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इन प्रदेशों में आगे बढ़ रहा है मानसून, कहां-कहां हो सकती वर्षा

नई दिल्ली. दक्षिण-पश्चिम मानसून आगे बढ़ता हुआ कई और राज्यों को चपेट में ले रहा है। कहीं तेज बरसात तो कहीं बादजलों के बीच रूक-रूक कर बूंदाबांदी का सिलसिला देखने को मिल रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आज यानी 23 जून को मानसून और अधिक सक्रिय हो सकता है। जिससे कई हिस्सों में वर्षा की तीव्रता बढ़ने की संभावना है। खासकर दक्षिण और पूर्वी भारत के साथ-साथ उत्तर भारत के कुछ इलाकों में भी मौसम का प्रभाव दिखाई देने लगा है।
स्कईमेट के अनुसार मौजूदा हालात में देश के ऊपर कई सक्रिय मौसम प्रणाििलयों एक साथ काम कर रही है। जिनकी वजह से वर्षा का दायरा बढ़ रहा है। इन प्रणालियों के असर से मानसून अब महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों की तरफ बढ़ रहा है। वहीं केरल और कर्नाटक के तटीय इलाकों में पहले से ही भारी वर्षा का दौर जारी है। जिससे कई जगहों पर जनजीवन प्रभावित हो सकता है। पिछले दिन केरल, तटीय कर्नाटक और कोंकण-गोवा में अच्छी वर्षा दर्ज की गयी है। वहीं मध्यभारत और पूर्वोत्तर राज्यों के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा देखने को मिली है। उत्तर भारत के कुछ इलाकों में भी बादल छाये रहे। कहीं-कहीं हल्की वर्षा ने मौसम को सुहावना बना दिया है।
आज के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार केरल और कर्नाटक के कई हिस्सों में भारी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। पूर्वोत्तर भारत और सिक्किम में तेज बारिश के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। वहीं महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।  उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर में गरज-चमक के साथ धूल भरी आंधी और बारिश की स्थिति बन सकती है।  इसके अलावा बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और दक्षिण गुजरात के कुछ हिस्सों में भी हल्की बारिश के आसार बने हुए है।

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केन-बेतवा लिंक नहर में 4 गुना मुआवजा मिलेगा, 54 गांवों की भूमि का होगा अधिग्रहण

