Author: Mahesh Jha

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MP में अब अवैध कॉलोनियों में हो सकेगी रजिस्ट्री

ग्वालियर. अवैध कॉलोनियों में जमीन और मकानों की रजिस्ट्री को लेकर बडा फैसला सामने आया है। राज्य शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिला प्रशासन या नगर निगम अवैध कॉलोनियों के नाम पर रजिस्ट्री नहीं रोक सकते और न ही एनओसी की अनिवार्यता थोप सकते है। वाणिज्य कर विभाग के अवर सचिव द्वारा जारी आदेश में ऐसे सभी प्रशासनिक प्रतिबंधों को विधि-विरूद्ध बता तत्काल प्रभाव से निष्प्रभावी किया है। आदेश में कानूनी स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि किसी भी दस्तावेज का पंजीयन उस संपत्ति के स्वत्व का अंतिम प्रमाण नहीं होता है।
कलेक्टर-कमिश्नर को ये 4 प्रमुख निर्देश
पंजीयन अधिकारी न बनें जांचकर्ता- पंजीयन अधिनियम के तहत सब-रजिस्ट्रार का काम केवल दस्तावेज लिखाने वालों की पहचान और आपसी सहमति की जांच करना है। कॉलोनी वैध है या अवैध, इसकी विस्तृत जांच का भार पंजीयन अधिकारी पर डालना कानून के खिलाफ है।
इनकार के नियम बेहद सीमित- मप्र पंजीयन नियम में जिन विशिष्ट और गिने-चुने कारणों का उल्लेख है केवल उन्हीं के आधार पर रजिस्ट्री से इनकार किया जा सकता है। इसके अलावा किसी अन्य प्रशासनिक आदेश के आधार पर रजिस्ट्री नहीं रोकी जा सकती।
मप्र बनाम पूरन सिंह नरवरिया, 2014- इसमें सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि अवैध निर्माण या अवैध कॉलोनाइजेशन के मामले की जांच करना पंजीयन विभाग के अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र से बिल्कुल बाहर की बात है।
नियम 23 का गलत इस्तेमाल बंद हो- मप्र नगरपालिका नियम 2021 के नियम 23 का हवाला देकर जो एनओसी मांगी जा रही है वह केवल एक निश्चित कट-ऑफ तिथि से पूर्व की अवैध कॉलोनियों के लिए है। इसका सामान्यीकरण कर हर रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगाना गलत है।

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ग्वालियर में सराफा व्यापारी ने फांसी लगाई, मौत

ग्वालियर. आर्य नगर इलाके में देर शाम को सदर बाजार के एक सराफा कारोबारी ने फांसी लगा ली। पति को फंदे पर लटा देख पत्नी ने बेटे को जानकारी दी। बेटा अपनी दुकान से दौडता हुआ घर आया। पिता फंदे पर लटका देख तत्काल उसने चाकू से फंदा काटा और हॉस्पिटल लेकर गया। वहां डॉक्टर ने कारोबारी को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने जांच शुरू की
जानकारी के अनुसार घटना स्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को निगरानी में लेकर जांच शुरू कर दी है। मुुरार थाना पुलिस ने बताया कि आर्य नगर निवासी श्रीकृष्ण सोनी की मुरार सदर बाजार में सोने-चांदी की दुकान है। शाम करीब 4 बजे उनका 28 वर्षीय बेटा आशुतोष सोनी रोज की तह दुकान पर बैठा हुआ था। इसी दौरान उसके मोबाइल पर मां अर्चना सोनी का फोन आया। मां फोन पर बिलख-बिलख कर रो रही थीं और उन्होंने आशुतोष को तुरंत घर आने के लिए कहा। मां को इस हाल में देखकर आशुतोष घबरा गया औ दुकान छोडकर तुरंत घर के लिए भागा।
चाकू से तार काटकर शव को नीचे उतारा
बता दें कि जब बेटा घर पहुंचा तो मां अर्चना औ दादी लक्ष्मी सोनी जोर-जो से रो रही थीं। मां ने रोते हुए बताया कि उसके पिता ने अंदर कमरे में फांसी लगा ली है। आशुतोष भागकर कमरे में गया तो देखा कि उसके पिता श्रीकृष्ण सोनी छत के कुंदे से लोहे का तार का फंदा बनाकर लटके हुए थे। उसने तुरंत फंदे को खोलने का प्रयास किया लेकिन तार कस जाने के कारण वह हाथ से नहीं खुला। इसके बाद आशुतोष ने रसोई से चाकू लाकर तार को काटा और पिता के शव को नीचे उतारा। उस वक्त पिता की नब्ज हल्की चल रही थी और वह बेहोश थे।
पुलिस ने शव का पंचनामा बनाकर उसे पोस्टमार्टम हाउस भेजा
आशुतोष तुरंत अपने परिजनों की मदद से अचेत पिता को कार में डालकर इलाज के लिए गोला का मंदिर स्थित बिरला अस्पताल लेकर भागा। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद श्रीकृष्ण सोनी कोा मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल लाने से कुछ देर पहले ही वह दम तोड चुके थे। घटना की सूचना मिलते ही मुरार थाना पुलिस की टीम अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने शव का पंचनामा बनाकर उसे पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया है। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है जिससे आत्महत्या के कारणों को लेकर रहस्य गहरा गया है। पुलिस इसी थ्योरी पर काम कर रही है।

