Author: Mahesh Jha

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ग्वालियर में 44371 मकान मिले खाली, 1.01 लाख से अधिक घरों में खुले दफ्तर और गोदाम

ग्वालियर. ग्वालियर में मकानों की जो गणना पूरी हुई है, उसने रियल एस्टेट की एक तस्वीर उभर कर सामने आई है। जिले में कुल 55,288 मकान खाली पड़े हैं, जिनमें से अकेले नगर निगम क्षेत्र में ही 44,371 घर खाली मिले हैं। यानी लोगों ने इन्वेस्टमेंट के लिए आशियाने तो खरीद लिए, पर वहां रहने वाला कोई नहीं है।
मकानों का इस्तेमाल दुकान, दफ्तर या गोदाम के रूप में हो रहा
एक और बड़ा ट्रेंड जो सामने आया है, वह यह कि अब घर सिर्फ रहने के लिए नहीं, बल्कि कमाई का जरिया बन रहे हैं। जिले के 1,01,795 मकानों का इस्तेमाल बल्कि दुकान, दफ्तर या गोदाम के रूप में हो रहा है। यही वजह है कि जिले में आवासीय मकानों की संख्या घटकर 4.49 लाख ही रह गई है। जिले की कुल जनसंख्या 24 लाख 35 हजार 519 हो गई है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी नगर निगम क्षेत्र की है, जहां 14.54 लाख लोग निवास कर रहे हैं। 10 में से 6 लोग निगम सीमा में निवास कर रहे हैं, जबकि 4 गांव में। जिला जनगणना अधिकारी अनिल बनवारिया का कहना है कि मकानों की गणना का कार्य पूरा हो गया है।
डबरा और भितरवार में भारी बसावट
उप-जिलों में डबरा के बाद घाटिगांव (1.28 लाख), भितरवार (1.21 लाख) और चिनौर (1.11 लाख) सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्र हैं। इसके विपरीत, सिटी सेंटर क्षेत्र में सबसे कम 19,309 की आबादी दर्ज की गई है, जो मुख्य रूप से पूर्णत: व्यावसायिक गतिविधियों और पॉश कॉलोनियों के सीमित आवासीय ढांचे को दर्शाती है। सिटी सेंटर में 8 राजस्व ग्राम हैं, जिसके कारण सेक्टर छोटा बना था।

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रक्षाबंधन के पहले MP में शुरू होगी सुगम परिवहन बसें

भोपाल. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में रक्षाबंधन से पहले मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत बसों का संचालन शुरू करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि रक्षाबंधन पर बहनों को राज्य परिवहन की बसों में सफर की सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को आज भी आवागमन के लिए लोडिंग वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। नई व्यवस्था शुरू होने से आम नागरिकों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी।
रक्षाबंधन पर बहनें बसों से यात्रा कर सकेंगी
विधानसभा में मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साल रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाइयों के घर राज्य परिवहन की बसों से यात्रा कर सकेंगी।
राज्य परिवहन की भूमिका महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य परिवहन आम नागरिकों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सरकार एक ओर आधुनिक और बेहतर सड़कों का निर्माण कर रही है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

 

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जम्मू के किश्तवाड़ में 2 जगह बादल फटा, लैंडस्लाइड से सड़कें बंद

जम्मू कश्मीर. जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में मंगलवार को दो जगह बादल फटे है। पहला बादल सरथल के गहन इलाके में और दूसरा माछीपाल क्षेत्र में फटा है। कुछ इलाकों में लैंडस्लाइड से सड़कें बंद हो गईं है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल किसी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। पुलिस, रेड क्रॉस, राजस्व विभाग और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर भेजी गई हैं।