छतरपुर. केन बेतवा लिंक परियोजना के तहत अब केन नदी से बेतना नदी तक बनने वाली लिंक नहर के लिये भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। इसमें छतरपुर जिले के 54 गांवों में नहर निर्माण कार्य के लिये भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इन गांवों के किसानों का नई गाइडलाइन के तहत जमीन के सरकारी रेट का चार गुना मुआवजा दिया जायेगा। इस वजह से बांध की तुलना में जिन लोगों की जमीन नहर के लिये अधिग्रहित की जा रही है। उन्हें प्रति एकड़ अधिक मुआवजे का भुगतान किया जायेगा।
प्रियोजना के तहत केन नदी परद ढोइन बांध बनाया जा रहा है। ढोइन बांध का पानी नहर के माध्यम से बरूआसागर के पास बेतवा नदी तक पहुंचाया जायेगा। इसके लिये 219 किमी लम्बी नहर का निर्माण किया जायेगा। नहर निर्माण के लिये केन बेतवा लिंक प्रोजेक्ट अथॉरिटी ने 2 हिस्सों में डीपीआर तैयार किये है। पहले हिस्से में केन नदी से छतरपुर जिले की सीमा में धसान नदी तक डीपीआर बनाया गया है। सबसे पहले इसी हिस्से का टेंडर जारी किया जायेगा। छतरपुर जिले में सबसे अधिक 107 किमी लम्बी नहर का निर्माण किया जाना है। यह नहर छतरपुर जिले के गांवों की सीमा से होकर गुजर रही है। इसी वजह से जल संसाधन विभाग 54 गांवों की भूमि अधिग्रहण कर रहा है।
रेट 3 लाख रेट वहां मुआवजा 12 लाख प्रति एकड़
ढोड़न बांध निर्माण के लिए 14 गांवों में लोगों की जमीनों का अधिग्रहण किया गया है। इन गांवों में सरकार ने विशेष पैकेज के प्रावधानों को लागू किया है। इसमें 5 लाख रुपए प्रति एकड़ मुजावजा राशि का भुगतान किया गया है, जबकि नहर क्षेत्र में जमीनों के कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार न्यूनतम दर 3 लाख प्रति एकड़ से अधिक हैं। जहां 3 लाख प्रति एकड़ रेट हैं वहां किसानों को 12 लाख प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाएगा, जबकि कई हाइवे किनारे के गांव जैसे गंज, गढ़ीमलहरा में यह दर 15 लाख प्रति एकड़ से भी अधिक है। इस कारण यहां किसानों को इसका चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।
दो नदियों को जोड़ने वाली नहर के​ लिए 54 गांवों में भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। इसमें सबसे अधिक 21 गांव नौगांव विकासखंड के हैं। इसी प्रकार छतरपुर विकासखंड के 17, राजनगर के 11 और बिजावर के 5 गांवों में भूमि अधिग्रहण किया जाना है। नहर आबादी क्षेत्र के बाहर से गुजरेगी। इस कारण किसी गांव का विस्थापन नहीं किया जाएगा।
लिंक नहर के लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई तेजी से चल रही है। धारा 11 और धारा 19 की कार्रवाई पूरी कर ली गई है। मुआवजा की दरों के निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है। मप्र सरकार के नए नियम के अनुसार किसानों को कलेक्टर गाइडलाइन से चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। – उमा गुप्ता, कार्यपालन यंत्री केन बेतवा लिंक परियोजना छतरपुर

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MP में कुछ जिलों में भी फेरबदल की तैयारी, 10 कलेक्टर, 2 संभागायुक्त और 3 पीएस पर लटकी तबादले की तलवार

भोपाल. मध्यप्रदेश के 3 प्रमुख सचिव, 2 संभागायुक्त और 10 कलेक्टरों पर तबादले की तलवार लटकी है। कभी भी इनके तबादले किए जा सकते है। ये सभी लंबे समय से एक ही जगह पदस्थ है इनमें से 75% पहले से नई पदस्थापना की जुगत में है तो कुछ सरकार बदलने का मन बना चुकी है। सूत्रों के अनुसार प्रमुख सचिवों में अमित राठौर, गुलशन बामरा और सोनाली पोंकशे वायंगंकर का नाम बताया जा रहा है। इनके पास क्रमशः वाणिज्यिक कर, जनजातीय कार्य और सामाजिक न्याय विभाग है। जहां पर ये 2 साल से अधिक समय से काम कर रहे है, जबकि मुख्यमंत्री कार्यालय में कुछ पदों पर नए सिरे से जमावट की सुगबुगाहट है। हाल में मुख्यमंत्री के सचिव आलोक सिंह को आईजी पंजीयन बनाकर भेजा है। माना जा रहा है कि उनका काम किसी युवा IAS को दिया जा सकता है। हालांकि पहले से मुख्यमंत्री के पास इलैया राजा टी और कौशलेंद्र विक्रम सिंह जैसे दो युवा सचिव है।
ये कमिश्नर, जिन्हें बुलाने की तैयारी
मनोज खत्री,                                 ग्वालियर-                                                 कब से पदस्थ- 29 जून 2024
सुरभि गुप्ता,                                 शहडोल –                                                 कब से पदस्थ- 18 नवंबर 2024
ये पीएस, जिनकी बदल सकती है जिम्मेदारी
अमित राठौर,                              वाणिज्य कर – कब से पदस्थ –                   25 जनवरी 2024

