Author: Mahesh Jha

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चंबल रेत खनन पर MP, UP को चेतावनी, राजस्थान पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी

चंबल सेंक्चुरी में मौजूद घड़ियाल।

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने चम्बल अभ्यारण्य में अवैध रेत खनन के मामले में 26 मई को आदेश जारी किया है। जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राजस्थान सरकार की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई है। जबकि मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की कार्यवाही को भी नाकाफी बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अवैध उत्खनन अभी भी बेलगाम चल रहा हैं प्रशासनिक लापरवाही साफ दिखाई दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई को रिजर्व रखे गये मामले में आज विस्तृत फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों (एमपी, यूपी और राजस्थान) को नयी सख्त दिशा-निर्देश दिये और कहा है कि पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा अब और टाल-मटाल बर्दाश्त नहीं की जायेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को आगे भी निगरानी में रखा है। राज्यों में नये कॉम्पलायंस एफिडिवेट मांगे है।
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की कार्यवाही को बहुत खराब अनुपालन बताते हुए कहा है कि 2-17 अप्रैल के आदेशों का पालन लगभग नहीं हुआ है। सीसीटीवी और जीपीएस औेर निगरानी व्यवस्था अभी भी प्रारंभिक चरण में है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कई महत्वपूर्ण फैसले केवल कोर्ट के सख्त आदेश के बाद लिये गये है। जो प्रशासनिक लापरवाही दशा्रता है।
मप्र सरकार ने अनरजिस्टर्ड व्हीकल्स पर कुछ कार्रवाई बताई (मुरैना में 1641 वाहन चालान), लेकिन कोर्ट ने कहा कि केवल चालान काटकर जुर्माना वसूलना पर्याप्त नहीं। बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों को जब्त करने, मालिकों के खिलाफ कार्रवाई और मास्टरमाइंड तक पहुंचने की व्यवस्था अभी भी कमजोर है।
कोर्ट ने जो प्रमुख बातें कहीं- राजस्थान सरकार पर टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि राजस्थान में अनुपालन की स्थिति बेहद खराब है। कई महत्वपूर्ण कदम (CCTV, सर्विलांस सिस्टम) 18 से 36 महीने बाद पूरे होने वाले हैं, जो स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वीकार्य नहीं। कोर्ट ने प्रशासनिक आलस्य और लापरवाही पर गहरी चिंता जताई।
मध्य प्रदेश पर टिप्पणी
कोर्ट ने मप्र की कार्रवाई को अपर्याप्त बताया। अनरजिस्टर्ड और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर केवल चालान काटना और छोटा जुर्माना वसूलना पर्याप्त नहीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे वाहनों की जब्ती, मालिकों के खिलाफ मुकदमा और किंगपिन्स तक पहुंचना जरूरी है, अन्यथा अवैध खनन जारी रहेगा।
अनरजिस्टर्ड वाहनों पर चिंता
कोर्ट ने कहा कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों का खुलेआम चलना अवैध खनन को बढ़ावा दे रहा है। केवल जुर्माना वसूलकर छोड़ देने से माफिया प्रभावित नहीं होते। कोर्ट ने सख्त कार्रवाई (जब्ती, ब्लैकलिस्टिंग, प्रॉसेक्यूशन) के निर्देश दिए।

सभी तीनों राज्यों (राजस्थान, मप्र, यूपी) को दिए यह आदेश
फॉरेस्ट गार्ड्स और फील्ड स्टाफ की भर्ती तुरंत पूरी करें।
अनरजिस्टर्ड और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर जब्ती और मुकदमा की सख्त कार्रवाई की जाए।
CCTV, GPS ट्रैकिंग और जॉइंट पेट्रोलिंग को जल्द पूरा करें।
स्थानीय लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार योजनाएं बनाएं।
नई कॉम्पलाइंस एफिडेविट अगली सुनवाई में दाखिल करें।
NHAI को यह आदेश दिया
NH-44 के मोरेना-धौलपुर पुल की सुरक्षा के लिए CCTV लगाने और नियमित निगरानी करने के निर्देश।
पुल के आसपास 1 किमी ऊपर और 0.5 किमी नीचे खनन पूरी तरह रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन से समन्वय।

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पेयजल समस्या को लेकर पूर्व पार्षद जनसुनवाई में खाली मटका लेकर पहुंचे, 840 करोड़ रूपये की अमृत योजना पर उठाये सवाल