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में बादल फटने के बाद कई जगह तबाही हुई है। - Dainik Bhaskar
सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि स्थानीय लोगों से लगातार संपर्क किया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। इधर, राजस्थान और मध्य प्रदेश में आंधी-बारिश से 5 लोगों की मौत हो गई। एमपी के नीमच में सोमवार रात मकान की छत ढहने से मां-बेटे की मौत हो गई। वहीं, राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर में दीवार ढहने से दो बच्चों सहित 3 लोगों की जान चली गई।
बादल फटना ऐसी स्थिति है, जब किसी छोटे इलाके में बहुत कम समय के भीतर अचानक बेहद तेज बारिश होने लगती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि एक घंटे में 100 मिमी या उससे ज्यादा बारिश हो जाए, तो उसे क्लाउडबर्स्ट माना जाता है। यह घटना आमतौर पर 10 से 20 वर्ग किलोमीटर के छोटे क्षेत्र में होती है और पहाड़ी इलाकों में ज्यादा देखने को मिलती है। बादल फटने से अचानक बाढ़, भूस्खलन और सड़कों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ जाता है।

 

 

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व्यापंम में बर्खास्त MBBS छात्रों को डिग्री, जीवाजी विश्ववि़द्यालय नहीं दे रहे है डिग्री की जानकारी

ग्वालियर. गजराराजा मेडीकल कॉलेज(GRMC) में डिग्री घोटाले के मामले में 5 माह निकल चुके है। जीवाजी विश्वविद्यालय और जीआरएमसी ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी है। बर्खास्त छात्रों के संबंध में मांगी गयी जानकारी नहीं तो शिकायकर्ता को दी है। न ही लोकायुक्त का दी जा रही है। मेडीकल कॉलेज की तरफ से शिकायतकर्ता को मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने की बात लिखकर जानकारी दी गयी है जबकि कोई मामला हाईकोर्ट में नहीं है।
जीवाजी विश्वविद्यालय एक कदम आगे निकली और मामला लोकायुक्त जांच में होने का हवाला देते हुए जानकारी छिपाई जा रही है। दोनों ही विभाग सांठगांठ से काम करते हुए लोकायुक्त को भी डिटेल नहीं दे रहे है। इस मामले में लोकायुक्त पुलिस ने शिकायतकर्ता के बयान ले लिये है। जल्द ही बड़ा एक्शन की तैयारी है।
हाईकोर्ट का अब लोकायुक्त जांच का बहाना
एक्स मेडीकल छात्र संदीप ने बताया कि जनवरी 2026 से लगातार मैं गजराराजा मेडीकल कॉलेज-जीवाजी विश्वविद्यालय से लिस्टेट छात्रों की डिग्री से संबंधित डिटेल मांग रहा हूं। लेकिन पहले जीआरएमसी ने हाईकोर्ट में मामला होने का बहाना बताते हुए डिटेल नहीं दी। जबकि मामला हाईकोर्ट में नहीं है। इसके बाद जीवाजी विश्वविद्यालय में इन छात्रों की डिग्री का रिकॉर्ड मांगा गया था। फर्स्ट अपील में 30 मई तक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने कीबात कहीं गयी थी। 24 को पत्र मिला कि जल्द ही जानकारी दे दी जायेगी। लेकिन हाल ही में 3 दिन पहले नया संदेश मिला कि उसमें लिखा था कि चूंकि मामला लोकायुक्त की जांच में हैं। इसलिये यह जानकारी देना न्यायोचित नहीं है। लगातार बहाने बनाकर मामले को टाला जा रहा हैं
लोकायुक्त में हलचल तेज, स्कैम के साक्ष्य मिले
गजराराजा मेडिकल कॉलेज और जीवाजी यूनिवर्सिटी के गठजोड़ की शिकायत पूर्व मेडिकल स्टूडेंट संदीप लहारिया ने लोकायुक्त एसपी ग्वालियर को की थी। शिकायत में साल 2006 से 2010 के बीच के लगभग 30 छात्रों को व्यापमं कांड में नाम आने के बाद 2017 में न्यू हाई पॉवर एक्शन कमेटी द्वारा बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाजवूद उनमें से 70 फीसदी बर्खास्त छात्रों को MBBS की डिग्रियां बांट दी गईं। हाल ही में लोकायुक्त पुलिस को इस मामले में कुछ नए साक्ष्य मिले हैं। जिसके बाद लोकायुक्त की टीम हरकत में आ गई है। हाल ही में शिकायकर्ता के बयान भी दर्ज कर लिए गए हैं। जिस तरह की हलचल है उससे साफ है कि जल्द बड़ा एक्शन होने वाला है।

