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अचानक दिल्ली पहुंचे नरोत्तम मिश्रा, प्रत्याशी के लिए हलचल तेज

दतिया. दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव को लेकर हलचलें तेज होती जा रही हैं। दोनों प्रमुख दलों में अभी उम्मीदवार को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बीजेपी और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों का चयन नहीं किया है। कांग्रेस में पूर्व विधायक राजेंद्र भारती अपने बेटे के लिए कवायद कर रहे हैं। उनकी पत्नी के नाम की भी चर्चा है। कांग्रेस में विधानसभा टिकट के 2 अन्य बड़े दावेदार भी हैं। इधर बीजेपी से नरोत्तम मिश्रा सक्रिय हैं। हालांकि अभी पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इसी गहमागहमी में नरोत्तम मिश्रा शनिवार को अचानक दिल्ली पहुंच गए जिससे सियासी गलियारों में अटकलें तेज हो गईं। बाद में मालूम चला कि मिश्रा, पंडित धीरेंद्र शास्त्री से आशीर्वाद लेने दिल्ली गए थे।
पार्टी कार्यालय में बैठक बुधवार को
नरोत्तम मिश्रा ने दतिया विधानसभा सीट रिक्त होते ही क्षेत्र में दौरे पहले से बढ़ा दिए थे। अब बुधवार को पार्टी कार्यालय में प्रस्तावित बैठक में पार्टी स्तर पर जीत की रणनीति तैयार की जाएगी। बता दें, भाजपा में दतिया सीट को लेकर सक्रियता 5 जुलाई के बाद तेज हो सकती है। अपने निजी कार्यक्रम से लौटने के बाद प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में सत्ता-संगठन की अहम बैठक भी प्रस्तावित है। सूत्रों का कहना है कि इसमें प्रत्याशी के चयन की औपचारिकता भी पूरी होगी और वरिष्ठ नेताओं को दतिया में मैदान पर उतारा जाएगा।
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनाव की निगरानी के लिए आयोग ने तीन प्रेक्षकों की नियुक्ति कर दी। इसमें जनरल प्रेक्षक पश्चिम बंगाल कैडर आइएएस अफसर शरद द्विवेदी और पुलिस प्रेक्षक कर्नाटक के आइपीएस अफसर डॉ. एमबी बोरलिंगैया को बनाया है। चुनावी खर्च की निगरानी के लिए आइएएस विशाल मालानी को प्रेक्षक बनाया है।

 

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MP में अब भोपाल से नहीं मेडिकल कॉलेज के डीन तय करेंगे डॉक्टरों की पोस्टिंग

भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार ने जिला रेजिडेंट प्रोग्राम (डीआरपी) नीति में तीन साल बाद बड़ा बदलाव किया है। अब जिला अस्पतालों में तीन माह की सेवा देने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टिंग राज्य स्तर से नहीं होगी। इसके बजाय संबंधित मेडिकल कॉलेज के डीन की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय डीआरपी प्लेसमेंट एलोकेशन कमेटी पोस्टिंग का निर्णय करेगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय जरूरतों के अनुसार डॉक्टरों की तैनाती करना और जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। हालांकि, नई नीति में आवास भत्ता समाप्त किए जाने से रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच असंतोष भी देखा जा रहा है।
डीन की अध्यक्षता वाली समिति करेगी पोस्टिंग
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में गठित पांच सदस्यीय समिति रेजिडेंट डॉक्टरों के जिला आवंटन का फैसला करेगी। पहले यह प्रक्रिया राज्य स्तर पर होती थी। अब जिस मेडिकल कॉलेज में जिस क्षेत्र के मरीज अधिक आते हैं, उसी क्षेत्र के जिला अस्पतालों में वहां के रेजिडेंट डॉक्टरों को भेजा जाएगा।
क्षेत्र के अनुसार होगा जिला आवंटन
नई नीति के अनुसार गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल के रेजिडेंट डॉक्टरों की तैनाती भोपाल, विदिशा, रायसेन और सीहोर जैसे जिलों में होगी। वहीं एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर के डॉक्टरों को इंदौर, धार, झाबुआ और आसपास के जिलों में सेवाएं देनी होंगी। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
आवास भत्ता खत्म, खुद करनी होगी व्यवस्था
नीति में सबसे बड़ा बदलाव आवास भत्ते को समाप्त करना है। अब रेजिडेंट डॉक्टरों को अपने रहने की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। जिला प्रशासन केवल सुरक्षित आवासों की सूची उपलब्ध कराएगा। वहीं महिला और दिव्यांग रेजिडेंट डॉक्टरों को सुविधा के अनुसार नजदीकी जिलों में पदस्थापना देने का प्रयास किया जाएगा। जिला अस्पतालों में मेंटर और रेजिडेंट डॉक्टरों का अनुपात 1:3 रखा गया है।
रेजिडेंट डॉक्टरों ने रखीं मांगें
रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि पहले की तरह आवास भत्ता जारी रखा जाना चाहिए। साथ ही अधिक मेडिकल कॉलेजों वाले क्षेत्रों से बाहर भी जिलों को डीआरपी में शामिल किया जाए। उन्होंने पूरे प्रदेश में डिवीजन से बाहर म्युचुअल ट्रांसफर की सुविधा लागू करने की भी मांग की है।

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सरकारी कोषालय से असली गोल्ड ज्वेलरी गायब, हाइ्रकोर्ट ने लगाई फटकार

मुरैना. जौरा उप-कोषालय और कलेक्टर ऑफिस में सरकारी अभिरक्षा में रखे गये सोने के आभूषण गायब होने के मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन के अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। हाईाकोर्ट के समक्ष यह तथ्य आया कि सरकार सुरक्षा में रखे गये असली सोने के गहने गायब हो गये। जबकि उनकी जगह नकली गहने रख दिये गये। इस पूरे मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी वर्षो तक हाईकोर्ट से छिपाई जाती रहीं।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डबल बेंच ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारी या तो अत्याधिक लापरवाह रहें या फिर इस पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगों के साथ उनकी मिली भगत रहीं। हाईकोर्ट ने अधिकारियों के आचरण को गंभीर और चिंताजनक बताया।
सरकार सीआईडी जांच वापिस लेने की मांग
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने आवेदन पेश कर पहले दिये गये सीआईडी जांच के आदेश को वापिस लेने का अनुरोध किया है। सरकार की तरफ से कहा गया है कि इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज हो चुकी थी। वर्ष 2019 में निचली अदालत आरोपियों को बरी कर चुकी है। सरकारी पक्ष की दलील हाईकोर्ट ने सख्त रूख अपनाते हुए पूछा कि यदि एफआईआर दर्ज थीं ट्रायल चल रहा था। यह जानकारी पहले कभी न्यायालय के समक्ष क्यों नहीं रखी गयी। इस पर सरकारी पक्ष ने स्वीकार किया कि यह तथ्य न तो लिखित रूप में और न ही मौखिक रूप से अदालत का बताया गया था।
सरकार से मांगा वरिष्ठ अधिकारी का शपथपत्र
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कई अहम सवाल पूछे हैं। अदालत ने जानना चाहा कि जौरा उप-कोषालय अधिकारी और तत्कालीन मुरैना कलेक्टर ने एफआईआर और लंबित ट्रायल की जानकारी न्यायालय से क्यों छिपाई। साथ ही यह भी पूछा कि रिट अपील दायर करते समय इस महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख क्यों नहीं किया गया और आरोपियों के बरी होने के बाद भी अदालत को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि मुरैना कलेक्टर से वरिष्ठ अधिकारी—संभागायुक्त या शासन के सचिव स्तर के अधिकारी—व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर पूरे घटनाक्रम का जवाब दें। अदालत ने स्पष्ट किया कि इतने गंभीर मामले में केवल अधीनस्थ अधिकारियों का स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं होगा। रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि वर्ष 2017 से 2019 के बीच यह मामला कई बार हाईकोर्ट में सूचीबद्ध हुआ, लेकिन हर सुनवाई में संबंधित अधिकारियों ने लंबित आपराधिक प्रकरण की जानकारी अदालत से छिपाए रखी। यहां तक कि आरोपियों के बरी होने के बाद भी इस तथ्य की जानकारी न्यायालय को नहीं दी गई।
20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की है। तब तक राज्य सरकार को सभी बिंदुओं पर विस्तृत जवाब और संबंधित रिकॉर्ड न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।

