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वायनाड में लैंडस्लाइड में 2 लोगों की मौत, टनल की मिट्टी टैंकर और गाडि़यां बहा ले गयी

वायनाड में भूस्खलन (Photo: ITG)वायनाड. केरलम के वायनाड में मंगलवार की सुबह तेज वर्षा के चलते लैंडस्लाइड हुआ है इस घटना में 2 लोगों की मौत हो गयी है। 8 लोग घायल हुए है। कई लोगों क मलबे में दबे होने की खबर है। घटना कल्लाडी स्थित मीनाक्षी ब्रिज के पास की है। यहां मलप्पपुरम-वायनाड टनल प्रोजेक्टर के कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है। टनल से मिट्टी निकाल कर बाहर जमा की गयी थी। वर्षा के चलते मिट्टी खिसक गयी। जिससे पेड भी उखड़ गये और बैरिकेड भी बह गये।

हादसे से जुड़ी 4 तस्वीरें…

स्थानीय लोगों ने मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
स्थानीय लोगों ने मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
हादसे वाली जगह पर कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था। यहां टनल का निर्माण हो रहा है।
हादसे वाली जगह पर कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था। यहां टनल का निर्माण हो रहा है।
पुलिस-एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची है। रेस्क्यू जारी है।
पुलिस-एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची है। रेस्क्यू जारी है।

घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। इसमें दिखाई दे रहा है कि 7 जुलाई की सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर टनल से तेज लहर के साथ आया मलबा एक टैंकर का तिनके की तरह बहाकर ले गया। 2 लोग इसके मलबे में फंसे। पुलिस की एनडीआरएफ की टीम रेस्क्यू कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मलबा हटाने के लिये भारी मशीनों की आवश्यक होगी। अधिकारियों के अनुसार, लगातार वर्षा की वजह से सोमवार से ही सुरंग कंस्ट्रक्शन का काम रोक दिया गया था। मलप्पुरम -वायनाड टनल प्रोजेक्ट के तहत मलप्पुरम को वायनाड से सुरंग (टनल) के माध्यम से जोड़ना है। टनल की लम्बाई लगभग 8.17 किमी है। इसकी लागत लगभग 2,100,2,200 करोड़ है। दो साल पहले भी वायनाड में एक के बाद एक 3 भूस्खलन हुए थे। जिसमें 400 से अधिक जानें चली गयी थी।
वायनाड में लैंडस्लाइड की क्या वजह है
वायनाड, केरल के नॉर्थ-ईस्ट में है। यह केरल का एकमात्र पठारी इलाका है। यानी मिट्टी, पत्थर और उसके ऊपर उगे पेड़-पौधों के ऊंचे-नीचे टीलों वाला इलाका। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल का 43% इलाका लैंडस्लाइड प्रभावित है। वायनाड की 51% जमीन पर पहाड़ी ढलाने हैं। यानी लैंडस्लाइड की संभावना बहुत ज्यादा बनी रहती है। वायनाड का पठार वेस्टर्न घाट में 700 से 2100 मीटर की ऊंचाई पर है। मानसून की अरब सागर वाली ब्रांच देश के वेस्टर्न घाट से टकराकर ऊपर उठती है, इसलिए इस इलाके में मानसून सीजन में बहुत ज्यादा बारिश होती है। वायनाड में काबिनी नदी है। इसकी सहायक नदी मनंतावडी ‘थोंडारमुडी’ चोटी से निकलती है। लैंडस्लाइड के कारण इसी नदी में बाढ़ आने से भारी नुकसान हुआ है।

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विधायक के पीए और मंत्रालय के बाबू लौटे स्कूलों की ओर, बच्चों को पढायेंगेग, 213 शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त

भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसूत्र सत्र से पहले स्कूलों से बाहर काम कर रहे 213 सरकारी शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त कर दिया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने 16 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को सभी शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से उनके मूल पदस्थापना स्थल यानी स्कूलों में वापिस भेजने के निर्देश दिये है।


