Author: Mahesh Jha

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अधिक मास के पावन अवसर पर सेवा कार्य, बेटे के जन्मदिन पर सभी लोगों को फल किये वितरित

ग्वालियर.  विप्रा महिला मंच की संस्थापिका डॉ प्रतिभा चतुर्वेदी ने हिंदू कैलेंडर के अनुसार होने वाले 3 साल अधिक मास के बारे में बताया जिसे हम सभी लोग कई नाम से जानते है। जैसे कि इस माह को पुरूषोतम मास ,लौंद मास ,मलमास आदि गुड़ागुड़ी का नाका स्थित स्वर्ग सेवा सदन आश्रम में अधिक मास के शुभ अवसर पर विप्रा की अध्यक्ष शिवानी चतुर्वेदी ने बहनों द्वारा एक विशेष सेवा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत आश्रम में रह रहे जरूरतमंद लोगों को भोजन करवाया गया तथा सेवा भाव के साथ पुण्य कार्य किए गए।


कार्यक्रम में सभी विप्रा बहनों ने अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर अपना सहयोग एवं उपस्थिति दर्ज करायी गई। सचिव डॉक्टर राजरानी शर्मा ने कि अधिक मास में दान, सेवा और जरूरतमंदों की सहायता का विशेष महत्व होता है, इसलिए यह आयोजन समाज सेवा की भावना को समर्पित रहेगा। कार्यक्रम में अध्यक्ष शिवानी चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष शैलजा मिश्रा और कल्पना पाठक ने अपने बेटे के जन्मदिन पर सभी लोगों को फल 🍎 वितरित किये ।इस कार्यक्रम में उपाध्यक्ष डॉक्टर शैलजा मिश्रा, सचिव डॉक्टर राजरानी शर्मा, ज्योति शर्मा, दीप्ति शर्मा, स्मिता पांडे, कृष्णा विश्राम शर्मा, कल्पना पाठक, मंजू शर्मा, कल्पना ऋषीश्वर, सीमा दूबे, श्रुति उपाध्याय, मुनमुन शुक्ला, काव्यांश शर्मा, सुमन तिवारी, सपना पारशर, संगीता शर्मा आदि उपस्थित रही।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह हैं गद्दार-राहुल गांधी

नई दिल्ली. पीएम नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पार्टी कार्यकर्त्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए गद्दार कहा है। इस बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे बंेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अराजकतावादी मानसिकता का प्रतीक बताया है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को रायबरेली के धुलवारी गांव में वीरापासी की मूर्ति का अनावरण किया है। इस बीच एक आमसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा है कि आरएसएस कार्यकर्त्ता आपनके सामने आयेंगे। वह प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की बात करेंगे तो उनसे आप उसने खुलकर कहियेगा कि आपका प्रधानमंत्री गद्दार है। आपका गृहमंत्री गद्दार है। आपका संगठन गद्दार है। आपने हिन्दुस्तान को बेचने को काम किया। आपने संविधान पर हमला करने का काम किया है। आपने अंबेडकर पर हमला किया है।
राहुल गांधी चुनावी हार के हताश-नितिन नवीन
बीजेपी अध्यक्ष ने राहुल से सवाल करते हुए कहा कि क्या देश की जमीन सुरक्षित रखना और नक्सलवाद खत्म करना गद्दारी है?. राहुल गांधी आपके पूर्वजों ने इस देश की जमीन को हमेशा गिरवी रखने का काम किया, कभी हमारे सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने का काम नहीं किया, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस देश की जमीन भी सुरक्षित हुई है और देश की जमीन भी मजबूत हुई है. आपके शासन काल में देश की पूरी तरह से अखंड हो गई।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इस तरह के बयान देकर राजनीतिक विरोधियों से नहीं, बल्कि सीधे भारतीय राज्य और लोकतंत्र से लड़ रहे है।  भंडारी के अनुसार, ऐसी भाषा केवल पाकिस्तान या उसके द्वारा समर्थित आतंकवादी ही बोल सकते हैं। राहुल गांधी के इस कृत्य से साफ होता है कि वे देश के सभी 140 करोड़ नागरिकों का अपमान कर रहे है।