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कश्मीर में 2 लश्कर आतंकी मारे जाने की खबर, 3 घंटे चला एनकाउंटर

जम्मू कश्मीर. कश्मीर के शोपियां के सैदपोरा इलाके में शनिवार शाम स ेचल रही मुठभेड में लश्कर के म आतंकियों के मारे जाने की खबर है। सुरक्षाबलों ने इसकी पुष्टि नहीं की है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार मारे गए दोनों आतंकी लश्कर ए तैयबा के टॉप ऑपरेटिव थे। एक आतंकी जाकिर अहमद गनी उन 14 आतंकियों की लिस्ट में शामिल था जिसे पहलगाम हमले के बाद खुफिया एजेंसियों ने जारी किया था। दूसरा आतंकी जाकिर का साथी लतीफ भट है। सुरक्षाबलों को शोपियां के सैदपोरा पायीन के पास छानपोरा इलाके में आतंकियों के छिपे होने की खबर मिली थी। घेराबंदी के दौरान जब जवान आतंकियों के ठिकाने के करीब पहुंचे तो उन्होंने फायरिंग कर दी। मुठभेड 4 जुलाई की शाम 7.45 बजे शुरू हुई थी। अंधेरे के कारण एनकाउंटर और सर्च ऑपरेशन रात में रोक दिया गया, अभी तक आतंकियों के शव भी बरामद नहीं हुए है।

जिन आतंकियों के मारे जाने की खबर है, उनका एक CCTV फुटेज भी सामने आया है। - Dainik Bhaskar
आतंकी दिखे तो 4 गांव खाली कराए
यह ऑपरेशन शुक्रवार दोपहर को शुरू किया गया था जब 7 गांव वाले मीमंदर इलाके के एक बाग में लगे सेना के कैमरे में ये दो आतंकी दिखाई दिए। सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की कई टुकडियों की टीम ने इलाके की घेराबंदी की और शाम तक 4 गांव खाली करा लिए। सेना की खास एंटी टेरेरिज्म यूनिट, विक्टर फोर्स ने बाग के घने पेडों के बीच से भागने के सभी संभावित रास्तों को बंद करने के लिए अतिरिक्त जवान तैनात किए और इलाके में रोशनी का इंतजाम भी किया। जब सेना के जवान उनकी ओर बढे तो उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी जिसके जवाब में सेना ने भी प्रभावी ढंग से जवाबी कार्रवाई की और मुठभेड शुरू हो गई।

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हमारे शिक्षक एप ई-अटेंडेंस करने में उलझे 8 हजार लिपिक, एप ने अवकाश के दिन किया गैर हाजिर

