दिनदहाड़े हुई इस चोरी से गांव में यह अफवाह फैल गयी। लड़की वालों ने परिवार को सम्मोहित कर चोरी की है।
पुलिस जांच में खुला राज, दिन में नहीं, रात में हुई थी चोरी
मामले की जांच कर रहे एसपी धर्मराज मीणा को मुखबिर से सूचना मिली कि इस वारदात के पीछे 32 हजार रुपए के इनामी बदमाश रामस्वरूप उर्फ स्वरूपा गुर्जर का हाथ हो सकता है। पुलिस ने जब स्वरूपा को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पूरी कहानी ही बदल गई। पता चला कि चोरी 22 मई को दिन में नहीं, बल्कि 21 मई की रात को ही हो चुकी थी। परिवार के लोग रात में कूलर चलाकर सो रहे थे, तभी चोर खेतों के रास्ते छत से होते हुए घर में घुसे और माल समेटकर फरार हो गए। दिन में तो सिर्फ उसका पता चला था, जिसके कारण लड़की वालों पर गलत शक गया।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि इस पूरी कहानी का असली सूत्रधार फौजी का दोस्त रामप्रकाश उर्फ रम्पा सिकरवार था। कुछ दिन पहले इनामी बदमाश स्वरूपा के बेटे के जन्मदिन की पार्टी थी। वहां रम्पा ने कहा कि उसे भैंस खरीदने के लिए 1 लाख रुपए की जरूरत है।
शातिर चोर स्वरूपा ने रम्पा के सामने प्रस्ताव रखा कि अगर वह किसी बड़े घर की सटीक जानकारी (टिप) देगा तो उसे 1 लाख रुपए मिलेंगे। लालच में आकर रम्पा ने अपने ही फौजी दोस्त के घर का पूरा राज खोल दिया कि उसकी दोनों बेटियां गहनों के साथ मायके आई हुई हैं।

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RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पत्नी की सर्जरी और बच्चों की देखभाल का आधार पर मांगी जमानत, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

जबलपुर. आरटीओ में तैनात रहे करोड़पति पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की जमानत अर्जी पर बुधवार को सुनवाई की गयी थी। अस्थाई जमानत (टेम्प्रेररी बेल) आवेदन पर सुनबाई के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरखित रख लिया है। ऐसा माना जा रहा है कि इस पर एक-दो दिन में फैसला आ सकता है। सौरभ शर्मा ने पत्नी की सर्जरी और बच्चों की देखभाल का हवाला देते हुए जमानत अर्जी दायर की है। आपको बता दें कि सौरभ शर्मा प्रदेश के बहुचर्चित आरटीओ भ्रष्टाचार और मनी लॉड्रिंग मामले के मुख्य आरोपी है।
गर्मियों की छुट्टियों के बीच जस्टिल विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले कि जिला अदालत और हाईकोर्ट दोनों ही सौरभ शर्मा की नियमित जमानत यचिकाये खारिज कर चुके हैं। इस बार सौरभ शर्मा ने पत्नी दिव्या तिवारी की सर्जरी और 2 बच्चों की देखभाल का आधार बनाकर 60 दिन की अस्थाई जमानत की मांग की है। इससे पहले जबलपुर हाईकोर्ट में 108 करोड़ रूपये की संपत्ति, 51 किलो सोना और मनी लॉड्रिंग से जुड़े तथ्यों का हवाला देते हुए उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। अब हाईकोर्ट में दायर 60 दिन की अस्थाई जमानत याचिका पर फैसला आना बाकी है।
बच्चों की देखभाल और पत्नी की सर्जरी का आधार बनाकर मांगी जमानत
सौरभ शर्मा ने अपनी जमानत याचिका में कहा गया है कि उसकी पत्नी दिव्या तिवारी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है। याचिका के अनुसार,उसे डिविएटे डनेजल सेप्टम क्रॉनिक साइनसिस्टम और नॉक संबंधी जटिल समस्या है। जिसके चलते डॉक्टर ने फंक्शनल एंडोस्कोपी साइनस सर्जरी की सलाह दी है। याचिका में यह भी कहा गया है कि ऑपरेशन के बाद भी देखभाल के लिये पति की मौजूदगी आवश्यक है। जमानत याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि उसके 2 नाबालिग बच्चे अमीर और सुबीर तरह से अपने माता-पिता पर ही निर्वाह है। पत्नी के अस्पताल में भर्ती रहने और सर्जरी के बाद रिकवरी के दौरान बच्चों की देखभाल करने वाला कोई अन्य जिम्मेदार सदस्य नहीं है। इस मानवीय आधार पर उसे 60 दिन की अस्थाई जमानत दी जाये।
ईडी ने परिवार और करीबी लोगों के नाम पर संपत्तियां होने का किया दावा
ईडी के मुताबिक, चेतन सिंह गौर, शरद जायसवाल और रोहित तिवारी जैसी हस्तियां उसकी कंपनियों से जुड़ी है। पत्नी दिव्या तिवारी, मां उमा शर्मा, सास रेखा तिवारी और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर जमीन, कंपनियां, स्कूल, प्रोजेक्ट, पेट्रोल पंप और अन्य संपत्तियां होने का दावा जांच एजेंटीयों ने किया है, ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब कथित तौर पर पूरा आर्थिक साम्राज्य इतने लोगों के सहारे संचालित हो रहा था, तो पत्नी के इलाज और बच्चों की देखभाल के लिए सौरभ शर्मा को आखिर क्यों जमानत अर्जी दायर करनी पड़ रही है।

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