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लंदन म्यूजियम वाली भोजशाला की मां वाग्देवी की प्रतिमूर्ति ओरिजनल मूति की हूबहू 15 वर्षो से ग्वालियर में है

ब्रिटिश म्यूजियम ग्रेट रसल स्ट्रीट में मां वाग्देवी की यह प्रतिमा रखी हुई है।
ग्वालियर. मध्यप्रदेश के धार स्थिति ऐतिहासिक भोजशाला के गर्भगृह में स्थापित करने के लिये अष्टधातू वांग्देवी की प्रतिमा ग्वालियर के स्टूडियों में 15 वर्षो वालियर कास्ट की गयी थी। वाग्देवी (सरस्वती)की प्रति को वर्ष 2011 में बसंत पंचमी के मौके पर मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा होना तय थी। लेकिन उस वक्त हुए सांप्रदायिक और प्रशासनिक विवाद के चलते इसे ग्वालियर में ही रोक दिया गया था। अब हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मूर्तिकार के घर में भी उम्मीद का दीया जल उठा है।


मूर्तिकार स्वर्गीय प्रभातराय के सुपुत्र अनुज ने बताया है कि वर्ष 2011 में राष्ट्रीय स्वयं संघ (आरएसएस) के सीनियर नेता नवलकिशोर जी ने उन्हें इस मूर्ति को बनाने का ऑर्डर दिया था। वर्ष 2011 जब मूर्ति बन कर तैयार हुई थी। इसे धार भेजने की तैयार थी। तभी वहां धार्मिक और प्रशासनिक विवाद भड़क गया था, जिससे प्रशासन ने सुरक्षा वजहों से मूर्ति को ग्वालियर में ही रोकने का आदेश दिया था। उस समय विवाद इतना बढ़ा कि करीब 2 हफ्तों तक 2-5 पुलिसकर्मी हमारे निवास पर सुरक्षा में तैनात रहे। इसके बाद भी वर्ष 2011-2015 तक हर बसंत पंचमी पर पुलिस प्रोटेक्शन के साये में ही 2-3 दिन के मूर्ति रखी जाती थी।
अब मौन धारण किया नवल किशोर ने
ग्वालियर आरएसएस पदाधिकारी लोकेंद्र मिश्रा ने बताया कि 2011 के बाद आरएसएस प्रचारक नवल किशोर अब वर्तमान में चेतनदास जी महाराज बन गए हैं और अभी महेश्वर में है। उन्होंने अब मौन धारण कर लिया हैं। ऐसे में मूर्ति का अब आगे क्या होगा इसके बारे में से नवल किशोर ही बता सकते थे लेकिन अब मूर्ति का क्या होगा इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।

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MP के 41 हजार मेडिकल स्टोर्स बंद, दवा की ऑनलाइन बिक्री का विरोध

भोपाल. मध्यप्रदेश में बुधवार को करीब 41 हजार दवा दुकानें बंद हैं। अकेले भोपाल में 3 हजार से ज्यादा मेडिकल स्टोर्स इस बंद में शामिल हैं। सिर्फ अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स को ही खुला रखा गया है। यह बंद ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स की ओर से ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुलाया गया है। आईओएसीएडी को जनरल सेक्रेटरी राजीव सिंघल ने बताया कि प्रदेश के सभी रिटेल और थोक दवा व्यवसायियों ने इस बंद का समर्थन किया है। यह मुद्दा सीधे आम लोगों की सेहत से जुड़ा है। घर-घर पहुंच रही ऑनलाइन दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर अभी स्पष्ट सिस्टम नहीं है, जो गंभीर चिंता का विषय है।


ग्वालियर के दवा बाजार में हड़ताल से मरीज परेशान
ग्वालियर के दवा बाजार में दवा लेने पहुंचे बुजुर्ग हरिओम कश्यप ने बताया कि वह अपनी 75 साल की पत्नी के लिए दवा लेने आए थे, लेकिन बाजार बंद होने के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। काफी देर भटकने पर भी उन्हें दवा नहीं मिलीं। उन्होंने कहा कि जिस दवा के लिए वह आए हैं, वह उनकी पत्नी के लिए बेहद जरूरी है। समय पर दवा नहीं मिलने से उनकी तबीयत और बिगड़ सकती है।