ग्वालियर. नगरनिगम की जनसुनवाई में वार्ड 27 के पूर्व पार्षद बृजेश गुप्ता अपने समर्थकों के साथ खाली मटका और पानी के बर्तन लेकर पहुंचे। उन्होंने इलाके में गंभीर जल संकट का आरोप लगाते हुए नगरनिगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अमृत योजना के तहत खर्च हुए 840 करोड़ रूपये पर सवाल उठाये।
पूर्व पार्षद ने बताया है कि उनके इलाके में कई दिनों से पानी नहीं आ रहा है। जिससे लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। उन्हें पानी के लिये घंटोुं इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा है कि नगर के पानी आपूर्ति के दावे तरह विफल साबित हो रहे है। बृजेश गुप्ता ने सवाल किया है कि यदि पानी की पूर्ति नहीं हो पा रहा है तो अमृत योजना के 840 करोड़ का रूपये का क्या लाभ हुआ है। यह राशि कहां गयी। इस पर अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनके इलाके में पानी की समस्या 2 दिनों के भीतर हल कर दी जायेगी।
घरेलू बिल को किया व्यवसायिक
म्ंगलवार को हुई जनसुनवाई में एक अन्य शिकायत महलगांव निवासी राजाबेटी ने दर्ज कराई है। उन्होंने अधिकारियों को बताया है कि उनके घरेलू पानी के बिल को गलीती से व्यावसायिक बिल में बदल दिया गया है। जिस वजह से उन्हें अत्याधिक राशि के बिल मिल रहे है। राजा बेटी ने अधिकारियों से इस त्रुटि को तत्काल सुधारने का आग्रह किया है। अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही बिल में बदलाव कर दिया जायेगा। जनसुनवाई के दौरान शहर की विभिन्न समस्याओं से संबंधित कई अन्य आवेदन भी प्राप्त हुए। अधिकारियों ने सभी समस्याओं का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों को उनके समाधान के लिये निर्देशित किया और आवेदकों को शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया है।

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जल्दी-जल्दी भागो अवैध बांग्लादेशियों को सीएम शुभेंदु ने चेताया

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाली की शुभेंदु सरकार अवैध बांग्लादेशियों का लेकर एक्शन मोड में आ गयी है। सीएम शुभेंदू अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को कड़ी चेतावनी दी है। शुभेंदु सरकार की तरफ से इस संबंध में पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को लिखित निर्देश और गाइडलाइंस जारी की गयी थी। सरकार ने सभी जिला अधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन होल्डिंग सेंटरों का बनाने के लिये सही जगह की पहचान करने और आगे की कार्यवाही जल्द से जल्द शुरू करने के लिये कहा है।
शुभेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को चेताते हुए कहा है कि जल्दी-जल्दी भागों। हमें इन्हें जेल में रखकर खिलाना नहीं चाहते हैं। हमें अपना पैसा इन्हें जेल में रखकर खिलाने में क्यों बर्बाद करना चाहिये। हमने पुलिस से इन्हें सीधे बांग्लादेश भेजने के लिये कह दिया है। इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार न राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकरबहुत बड़ा कदम उठाया था। राज्य सरकार ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को उनके देश वापिस भेजने क लिये विशेष होल्डिंग सेंटर बनाने के निर्देश जारी किये थे।
क्या है बंगाल की ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति?
बंगाल में बीजेपी सरकार की नई ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति के बीच स्टेट बॉर्डर के कई पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े समूह इकट्ठा होने लगे है।  उत्तरी 24 परगना और मालदा से आ रही तस्वीरों और वीडियो से पता चलता है कि राज्य का घुसपैठ रोधी अभियान अब सिर्फ सियासी बयानबाजी से आगे बढ़कर प्रशासनिक कार्रवाई का रूप ले चुका है।  बता दें कि बीजेपी ने इस साल हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राज्य से अवैध प्रवासियों को निकालने का वादा किया है। अमित शाह ने अपने एक संबोधन में साफ तौर पर कहा था कि जिस तरह बीजेपी ने असम में घुसपैठ को पूरी तरह से खत्म किया, उसी तरह पार्टी बंगाल में भी अवैध घुसपैठ पूरी तरह से खत्म कर देगी. अब राज्य में बीजेपी की सरकार कायम होने के बाद, पार्टी अपने उस वादे को पूरा करने में जुट गई है।
उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर मंगलवार सुबह 100 से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा है।   ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते थे। ये लोग कथित तौर पर बंगाल के अलग-अलग इलाकों में अवैध रूप से रह रहे थे। विदेशी नागरिकों को देश से निकालने और उनके लिए होल्डिंग सेंटर बनाने के संबंध में सरकार की हालिया घोषणाओं के बाद वे चेकपॉइंट पर पहुंचे ।

