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MP में UCC का ड्राफ्ट 30 जून तक होगा तैयार

भोपाल. मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने भोपाल स्थित प्रशासन अकादमी में सुबह 10.30 बजे से देर शाम तक राज्य स्तरीय सुनवाई की। इसमें संस्थाओं, शासकीय विभागों, राजनीतिक दल, धर्मगुरूओं सहित विभिन्न आयोगों के प्रतिनिधियों से उनका पक्ष जाना। इसमें आदिवासियों को अन्य प्रांतों की तरह यूसीसी के दायरे से बाहर रखने और मतांतरित होने वालों पर कानून लागू किए जाने का प्रावधान रखे जाने की बात सामने आई। इसके पीछे यह तर्क दिया गया कि मतांतरण के बाद परंपराएं बदल जाती है। उधर लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर अधिकतर का मत रहा कि इसे मान्यता नहीं दी जानी चाहिए।
समिति का प्रयास है कि 30 जून तक विधेयक का प्रारूप तैयार कर सरकार को सौंप दिया जाए। सरकार की मंशा 20 जुलाई से प्रारंभ होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में इसे प्रस्तुत करने की है। राज्य स्तरीय सुनवाई में समिति के सदस्य सेवानिवृत्त मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, शिक्षाविद गोपाल शर्मा, डॉ. शोभा पेठणकर, वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप नायर और समाजसेवी बुद्ध पाल सिंह ने सुझाव सुने।
आदिवासियों को लेकर कहा कि नियम स्पष्ट होने चाहिए क्योंकि आदिवासी अब आदिवासी नहीं रह गए हैं। आईएएस, आईपीएस बन गए हैं। ब्राह्मण व ऊंची जातियों के बच्चों से विवाह कर रहे हैं, फिर भी आदिवासी हैं। वहीं, अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य भगत सिंह नेताम ने कहा कि अन्य राज्यों ने यूसीसी से अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखा है। प्रदेश में भी ऐसा ही हो क्योंकि इन्हें यूसीसी में शामिल किया तो उनकी सांस्कृतिक प्रथाएं छिन्न-भिन्न हो जाएंगी। मतांतरित आदिवासियों को यूसीसी के दायरे में रखा जाना चाहिए। इन्हें विशेष हितलाभ देना उचित नहीं।

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