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जम्मू से श्रीनगर वंदे भारत से 5 घंटे में, 855 रुपए किराया, सुरक्षा में CORAS कमांडो

जम्मू कश्मीर. अब जम्मू ट्रेन के जरिए सीधे कश्मीर घाअी से जुड गया है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना के तहत जम्मू से श्रीनगर तक वंदे भारत एक्सप्रेस चलने से घाटी में बदलाव दिख रहा है। जम्मू से श्रीनगर के बीच 270 किमी की दूरी है। यहां रोड कनेक्टिविटी हमेश बडी चुनौती रही है। बता दें कि सर्दियों में रामबन, बनिाल और रामसू जैसे इलाकों में लैंडस्लाइड और बर्फबारी होने से सडक कई दिनों या हफ्तों तक बंद रहती थी। इससे न सिर्फ काम रूकता था बल्कि कश्मीर में जरूरी सामानों की भी कमी हो जाती थी। अब सडकें पहले से बेहतर हुई है, फोर-लेन हाईवे और टनल है लेकिन ट्रेन का सफर ज्यादा आासन, सस्ता और भरोसेमंद है।
70 हजार स्टूडेंट्स के लिए सफर आसान हुआ
जम्मू कश्मीर के करीब 70 हजार स्टूडेंट दिल्ल्ी, चंडीगढ और देश के बाकी शहरों में रहकर पढ रहे है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट श्रीगुफवारा के रहने वाले मोहम्मद आमिर कहते है कि पहले सर्दी या बारिश में जब एनएच-44 बंद हो जाता तो मजबूरी में हवाई सफर करके घर जाना पडता था। अब घर आने-जाने से पहले सोचना नहीं पडेगा। आमिर सरकार से अनंतनाग में ट्रेन के स्टॉपेज की मांग भी करते हैं। वे कहते है कि इससे साउथ कश्मीर में अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा और शोपियां जिलों के स्टूडेंट्स को सीधा फायदा मिलेगा।

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तेल की कीमत 110 डॉलर के पार, दहशत में दुनिया, नहीं माना ईरान तो होर्मुज में होगी नाटो की एंट्री

होर्मुज को लेकर होने वाली है नाटो की बड़ी बैठक. (Photo: AP)

नई दिल्ली. अमेरिका -ईरान में कब बात बनेगी। दुनिया इसका इंतजार कर रही है। दूसरी तरफ कच्चे तेल के दाम फिर से दहशत फैलाती नजर आ रही है। ग्लोब टेंशन कम होने का नाम नहीं ले रही है। यह सब है यूएस-ईरान के बीच तेल -गैस आवाजाही के लिये सबसे अहम समुद्री रूट होर्मुज ऑफ स्ट्रेट की वजह से जिसे ईरान ने बन्द कर रखा है तो इसके आसपास अमेरिका की नाकाबंदी चल रही है। इस सबसे बड़े संकट को कम करने के लिये अब होर्मुज में नाटो की एंट्री हो सकती है। इसके कुछ सदस्य देशों का अब मानना है कि अगर नाकाबंदी जारी रही है। ईरान न माना तो ऐसा करना आवश्यक हो सकता है। जिससे इस समुद्री रूट से जहाजों की आवाजाही सुचारू करने में मदद मिलेगी।
नाटो का रूख में अचानक बदला
ब्लूमबर्ग ने अपनी नयी रिपोर्ट में मंगलवार का नाटो गठबधन के वरिष्ठ अधिकारियों और राजनायिकों का हवाला देते हुए बताया है कि नाटो इस बाद पर चर्चा कर रहा है कि अगर ईरान जुलाई की शुरूआत तक स्ट्रेटिजिक समुद्री रूट होर्मुज स्ट्रेट को फिर से नहीं खोलता है। यहां से जहाजों को गुजरने में मदद कैसे की जाये। ये चर्चाये ईरान से जुड़े अमेरिका -इजरायल संघर्ष में प्रत्यक्ष भागीदारी के प्रति कई यूरोपीय सदस्यों के माह के प्रतिरोध के बाद बड़े बदलाव का संकेत है। क्योंकि ट्रम्प के अनुरोध को पहले कई नाटो देशों ने ठुकरा दिया था।
अप्रैल में, नाटो के सहयोगियों ने सार्वजनिक रूप से क्षेत्र में नाकाबंदी अभियान का समर्थन करने के लिए ट्रम्प की अपील को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट की मानें, तो अब इस प्रस्ताव को कई नाटो देशों का समर्थन मिल चुका है, हालांकि अभी तक सर्वसम्मति से सभी का समर्थन नहीं मिला है।
‘अंकारा’ की बैठक में होगा फैसला
Hormuz Strait से होकर दुनिया की कुल जरूरत का करीब 20 फीसदी तेल और गैस की आवाजाही होती है और इसमें आई रुकावट के चलते तमाम देशों में तेल-गैस का संकट गहराया हुआ है।   कच्चे तेल की कीमतों में इजाफे से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, महंगाई भी कोहराम मचाती नजर आ रही है।