 

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लोकायुक्त की रेड में राजस्व निरीक्षक को 80 हजार रूपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

जबलपुर. लोकायुक्त पुलिस ने मंगलवार की सुबह राजस्व विभागमें पदस्थ एक राजस्व निरीक्षक (आरआई) को 80 रूपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी राजस्व निरीक्षक ने व्यापारी से जमीन के सीमांकन के एवज में एक लाख रूपये की रिश्वत की मांग कर रहा था। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने कार्यवाही करते हुए उसे उसके घर के बाहर रिश्वत लेते हुए दबोचा है। व्यापारी रोहित जैन ने अपने साथियों के साथ ग्राम क्लोन, तहसील शहपुर में मटर प्लांट स्थापित करने के लिये जमीन खरीदी थी। जमीन का नामान्तरण हो चुका था। लेकिन सीमांकन की प्रक्रिया बाकी थी। इसके लिये उन्होंने शहरपुरा में पदस्थ राजस्व निरीक्षक करणसिंह लोधी से संपर्क किया था।
व्यापारी रोहित जैन ने बताया है कि सभी दस्तावेज देखने के बाद राजस्व निरीक्षक ने कुछ कमियां बताई थी। जिन्हें बाद में पूरा कर लिया गया। इसके बावजूद सीमांकन करने के एवज में एक लाख रूपये की रिश्वत की डिमांड की गयी। रोहित जैन का कहना था कि पिछले लगभग 2 महीने से वह सीमांकन के लिये चक्कर लगा रहे थे। लेकिन हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर काम टाल दिया जाता था।
लोकायुक्त ने बिछाया जाल
परेशान होकर व्यापारी ने लोकायुक्त एसपी को लिखित शिकायत दी। शिकायत के सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर लोकायुक्त टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। मंगलवार को आरोपी ने रतन कॉलोनी स्थित अपने निवास के पास शिकायतकर्ता को रुपए लेकर बुलाया था।
पूर्व निर्धारित योजना के तहत व्यापारी ने आरोपी को 80 हजार रुपए दिए। जैसे ही उसने रकम स्वीकार की, लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। लोकायुक्त निरीक्षक जितेंद्र सिंह ने बताया कि शिकायत की जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद ट्रैप कार्रवाई कर राजस्व निरीक्षक करण सिंह लोधी को 80 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

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स्वर्णरेखा नदी से जुड़े बांधों का अपग्रेडेशन करेगा जल संसाधन विभाग, डीपीआर आने के बाद ही कार्यवाही शुरू होगी, अतिक्रमण हटायेगा विभाग