यह कार्यवाही पिछले वर्ष 30 जुलाई को विधानसभा में सिरोंज से भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा के सवाल के आधार पर हुई जिला स्तरीय समीक्षा के बाद की गयी है। शिक्षा विभाग की लिस्ट के अनुसार कई शिक्षक विधायक ऑफिसों में निजी सहायक (पीए) के रूप में कलेक्टर कार्यालयों, जिला पंचायत, निर्वाचन कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जनपद पंचायत, एसडीएम कार्यालय और अन्य प्रशासनिक कार्यालयों में सालों से अटैच होकर काम कर रहे थे। अब सभी को मूल स्कूलों में कार्यभार ग्रहण करने के लिये तत्काल रिलीव करने के आदेश जारी किये गये है।
16 जिलों के 213 शिक्षक स्कूल के अलावा कार्यालय में तैनात
लोक शिक्षण संचालनालय की समीक्षा में उज्जैन, देवास, नीमच, शहडोल, दतिया, ग्वालियर, भिंड, श्योपुर, रीवा, कटनी, गुना, सिंगरौली, सतना, राजगढ़ और मंडला समेत 16 जिलों के 213 शिक्षकों के संलग्नीकरण का विवरण सामने आया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी को उनके मूल विद्यालयों में वापिस भेजा जाये। ताकि स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो।
विधायक से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक लगे थे शिक्षक
विधायक कार्यालयों में निजी सहायक (पीए) के रूप में कलेक्टर कार्यालय,  जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जिला पंचायत, जनपद पंचायत, एसडीएम कार्यालय, जिला निर्वाचन कार्यालय, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय, सीईओ जनपद कार्यालय, अन्य प्रशासनिक कार्यालय।
विधानसभा में सवाल के बाद हुई कार्रवाई
पिछले विधानसभा सत्र में स्कूलों से बाहर संलग्न शिक्षकों का मुद्दा तारांकित प्रश्न क्रमांक-1108 के माध्यम से उठाया गया था। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिलों से जानकारी मंगाई। मानसून सत्र शुरू होने से पहले संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को संलग्नीकरण समाप्त कर संबंधित शिक्षकों को मूल पदस्थापना वाले विद्यालयों में वापस भेजने के निर्देश दिए हैं।

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MP में 190 तहसीलदार और SLR बने डिप्टी कलेक्टर, पदोन्नति के किये जारी, DPC में लिया गया फैसला

भोपाल. मध्यप्रदेश शासन ने लम्बे समय से इंतजार कर पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करते हुए 190 तहसीलदार, अधीक्षक भू-अभिलेख (एसएलआर) और प्रभारी डिप्टी कलेक्टरों को राज्य प्रशासनिक सेवा में डिप्टी कलेक्टर पद पर प्रमोशन दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा मंगलवार को आदेश जारी करने के साथ ही यह अधिकारी अब राजस्व विभाग के बजाय सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारी माने जायेंगे।
जारी आदेश के मुताबिक संबंधित अधिकारियों को कार्यभार ग्रहण करने के दिनांक से राज्य प्रशासनिक सेवा के कनिष्ट श्रेणी वेतनमान में प्रमोशन किया गया है। उनकी पदस्थापना फिलहाल उसी जिले में रखी गयी है। जहां वह वर्तमान में कार्यरत है। आदेश में उन अफसरों का भी पदोन्नति का फायदा दिया गया है। जिन्होंने पूर्व में प्रभारी डिप्टी कलेक्टर अथवा एसएलआर के रूप में कार्य करना स्वीकार किया था। लेकिन कार्यवाहक उच्च पद का प्रभार नहीं लिया था।
DPC  बैठक के बाद जारी हुए आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव एम सेलवेंद्रन और राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार ने सोमवार को इंदौर स्थित लोक सेवा आयोग कार्यालय में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक में भाग लिया था। बैठक में पदोन्नति के लिये प्रस्तावित अधिकारियों के नामों पर अंतिम मुहर लगाई गयी। जिसके बाद मंगलवार को पदोन्नति आदेश जारी कर दिये गये। करीब 250 प्रभारी तहसीलदार, तहसीलदार, और एसएलआर के नामों पर विचार किया गया था। जिनमें से पहले चरण में 190 अधिकारियों का डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नत किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी पदोन्नतियां प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।
नायब तहसीलदारों की पदोन्नति सूची भी जल्द
राजस्व विभाग अब नायब तहसीलदारों की पदोन्नति प्रक्रिया भी पूरी करने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि करीब 200 प्रभारी तहसीलदार, जो वर्तमान में नायब तहसीलदार के पद से कार्य कर रहे हैं, उन्हें नियमित तहसीलदार के पद पर पदोन्नत किए जाने के आदेश एक-दो दिन में जारी किए जा सकते हैं।