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सेवानिवृत्ति का साल, 7 माह में IAS, IPS और IFS के 25 अधिकारी, आईजी ग्वालियर अरबिंद सक्सेना 31 जुलाई को होंगे रिटायर

भोपाल. मध्यप्रदेश मे साल 2026 में ब्यूरोक्रेसी में कई बड़े बदलाव और फेरबदल देखने को मिलने वाले है। अभी तक 5 माह में तीनों अखिल भारतीय सेवाओं आईएएस, आईपीएस और आईएफएस में सीनियर स्तर के 8 अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके है। जबकि अगले 7 माह में बड़े पदों पर बैठे 25 और अधिकारी सेवानिवृत्त हो जायेंगे।
गौरतलब है कि अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के लिये सेवानिवृत्त की आयु 60 वर्ष निर्धारित है। आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों की ग्रेडेशन सूची के अनुसार 2026 में सीनियर पदों पर मौजूद कुल 33 अधिकारियों की जन्मतिथि का वर्ष 1966 है जो इसी साल किसी न किसी माह में सेवानिवृत्त हो रहे है।
इन सेवानिवृत्तियों से प्रदेश के कई अहम विभागों, पुलिस जोन और वन वृत्तों में नेतृत्व का खालीपन आयेगा। जिसकी भरपाई के लिये प्रशासनिक सर्जरी की आवश्यकता होगी। मई से दिसंबर के बीच 12 सीनियर आईएएस अधिकारी अपनी पारी समाप्त करेंगे। वहीं, पुलिस महकमे में भी 5 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सेवामुक्त होंगे। जिनमें स्पेशल डीजी से लेकर आईजी स्तर के अधिकारी भी शामिल है। इसके बाद तीसरी अहम अखिल भारतीय वन सेवा आईएफएस के 8 अधिकारी अगले 7 माह में सेवानिवृत्त होंगे। इनमें पीसीसीएफ से लेकर सीसीएफ और सीएफ लेवल के सीनियर अधिकारी शामिल है।
इसी साल होंगे सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी
भोपाल आईजी संजय तिवारी, ग्रामीण भोलपा 30 जून, संजीव शमी स्पेशल डीजी, टेलीकम्यूनिकेशन 30, एनसीआरबी के निदेशक आलोक रंजन, आईजी ग्वालियर अरबिंद सक्सेना 31 जुलाई, एफएसएल के डायरेक्टर शशिकांत शक्ला 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होंगे।
वर्ष 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले आईएएस अधिकारी
केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति के अल्पसंख्यक आयोग की सचिव अलका उपाध्याय का कार्यकाल इसी वर्ष समाप्त हो रहा है। 31मई को खादी ग्रोमोद्योग के एमडी मालसिंह भयडिया, पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव, बालाघाट एडीएम जीएस धुर्वे, चंबल आयुक्त सुरेश कुमार 30 सितम्बर, केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर इंटरस्टेट काउंसिल के सचिव आशीष श्रीवास्तव 31 अक्टूबर, लोकायुूक्त सचिव अरूणा गुप्ता 31 अक्टूबर शहडोल कलेक्टर केदार सिंह 31 अक्टूबर, सीएमओ के सचिव चंद्रशेखर बालिंवे 31 अक्टूबर, नर्मदा घाटी विकास के अपर सचिव रवीन्द्र कुमार चौधरी 30 नवंबर, आयुष विभाग के सचिव संजयमिश्रा 31 दिसम्बर, राजस्व मंडल के सदस्य ललित दाहिमा 31 दिसम्बर को सेवानिवृत्त होंगे।
आईएफएस… 8 वरिष्ठ अफसर
पुरुषोत्तम धीमान पीसीसीएफ (विकास) 31 मई {आसित गोपाल विशेष सचिव- टेक्सटाइल मंत्रालय (केंद्रीय प्रतिनियुक्ति)31 जुलाई {एचयू खान एमडी वन विकास निगम 31 जुलाई {ब्रिजेंद्र झा सीसीएफ, वन विकास निगम 31 अगस्त {आलोक पाठक सीएफ, उज्जैन 31 अगस्त {अनिल चोपड़ा सीएफ, लोक वानिकी 31 अक्टूबर {अतुल कुमार मिश्रा सचिव वन, मंत्रालय 31 अक्टूबर {हेमंत कुमार रायकवार डीएफओ, ओबेदुल्लागंज 30 नवंबर।

