MP में प्रमोशन नियमों पर फिर छिड़ा घमासान, आंदोलन का एलान
भोपाल. मध्य प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर फिर से कर्मचारी सरकार के रवैए से नाखुश हैं। राज्य सरकार वर्ष 2025 के उन नियमों से पदोन्नति की प्रक्रिया प्रारंभ करने की तैयारी में है जिनके विरोध में सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने हाई कोर्ट की शरण ली थी। दरअसल नियम में आरक्षित वर्ग के लिए आरक्षित पदों पर तो उन्हें पदोन्नति दी ही जाएगी अनारक्षित पदों पर मेरिट के आधार पर भी एससी-एसटी वर्ग को अवसर देने का प्रावधान रखा है जबकि मांग यह है कि आरक्षित वर्ग अपने वर्ग में पदोन्नत हो और अनारक्षित वर्ग को उसके वर्ग में आगे बढने का अवसर मिले।
सरकार ने जो नियम तैयार किए फिर वहीं प्र्रावधान रख दिया
तमाम विचार-विमर्श के बाद सरकार ने जो नियम तैयार किए है उनमें फिर वहीं प्र्रावधान रख दिया। हालांकि यह व्यवस्था बना दी कि एक बार अनारक्षित रेणी में यदि कोई आरक्षित वर्ग का व्यक्ति पदोन्नति हो जाता है तो फिर वह अपनी श्रेणी में नहीं लौट सकेगा और आरक्षित श्रेणी का एक पद कम हो जाएगा। मगर इसका कोई लाभ अनारक्षित श्रेणी को फिलहाल नहीं होगा क्योंकि पूर्व में जो अनुसूचित जाति-जनजाति के अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नत हो चुके है वे सामान्य वर्ग के कर्मचारियों से एक-दो पद आगे है। जब पदोन्नतियां होंगी तो स्वाभाविक है कि प्रथम लाीा उन्हें ही मिलेगा तब तक सामान्य वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी सेवानिवृत्त हो जाएंगे जो इस असमानता के विरोध की लडाई लंबे समय से लड रहे है।
आंदोलन का निर्णय लिया गया
यही कारण है कि एक बार फिर प्रदेश में पदोन्नति के नियम को लेकर विरोध के स्वर उठे है। नए नियम से पदोन्नति की कवायद के बीच सामान्य, पिछडा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था सपाक्स की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक रविवार को भोपाल में हुई। इसमें पदोन्नति के नियमों में आरक्षित वर्ग समूह के पदों की गणना का प्रावधान विसंगतिपूर्ण बताकर प्रदेशव्यापी आंदोलन का निर्णय लिया गया।