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बिना मुखिया के चल रहा जल संसाधन विभाग, बांधों की निगरानी और बाढ़ प्रबंधन पर उठे सवाल

ग्वालियर -मानसून की सक्रियता के बीच ग्वालियर संभाग में जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। संभाग के प्रमुख बांधों की निगरानी करने वाला विभाग पिछले एक माह से कार्यपालन यंत्री (Executive Engineer) के बिना संचालित हो रहा है। ऐसे समय में जब बारिश का दौर तेज हो रहा है और किसी भी समय बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं, विभाग में नेतृत्व का अभाव प्रशासनिक चिंता का विषय बन गया है।
ग्वालियर संभाग के प्रमुख तिघरा, हरसी और केकटो (ककेटो) बांध की सुरक्षा, जलस्तर की निगरानी, नहरों के रखरखाव और बाढ़ नियंत्रण की जिम्मेदारी जिस कार्यपालन यंत्री पर होती है, वह पद करीब एक माह से रिक्त पड़ा है। इसके चलते विभाग की नियमित मॉनीटरिंग और रखरखाव प्रभावित हो रहा है।


संभागायुक्त ने ली थी बाढ़ तैयारियों की बैठक
हाल ही में संभागायुक्त मनोज खत्री ने बाढ़ और अतिवृष्टि से निपटने की तैयारियों को लेकर सभी संबंधित विभागों की बैठक ली थी। बैठक में जल संसाधन विभाग को बांधों के जलस्तर की सतत निगरानी, समय पर पानी छोड़ने की सूचना देने, निचले क्षेत्रों को अलर्ट करने तथा राहत एवं बचाव एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे हालांकि विभाग में वरिष्ठ अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