गुलशन बामरा,                            जनजातीय कार्य –                                     कब से पदस्थ – 12 नवंबर 2024
सोनाली पोंकशे वायंगंकर,            सामाजिक न्याय –                                    कब से पदस्थ 12 अगस्त 2024
इन कलेक्टर्स को वापल बुला सकती है सरकार
कलेक्टर –                   जिला –                                                                      कब से पदस्थ
रुचिका चौहान-               ग्वालियर –                                                             11 नवंबर 2024
केदार सिंह –                शहडोल –                                                                 13 अगस्त 2024
गिरीश मिश्रा –                राजगढ़ –                                                                12 अगस्त 2024
रिजू बाफना –                शाजापुर –                                                               5 जनवरी 2024
अदिति गर्ग –                मंदसौर –                                                                  29 जुलाई 2024
पार्थ जायसवाल –              छतरपुर –                                                            6 अगस्त 2024
मृणाल मीना –                बालाघाट –                                                             12 अगस्त 2024
हर्षल पंचोली –                अनूपपुर –                                                             13 अगस्त 2024
हिमांशु चंद्रा –                 नीमच –                                                                 13 अगस्त 2024
किरोड़ीलाल मीना –             भिंड –                                                              16 फरवरी 2024

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KGP-1 चीता ने फिर से सोन चिडि़या अभ्यारण इलाके में दी दस्तक

ग्वालियर. लगभग 80 दिनों तक अलग-अलग वन इलाकोकं में विचरण करने के बाद चीता केजीपी-1 एक बार फिर से ग्वालियर के घाटीगांव स्थित सोन चिडि़या अभ्यारण्य के आसपास पहुंच गयाहै। चीते की लोकेशन मिलते ही वन विभाग की टीम अलर्ट हो गयी है। उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
वन अधिकारियों के अनुसार यह चीता पिछले कई दिनों से शिवपुरी और नरवर के घने जंगलों में लगातार घूम रहा था। लम्बी दूरी तय करने के बाद उसने प्राकृतिक वन्यजीव मार्गी यानी वन कॉरिडोर का इस्तंेमाल करते हुए ग्वालियर जिले के लखनपुरा और चंदूपुरा वन इलाके में प्रवेश किया। वन अधिकारियों का कहना है कि चीता पूर्व में भी कई बार इस रूट का उपयोग कर चुका है।जिसके चलते यह मार्ग अब उसके नियमित विचरण इलाके का पार्ट बनता जा रहा है। यही कारण है कि वह बिना किसी बाधा के दोबार इस इलाके तक पहुंच गया।
कॉलर आईडी से चीते को कर रहे ट्रैक
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि चीता स्वभात से शर्मीला और शांत वन्यजीव माना जाता है। जो सामान्य परिस्थितियों में इंसानों से दूरी बनाये रखता है। उसका मुख्य उद्देश्य भोजन और सुरक्षित आवास की तलाश करना होता है। विभाग का कहना है कि लोगों को अनावश्यक रूप से घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन जंगल से लगे इलाकों में सावधानी बरतना जरूरी है। चीते की दोबारा आमद के बाद कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन और वन विभाग की विशेष ट्रैकिंग टीम पूरी तरह से सक्रिय हो गयी है। चीते की लोकेशन और गतिविधियों पर नजर रखने के लिये सैटेलाइट कॉलर से प्राप्त संकेतों के साथ साथ ग्राउंड मॉनिटरिंग भी की जा रही है। विशेषज्ञ लगातार उसके मूवमेंट का अध्ययन कर रहे है। ताकि किसी भी संभावित स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
चीते की मौजूदगी की पुष्टि उस समय हुई, जब चंदूपुरा क्षेत्र में एक बकरी का शिकार किए जाने की सूचना सामने आई। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों के बीच चीते को लेकर चर्चा शुरू हो गई। जहां एक ओर लोगों में दुर्लभ वन्यजीव को देखने की उत्सुकता दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर पशुपालकों ने अपने मवेशियों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई। सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और क्षेत्र का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी जुटाई।

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MP में UCC का ड्राफ्ट 30 जून तक होगा तैयार