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ताऊ ने नाबालिग बच्ची के मुंह में ठूंसा रूमाल और हाथ-पैर बांधकर किया रेप

ग्वालियर. 11 वर्षीय छात्रा से उसके ताऊ ने रेप किया है। आरोपी ने मासूम को जबरन कमरे में खींचा और मुंह में रूमाल ठूंसकर हाथ-पैर बांध दिये और इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया है।घटना 13 मई 2026 को झांसी रोड़ इलाके की है। मासूम अपने नाना-नानी के पास रहती है। घटना से 2 दिन पूर्व मां के पास आई थी। परिवार ने 12 दिन तक मामला दबाने का प्रयास किया। पेट में दर्द होने पर सोमवार को मामला झांसी रोड थाने पहुंचा। पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने आरोपी ताऊ को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद से ही मासूम दहशत में है।
न्निहाल में रहती है। भाई का जन्मदिन मनाने के लिये रूकी थी। शिकायत के मुताबिक झासी रोड इलाके में रहने वाले परिवार की 11 वर्षीय बेटी 6वीं की छात्रा है। छात्रा बचपन से अपने नाना-नाजी के पास रहती है। 11 मई 2026 को वह अपने छोटे माई के जन्मदिन समारोह में शामिल होने के लिये माता-पिता के घर आई थी। जन्मदिन के बाद वह कुछ दिन वहीं रूक गयी थी।
बिजली गुल हुई, भाई को जगाने गई थी
वारदात 13 मई की रात करीब 8 बजे की है, जब इलाके की बिजली गुल हो गई थी। गर्मी के कारण परिवार के लोग घर के बाहर बैठे थे। इसी दौरान मां ने बेटी को अंदर सो रहे छोटे भाई को जगाकर लाने भेजा। बच्चा तो बाहर आ गया, लेकिन छात्रा नहीं लौटी।
पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी ताऊ को पकड़ लिया
पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया और आरोपी के खिलाफ बलात्कार, पॉक्सो एक्ट और जान से मारने की धमकी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया। थाना प्रभारी ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम बनाई। घेराबंदी कर आरोपी ताऊ को सोमवार को उसके संभावित ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।

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फिर ले रही मोहन सरकार 2800 करोड़़ रूपये का कर्ज, RBI के ई-कुबरे प्लेटफार्म से सिक्योरिटी की करेगी नीलामी

भोपाल. मध्चप्रदेश की मोहन यादव सरकार मई के अंतिम सप्ताह में एक बार फिर से बड़ा कर्ज लेने जा रही है। राज्य सरकार भारतीय रिजव्र बैंक के माध्यम से 2800 करोड़ रूपये काकर्ज 2 अलग-अलग किश्तों में उठा रही है। इसमें 1600 करोड़ रूपये और 1200 करोड़ रूपये की राशि शामिल है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह चौथी बार है। जब सरकार बाजार से कर्ज ले रही है। इसके साथही इस वित्तीय वर्ष में अभी तक लिये गकये कुल कर्ज का आंकडा 9200 करोड़ रूपये तक पहुंच गया है।
वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक राज्य सरकार यह कर्ज मध्यप्रदेश राज्य विकास ऋण के तहत आरबीआई के माध्यम से बॉंड जारी कर ले रही है। पहली राशि 1600 करोड़ रूपये की होगी। जिस पर 7.64 प्रतिशत ब्याज दर तय की गयी है। वहीं दूसरी राशि 1200 करोड़ रूपये की होगी। जिस पर 7.83 प्रतिशत ब्याज देना होगा। दोनो कर्ज की अदायगी सरकार 6 माह की किश्तों में अप्रैल और अक्टूबर में करेगी।
2034 और 2048 तक के लिए कर्ज
सरकार द्वारा लिया जा रहा पहला कर्ज वर्ष 2034 तक की अवधि के लिए रहेगा, जबकि दूसरा कर्ज 2048 तक यानी 22 वर्षों की अवधि के लिए लिया गया है। दोनों ऋणों के लिए सिक्योरिटी की नीलामी आरबीआई द्वारा कराई जाएगी और भुगतान प्रक्रिया 27 मई 2026 तक पूरी की जाएगी।
प्रदेश सरकार ने इस वित्त वर्ष में अप्रैल से ही कर्ज लेना शुरू कर दिया था। इससे पहले के वर्षों में आमतौर पर मई से कर्ज उठाने की प्रक्रिया शुरू होती थी। अप्रैल में सरकार ने दो बार चार किस्तों में 4600 करोड़ रुपए का ऋण लिया था। इसके बाद मई में पहले 1800 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया और अब 2800 करोड़ रुपए का नया ऋण उठाया जा रहा है।