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TMC 100 से अधिक पार्षदों ने दिया इस्तीफा, BJP की बैठक में 6 विधायकों के साथ पहुंची सांसद काकोली

कोलकाता. बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के अन्दर हलचल जारी है। टीएमसी सांसद काकोली घोष ने खुलकर असंतोष जताना शुरू कर दिया है। जबकि TMC  नियंत्रित नगर निकायों में चल रही अंदरूनी कलह के कारण से सामूहिक इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है। इस दौरान मंगलवार को काकोली समेत पार्टी के 6 विधायकों ने बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया है।
बंगाल क राजनीतिक गलियारों में इसके कई मायने निकाले जारहे है। काकोली ने हालही में जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे वक्त में राज्य की भाजपा सरकार के अधिकारिक मंच पर उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। काकोली के अलावा इस बैठक में देगंगा से टीएमसी विधायक अनीसुर रहमान विश्वास, स्वरूपनगर की बीमा मंडल, हरौआ के मोहम्मद अब्दुल मतीन और बसीरहाट इलाके के 3 अन्य विधायक भी शामिल हुए है।
बता दें कि बीते कुछ दिनों में विभिन्न नगरपालिकाओं के करीब 100 पार्षद इस्तीफा दे चुके है।  इस राजनीतिक उथल-पुथल ने बीजेपी के लिए उन नगर निकायों में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका खोल दिया है, जो अब तक बड़े पैमाने पर टीएमसी के नियंत्रण में रहे है।
ये संकट इतना गंभीर हो गया है कि अगले साल होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले ही कई नगरपालिका बोर्ड भंग किए जा सकते है। ऐसी अटकलें तेज हैं कि ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम ने भी पद छोड़ने की इच्छा जताई है. हालांकि हाल ही में ममता बनर्जी ने पार्षदों से इस्तीफा न देने की अपील की थी लेकिन बंगाल के नगर निकायों में उथल-पुथल के संकेत लगभग हर दिन सामने आ रहे है।  बता दें कि 1998 में कांग्रेस से अलग होकर पार्टी बनाने के बाद से यह तृणमूल कांग्रेस के सामने आया सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है।  पहले भी कई मौकों पर ममता बनर्जी पार्टी को एकजुट रखने वाली मजबूत कड़ी साबित हुई थीं, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग दिखाई दे रही है।