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कलेक्ट्रेट में लगी आग से बैंक समेत 3 ऑफिसों को पहुंचा नुकसान, फायर ट्रेनिंग से दक्ष कर्मचारियों ने बुझाई आग, आग बुझाने वाले कर्मचारी होंगे सम्मानित

कलेक्टर परिसर में लगी आग।ट्रांसफार्मर में ब्लास्ट, कर्मचारी अग्निशमन यंत्र लेकर दौड़े, अफसर भी मौके पर पहुंचे,
ग्वालियर। दफ्तर बंद होने के बाद शाम करीब 7.15 बजे कलेक्ट्रेट में आग लग गई। घटना बैंक के पास लगे ट्रांसफार्मर में ब्लास्ट से हुई। मौके पर मौजूद कुछ कर्मचारियों ने दफ्तर में रखे अग्निशमन यंत्र की मदद से आग को काबू में किया। बाद में फायर ब्रिगेड भी पहुंच गई थी। दिन में करीब 1 बजे भी कलेक्ट्रेट में बिजली सप्लाई गड़बड़ हुई थी। तब बिजली कंपनी के कर्मचारी पहुंचे और फाल्ट ठीक किया था। कलेक्ट्रेट में लोड अधिक होने से इससे पहले भी ऐसे हादसे हो चुके हैं। कलेक्ट्रेट में शाम को प्रभारी मंत्री की देखरेख में बनने वाली समितियों को लेकर बैठक प्रस्तावित थी। इसी कारण यहां कुछ अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।
शाम को लगी आग, 25 कंप्यूटरों को नुकसान की आशंका
शुरुआत -प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग की शुरुआत बैंक में रखे सोफे से हुई। बैंक बंद हो चुकी थी, इसलिए कर्मचारियों ने बाहर लगे कांच को तोड़कर अंदर अग्निशमन यंत्र की मदद से सोफे की आग को काबू में किया।
राहत -दफ्तर में एमसीबी में ब्लास्ट होने से आग फैली। गनीमत यह रही कि बैंक के पास ही कैंटीन तक आग पहुंचने से पहले काबू पा लिया। कैंटीन में दो गैस सिलेंडर रखे थे, इन्हें कर्मचारियों ने बाहर निकाला।
आग बुझाने वाले कर्मचारी होंगे सम्मानित
घटनास्थल पर मौजूद कलेक्टर रूचिका चौहान देखा कि कर्मचारी अपनी जान की परवाह किये बिना आग बुझाने में जुटे हुए, कर्मचारियों की तत्परता को देखते हुए कलेक्टर आग बुझाने वाले कर्मचारियों को 15 अगस्त को होने वाले राष्ट्रीय समारोह में पुरस्कृत करने का निर्णय लिया है।
5 दमकल पहुंची, कलेक्टर मौजूद रहीं
कलेक्ट्रेट में आग की सूचना दमकल को दी गई तो एक के बाद एक पांच गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। इनके पहुंचने से पहले ही 90 फीसदी आग पर काबू पा लिया गया था। कर्मचारियों ने दफ्तर में रखे लगभग 15 अग्निशमन यंत्रों का उपयोग किया। कलेक्टर रुचिका चौहान भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने आग बुझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कर्मचारियों की सराहना की।
बिजली बंद की, तब रुकी स्पार्किंग
आग ई-दक्ष (ट्रेनिंग सेंटर) में रखे कंप्यूटरों तक पहुंच गई थी। यहां करीब 25 सिस्टम लगे थे। इन्हें भी नुकसान की खबर है। इस घटना के बाद पूरे दफ्तर की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। नुकसान का वास्तविक आंकलन बुधवार सुबह दफ्तर खुलने पर ही होगा।