ग्वालियर. महानगर ग्वालियर की जीवन रेखा कहीं जाने वाले स्वर्णरेखा नदी को पुनर्जीवित करने के लिये जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) ने एक अहम पहल की है। नदी में जल प्रवाह बहाल करने और जल संग्रहण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वीरपुर, मामा का बांध, हनुमान और गिरवाई बांध के अपग्रेडेशन की तैयारी शुरू कर दी गयी है। यह बांध स्टॉपडेम के रूप में बने है। इस परियोजना के लिये विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) हालांकि तैयार कर ली गयी है। पेमेंट के अभाव में डीपीआर विभाग के सुर्पुद नहीं की गयी है।
इस परियोजना के लिये विस्त्त परियोजना रिपोर्ट तैयार की गयी है। बांधों के सर्वेक्षण और जल संरक्षण से संबंधित विस्तृत योजना बनाने का कार्य भोपाल की एक विशेषज्ञ कम्पनी को सौंपा गया है। कम्पनी एक महीने के अन्दर डीपीआर विभाग को सौंपी जायेगी। जिसके बाद आगे की कार्यवाही और निर्माण कार्य शुरू किया जायेगा।
WRD हटवायेगा अतिक्रमण
जल संसाधन विभाग की योजना में बांधों का गहरीकरण क्षतिग्रस्त भागों की मरम्मत और जुड़े हुए जल मार्गो व नहरों का सुधार कार्य भी शामिल किया गया है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नदी में पूरे वर्षा पर्याप्त जलप्रवाह बना रहें। जल संरक्षण की स्थिति मजबूत हों। स्वर्णरेखा नदी पुर्नजीवन परियोजना को नगर निगम की अमृत 2.0 योजना से भी जोड़ा गया है। इस योजना के तहत नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिये दोनों किनारों पर सीवर लाइन बिछाई जायेगी। शहर के नालों को ट्रैप करके गन्दे पानी को सीधे नदी में जाने से रोका जायेगा। इसके अतिरिक्त नदी और बांधों के आसपास हुए अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही भी की जायेगी।
नाले का रूप ले चुकी स्वर्णरेखा नदी
पहले इन बांधों से स्वर्णरेखा नदी में स्वच्छ जल का निरंतर प्रवाह बना रहता था। इससे शहर की पेयजल आपूर्ति और आसपास के क्षेत्रों की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलती थी। हालांकि, वर्षों की उपेक्षा, अतिक्रमण और गाद जमने के कारण इन बांधों की क्षमता में लगातार गिरावट आई है। परिणामस्वरूप, नदी कई स्थानों पर नाले का रूप ले चुकी है और अधिकांश बांधों की जल संग्रहण क्षमता भी काफी कम हो गई है।

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UP  में 10%  अब बिजली महंगी नहीं होगी, नियामक आयोग ने UPPCL के प्रस्ताव पर लगाई रोक

लखनऊ. उत्तरप्रदेश विद्युत नियामक आयोेग ने राज्य के करोड़ो बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। यूपी पॉवर कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) द्वारा जून माह के बिलों में प्रस्तावित 10 प्रतिशत अतिरिक्त बिजल टैरिफ वसूली पर रोक लगा दी है। विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस अतिरिक्त वसूली को नियमों के विरूद्ध बताते हुए नियामक आयोग में याचिका दाखिल की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग ने यूपीपीसीएल से इस मामले में स्पष्टीकरण मांग लिया है। निर्देश दिया है कि अंतिम फैसला आनेतक बिलों में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं जोड़ा जायेगा। उपभोक्ता परिषद की इस पहल से उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला बड़ा आर्थिक बोझ फिलहाल टल गया है।
गौरतलब है कि बिजली दरों में वृद्धि का फैसला ऐसे वक्त आया था। जब प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली कटौती और आपूति संबंधी शिकायतें लगातार सामने आ रही है। गर्मी के मौसम में बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ता पहले से ही बिजली संकट और अनियमित आपूर्ति की समस्या से जूझ रहे है। ऐसे में बिजली बिल में 10 प्रतिशत अतिरिक्त भार पड़ने से आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ता है। हालांकि इस प्रस्ताव पर रोक लग गयी है। जिससे ग्राहकों ने राहत की सांस ली है।

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MP में 1 जुलाई से 1164 रूटों पर दौड़ेंगी सरकारी बसें

भोपाल. एमपी में 21 साल बाद सडकों पर फिर सरकारी बसें दौड़ेंगी। राज्य सरकार इसके लिए मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा के नाम से बस सेवा बहाल करने जा रही है। सेवा की 1 जुलाई से शुरुआत होगी। इसके लिए सबसे पहले इंदौर संभाग को चुना है। क्रमवार यह सेवा अन्य संभागों में भी शुरू होगी। इसके लिए कुल 1164 मार्ग तय किए गए हैं। इन रूटों पर 5206 बसें चलेंगी। राज्य सरकार इन बसों को एक राज्य स्तरीय व 7 क्षेत्रीय कंपनियों के जरिए चलाएगी। परिवहन विभाग निगरानी करेगा। प्रदेश में एक से दूसरे जिलों, ग्रामीण क्षेत्रों और पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तरप्रदेश, राजस्थान के प्रमुख शहरों तक दौड़ेंगी। सीएम डॉ. मोहन यादव ने राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी के संचालक मंडल की बैठक में परिवहन विभाग के रोडमैप को मंजूरी दे दी। बैठक में परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह व मुख्य सचिव अनुराग जैन समेत अन्य अफसर भी मौजूद थे। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने तैयारियों का ब्योरा दिया।
निजी ऑपरेटरों से सरेंडर नहीं कराए जाएंगे परमिट
सरकार ने साफ किया, निजी ऑपरेटरों को वर्तमान में जो परमिट दिए गए हैं, उस पर सुगम लोक परिवहन सेवा के शुरू होने से असर नहीं पड़ेगा। बता दें, ऑपरेटरों को डर था कि परमिट सरेंडर कराए जाएंगे और नए सिरे से बसों का संचालन होगा। नई व्यवस्था में ऐसी कोई तैयारी नहीं है। सरकार ने नए रूट और नए समय पर बसें दौड़ाने का फैसला लिया है।