 

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श्मशान पर अतिक्रमण से मुक्ति के लिये चक्काजाम, दंबगों के कब्जे से भड़के ग्रामीण

ग्वालियर. विक्की फैक्ट्री तिराहे पर मंगीवार की दोपहर भीषण गर्मी के बीच उस वक्त तनाव की स्थिति बन गयी। जब कोठी गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने शव सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि गांव के पारंपरिक मुक्तिधाम पर रसूखदार लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। जिसकी वजह से अंतिम संस्कार के लिये जगह नहीं बची थी। चक्काजाम के चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लम्बी कतारें लग गयी और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जगह नहीं बची अंतिम संस्कार के लिये
विक्की फैक्ट्री के पास स्थित कोठी गांव निवासी 80 वर्षीय गणेशराम बघेल का निधन हो गया था। परिजन और ग्रामीण जब शव को अंतिम संस्कार के लिये मुक्तिधाम लेकर पहुंचे तो वहां अतिक्रमण की वजह से पर्याप्त जगह नहीं मिली। ग्रामीणों का कहना था कि इस समस्या की शिकायत पहले भी कई बार प्रशासन की जा चुकी है। लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई हे। इससे नाराज ग्रामीण शव को लेकर विक्की फैक्ट्री तिराहे पहुंचे औरमुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया।
अतिक्रमण हटाने के आश्वासन पर खत्म हुआ चक्काजाम
शव सड़क पर रखे होने और बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई का भरोसा दिलाया। एसडीएम अतुल सिंह ने ग्रामीणों से चर्चा कर आश्वासन दिया कि राजस्व और नगर निगम की संयुक्त टीम से जमीन का सीमांकन कराया जाएगा। साथ ही मुक्तिधाम की जमीन पर हुए अवैध कब्जे को हटाकर वहां बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया जाएगा। प्रशासन से लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त किया और शव को अंतिम संस्कार के लिए ले गए। इसके बाद पुलिस ने यातायात व्यवस्था बहाल कराई।

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ग्वालियर में सट्टा सेंटर चलाने वाले दुबई-श्रीलंका कनेक्शन, देवेंद्र यादव ने 8 बुकियों को अपने ही घर में बंधक बनाकर रखा