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शुभेंदु ने ‘‘चिकन नेक’’ इलाका केन्द्र सरकार को सौंपा, एक फैसला 8 राज्यों के लिये बना खुश खबरी

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘‘चिकन नेक’’ एक बार फिर से चर्चाओं में आ गया। राज्य की नयी भाजपा सरकार ने इस संवेदनशील इलाके के लगभग 120 एकड़ जमीन केन्द्र सरकार को सौंपने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इस जमीन का उपयोग सीमा सुरक्षा, फेंसिंग, राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिये किया जायेगा।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिये बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि यही संकरा भूभाग के 8 राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता हैंइस कॉरिडोर की चौड़ाई लगभग 22 किमी और लम्बाई 60 किमी बताई जाती है। इसकी सीमायें नेपाल और बांग्लादेश से भी लगती है। इसलिये इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील इलाका माना जाता है। भाजपा का आरोप है कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को इस इलाके में पर्याप्त अधिकार और जमीन उपलब्ध कराने में रूचि नहीं दिखाई। यही टीएमसी ने ऐसे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया हे। इस बहसके बीच 2020 दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम का पुराना बयान भी फिर चर्चाओं में है। जिसमें उन्होंने चिकन नेक कॉरिडोर को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गयी थी।
वर्ष 2020 में दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के आरोपी शराजील इमाम ने कहा था कि अगर 5 लाख मुसलमान भी इकट्ठा हो जाये तो चिकन नेक को बन्द करके भारत को नॉर्थ ईस्ट के राज्यों से पूरी तरह काटा जा सकता है। शरजील इमाम यह बात इसलिये कह रहा था। क्योंकि चिकन नेक के इलाके को मुस्लिम अक्सरियत माना जाता है। मुस्लिम अक्सरियत का मतलब है कि यहां मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है। अब यह बात इनती खतरनाक थी। इसकी वजह शरजील इमाम को आज तक जमानत नहीं मिल पायी है। जबकि केन्द्र सरकार सरकार ने भी ऐसी कई कोशिशें की। जिससे चिकन नेक का इलाक उसकी एजेंसियों और बीएसएफ को पूरी तरह मिल जाये। ममता बनर्जी को इसके लिये कइ्र प्रस्ताव भेजे गये। लेकिन वह ऐसा करने के लिये तैयार नहीं हुई थी।
पश्चिम बंगाल में सरकार बदली और CM  शुभेंदु अधिकारी ने चिकन नेक कॉरिडोर की 120 एकड़ जमीन केंद्र को सौंप दी।  BJP  का कहना है कि कॉरिडोर के आसपास के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना जरूरी है, ताकि घुसपैठ और किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।  अब ये जमीन बॉर्डर फेंसिंग, नेशनल हाइवे और सुरक्षा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए इस्तेमाल होगी और भी सरल शब्दों में कहें तो यहां बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ को रोकने के लिए बीएसफ सीमा पर बाड़ लगाएगी।
इलाके में अंडरग्राउंड रेल नेटवर्क का है प्लान
भारत सरकार इस इलाके में अंडरग्राउंड रेल नेटवर्क बना रही है ताकि भविष्य में अगर किसी आपातकालीन स्थिति में सड़क मार्ग अवरुद्ध भी हो जाए, तब भी सेना की आवाजाही जारी रहे और नॉर्थ ईस्ट के राज्यों का भारत से संपर्क टूटे नहीं।  पार्टी का दावा है कि नई सरकार बनने के बाद इस दिशा में तेजी से फैसले लिए जा रहे हैं। वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि इस मुद्दे को धार्मिक और वोटबैंक की राजनीति से जोड़कर पेश किया जा रहा है. उनका कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले सभी समुदायों के लोग देशभक्त हैं और सुरक्षा के सवाल को सांप्रदायिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
इस बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि राज्य सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर मुद्दे पर केंद्र के साथ मिलकर काम करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने और अवैध घुसपैठ रोकने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे. राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में अवैध कब्जों और कथित अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई, पुनर्मतदान और चुनावी हिंसा जैसे मुद्दों पर भी बीजेपी और टीएमसी आमने-सामने हैं.
चिकेन नेक पूरे देश की सुरक्षा के लिए अहम
सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकेन नेक) सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सामरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।  इसलिए इस क्षेत्र में सुरक्षा, विकास और सामाजिक सौहार्द- तीनों के बीच संतुलन बनाए रखना वर्तमान और पूववर्ती सभी सरकारों के लिए बड़ी चुनौती रही है. पश्चिम बंगाल के CM  शुभेंदु अधिकारी ने भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग के लिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को जमीन देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।  भारत, बांग्लादेश के साथ 4,097 किमी लंबी सीमा साझा करता है।   पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लगभग 2,216 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक लगभग 3,240 किमी की सीमा पर बाड़ लगाई जा चुकी है और करीब 850 किमी सीमा की बाड़बंदी होनी बाकी है, जिसमें 175 किमी का दुर्गम भूभाग भी शामिल है।  इस 175 किमी में से 127 किलोमीटर सीमा की फेंसिंग होनी है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि ममता बनर्जी की सरकार में इस खंड में सिर्फ 8 किलोमीटर हिस्से की फेंसिंग हो पाई थी।
केंद्र सरकार ने बंगाल के सीमावर्ती जिलों में बांग्लादेश बॉर्डर पर बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किमी से बढ़ाकर 50 किमी कर दिया था. यानी बीएसएफ 50 किमी तक के इलाके में तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती कर सकती है. तत्कालीन ममता सरकार ने इसे राज्य के मामलों में हस्तक्षेप बताया था. दिसंबर 2021 में बंगाल विधानसभा में इसके खिलाफ एक प्रस्ताव भी पारित किया था।