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ग्वालियर-चंबल के ‘पेच’ में अटकी भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति, सिंधिया ने थमाई लंबी सूची, दिल्ली में मंथन शुरू

ग्वालियर. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की कार्यसमिति की सूची लेकर सोमवार को फिर प्रदेश भाजपा के नेता दिल्ली पहुंच गए हैं। जहां कार्यसमिति को अंतिम रूप देने के लिए मंथन किया जा रहा है। दिल्ली रवाना होने से सप्ताहभर पहले प्रदेश अध्यक्ष ने शिवपुरी प्रवास के दौरान केंद्रीय मंत्री से बंद कमरे में एक घंटे कार्यसमिति के मुद्दे पर चर्चा की थी। प्रदेश कार्यसमिति में सबसे बड़ा पेच ग्वालियर-चंबल अंचल का फंसा हुआ है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया निगम मंडलों व प्राधिकरणों में हुई नियुक्तियों को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। उनके नेतृत्व के सामने बड़ा सवाल है कि जब इन लोगों को पार्टी में आए साढ़े छह वर्ष के लगभग हो गए हैं, तो फिर मूल और बाहर से आए कार्यकर्ताओं में संगठन स्तर पर भेद क्यों किया जा रहा है। सिंधिया ने प्रदेश कार्यसमिति में समर्थकों को समायोजित करने के लिए लंबी सूची थमा दी है। दूसरी तरफ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी सिंधिया की सूची पर नजर रखे हुए हैं। प्रदेश नेतृत्व के सामने मुश्किल है कि कार्यसमिति को इस बार 100 के आसपास सीमित रखना है। जबकि विशेष परिस्थितियों में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की कार्यसमिति की संख्या 600 के लगभग पहुंच गई थी। उम्मीद की जा रही है दिल्ली में मंथन के एक सप्ताह में प्रदेश कार्यसमिति का गठन हो जाएगा।
सबसे लंबी सूची सिंधिया की
प्रदेश अध्यक्ष ने दो माह पहले पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने दावा किया था दो दिन कार्यसमिति घोषित कर पहली बैठक ओरछा में की जाएगी। इस दावे को पूरे दो माह हो गए हैं, लेकिन कार्यसमिति फाइनल नहीं हो पाई है। समूचे प्रदेश के नेताओं से कार्यसमिति के लिए नाम भोपाल मंगा लिए गए हैं। बताया गया है कि सबसे लंबी सूची सिंधिया की है। पूर्व मंत्री इमरती देवी, ओपीएस भदौरिया, पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल, मुन्नालाल गोयल वर्तमान मंत्रियों व विधायकों को समायोजित करना चाहते है। सिंधिया की सूची में 15 से अधिक नाम हैं। केंद्रीय मंत्री का तर्क है कि निगम मंडलों व प्राधिकरणों के नियुक्तियों में उनसे जुड़े लोगों के साथ न्याय नही किया गया है। उनके नाम पर केवल इसलिए विचार नहीं किया गया है कि उनको स्थान मिलने पर पार्टी के मूल कार्यकर्ता नाराज हो जाएंगे। अब यह लोग भी पार्टी के मजबूती के लिए कंधे से कंधे मिलाकर काम कर रहे है।
विधानसभा अध्यक्ष की नजर
विधानसभाध्यक्ष ने प्रदेश कार्यसमिति में समायोजित करने के लिए अपनी सूची प्रदेश नेतृत्व को थमा दी है। यह सूची सिंधिया के मुकाबले कम हैं, लेकिन विधानसभाध्यक्ष से जुड़े सांसद भारत सिंह कुशवाह, शिवमंगल सिंह तोमर व संध्या राय का नाम भी जोड़ लिए जाएं तो यह संख्या सिंधिया से अधिक है। तोमर ने प्रदेश नेतृत्व तक संदेश पहुंचा दिया है कि सिंधिया के बराबर का ही प्रतिनिधित्व चाहिए। क्योंकि पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं का बाहर से आये लोगों से अधिकर अधिक है।
अब फैसला दिल्ली में होगा
प्रदेश कार्यसमिति को लेकर दिल्ली में मंथन चल रहा है। प्रदेश के नेता भी दिल्ली पहुंच गए हैं। माना जा रहा है कि वगैरह किसी को अतिरिक्त वजन दिए संगठन और चुनाव के परिदृश्य को ध्यान में रखकर प्रदेश कार्यसमिति की सूची फाइनल किया जाएगा और अंतिम फैसला भी दिल्ली में ही होगा। ताकि कार्यसमिति के जारी होने के बाद किसी तरह का विवाद सामने नहीं आए। इसके बाद ही अंचल के दोनों ध्रुव अपने-अपने समर्थकों के नामों को लेकर अड़े हुए हैं।