ग्वालियर. श्रीलंका और दुबई से ऑपरेट होने वाले 100 पैनल डॉटऑनलाइन सट्टा ऐप के लोकल सेंटर का जो खौफनाक सच सामने आया है, उसने पुलिस को भी चौंका दिया है। ग्वालियर के शिवनगर में सट्टा सेंटर चलाने वाले पवन यादव और देवेंद्र यादव ने बिहार-यूपी से बुलाए गए 8 बुकियों को अपने ही घर में बंधक बनाकर रखा था। पुलिस रिमांड में बुकियों ने रोते हुए खुलासा किया कि उन्होंने पिछले डेढ़ महीने से सूरज की धूप तक नहीं देखी है। उन्हें कमरे में ताले के अंदर रखा जाता था और टॉयलेट जाने के लिए भी देवेंद्र के परिजन बारी-बारी से पहरेदारी करते हुए अपनी नजरों के सामने ले जाते थे। क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में आए बुकियों ने बताया कि सरगना पवन और देवेंद्र रोजाना लाखों रुपये कमा रहे थे। यदि कोई खिडक़ी से बाहर झांकने की कोशिश करता तो उसे जान से मारने की धमकी देते। दांव जीतने वाले ग्राहकों को पैसा वापस करने के बजाय, आरोपी मुनाफा अपने परिजनों के खातों में ट्रांसफर कर उनके साथ धोखाधड़ी करते थे।
यह है पूरा मामला
बीते रविवार को क्राइम ब्रांच ने शिवनगर (मोतीझील) में धर्मपाल यादव के मकान पर दबिश देकर ऑनलाइन सट्टा पकड़ा था। मौके से मिथुन, पुनीत, चंदन, संतोष, रिशु, गोलू, सागर और विकास (सभी बिहार-आगरा निवासी) को सट्टा लगाते गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 6 को जेल भेज दिया गया है। फिलहाल मुख्य सरगना पवन, देवेंद्र और उनके दो खास गुर्गे विकास और रिशु 3 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं।
15 दिन की ट्रेनिंग, इंस्टाग्राम से भर्ती
गिरफ्तार बुकी विकास गुप्ता ने पुलिस के सामने कबूल किया कि उसने और उसके साथियों ने सूरत में ऑनलाइन सट्टा बुङ्क्षकग का 15 दिन का बकायदा ट्रेङ्क्षनग कोर्स किया था। इसके बाद उन्होंने इंस्टाग्राम पर बायोडाटा अपलोड किया, जिसे देखकर आरोपियों ने इन्हें नौकरी पर रखा। शिवनगर के इस मकान में बेहद गोपनीय तरीके से काम हो रहा था, जिसकी भनक पड़ोसियों तक को नहीं थी। इस साम्राज्य का अंत सटोरियों के ही एक करीबी राजदार के खुफिया मैसेज से हुआ, जिसने पुलिस को इस गुप्त ठिकाने का पता दे दिया।
जांच में खुलासा, मुख्य आरोपी देवेंद्र का पूरा परिवार अवैध कारोबार में लिप्त
जांच में खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपी देवेंद्र उर्फ देवा का पूरा परिवार इस अवैध कारोबार में लिप्त था। देवेंद्र सट्टे की काली कमाई को अपनी मां भगवती यादव और भाई चंद्रपाल यादव के बैंक खातों में खपा रहा था। पुलिस को आरोपियों के पास से 47 एटीएम कार्ड मिले हैं। अब तक 38 बैंक खातों की डिटेल मांगी गई है, जिनमें शुरुआती तौर पर ढाई करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। पुलिस के अनुसार, इस रैकेट के लिए सबसे ज्यादा ’म्यूल’ (किराए के) बैंक खाते दतिया जिले से खरीदे गए थे।

 

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17 हजार घरों को मिलेगी बेहतर बिजली, जून तक बन जाएगा रानीताल सब स्टेशन

जबलपुर. ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था मजबूत करने के लिए रिवेम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत जबलपुर ग्रामीण में पांच नए सब स्टेशन बनाए जा रहे हैं। करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इन सब स्टेशनों के शुरू होने से लगभग 17 हजार परिवारों को बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली मिल सकेगी। इनमें से चार सब स्टेशन बनकर शुरू हो चुके हैं, जबकि सिहोरा के रानीताल क्षेत्र में बन रहा सब स्टेशन अभी निर्माणाधीन है।
5 एमवीए क्षमता के पांच सब स्टेशन
जबलपुर ग्रामीण के अधीक्षण यंत्री खुशियाल शिववंशी ने बताया कि उपभोक्ताओं को पर्याप्त वोल्टेज और निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के उद्देश्य से पांच एमवीए क्षमता के पांच सब स्टेशन तैयार किए जा रहे हैं। ये सब स्टेशन मुरई, देवरी पीपल, निगरी, झांसी बेला और सिहोरा के रानीताल क्षेत्र में बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि रानीताल को छोड़कर बाकी सभी सब स्टेशन बन चुके हैं और वहां से बिजली आपूर्ति भी शुरू कर दी गई है।
रानीताल सब स्टेशन का निर्माण कार्य धीमा
रानीताल सब स्टेशन का निर्माण कार्य अपेक्षाकृत धीमी गति से चल रहा है। विभाग के अनुसार जिस कंपनी को निर्माण का ठेका दिया गया था, उसने स्थानीय स्तर पर काम कराया, जिसके कारण समय पर कार्य पूरा नहीं हो सका। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि जून माह तक यह सब स्टेशन भी तैयार हो जाएगा।
ग्रामीण इलाकों की समस्याओं में आएगी कमी
नए सब स्टेशन बनने से ग्रामीण इलाकों में लो वोल्टेज, बार-बार बिजली गुल होने और ओवरलोडिंग जैसी समस्याओं में काफी कमी आएगी। किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर बिजली मिलेगी, वहीं घरेलू उपभोक्ताओं को भी स्थिर वोल्टेज का लाभ मिलेगा।