बांधों की निगरानी और नहरों का रखरखाव प्रभावित
सूत्रों के अनुसार ग्वालियर संभाग के कई बांधों की नहरों में जगह-जगह क्षति पहुंची है। समय पर मरम्मत और नियमित मेंटेनेंस नहीं होने से सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। कई स्थानों पर नहरों के किनारे कटाव और रिसाव की शिकायतें भी सामने आई हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी नहीं होने से निर्णय प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान बांधों की सुरक्षा केवल जलस्तर तक सीमित नहीं होती, बल्कि स्पिलवे, गेट, नहरों और तटबंधों की लगातार निगरानी भी उतनी ही आवश्यक होती है।
बाढ़ राहत कार्यों पर कौन करेगा समन्वय?
यदि लगातार बारिश के कारण तिघरा, हरसी अथवा अन्य बांधों से पानी छोड़ने की नौबत आती है, तो सबसे बड़ी चुनौती राहत एवं बचाव कार्यों के समन्वय की होगी। सामान्य स्थिति में कार्यपालन यंत्री जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर स्थिति की मॉनीटरिंग करता है।
वर्तमान में यह जिम्मेदारी किस अधिकारी के पास है, इसे लेकर विभागीय स्तर पर स्पष्टता नहीं है। ऐसे में आपातकालीन स्थिति में निर्णय लेने में देरी होने की आशंका बनी हुई है।
कई कार्यालयों में अधिकारियों की कमी
जल संसाधन विभाग के विभिन्न कार्यालयों में भी अधिकारियों के पद लंबे समय से रिक्त बताए जा रहे हैं। इसका सीधा असर तकनीकी निरीक्षण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, मरम्मत और परियोजनाओं की निगरानी पर पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि सीमित संसाधनों और अधिकारियों की कमी के कारण नियमित निरीक्षण प्रभावित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
जल प्रबंधन विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान प्रत्येक बड़े बांध की 24×7 मॉनीटरिंग, जलस्तर का वैज्ञानिक विश्लेषण, गेट संचालन की पूर्व योजना तथा निचले क्षेत्रों को समय पर चेतावनी देना अत्यंत आवश्यक है। यदि विभाग में नेतृत्व का अभाव बना रहता है तो आपात स्थिति में जोखिम बढ़ सकता है।
प्रमुख सवाल
एक माह से कार्यपालन यंत्री का पद खाली होने के बावजूद अब तक नियुक्ति क्यों नहीं हुई?
तिघरा, हरसी और केकटो बांधों की वर्तमान निगरानी कौन कर रहा है?
क्षतिग्रस्त नहरों के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी किस अधिकारी के पास है?
बाढ़ की स्थिति बनने पर राहत एवं बचाव कार्यों का समन्वय कौन करेगा?
मानसून के बीच रिक्त पदों को भरने के लिए विभाग ने क्या कदम उठाए हैं?
जल संसाधन विभाग में नेतृत्व की कमी ऐसे समय सामने आई है, जब मानसून अपने चरम की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में बांधों की सुरक्षा, नहरों का रखरखाव और संभावित बाढ़ प्रबंधन को लेकर प्रशासन को शीघ्र निर्णय लेने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में जन-धन की हानि से बचा जा सके।

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MP पदोन्नति में आरक्षण पर हाईकोर्ट ने कहा जल्द करेंगे अंतिम निराकरण

जबलपुर. मध्य प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण के बहुचर्चित विवाद पर मंगलवार को हुई सुनवाई ने एक बार फिर लाखों शासकीय कर्मचारियों की निगाहें हाईकोर्ट पर टिका दी हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि इस लंबे समय से लंबित मामले का जल्द अंतिम निराकरण किया जाएगा। साथ ही राज्य सरकार से उस मौखिक आश्वासन पर भी जवाब तलब किया गया, जिसमें नई प्रमोशन पालिसी लागू नहीं करने की बात कही गई थी।
मामले को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने महाधिवक्ता की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए मामले को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। वहीं, सपाक्स की ओर से जल्द अंतिम सुनवाई की मांग करते हुए कहा गया कि निर्णय आने तक राज्य सरकार को नई पदोन्नतियां करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। विधानसभा सचिवालय में हाल ही में जारी 15 पदोन्नति आदेशों पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई।
अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाएगा
युगलपीठ ने महाधिवक्ता से स्पष्ट करने को कहा कि नई प्रमोशन पालिसी लागू नहीं करने संबंधी मौखिक अंडरटेकिंग की वर्तमान स्थिति क्या है। कोर्ट ने संकेत दिए कि अब इस विवाद को अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाएगा। प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के सेवा हितों से जुड़े इस मामले में हाई कोर्ट का विस्तृत आदेश अभी आना शेष है। न्यायिक हलचल के बीच कर्मचारियों की नजर अब अगली सुनवाई और अदालत के विस्तृत आदेश पर टिक गई है।

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एलिवेटेड रोड डायवर्जन रोड पर अतिक्रमण की वजह से निकलना बना परेशानी का सबब, अतिक्रमण रोक रहे रास्ता

