रायपुर बांध में अवैध उत्खनन का आरोप, गंगा जल संवर्धन योजना पर मंडराया संकट

ग्वालियर- अंचल के ऐतिहासिक एवं जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण रायपुर बांध में कथित अवैध उत्खनन को लेकर क्षेत्र में चिंता बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों एवं जल संरक्षण से जुड़े नागरिकों का आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना से संबंधित ठेकेदारों द्वारा बांध के डूब क्षेत्र से बड़े पैमाने पर मिट्टी और मुरम निकाली जा रही है, जिससे पूरे जल तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
रियासतकालीन बांध श्रृंखला पर खतरे की आशंका
ऐसा बताया जा रहा है कि रायपुर बांध रियासतकालीन पाँच बांधों की श्रृंखला का पहला और प्रमुख बांध है। इसी बांध से पानी आगे मामा के बांध, गिरवाई, वीरपुर और हनुमान बांध तक पहुँचता है तथा अंत में स्वर्ण रेखा नदी में प्रवाहित होता है। जल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रथम बांध की संरचना और जलधारण क्षमता प्रभावित होती है तो पूरी श्रृंखला के जल भराव पर असर पड़ सकता है।
मुरम और पथरीली जमीन के कारण बढ़ी चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि रायपुर बांध का भू-भाग मुरम एवं पथरीली संरचना वाला है। ऐसे में यदि बांध के डूब क्षेत्र की गहराई अत्याधिक बढ़ा दी गई तो वर्षा का पानी रुकने के बजाय जमीन के भीतर समा सकता है। इससे न केवल बांध का जलस्तर प्रभावित होगा, बल्कि उससे जुड़े अन्य बांधों तक पानी का प्रवाह भी कम हो जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान में जो खुदाई की जा रही है, उससे भविष्य में जल संरक्षण व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाएगा और क्षेत्र में जल संकट गहराने की आशंका भी बढ़ सकती है।
गंगा जल संवर्धन अभियान पर असर की आशंका
प्रदेश सरकार द्वारा संचालित “गंगा जल संवर्धन अभियान” के तहत रायपुर बांध को जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह योजना किसानों के लिए जल संचित करने और भूजल स्तर सुधारने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि बांध के डूब क्षेत्र से लगातार मिट्टी निकाली जाती रही तो वर्षा का पानी संचय नहीं हो पाएगा। इससे सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और करोड़ों रुपये की जल संरक्षण परियोजना कमजोर हो सकती है।
अवैध खनन और राजस्व नुकसान के आरोप
आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना से जुड़ी हिलवेज कम्पनी, गढ़वाल द्वारा तालाबों, राजस्व भूमि एवं वन क्षेत्र से भी अवैध उत्खनन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे शासन को राजस्व की हानि पहुँच रही है तथा पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ रहा है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और बांध क्षेत्र में हो रहे उत्खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए।
कोर्ट में लंबित मामलों का भी हवाला
क्षेत्रीय नागरिकों ने यह भी कहा कि स्वर्ण रेखा नदी में जल प्रवाह बनाए रखने को लेकर न्यायालय में प्रकरण लंबित हैं। ऐसे में यदि बांधों का प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित हुआ तो भविष्य में कानूनी और पर्यावरणीय समस्याएँ और बढ़ सकती हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जल संरक्षण से जुड़े लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि रायपुर बांध एवं उससे जुड़े सभी जलाशयों का सर्वे कराया जाए। साथ ही डूब क्षेत्र में हो रही खुदाई की तकनीकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि आने वाले समय में जल संकट और पर्यावरणीय नुकसान को रोका जा सके।