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MP में 1 प्रति किलो महंगी हुई CNG, 10 दिन में दूसरी बार रेट बढ़े

भोपाल. ईरान जंग के बीच मध्य प्रदेश में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस यानी, सीएनजी के रेट 10 दिन में दूसरी बार बढ़े हैं। भोपाल में यह 1 रुपए प्रति किलो तक महंगी कर दी गई है। अब यह 94.75 रुपए प्रतिकिलो में मिल रही है। इससे पहले 16 मई को करीब 3 रुपए प्रतिकिलो रेट बढ़े थे। फिलहाल थिंक गैस एजेंसी ने कीमतें बढ़ाई हैं। इसकी सप्लाई भोपाल समेत आसपास के जिलों में है। दो महीने में यह तीसरी बार बढ़ोतरी की गई है। तीन बार में सीएनजी 6 रुपए किलो तक महंगी हुई है।

भोपाल के कोलार रोड पर कार में सीएनजी सप्लाई करता कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
मध्य प्रदेश में 3 गैस एजेंसियां- थिंक, गेल और अवंतिका सीएनजी की सप्लाई करती हैं। भोपाल, सीहोर, राजगढ़, शिवपुरी, विदिशा समेत आसपास के जिलों में थिंक कंपनी सप्लाई करती है, जबकि इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर संभाग में अवंतिका की सप्लाई है। गेल कंपनी की भी कई जिलों में सप्लाई है।

 

 

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चंबल रेत खनन पर MP, UP को चेतावनी, राजस्थान पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी

चंबल सेंक्चुरी में मौजूद घड़ियाल।

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने चम्बल अभ्यारण्य में अवैध रेत खनन के मामले में 26 मई को आदेश जारी किया है। जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राजस्थान सरकार की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई है। जबकि मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की कार्यवाही को भी नाकाफी बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अवैध उत्खनन अभी भी बेलगाम चल रहा हैं प्रशासनिक लापरवाही साफ दिखाई दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई को रिजर्व रखे गये मामले में आज विस्तृत फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों (एमपी, यूपी और राजस्थान) को नयी सख्त दिशा-निर्देश दिये और कहा है कि पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा अब और टाल-मटाल बर्दाश्त नहीं की जायेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को आगे भी निगरानी में रखा है। राज्यों में नये कॉम्पलायंस एफिडिवेट मांगे है।
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की कार्यवाही को बहुत खराब अनुपालन बताते हुए कहा है कि 2-17 अप्रैल के आदेशों का पालन लगभग नहीं हुआ है। सीसीटीवी और जीपीएस औेर निगरानी व्यवस्था अभी भी प्रारंभिक चरण में है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कई महत्वपूर्ण फैसले केवल कोर्ट के सख्त आदेश के बाद लिये गये है। जो प्रशासनिक लापरवाही दशा्रता है।
मप्र सरकार ने अनरजिस्टर्ड व्हीकल्स पर कुछ कार्रवाई बताई (मुरैना में 1641 वाहन चालान), लेकिन कोर्ट ने कहा कि केवल चालान काटकर जुर्माना वसूलना पर्याप्त नहीं। बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों को जब्त करने, मालिकों के खिलाफ कार्रवाई और मास्टरमाइंड तक पहुंचने की व्यवस्था अभी भी कमजोर है।
कोर्ट ने जो प्रमुख बातें कहीं- राजस्थान सरकार पर टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि राजस्थान में अनुपालन की स्थिति बेहद खराब है। कई महत्वपूर्ण कदम (CCTV, सर्विलांस सिस्टम) 18 से 36 महीने बाद पूरे होने वाले हैं, जो स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वीकार्य नहीं। कोर्ट ने प्रशासनिक आलस्य और लापरवाही पर गहरी चिंता जताई।
मध्य प्रदेश पर टिप्पणी
कोर्ट ने मप्र की कार्रवाई को अपर्याप्त बताया। अनरजिस्टर्ड और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर केवल चालान काटना और छोटा जुर्माना वसूलना पर्याप्त नहीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे वाहनों की जब्ती, मालिकों के खिलाफ मुकदमा और किंगपिन्स तक पहुंचना जरूरी है, अन्यथा अवैध खनन जारी रहेगा।
अनरजिस्टर्ड वाहनों पर चिंता
कोर्ट ने कहा कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों का खुलेआम चलना अवैध खनन को बढ़ावा दे रहा है। केवल जुर्माना वसूलकर छोड़ देने से माफिया प्रभावित नहीं होते। कोर्ट ने सख्त कार्रवाई (जब्ती, ब्लैकलिस्टिंग, प्रॉसेक्यूशन) के निर्देश दिए।