ग्वालियर. एलिवेटेड रोड के निर्माण कार्य चलते रूट डायवर्जन 15 दिन से वाहन चालकों के लिये परेशानी का सबब बना हुआ है। फूलबाग -गुरूद्वारे के बीच इस डायवर्जन का पहले से सही प्लानिंग के साथ लागू नहीं किया गया औरफिर डायवर्जनरूट पर अतिक्रमण भी नहीं हटाये गये। नौगजा रोड हो जल बिहार रोड या फिर बैजाताल रोड तीनों रोड पर सडक पर अतिक्रमणों की वजहों से वाहनों को निकलने में पर्याप्त जगहनहीं मिल पा रही है।
जिस वजह से इन तीनों ही रूट पर सुबह से रात तक यातायात जाम की समस्या का सामना आम लोगों का करना पड़ रहा है। अभी इस सिर्फ डायवर्जन को सिर्फ 15 दिन ही निकले हैं। लगभग 45 दिन बाकी है। यह डायवर्जन 19 जून से 19 अगस्त तक के लिये किया गया है। इस रूट पर प्रतिदिन 1 लाख से ज्यादा बड़े-छोटे वाहनों का यातायात का लोड रहता है। विशेषकर शाम के समय जाम की समस्या सबसे अधिक परेशानी बनती है। ज्यादा परेशानी स्कूल बसों का आती है।
छोटी सड़कों पर बढ़ा बेहिसाब यातायात
डायवर्जन प्लान में जल बिहार और बैजाताल रोड पर सबसे गलत प्लानिंग की गयी है। इन दोनों सड़कों पर फूलबाग की तरफ से नदी गेगट और नदी गेट से फूलबाग की ओर से यातायात को आने-जाने दिया जा रहा है। जबकि शुरूआती प्लानिंग में तय हो रहा था। इन दोनों सड़कों का वन-वे रखा जायेगा। ताकि एक -एक दिशा से यातायात आ और जा सके। ऐसा होने पर यातायात का लोड नहीं बढ़ेगा। जाम की परेशानी भी न के समान रहेगी। लेकिन ऐन वक्त पर इन दोनों सड़कों पर टू वे यातायात छोड़कर व्यवस्था बिगाड़ दी गयी।
15 दिन पहले अ​तिक्रमण हटना था, कार्रवाई अब तक नहीं की
नौगजा रोड पर गाड़ी मैकेनिकों ने सड़क तक अपनी दुकान फैला रखी है। जिससे इस सड़क पर वाहनों के लिए काफी कम जगह मिल पा रही। इतना ही नहीं गाड़ियां नहीं निकल पाने के कारण यहां रोजाना कई लोगों के वाहन चालकों से विवाद भी होते हैं। ऐसे ही जल विहार और बैजाताल रोड के किनारे ठेले वाले कब्जा किए खड़े रहते हैं। जिस कारण वाहनों का ट्रैफिक जाम लगा रहता है। इन तीनों सड़कों पर ये अतिक्रमण रूट डायवर्जन से पहले हटाए जाने थे, लेकिन 15 दिन बाद भी अतिक्रमण की स्थिति जस की तस है।

 

