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हाईकोर्ट सख्त: पुरानी पेंशन योजना में फैसला सुनाया तो अवमानना के 2 मामलों पर जताई नाराजगी…

2005 से पहले नियुक्त हुई तो मिलेगा लाभ, भले ही ज्वॉइनिंग बाद में हुई हो
ग्वालियर -मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुरानी पेंशन योजना (GPF) को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। 2010 से लंबित याचिका में कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति 1 जनवरी 2005 से पहले हो चुकी है, तो उसे पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलेगा, भले ही उसने वैध कारणों से बाद में कार्यभार ग्रहण किया हो।
मामला डॉ. ज्योति राठौर बावने का है, जिनका चयन एमपीआई सेवा में बीमा चिकित्सा अधिकारी के पद पर हुआ था। उन्हें 2 जनवरी 2004 को नियुक्ति पत्र जारी किया गया था। उस समय वह गायनाकोलॉजी में पीजी कोर्स कर रही थीं। इसे देखते हुए श्रम विभाग ने उन्हें पढ़ाई पूरी करने के बाद ज्वॉइनिंग देने की अनुमति दी थी।
हेल्थ पीएस बर्णवाल सहित 4 अधिकारी जमानती वारंट से तलब
फैमिली पेंशन व अन्य मांगों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने 2 मामलों में अवमानना नोटिस जारी किए हैं। शीला त्रिपाठी ने पति को पेंशन व अन्य लाभ नहीं मिलने के चलते 2019 में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने 26 फरवरी व 5 मार्च 2019 को नोटिस जारी किए थे, लेकिन न तो अफसर खुद पेश हुए, न जवाब पेश किया। इस पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल, कमिश्नर हेल्थ, सीएमएचओ ग्वालियर डॉ. सचिन श्रीवास्तव व जिला पेंशन अधिकारी को 10-10 हजार और दूसरे मामले में पीएस को 5-5 हजार के जमानती वारंट से तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

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