भोपाल. स्कूल शिक्षा विभाग ने 1 जुलाई 2026 से लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों की उपस्थिति भी ‘हमारे शिक्षक’ एप से दर्ज करने के निर्देश दिये है। लेकिन इससे नयी विसंगति सामने आयी है। मध्यप्रदेश के 8 हजार लिपिकों का कार्य सप्ताह सोमवार-शुक्रवार है। जबकि एप् में 6 दिन उपस्थिति अनिवार्य शो कर रहा है। नतीजतन शनिवार को अवकाश होने पर भी कई कर्मचारियों की अनुपस्थिति दर्ज हो गयी है। कर्मचारियों ने संकुल प्राचार्यो व जिला शिक्षा अधिकारियों से मिलकर शिकायत दर्ज कराई है।
5 दिन की ड्यूटी, एप मांग रहा 6 दिन
लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश के बाद लिपिक संवर्ग की उपस्थिति ‘हमारे शिक्षक’ एप से दर्ज की जा रही है, लेकिन इसमें तकनीकी विसंगति सामने आई है। विभागीय कार्यालयों में पदस्थ लिपिकों के लिए शनिवार अवकाश दिख रहा है, जबकि हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों के संकुल केंद्रों में कार्यरत लिपिकों के लिए शनिवार कार्यदिवस प्रदर्शित हो रहा है।
इससे अवकाश के दिन भी अनुपस्थित दर्ज होने की स्थिति बन रही है। लिपिक संवर्ग का कहना है कि सामान्य प्रशासन विभाग के 20 दिसंबर 2022 के आदेश के अनुसार शासकीय कार्यालयों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है। वहीं, शिक्षकों और लिपिकों की सेवा शर्तें व अवकाश नियम अलग-अलग हैं। ऐसे में शिक्षकों के लिए विकसित मॉड्यूल से उपस्थिति दर्ज होने पर रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका है। कर्मचारियों ने एप में अलग व्यवस्था की मांग की है। विभाग का कहना है कि यह तकनीकी खामी है और इसे जल्द ठीक किया जाएगा।

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MP में 900 कर्मचारियों का रोका वेतन, एक भी दिन नहीं लगाई फेस अटेंडेंस

भोपाल. फेस अटेंडेंस में लगातार कम उपस्थिति दर्ज कराने वाले कर्मचारियों पर नगर निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। निगम प्रशासन ने 900 कर्मचारियों की अटेंडेंस आईडी ब्लॉक की है। इन कर्मचारियों ने पूरे महीने में पांच दिन या उससे कम दिन ही फेस अटेंडेंस के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें भी करीब 800 कर्मचारी ऐसे है जिन्होंने एक भी दिन फेस अटेंडेंस नहीं लगाई थी। इनमें इंजीनियर, एआरआई, एलडीसी, विनियमित कर्मचारी और 29 दिवसीय दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शामिल है।
आईडी ब्लॉक होने से रूका वेतन
आईडी ब्लॉक होने से ये कर्मचारी फिलहाल हाजिरी दर्ज नहीं कर पा रहे है और इस महीने का वेतन भी रोक दिया गया है। निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संबंधित कर्मचारियों को पहले अपने विभागाध्यक्ष के माध्यम से निगम आयुक्त संस्कृति जैन के समक्ष उपस्थित होकर अपनी कार्यस्थली और जिम्मेदारियों की जानकारी देनी होगी। संतोषजनक जवाब मिलने के बाद ही उनकी अटेंडेंस आईडी दोबारा चालू की जाएगी और वेतन जारी होगा।
कार्रवाई की जद में इंजीनियर, एआरआई व जेडओ भी
कार्रवाई की जद में केवल दैनिक वेतनभोगी ही नहीं बल्कि विभिन्न विभागों में पदस्थ इंजीनियर, राजस्व विभाग के एआरआई, वार्ड प्रभारी और जोनल अधिकारी भी आए है। निगम प्रशासन का कहना है कि सभी संबंधित कर्मचारियों से यह स्पष्ट कराया जाएगा कि वे वर्तमान में किस स्थान पर और किस कार्य के लिए तैनात हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि बडी संख्या में निगम कर्मचारी मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधियों और अन्य कार्यालयों में संबद्ध होकर कार्य कर रहे है। ऐसे कर्मचारियों की वास्तविक तैनाती का भी सत्यापन किया जा रहा है।

 