सभी तीनों राज्यों (राजस्थान, मप्र, यूपी) को दिए यह आदेश
फॉरेस्ट गार्ड्स और फील्ड स्टाफ की भर्ती तुरंत पूरी करें।
अनरजिस्टर्ड और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर जब्ती और मुकदमा की सख्त कार्रवाई की जाए।
CCTV, GPS ट्रैकिंग और जॉइंट पेट्रोलिंग को जल्द पूरा करें।
स्थानीय लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार योजनाएं बनाएं।
नई कॉम्पलाइंस एफिडेविट अगली सुनवाई में दाखिल करें।
NHAI को यह आदेश दिया
NH-44 के मोरेना-धौलपुर पुल की सुरक्षा के लिए CCTV लगाने और नियमित निगरानी करने के निर्देश।
पुल के आसपास 1 किमी ऊपर और 0.5 किमी नीचे खनन पूरी तरह रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन से समन्वय।

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पेयजल समस्या को लेकर पूर्व पार्षद जनसुनवाई में खाली मटका लेकर पहुंचे, 840 करोड़ रूपये की अमृत योजना पर उठाये सवाल


ग्वालियर. नगरनिगम की जनसुनवाई में वार्ड 27 के पूर्व पार्षद बृजेश गुप्ता अपने समर्थकों के साथ खाली मटका और पानी के बर्तन लेकर पहुंचे। उन्होंने इलाके में गंभीर जल संकट का आरोप लगाते हुए नगरनिगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अमृत योजना के तहत खर्च हुए 840 करोड़ रूपये पर सवाल उठाये।
पूर्व पार्षद ने बताया है कि उनके इलाके में कई दिनों से पानी नहीं आ रहा है। जिससे लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। उन्हें पानी के लिये घंटोुं इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा है कि नगर के पानी आपूर्ति के दावे तरह विफल साबित हो रहे है। बृजेश गुप्ता ने सवाल किया है कि यदि पानी की पूर्ति नहीं हो पा रहा है तो अमृत योजना के 840 करोड़ का रूपये का क्या लाभ हुआ है। यह राशि कहां गयी। इस पर अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनके इलाके में पानी की समस्या 2 दिनों के भीतर हल कर दी जायेगी।
घरेलू बिल को किया व्यवसायिक
म्ंगलवार को हुई जनसुनवाई में एक अन्य शिकायत महलगांव निवासी राजाबेटी ने दर्ज कराई है। उन्होंने अधिकारियों को बताया है कि उनके घरेलू पानी के बिल को गलीती से व्यावसायिक बिल में बदल दिया गया है। जिस वजह से उन्हें अत्याधिक राशि के बिल मिल रहे है। राजा बेटी ने अधिकारियों से इस त्रुटि को तत्काल सुधारने का आग्रह किया है। अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही बिल में बदलाव कर दिया जायेगा। जनसुनवाई के दौरान शहर की विभिन्न समस्याओं से संबंधित कई अन्य आवेदन भी प्राप्त हुए। अधिकारियों ने सभी समस्याओं का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों को उनके समाधान के लिये निर्देशित किया और आवेदकों को शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया है।

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