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MP हाई कोर्ट ने कहा सरकार निजी मंदिर के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती

जबलपुर. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि सरकार किसी निजी मंदिर के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। अदालत ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि किसी भी मंदिर पर प्रबंधन योजना लागू करने से पहले यह तय किया जाए कि वह मंदिर सार्वजनिक है या निजी। कोर्ट ने यह आदेश सिवनी जिले के डूंडा सिवनी गांव स्थित एक शिव मंदिर के सर्वराहकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
निजी मंदिरों में सरकार की कोई भूमिका नहीं
कोर्ट ने कहा कि निजी मंदिरों में सरकार की कोई भूमिका नहीं है। निजी मंदिर से जुड़ी भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में कलेक्टर या पुजारी का नाम प्रबंधक या ट्रस्टी के रूप में दर्ज किए जाने की आवश्यकता नहीं है।
ऐसी संपत्ति देवता के नाम पर दर्ज होनी चाहिए। यह भी कहा कि यदि किसी निजी मंदिर या उससे जुड़ी संपत्ति का दुरुपयोग होता है तो मंदिर या देवता में रुचि रखने वाला कोई भी व्यक्ति, चाहे वह श्रद्धालु हो या नहीं, देवता की ओर से नेक्स्ट फ्रेंड के रूप में मुकदमा दायर कर सकता है।
याचिकाकर्ता सुमरन की ओर से लोक न्यास रजिस्ट्रार द्वारा मंदिर के प्रबंधन के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। कहा गया कि पिछले चार पीढ़ियों से उनका परिवार मंदिर की देखरेख कर रहा है। मंदिर का निर्माण वर्ष 1913 में स्व. भवानी पटेल ने कराया था और उसके रखरखाव व पुजारी के खर्च के लिए लगभग 14 एकड़ भूमि छोड़ी गई। बाद में 1962-63 में सर्वराहकार के रूप में सुमरन का नाम अधिकार अभिलेख में दर्ज किया गया। हालांकि, गांव के कुछ लोगों की शिकायत के बाद लोक न्यास रजिस्ट्रार ने मंदिर प्रबंधन के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि समिति में शामिल दो सदस्य सरकारी कर्मचारी हैं, जो धार्मिक गतिविधियों में भाग नहीं ले सकते। साथ ही बिना यह जांच किए कि मंदिर निजी है या सार्वजनिक, सरकार ने अपनी प्रबंधन योजना थोपने का प्रयास किया।
राज्य की ओर से कहा गया कि जांच में मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना पाया गया और उसे मरम्मत की आवश्यकता है। कोर्ट ने कहा कि मंदिर से जुड़ी भूमि देवता के नाम पर दर्ज होती है और कानून के अनुसार देवता को एक विधिक इकाई माना जाता है, जिसकी ओर से नेक्स्ट फ्रेंड कार्य करता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश बनाम पुजारी उत्थान एवं कल्याण समिति का हवाला देते हुए कहा कि मंदिर में स्थापित देवता ही संपत्ति के वास्तविक स्वामी होते हैं और पुजारी केवल पूजा-अर्चना तथा संपत्ति की देखरेख के लिए होता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कलेक्टर को सभी मंदिरों का प्रबंधक नहीं माना जा सकता, जब तक कि वह मंदिर सरकारी नियंत्रण में न हो। यदि किसी निजी मकान या निजी संपत्ति में देवता स्थापित हैं तो उस मंदिर की देखभाल करने वाले व्यक्ति को प्रबंधन में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