भोपाल. मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने भोपाल स्थित प्रशासन अकादमी में सुबह 10.30 बजे से देर शाम तक राज्य स्तरीय सुनवाई की। इसमें संस्थाओं, शासकीय विभागों, राजनीतिक दल, धर्मगुरूओं सहित विभिन्न आयोगों के प्रतिनिधियों से उनका पक्ष जाना। इसमें आदिवासियों को अन्य प्रांतों की तरह यूसीसी के दायरे से बाहर रखने और मतांतरित होने वालों पर कानून लागू किए जाने का प्रावधान रखे जाने की बात सामने आई। इसके पीछे यह तर्क दिया गया कि मतांतरण के बाद परंपराएं बदल जाती है। उधर लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर अधिकतर का मत रहा कि इसे मान्यता नहीं दी जानी चाहिए।
समिति का प्रयास है कि 30 जून तक विधेयक का प्रारूप तैयार कर सरकार को सौंप दिया जाए। सरकार की मंशा 20 जुलाई से प्रारंभ होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में इसे प्रस्तुत करने की है। राज्य स्तरीय सुनवाई में समिति के सदस्य सेवानिवृत्त मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, शिक्षाविद गोपाल शर्मा, डॉ. शोभा पेठणकर, वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप नायर और समाजसेवी बुद्ध पाल सिंह ने सुझाव सुने।
आदिवासियों को लेकर कहा कि नियम स्पष्ट होने चाहिए क्योंकि आदिवासी अब आदिवासी नहीं रह गए हैं। आईएएस, आईपीएस बन गए हैं। ब्राह्मण व ऊंची जातियों के बच्चों से विवाह कर रहे हैं, फिर भी आदिवासी हैं। वहीं, अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य भगत सिंह नेताम ने कहा कि अन्य राज्यों ने यूसीसी से अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखा है। प्रदेश में भी ऐसा ही हो क्योंकि इन्हें यूसीसी में शामिल किया तो उनकी सांस्कृतिक प्रथाएं छिन्न-भिन्न हो जाएंगी। मतांतरित आदिवासियों को यूसीसी के दायरे में रखा जाना चाहिए। इन्हें विशेष हितलाभ देना उचित नहीं।

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MP में कैबिनेट विस्तार में 5 नए विधायक बन सकते हैं मंत्री

भोपाल. मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार पहले बडे मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी में है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बातचीत में संकेत दिए कि विधानसभा के मानसून सत्र के बाद बदलाव संभव है। नए मंत्रिमंडल में युवाओं को प्राथमिकता मिल सकती है जबकि अनुभवी नेताओं को भी महत्व दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार 5 से 6 मंत्रियों को हटाकर 7 से 8 नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है।
बीजेपी के सामने प्रमुख राजनीतिक समीकरण
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मंत्रिमंडल फेरबदल का मुख्य आधार मंत्रियों का कामकाज रहेगा। अंतिम निर्णय पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मंत्रियों व विधायकों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा होती है जिसमें शीर्ष नेतृत्व के सुझाव भी शामिल रहते है। जानकारों के अनुसार इस फेरबदल के जरिए बीजेपी कई राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरण साधना चाहती है।

 

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आवासीय नक्शे पर कॉमर्शियल इमारत में लगी आग से 15 लोगों की मौत, कोई इमरजेंसी एग्जिट नहीं, एलडीए की खुली पोल

