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चंबल रेत खनन पर MP, UP को चेतावनी, राजस्थान पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी

चंबल सेंक्चुरी में मौजूद घड़ियाल।

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने चम्बल अभ्यारण्य में अवैध रेत खनन के मामले में 26 मई को आदेश जारी किया है। जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राजस्थान सरकार की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई है। जबकि मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की कार्यवाही को भी नाकाफी बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अवैध उत्खनन अभी भी बेलगाम चल रहा हैं प्रशासनिक लापरवाही साफ दिखाई दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई को रिजर्व रखे गये मामले में आज विस्तृत फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों (एमपी, यूपी और राजस्थान) को नयी सख्त दिशा-निर्देश दिये और कहा है कि पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा अब और टाल-मटाल बर्दाश्त नहीं की जायेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को आगे भी निगरानी में रखा है। राज्यों में नये कॉम्पलायंस एफिडिवेट मांगे है।
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की कार्यवाही को बहुत खराब अनुपालन बताते हुए कहा है कि 2-17 अप्रैल के आदेशों का पालन लगभग नहीं हुआ है। सीसीटीवी और जीपीएस औेर निगरानी व्यवस्था अभी भी प्रारंभिक चरण में है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कई महत्वपूर्ण फैसले केवल कोर्ट के सख्त आदेश के बाद लिये गये है। जो प्रशासनिक लापरवाही दशा्रता है।
मप्र सरकार ने अनरजिस्टर्ड व्हीकल्स पर कुछ कार्रवाई बताई (मुरैना में 1641 वाहन चालान), लेकिन कोर्ट ने कहा कि केवल चालान काटकर जुर्माना वसूलना पर्याप्त नहीं। बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों को जब्त करने, मालिकों के खिलाफ कार्रवाई और मास्टरमाइंड तक पहुंचने की व्यवस्था अभी भी कमजोर है।
कोर्ट ने जो प्रमुख बातें कहीं- राजस्थान सरकार पर टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि राजस्थान में अनुपालन की स्थिति बेहद खराब है। कई महत्वपूर्ण कदम (CCTV, सर्विलांस सिस्टम) 18 से 36 महीने बाद पूरे होने वाले हैं, जो स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वीकार्य नहीं। कोर्ट ने प्रशासनिक आलस्य और लापरवाही पर गहरी चिंता जताई।
मध्य प्रदेश पर टिप्पणी
कोर्ट ने मप्र की कार्रवाई को अपर्याप्त बताया। अनरजिस्टर्ड और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर केवल चालान काटना और छोटा जुर्माना वसूलना पर्याप्त नहीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे वाहनों की जब्ती, मालिकों के खिलाफ मुकदमा और किंगपिन्स तक पहुंचना जरूरी है, अन्यथा अवैध खनन जारी रहेगा।
अनरजिस्टर्ड वाहनों पर चिंता
कोर्ट ने कहा कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों का खुलेआम चलना अवैध खनन को बढ़ावा दे रहा है। केवल जुर्माना वसूलकर छोड़ देने से माफिया प्रभावित नहीं होते। कोर्ट ने सख्त कार्रवाई (जब्ती, ब्लैकलिस्टिंग, प्रॉसेक्यूशन) के निर्देश दिए।

सभी तीनों राज्यों (राजस्थान, मप्र, यूपी) को दिए यह आदेश
फॉरेस्ट गार्ड्स और फील्ड स्टाफ की भर्ती तुरंत पूरी करें।
अनरजिस्टर्ड और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर जब्ती और मुकदमा की सख्त कार्रवाई की जाए।
CCTV, GPS ट्रैकिंग और जॉइंट पेट्रोलिंग को जल्द पूरा करें।
स्थानीय लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार योजनाएं बनाएं।
नई कॉम्पलाइंस एफिडेविट अगली सुनवाई में दाखिल करें।
NHAI को यह आदेश दिया
NH-44 के मोरेना-धौलपुर पुल की सुरक्षा के लिए CCTV लगाने और नियमित निगरानी करने के निर्देश।
पुल के आसपास 1 किमी ऊपर और 0.5 किमी नीचे खनन पूरी तरह रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन से समन्वय।

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