 

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ग्वालियर में कैंसर मरीज करा सकेंगे सस्ता इलाज, 50 करोड़ की लागत से विश्वस्तरीय और अत्याधुनिक मशीनें तैयार

ग्वालियर. अंचल के कैंसर मरीजों के लिए राहत की खबर है। करीब एक दशक से भी लंबा इंतजार अब खत्म होने को है। जयारोग्य चिकित्सालय के कैंसर विभाग में 50 करोड़ रुपये की लागत से चार विश्वस्तरीय और अत्याधुनिक मशीनें पूरी तरह तैयार हैं। इन मशीनों के आने से कैंसर का जो जटिल इलाज दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों के निजी अस्पतालों में 2 से 5 लाख रुपये में होता है, वह यहां महज 10 से 20 हजार रुपये में संभव होगा, आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए यह पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा। इन मशीनों के अगले माह तक आने की संभावना है, डॉक्टरों का दावा है कि आते ही इनको इंस्टॉल कराने के बाद इलाज शुरू कर दिया जाएगा। इन मशीनों का ग्वालियर तक पहुंचने का सफर किसी संघर्ष से कम नहीं रहा।
2018 तक 3 साल की कागजी कसरत के बाद फंड जारी हुआ
2015 में शासन नेग्वालियर को स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की तर्ज पर विकसित करने के लिए मशीनों की स्वीकृति दी। 2018 तक तीन साल की कागजी कसरत के बाद फंड जारी हुआ। जब टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई, तब कोविड महामारी ने पूरी दुनिया को रोक दिया, जिससे ऑर्डर अटक गए। 2024-26 में मशीनों को रेडिएशन से सुरक्षित रखने के लिए 7 करोड़ की लागत से विशेष बंकर और नई बिल्डिंग तैयार की गई।
ये चार मशीनें जो बदल देंगी कैंसर इलाज की तस्वीर
कैंसर विभाग के रेडियोथैरेपी सेक्शन में अब ये अत्याधुनिक तकनीकें उपलब्ध होंगी-
डुअल-एनर्जी लीनियर एक्सीलरेटर: यह मशीन स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना सीधे कैंसर कोशिकाओं पर सटीक वार करती है।
 सीटी स्यिुलेटर: रेडिएशन देने से पहले यह ट्यूमर का सटीक थ्रीडी डिजिटल नक्शा बनाती है, जिससे रेडिएशन की सही डोज तय होती है।
ब्रेकी थैरेपी: यह आंतरिक रेडिएशन तकनीक महिलाओं के गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स), प्रोस्टेट और ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए रामबाण मानी जाती है।
पेट सीटी : इससे शरीर के किसी भी हिस्से में कैंसर के प्रसार की शुरुआती स्टेज में ही पहचान हो सकेगी।

 

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