Latestमप्र छत्तीसगढ़राज्यराष्ट्रीय

BJP दतिया उप चुनाव में इसी सप्ताह प्रत्याशी की घोषणा करेगी

दतिया. उप चुनाव को लेकर भाजपा ने पहली बार 74 बंगला क्षेत्र में बैठक कर मंथन किया। सूत्रों के अनुसार भोपाल पहुंचे राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने इसकी अध्यक्षता की। सीएम मोहन यादव व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत अन्य पदाधिकारी भी शामिल रहे। बताया जा रहा है कि भाजपा इसी सप्ताह उप चुनाव के लिए प्रत्याशी की घोषणा करेगी।
जानकारी के अनुसार बैठक में शिवप्रकाश ने कहा कि दतिया उप चुनाव में सभी पक्षों को देखकर निर्णय लें, अभी से जुट जाएं, जनजन तक पार्टी की रीति-नीति पहुंचाए, प्रत्याशी चयन को लेकर कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने हाल में गठित प्रदेश कार्य समिति को लेकर भी फीडबैक लिया। यह भी कहा कि जिन्हें जो जिम्मेदारी मिली है उसका पालन हो। सता और संगठन का मूल मकसद जनता की सेवा होना चाहिए इस काम में किसी भी स्तर पर पीछे न रहे। जमीन पर जाकर काम करें और कांग्रेस के द्रष्प्रचार का मुहतोड जवाब दें।
उपचुनाव के लिए कांग्रेस में टिकट को लेकर मंथन जारी है। तीन दिन में उम्मीदवार के नाम की घोषणा की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश कांग्रेस ने नामों का पैनल तैयार कर लिया है। इसमें अब राजेन्द्र भारती की पत्नी शोभा भारती का नाम शामिल किए जाने की चर्चा है। जनता की सहानुभूति का लाभ उठाने पार्टी उन्हें टिकट दे सकती है।

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पनिहार के बरई में 15 दिन से डेरा जमाए है बोत्सवाना से आई मादा चीता

ग्वालियर. पनिहार के बरई में बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता विचरण कर रही है। यहां यह पिछले 15 दिन से डेरा जमाए हुए है। कूनों नेशनल पार्क की निगरानी टीम और ग्वालियर वन मंडल का स्टाफ संयुक्त रूप से नजर रखे हुए है। चिंता इस बात की है कि यह चीता हाईवे के नजदीक न आ जाए। हाईवे की ओर से रूख करने पर टीम सतर्क हो जाती है। जानकारी के अनुसार इससे पहले केजीपी वन चीता भी पनिहार क्षेत्र में पिछले 8 माह तक मूवमेंट कर चुका है। एक चीते की घाटीगांव में सडक हादसे मंे मौत हो गई थी। बोत्सवाना से 8 चीतों को भारत लाया गया था जिसमें यह पनिहार पहुंची मादा चीता सीसीबी-3 है।

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अमरनाथ गुफा में शिवलिंग 90% पिघला, ऊंचाई 1 फीट बची

श्रीनगर. अमरनाथ में बनने वाले पवित्र शिवलिंग का आकार पिघलकर एक फीट रह गया है। मंगलवार को एक फीट के बाबा बर्फानी की फोटो सामने आई। 57 दिन चलने वाली यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी। पिछले 3 दिनों में 56 हजार से ज्यादा तीर्थयात्री दर्शन कर चुके है। यह आंकडा पिछले साल से 18.6 प्रतिशत ज्यादा रहा। 2025 में पहले तीन दिन में 47972 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। यात्रा के लिए इस साल 4 लाख श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। 23 मई को बीएसएफ के जवानों ने जो तस्वीर जारी की थी उसमें शिवलिंग का आकार करीब 7 फीट था। 29 जून को पहली पूजा के दिन भी हिमलिंग की ऊंचाई 5 फीट से ज्यादा थी। 6 जुलाई को सामने आई तस्वीर में हिमलिंग लगभग 90 प्रतिशत गायब हो चुका है। 48 किमी लंबंे नुनवान-पहलगाम रूट और 14 किमी वाले छोटे, लेकिन कठिन बालटाल रूट से लगातार यात्री दर्शन के लिए पहुंच रहे है। यात्रा 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन खत्म होगी।


9 जुलाई तक रजिस्ट्रेशन स्लॉट बुक
जम्मू कश्मीर प्रशासन ने बिना रजिस्ट्रेशन करवाए अमरनाथ पहुंच रहे यात्रियों से कहा है कि वे अपनी यात्रा कुछ दिन के लिए टाल दें। प्रशासन के अनुसार 9 जुलाई तक सभी रजिस्ट्रेशन स्लॉट पूरी तरह भर चुके है। ऐसे में अगर कोई यात्री बिना रजिस्ट्रेशन बालटाल या पहलगाम रूट से आगे बढने की कोशिश करेगा तो उसे चेक पॉइंट्स पर रोक दिया जाएगा। उसे 9 जुलाई के बाद ही आगे बढने दिया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि रविवार से केवल रजिस्टर्ड यात्री ही कश्मीर की ओर जाने की अनुमति दी जाएगी।