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अगले महीने से लग सकता है महंगाई का झटका

भोपाल. ईंधन के दामों में होने वाली वृद्धि के साथ ही बाजार में महंगाई बढ़ने का सिलसिला भी जल्द शुरू होगा। उपभोक्ता वस्तुओं के दाम बढ़ाने के लिए उत्पादक और व्यापारी लगभग तैयारी कर चुके हैं। अभी इंतजार सिर्फ इसलिए हो रहा है कि यह तय किया जा सके कि दाम किस स्तर तक बढ़ाने की जरूरत है। दरअसल, दस दिनों में डीजल-पेट्रोल के दाम चार बार बढ़ चुके हैं। व्यापारियों के अनुसार दाम अभी और बढ़ेंगे। ऐसे में अंतिम स्तर ताजा बढ़ोतरी का क्या होगा यह समझने के बाद बाजार में कीमतों में वृद्धि की जाएगी। ईंधन के दाम में वृद्धि होने का सबसे पहला असर माल भाड़े पर होता है। चार बार में डीजल में करीब आठ रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है। इसके बाद भी अभी ट्रांसपोर्टरों ने माल भाड़े में वृद्धि नहीं की है।
थोड़े दिन रुककर ही माल भाड़ा बढ़ाने का निर्णय
ट्रांसपोर्टरों के अनुसार ईंधन की वृद्धि अभी तो कम है आशंका है कि डीजल करीब 10 रुपये तक महंगा हो सकता है। ऐसे में थोड़े दिन रुककर ही माल भाड़ा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। क्योंकि बार-बार भाड़ा बढ़ाना भी व्यवहारिक नहीं होगा। लिहाजा एक बार में ही भाड़ा इस अनुपात में बढ़ाया जाएगा जिससे ईंधन के दामों में हुई कुल वृद्धि की भरपाई की जा सके।
10 प्रतिशत बढ़ेगी कीमत
अहिल्या चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल कहते हैं कि ईंधन के दामों में बढ़ोतरी के बाद हर तरह की वस्तुओं की कीमत बढ़ेगी। अभी दाम लगभग स्थिर दिख रहे हैं। इसके दो कारण हैं एक तो माल भाड़ा अभी नहीं बढ़ा। दूसरी ओर अधिक मास होने के कारण वैवाहिक मुहूर्त थम गए हैं। तेज गर्मी और वैवाहिक मुहूर्त नहीं होने से बाजार में ग्राहकी सुस्त है। लिहाजा, अभी पुराने स्टाक पर व्यापारी भी भाव नहीं बढ़ा रहे। जैसे ही भाड़ा बढ़ेगा और वैवाहिक ग्राहकी बाजार में नजर आने लगेगी। वैसे ही तमाम वस्तुओं के दाम भी बढ़ने लगेंगे। शकर-अनाज-तेल से लेकर तमाम एफएमसीजी उत्पादों के दामों में 5 से 10 प्रतिशत की वृद्धि संभावित है।

 

 

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CNG ₹2 तक महंगी, दिल्ली में कीमत ₹83.09 किलो