लखनऊ. यूपी की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनियां इलाके में भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हो गयी। बल्कि इस हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिये है। आग की इस घटना में अभी तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। जिनमें 3 महिलायें भी शामिल है। सभी मृतकों की आयु 20-24 साल के बीच की बताई जा रही है।
आगजनी के बाद सामने आयी जानकारी के मुताबिक जिस बिल्डिंग में आग लगी उसका नक्शा आवासीय भवन के रूप में पास कराया गया था। हालांकि बाद में उसी बिल्डिंग का इस्तेमॉल कॉमर्शियल गतिविधियों के लिये किये जाने लागा। यह आरोप है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण की नाक के नीचे रिहायशी मानचित्र के आधार पर एक कॉमर्शियल तैयार हो गया। लेकिन इस पर वक्त रहते कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गयी है।
यह बिल्डिंग वीरेन्द्र शुक्ला की बताई जा रही है। वीरेन्द्र शुक्ला को रामेश्वरम इंजीनियरिंग कॉलेज का संचालक बताया जा रहा है। एलडीए के दस्तावेजों में यह संपत्ति वीरेन्द्र शुक्ला के साथ उनके भाईयों सुरेन्द्र शुक्ला और धीरेन्द्र शुक्ला के नाम पर दर्ज बताई गयी है। ऐसा बताया जा रहा है कि वर्ष 2014 में इस भवन का इस्तेमाल कॉमर्शियल रूप में किया जाने लगा है। जबकि इसका मूल मानचित्र आवासीय श्रेणी में स्वीकृत था। घटना के बाद अब यह जांच की जा रही है। भवन के संचालन और उपयोग को लेकर सभी जरूरी अनुमतियां ली गयी थी या नहीं।

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राष्ट्रपति ने चीता मित्रों से किया संवाद और चीता संरक्षण की ली जानकारी 

भोपाल -राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने दो दिवसीय कूनो नेशनल पार्क के प्रवास के दौरान सोमवार को चीता मित्रों से संवाद कर चीता संरक्षण के प्रयासों की जानकारी ली। राष्ट्रपति ने चीता मित्रों से चर्चा करते हुए उनके द्वारा चीतों की सुरक्षा और आमजन के बीच चीतों के व्यवहार को लेकर किये जा रहे जन-जागरूकता के प्रयासों के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सभी चीता मित्रों से वन-टू-वन चर्चा कर परियोजना के लिए उनके द्वारा मानसेवी रूप से किये जा रहे प्रयासों की सराहना की।
राष्ट्रपति को चीता मित्रों ने अवगत कराया कि कूनो नेशनल पार्क से लगे सभी ग्रामों में चीता मित्र मौजूद है, जिनके द्वारा चीतो की सुरक्षा के संबंध में ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। चीतो के आबादी क्षेत्र में आवागमन की स्थिति पर किये जाने वाले कार्यों के संबंध में सभी को अवगत कराया गया है। ग्रामीणों को यह जानकारी भी दी जा रही है कि स्वभाविक रूप से चीते किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते है। चीता जब आबादी क्षेत्र अथवा खेतों में दिखाई दे तो तत्काल वन विभाग को अवगत कराया जाये, जिससे उन्हें किसी भी प्रकार से नुकसान न पहुँचे। भारत में चीतों की पुनर्बसाहट के लिए यह परियोजना अति महत्वपूर्ण है।
इस दौरान चीता मित्र कुलदीप आदिवासी सिलोरी, संग्राम आदिवासी एवं कु. राजनदंनी आदिवासी हथेडी, मल्हा आदिवासी सेसईपुरा, शिवम आदिवासी पालपुर, विनोद आदिवासी पैरा, रामलखन आदिवासी कराहल, लालाराम आदिवासी सेसईपुरा, दौलतराम आदिवासी सेसईपुरा और सतीश आदिवासी मोरावन मौजूद रहें।
उल्लेखनीय है कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों की पुनर्स्थापन योजना को लगभग साढ़े तीन वर्ष से अधिक का समय हो गया है। नेशनल पार्क में नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका एवं बोत्सवाना से चीतों को लाया गया है, वर्तमान में देश में चीतों की संख्या 52 है, जिनमें से 49 चीते कूनो नेशनल पार्क में तथा 03 चीते मंदसौर स्थित गांधी सागर अभ्यारण में मौजूद है। भारत में जन्मे चीतो की संख्या 32 है, चीता प्रोजेक्ट निरंतर सफलता की ओर आगे बढ रहा है।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु चीता मित्रों से संवाद के उपरांत हेलीकॉप्टर से ग्वालियर के लिये रवाना हुई। हेलीपेड पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मीनिस्टर इन वेटिंग मंत्री राकेश शुक्ला, सांसद शिवमंगल सिंह तोमर सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों ने आदरपूर्वक विदाई दी।
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चेम्बर चुनाव की अधिसूचना जारी, 17 जुलाई को होगा मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना