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वैभव सूर्यवंशी पर IIM इन्दौर में करेगा स्टडी, पता करेंगे 15 साल की उम्र में कैसे बने सिक्सर किंग


जयपुर. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) इन्दौर क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी 15, को केस स्टडी में शामिल करने जा रहा है। वैभव मॉल पर देश की पहली मल्टी डिसिप्लिनरी स्टडी होगी। जिसमें खेल-मनो विज्ञान प्रबंधन के एक्सपर्ट मिलकर छोटी उम्र में बड़ी सफलता का फॉर्मूला खोजेंगे।
राजस्थान रॉयल (RR) के ओपनर वैभव एक सीजन में सर्वाधिक 72 छक्के मार मार क्रिस गेल 59, का 14 साल पुराना रिकॉर्ड तोउ़ चुके है। उनकी हैरतंगेज बल्लेबाजी की दुनिया कायल है। ऐसे में आईएमएम इंदौर अभी तक उनके सक्सेस फॉमूले को डिकोड करने पर काम शुरू कर रहा है। आईएमएम के डायरेक्टर हिमांशु रॉय ने बताया है कि यह स्टडी वैभव की उपलब्धियों का विश्लेषण करने के साथ उन सामाजिक, पारिवारिक, मनोवैज्ञानिक एवं संस्थागत कारकों को भी गहराई से समझेगी जो कम उम्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं का आकार देते हैं।
वैभव की क्रिकेट जर्नी अद्भुत
प्रो. राय ने कहा कि IIM का मानना है कि वैभव की क्रिकेट जर्नी अद्भुत है। इसके पीछे व्यक्तिगत क्षमता के अलावा कड़ी मेहनत, परिवार का त्याग, समर्पण, मेंटर का योगदान भी अहम है। उन्होंने कहा कि प्रतिभा उपहार हो सकती है, पर उसे स्थायी उत्कृष्टता में बदलने के लिए सही मूल्य, संतुलित सोच, मजबूत समर्थन तंत्र व दूरदर्शी नेतृत्व जरूरी है। मैनेजमेंट फैकल्टी डॉ. आरती चोपड़ा कहती हैं कि वैभव पर स्टडी भविष्य के प्रबंधकों व नीति-निर्माताओं के लिए अत्यंत मूल्यवान है। 5’7 हाइट और 55 किलो वजन के वैभव अपनी जबर्दस्त बैट स्पीड और टाइमिंग के दम पर गेंद को बाउंड्री पार भेजते हैं।

 

 

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