नई दिल्ली. ईरान जंग के बीच कंप्रेस्ड नेचुरल गैस के दाम पिछले दो हफ्तों के भीतर चौथी बार बढ़ गए हैं। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने आज मंगलवार 26 मई को सीएनजी 2 प्रति किलोग्राम महंगी कर दी है। दिल्ली-एनसीआर सहित कई शहरों में ये दाम बढ़ाए गए हैं।
दिल्ली और एनसीआर के शहरों में अब यह होंगे नए रेट्स
दिल्ली में सीएनजी 81.09 प्रति किलो से बढ़कर अब 83.09 प्रति किलो हो गई है।
नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में सीएनजी के लिए 91.70 देने होंगे।
गुरुग्राम में सीएनजी की कीमत बढ़कर 88.12 प्रति किलोग्राम कर दी गई है।
पेट्रोल-डीजल के दाम महीने में चौथी बार बढ़े
तेल कंपनियों ने 25 मई को पेट्रोल 2.61 और डीजल 2.71 प्रति लीटर महंगा कर दिया। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत 102.12 और डीजल की कीमत 95.20 हो गई है।

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कृषि जमीन-बिना मायनिंग परमिशन के 250 फीट अवैध खनन कर डाला, मायनिंग विभाग सोता रहा

खनन के बाद दूर से दिखाई देता गड्‌ढा। - Dainik Bhaskar

ग्वालियर. बिलौआ इलाके में पर्यावरण और कानून के नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रूपये की खनिज चोरी का एक बड़ा घोटाले का खुलासा हुआ है। एक क्रेशर संचालक ने बिना किसी अनुमति के निजी व कृषि जमीन पर 200 फीट से अधिक गहरा खोदकर अवैध उत्खनन कर करोड़ों रूपये का पत्थर साफ कर दिया है।
इस भ्रष्टाचार में हैरान करने वाली बात यह है कि बिना अनुमति के इतना बड़ा डेथ ट्रैप का (मौत का कुआ) बनाने के बावजूद खनिज विभाग सोता रहा और अब उसी खुदी हुई जमीन को बैध करने के लिये बाकायदा ‘‘लोक सुनवाई’’ तक की प्रक्रिया शुरू करा दी गयी है। हद तो तब हो गयी जब बिना मौके पर भौतिक निरीक्षण किये सैद्धांतिक अनुमति तक मिल गयी। जब इस मामले की शिकायत कलेक्टर ग्वालियर के पास पहुंची। तब जाकर खनिज विभाग में हड़कम्प मच गया। अब विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अजीबो-गरीब और हास्यास्पद दलीलें दे रहे है। कोई गलती से खुदाई होने की बात कहते हुए भ्रष्टाचार पर पर्दा डालते हुए नजर आ रहा है।
3 सर्वे नम्बर से खोदा गया पत्थर
ऐसा पता चला है कि मेसर्स राजेन्द्रप्रसाद खंडेलवाल द्वारा ग्राम बिलौआ के 3 प्रमुख सर्वे नम्बरों पर पत्थर (गिट्टी) के उत्खनन की नयी अनुमति मांगी गयी है। प्रभावित सर्वे नम्बर 3578, 3575, 1, 2 और 3570, 1 कुल रकबा 2.315 हैक्टर हैं। चौंकाने वाला सच यह है कि इस जमीन पर मायनिंग की पर्यावरणीय स्वीकृति की फाइल अभी पास भी नहीं हुई थी। लेकिन क्रेशर संचालक ने यहां कई महीनों से पहले ही भारी मशीनें उताकर लगभग 200-250 फीट गहरे गड्ढे कर दिये गये है। जब शिकायत के बाद इन सर्वे नम्बरों की सैटेलाइट इमेज निकाली गयी तो साफ दिखाई कि वहां लम्बे समय से अवैध उत्खनन जारी था और करोड़ों का काला पत्थर गायब किया जा चुका था।
रॉयल्टी का 30 गुना जुर्माना दबाने की साजिश
खनिज नियमों के मुताबिक, यदि कोई बिना अनुमति के अवैध उत्खनन करता है, तो पकड़े जाने पर कुल खनिज और रॉयल्टी का 30 गुना जुर्माना वसूलने का प्रावधान है। यह राशि करोड़ों रुपये बैठती है। बिलौआ के इस खेल में अधिकारियों ने क्रेशर संचालक को फायदा पहुंचाने के लिए न तो कोई जुर्माना लगाया और न ही खदान सील की। उल्टा, पर्यावरण विभाग के साथ मिलकर गुपचुप तरीके से फाइल आगे बढ़ा दी गई। अधिकारी मौका मुआयना करने भी पहुंचे, लेकिन किसी ने यह नहीं लिखा कि “जिस खदान की अनुमति मांगी जा रही है, वह तो पहले ही पूरी खुदी पड़ी है।”