3450 सदस्य करेंगे मताधिकार का प्रयोग, 27-28 जून को नामांकन प्रक्रिया
ग्वालियर। चेम्बर ऑफ कॉमर्स के चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी गई है। निर्वाचन प्रक्रिया के तहत 17 जुलाई को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान कराया जाएगा। मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना की जाएगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।
निर्वाचन अधिकारी अशोक विजयवर्गीय ने पत्रकारवार्ता में चुनाव कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि इस बार कुल 3450 सदस्य अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। चुनाव को लेकर व्यापारिक वर्ग में उत्साह देखा जा रहा है।निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 27 और 28 जून को नामांकन पत्र जमा किए जाएंगे। इसके बाद 2 जुलाई को दोपहर 11 बजे से शाम 5 बजे तक नाम वापसी की प्रक्रिया होगी। नामांकन वापसी के बाद प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी की जाएगी।
17 जुलाई को अध्यक्ष, संयुक्त अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मानसेवी सचिव, मानसेवी संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष पदों के लिए मतदान होगा। इसके साथ ही कार्यकारिणी समिति के सदस्य पद के लिए 150 प्रतिनिधियों के चयन हेतु समूहवार मतदान भी कराया जाएगा।
निर्वाचन अधिकारी अशोक विजयवर्गीय ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने सभी सदस्यों से मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।पत्रकारवार्ता में चेम्बर के पूर्व अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल, अरविंद गौर, पीताम्बर लोकवानी और राजीव अग्रवाल भी मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को व्यापारिक लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद जताई।

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ग्वालियर में EV की रिकॉर्ड डिमांड, पेट्रोल-डीजल महंगा होने के कारण ढाई गुना बढ़ी इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री

ग्वालियर. पश्चिम एशिया युद्ध के वैश्विक असर से घरेलू बाजार में पेट्रोलियम कंपनियों ने मई महीने में ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 10 रुपये की भारी बढ़ोतरी कर दी। इस अचानक आई महंगाई का असर शहर सहित पूरे जिले के ऑटोमोबाइल मार्केट पर दिखने लगा है। महंगे ईंधन की मार से बचने के लिए शहरवासियों का रुझान तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ा है, जिससे बाजार में इनकी डिमांड में उछाल आया है।
अप्रैल से लेकर 20 जून के बीच ही शहर में रिकॉर्ड बिक्री
इस वित्तीय वर्ष में महज ढाई महीने के भीतर, यानी एक अप्रैल से लेकर 20 जून के बीच ही शहर में रिकॉर्ड 6,532 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हो चुकी है। यदि इसकी तुलना पिछले साल की समान अवधि से की जाए, तो पिछले वर्ष इस दौरान महज 2,490 इलेक्ट्रिक वाहन ही बिके थे। इस तरह पिछले साल के मुकाबले इस बार ईवी की बिक्री में ढाई गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
एथेनॉल ब्लेंडिंग भी बनी बड़ी वजह
ऑटोमोबाइल सेक्टर के बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इलेक्ट्रिक वाहनों की इस कदर बढ़ती बिक्री के पीछे सिर्फ पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें ही इकलौता कारण नहीं हैं। सरकार द्वारा पेट्रोल में एथेनॉल की मिक्सिंग को बढ़ावा देना भी इसकी एक मुख्य वजह बन रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिक्स होने के कारण पुरानी और कई नई कार व बाइकों के इंजन पर विपरीत असर पड़ रहा है। लगातार एथेनॉल मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज ड्रॉप हो रहा है और इंजन में तकनीकी खराबी की शिकायतें आ रही हैं। यही वजह है कि वाहन चालक अब पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों को छोड़कर सुरक्षित और आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों को तरजीह दे रहे हैं।

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