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MP में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने पर कोर्ट का बड़ा फैसला, अधिकारियों को 2 साल और काम का मौका

नई दिल्ली. एमपी में रिटायरमेंट की उम्र में बढ़ोत्तरी की गई है। प्रदेश के न्यायिक सेवा के अधिकारियों के लिए यह वृद्धि की गई है। इनके रिटायरमेंट की आयु 60 से 62 साल कर दी गई है। इस प्रकार प्रदेश के न्यायिक अधिकारी अब 2 साल और काम कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय का लाभ रिटायर हो चुके न्यायिक अधिकारियों को भी मिल सकेगा। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि अनुभवी अधिकारियों को बनाए रखने से न्यायिक सेवा और असरकारक साबित होगी। खाली पदों से पड़ रहा प्रभाव कुछ हद तक कम होगा। मध्यप्रदेश के संदर्भ में लाखों पेंडिंग केसेस यह निर्णय असरकारक साबित हो सकता है। भोपाल जिला कोर्ट में ही पेंडिंग मामलों का आंकड़ा करीब डेढ लाख तक पहुंच चुका है।
MP सहित 7 राज्यों के लिए आदेश जारी
न्यायिक अधिकारियों के रिटायरमेंट की उम्र में बढ़ोत्तरी करने संबंधी आदेश सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने जारी किया। मध्यप्रदेश सहित देश के 7 राज्यों के लिए यह आदेश जारी किया गया है। इन राज्यों में छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल भी शामिल है।
2 माह में न्यायिक अधिकारियों के लिए लागू सेवा नियमों में परिवर्तन करना होगा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि एमपी सहित सभी राज्यों को यथासंभव 2 माह में न्यायिक अधिकारियों के लिए लागू सेवा नियमों में परिवर्तन करना होगा। तब तक 60 साल की आयु पूरी होने पर भी किसी भी न्यायिक अधिकारी को रिटायर नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि 31 मार्च 2026 या उसके बाद रिटायर हुए ऐसे न्यायिक अधिकारी भी दोबारा सेवा में आ सकेंगे जो रिटायरमेंट के बाद कोई दूसरी नौकरी नहीं कर रहे हों। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा है कि इसके लिए संबंधित अधिकारी को सेवा के लिए उपयुक्त पाया जाना जरूरी होगा। इस संबंध में हाईकोर्ट निर्णय लेगा। 60 साल की रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने पर न्यायिक अधिकारी के कामकाज और योग्यता का आकलन किया जाएगा।

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