बालटाल रूट पर बेस कैंप से पोर्टर एक तीर्थयात्री को पालकी में ले जा रहे हैं। यहां से घोड़े और पोनी भी मिलते हैं।

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वेस्टर्न बायपास लाएगा साडा में समृद्धि, 8 गांवों से होकर गुजरेगा

ग्वालियर। बरई से निरावली तक बन रहा वेस्टर्न बायपास साडा क्षेत्र में समृद्धि लाएगा। यह वेस्टर्न बायपास साडा क्षेत्र के 8 गांवों से होकर गुजरेगा। इसके आसपास साडा के लगभग 5500 भूखंड और 1000 ईडब्ल्यूएस फ्लैट बने हुए हैं, जिनमें से करीब 80 प्रतिशत बिक चुके हैं, लेकिन अभी तक यहां बसाहट शुरू नहीं हो सकी है। बायपास बनने के बाद क्षेत्र में बसाहट बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही ग्रामीणों की जमीनों के दाम बढ़ेंगे तथा वेयरहाउस, होटल, रेस्टोरेंट और ढाबे जैसे व्यवसाय विकसित होंगे।
कोल्ड स्टोरेज बनने से भी क्षेत्र को लाभ मिलेगा। बरई से निरावली तिराहे तक 28.516 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न बायपास बनाया जा रहा है। इस मार्ग पर तीन टोल प्लाजा बनाए जाएंगे, जो निरावली से 3.950, 10.40 और 16 किलोमीटर की दूरी पर होंगे। इसके अलावा 5.705 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड भी बनाई जाएगी। इसके आसपास होटल, ऑटोमोबाइल रिपेयरिंग शॉप, पेट्रोल पंप और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुलने की संभावना है। किसानों को भी अपनी उपज सीधे आगरा और दिल्ली की मंडियों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। वर्तमान में किसानों की अधिकांश फसल ग्वालियर मंडी में आती है।
इन गांवों से होकर गुजरेगा वेस्टर्न बायपास
वेस्टर्न बायपास निरावली, गढ़ुपुरा, जिगसौली, कुलैथ, सौजना, तिघरा, देवखेड़ा, बरई और रायपुर कला क्षेत्र से होकर गुजरेगा। साडा इन इलाकों के आसपास अपने प्रोजेक्ट नए सिरे से शुरू करने की योजना बना रहा है। साथ ही पुराने प्रोजेक्टों के तहत बिक चुके भूखंडों पर बसाहट विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
यह है पूरे प्रोजेक्ट की खासियत
बाढ़ से बचाव के लिए गांवों के पास लगभग 7 किलोमीटर लंबा ड्रेन (नाला) बनाया जाएगा।
71 पुलियाओं का निर्माण होगा, ताकि वर्षा का पानी आसानी से निकल सके।
लोगों की सुविधा के लिए 11 अंडरपास और 5 व्हीकल अंडरपास बनाए जाएंगे।
7 ब्रिज तथा रेलवे क्रॉसिंग पर 1 रेलवे ओवरब्रिज (ROB) बनाया जाएगा।
250 मीटर लंबा एलिवेटेड रोड तैयार किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के लिए 13 एनिमल अंडरपास बनाए जाएंगे, जिनकी कुल लंबाई 1200 मीटर होगी।
आपने कहा
नवल सिंह राजपूत, प्रभारी कार्यपालन यंत्री, साडा
“वेस्टर्न बायपास के आसपास साडा के कई भूखंड हैं, जो बिक चुके हैं। अब बायपास को ध्यान में रखते हुए नए प्रोजेक्ट तैयार किए जाएंगे।”

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