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MP-CM मोहन यादव अब इलेक्ट्रिक कार में करेंगे सफर, ड्राइवर्स की ट्रेनिंग जारी, काफिले में शामिल होगी EV

फाइल फोटो... - Dainik Bhaskar

भोपाल. पीएम नरेन्द्र मोदी की ईधन बचाने की अपील पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब इलेक्ट्रिक कार से यात्रा करेंगे। मुख्यमंत्री के लिये स्टेट गैरेज ने महिन्द्रा की नयी इलेक्ट्रिक कार खरीदी गयी है।
ड्राइवर्स की ट्रेनिंग के बाद ही काफिले में शामिल होगी ईवी
स्ीएम के लिये खरीदी गयी नयी इलेक्ट्रिक कार में जेड प्लस सिक्योरिटी प्राप्त वीआईपी के लिये तय प्रोटोकॉल के हिसाब से बदलाव किये जायेंगे। इलेक्ट्रिक कार में सेफ्टी मॉडिफिकेशन कराये जा रहे है। सीएम हाउस में कार की चार्जिंग के लिये प्वॉइंट बनाया जायेगा। नयी इलेक्ट्रिक कार चलाने वाले ड्राइवर्स भी ट्रेंड किये जा रहे है। सेफ्टी प्रोटोकॉल के हिसाब से मॉडिफिकेशन और ड्राइवर्स की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद2-3 दिनों में सीएम इसी इलेक्ट्रिक कार से यात्रा करते हुए दिखाई देंगे।
मुख्य खासियतें
पावर: 228 bhp (59 kWh) से 282 bhp (79 kWh) तक
टॉर्क: 380 Nm
0-100 km/h: सिर्फ 6.8 सेकंड में
टॉप स्पीड: 200 km/h
चार्जिंग: 20 मिनट में 20% से 80% (180 kW DC फास्ट चार्जर से)
बैटरी वारंटी: 8 साल / 1.6 लाख किमी
बूट स्पेस: 663 लीटर (बहुत बड़ा)
ग्राउंड क्लियरेंस: 207 mm
सेफ्टी: 5-स्टार एक्सपेक्टेड, ADAS फीचर्स
खास फीचर्स: पैनोरमिक सनरूफ, 360° कैमरा, वेंटिलेटेड सीट्स, प्रीमियम साउंड सिस्टम, इंटेलिजेंट ड्राइविंग मोड्स
रेंज (माइलेज)
59 kWh बैटरी: 542 किमी (ARAI)।
79 kWh बैटरी: 656 किमी (ARAI)- सबसे ज्यादा रेंज।
रियल वर्ल्ड रेंज: शहर में AC के साथ 450-550 किमी आसानी से मिल जाती है।

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ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर शुरू होगा डिपार्चर अलर्ट सिस्टम, ट्रेन छूटने से पहले बजेगा

ग्वालियर. रेलवे सफर को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए रेलवे स्टेशन पर एक बडा बदलाव होने जा रहा है। स्टेशन पर अब ट्रेन रवाना होने से ठीक पहले एक विशेष डिपार्चर अलर्ट सिस्टम बजाया जाएगा। झांसी स्टेशन की तर्ज पर अब ग्वालियर में भी एस आधुनिक सिस्टम को अपडेट किया जा रहा है। इस सिस्टम के शुरू होने से जैसे ही प्लेटफॉर्म पर ट्रेन तैयार है का अनाउंसमेंट गूंजेगा इससे यात्री तुरंत सतर्क हो जाएंगे। अभी तक अक्सर देखा गया है कि लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव के दौरान यात्री पानी लेने या खाने-पीने का सामान खरीदने के लिए प्लेटफॉर्म पर उतरते हैं। कई बार ट्रेन अचानक चल देती है जिससे या तो यात्रियों की ट्रेन छूट जाती है या फिर ट्रेन में चढने के चक्कर में वे हादसों का शिकार हो जाते है।
हर प्लेटफार्म के लिए अलग अनाउंसमेंट सिस्टम
रेलवे स्टेशन के चारों ही प्लेटफार्म से ट्रेनों का आना जाता होता है। ऐसे में अनाउंसमेंट सिस्टम में चारों ही प्लेटफार्म की ट्रेनों की एंट्री की जा रही है, जिससे किसी भी प्लेटफार्म पर ट्रेन आने के बाद जब जाएगी तो उस प्लेटफार्म पर ट्रेन का नाम और अलर्ट कर दिया जाएगा।

 

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