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रेत उत्खनन और परिवहन पर 3 माह तक प्रतिबंध, खदानों मार्ग पर खोदे गये गड्ढे

ग्वालियर. वर्षा ऋतु को देखते हुए 1 जुलाई-30 सितम्बर तक रेत के उत्खनन और परिवहन पर पूरी तरह रोक लगा दी गयी है। कलेक्टर रूचिका चौहान के इस आदेश के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने रेत खदानों को जाने वाले रास्तों पर जेसीबी से गड्ढे खुदवाकर उन्हें बंद करना शुरू कर दिया है।
भितरवार के रास्ते में खुदवाये गड्ढे
प्रतिबंध का पालन कराने के लिये भितरबार इलाके में एसडीएम राजीव समाधिया और नायब तहसीलदार हरनाम सिंह लोहारी ने बसई इलाके की रेत खदानों का औचक निरीक्षण किया। अधिकारियों ने घटनास्थल पर जेसीबी मशीन बुलवाकर मुख्य रास्तों पर बड़े-बड़े गड्ढे खुदवा दिये ताकि मानसून के दौरान रेत का अवैध परिवहन न हो सके। अधिकारियों ने ग्रामीणों से भी अपील की है कि नदी किनारे उत्खनन दिखने पर तुरंत प्रशासन को सूचित करें।
डबरा की तीन मुख्य रेत खदानों पर भी चला चेकिंग अभियान
इसी तरह डबरा क्षेत्र में भी तहसीलदार दिव्य दर्शन शर्मा ने चांदपुर, बैलगाडा और रायपुर रेत खदानों का रुख किया। उन्होंने इन सभी खदानों से जुड़े परिवहन मार्गों को जेसीबी की मदद से खुदवाकर पूरी तरह ब्लॉक कर दिया।

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MP में लागू होगा यूसीसी, विधानसभा के मानसून सत्र में आएगा विधेयक

भोपाल. मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता विधेयक 20 जुलाई से प्रारंभ हो रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनी समिति इसके प्रारूप को अंतिम रूप् दे रही है जिसे इसी सप्ताह मुख्यमंत्री मोहन यादव को सौंपा जाएगा। उधर सामान्य प्रशासन विभाग ने समिति का कार्यकाल 1 माह यानी 26 जुलाई तक बढा दिया है ताकि विधेयक प्रस्तुत होने के बाद जो तकनीकी कार्रवाई और की जानी हैं उन्हें पूरा किया जा सके।
सैद्धांतिक तौर पर सहमति भी बन चुकी
यूसीसी को लेकर समिति विभिन्न केंद्रीय कानून का अध्ययन कर चुकी है। जन परामर्श में प्राप्त सुझाव को शामिल करते हुए अनुशंास भी तैयार कर ली गई है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव अनुराग जैन को विधेयक का प्रारूप दिखाया जा चुका है। जिस पर सैद्धांतिक तौर पर सहमति भी बन चुकी है। कुछ विषयों को लेकर समिति और विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह समिति अपनी रिपोर्ट जो दो भाग में होगी सरकार को सौंप देगी।
कैबिनेट के समक्ष जल्द प्रस्तुत होंगे प्रस्ताव
उधर विधेयक प्रस्तुत करने को लेकर सामान्य प्रशसन विभाग तैयारी कर रहा है। मुख्य सचिव ने सभी विभागों से कहा है कि विधानसभा में प्रस्तुत किए जाने वाले विधेयकों के प्रस्ताव कैबिनेट के समझ प्रस्तुत किए जाएं ताकि प्रक्रिया कर विधानसभा सचिवालय समय से प्रेषित कर दिए जाएं।

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PM नरेन्द्र मोदी को ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले जान से मारने की धमकी, जांच में जु टी मेलबर्न पुलिस

