हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बिलौआ के क्रेशर एवं खदानों का व्यापार ठप्प
हर रोज आते थे 1200 से 1500 ट्रक, अब सिर्फ 300 ट्रक भरकर ले जा रहे
ग्वालियर। अनियमितताओं के चलते बिलौआ में की गई सख्ती की वजह से अब कई लोगों को बेरोजगार होने का डर सता रहा है। हालत यह है कि करीब डेढ़ माह पूर्व तक बिलौआ में एक 24 घंटे में 1000 से 1200 ट्रक माल लेने के लिए आते थे, अब लगभग 300 ट्रक ही माल लेने आ रहे हैं। बिलौआ और रफादपुर में 57 खदानों को मंजूरी शासन द्वारा दी गई है। इनमें से कुछ खदानें तो पहले बंद थीं, लेकिन करीब एक माह पूर्व हाईकोर्ट के आदेश पर 18 खदानों को बंद कराया गया है। फिर भी बहुत बड़ी संख्या ऐसी खदानों की थी, जो कि सही ढंग से संचालित थीं। जिनसे लाखों टन माल निकालकर क्रेशर में पीसा जा रहा था। जिसे खासकर उत्तर प्रदेश की ओर से आने वाले ट्रक भरकर ले जा रहे थे। ट्रकों के आवागमन से और कारोबार के संचालन से सैकड़ों लोगों को रोजगार मिल रहा था।
कम हो गई है आमदनी
चूंकि अब हर रोज मात्र 300 ट्रक ही बिलौआ में माल भरने के लिए आते हैं, इसलिए इनके माध्यम से जिन लोगों को रोजगार मिलता था। उनकी अब आमदनी कम हो गई है। उन्हें अब इस बात का डर है कि यह स्थिति कब तक रहने वाली है।क्रेशर पर मजदूरी करने वाले मजदूर राम सिंह ने बताया कि जब गिट्टी के खरीदार ही कम आएंगे तो हमें काम कहां से मिलेगा।
क्रेशर संचालक बोले माल रखा है, खरीदार नहीं
गुरु कृपा क्रेशर के संचालक तेजवंत जैन ने बताया कि अब उनके क्रेशर पर माल खरीदने वालों की बहुत कमी हुई है। क्रेशर पर पत्थर को पीसकर बड़ी तादाद में गिट्टी इकट्ठी हो गई है।
पेट्रोल पंप संचालक बोले आधी हुई बिक्री
बिलौआ स्थित हरिलील़ा पेट्रोल पंप के संचालक विकास साहू ने बताया कि एक माह के अंदर हमारे पंप से डीजल की खपत 70 प्रतिशत तक कम हुई है। मुझे पेट्रोल पंप के स्टाफ को अपनी जेब से उनकी सेलरी देना पड़ रही है।
असल में ट्रकों की संख्या कम होने का प्रभाव सिर्फ क्रेशर संचालकों पर ही नहीं पड़ा है। इसका असर इस इलाके के ढाबा वालों पर भी पड़ा है। इसके अलावा पंचर की दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करने वालों पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा पेट्रोल पंप भी प्रभावित हुए नहीं बचे हैं। इलाके के पेट्रोल पंप से डीजल की बिक्री में कमी आई है।