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 9 जुलाई के प्रस्तावित ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर है। मेलबर्न में आयोजित होने वाले मेलबन्र मीट्स मोदी’ कार्यक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर मिली जान से मारने की धमकी के बाद ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस (एएफपी) न जांच शुरू कर दी है।
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार धमकी फेसबुक पर उस पोस्अ के नीचे दी गयी थी। जिसमें मेलबर्न के मार्बल स्टेडियम में आयोजित होने वाले कम्युनिटी प्रोग्राम का प्रचार किया जा रहा था। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे का प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है। ‘‘अबू मुस्तफा’’ नाम के एक फेसबुक अकाउंट से टिप्पणी की गयी। जिसमें लिखा था। बेहतर होगा कि कार्यक्रम के दौरान स्टेडियम की छत बंद रहे। वरना वह ऑस्ट्रेलिया अपनी मौत के लिये आ रहे है। इस पोस्ट के सामने आने के तत्काल बाद मामल को ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस के पास भेज दिया गया है।
आईपी एड्रेस की हुई पहचान
ऐसा बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियों ने इस सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े आईपी एड्रेस की पहचान कर ली है। अब यह पता लगाया जा रहा है। यह टिप्पणी किसने की और इसके पीछे क्या मंशा थी। अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या इस मामले में किसी आपराधिक कानून का उल्लंघन हुआ है।
पीएम मोदी की कई एजेंसियों के पास होगी सुरक्षा की जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी कई एजेंसियों के पास होगी। इसमें ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस, राज्य पुलिस और विशेष सुरक्षा इकाइयां शामिल रहेंगी। सभी कार्यक्रमों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जा रही है। पीएम मोदी अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान द्विपक्षीय वार्ताओं में हिस्सा लेने के साथ-साथ भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे। ऐसे में मेलबर्न का यह कार्यक्रम काफी अहम माना जा रहा है। ऑनलाइन धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर सतर्क है। पूरे मामले की गहन जांच जारी है।

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सरकार का दावा- E-20 पेट्रोल से गाड़ियों को नुकसान नहीं, अभी एक्सपेरिमेंट, रिजल्ट अगले साल पता चलेगा

नई दिल्ली. पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को ेकर हो रहे विरोध के बीच शनिवार को सरकार ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग का काम रातों-रात नहीं हुआ। यह एक जांची-परखी, साइंटिफिक और स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस और इससे गाडियों को कोई नुकसान नहीं है। इसे पेट्रोल में मिलाने की ग्लोबल प्रैक्टिस अपनाई है और टॉप एजेंसियां भी इसकी टेस्ट कर चुकीं है। एथेनॉल ब्लेंडिंग पर दिलली में हुई इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट वर्तिका शुक्ला ने यह बात कही। वर्तिका शुक्लाने बताया कि देश में साल 2013 और 2014 के दौरान पेट्रोल में सिर्फ 1.5 प्रतशित एथेनॉल मिलाया जा रहा था।
20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का प्रोग्राम अभी भी एक्सपेरिमेंट
अब इस प्रोग्राम के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग की जा रही है। 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग के टारगेट को तय समय से 5 साल पहले यानी दिसंबर 2025 तक ही पूरा कर लिया गया है। हालांकि सरकार ने 4 दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का प्रोग्राम अभी भी एक्सपेरिमेंट है। इसका पूरा असर अगले साल तक पता चलेगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व सीएमडी वर्तिका शुक्ला के अलावा बजाज ऑटो के सर्कल हेड मनप्रीत सिंह, टीवीएस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत कृष्णन मौजूर रहे। उनके साथ टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी, मारूति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती, हुंडई इंडिया के पुनीत आनंद और हीरो मोटो के आशुतोष वर्मा भी शामिल हुए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बडे पैमाने पर हुई टेस्टिंग में गाडियों को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला है। सोशल मीडिया पर गाडी के परफॉर्मेंस को लेकर चल रहे दावों के बीच एक्सपर्ट्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की है।

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