7 मिनट में बनाया नकली मावा: चंबल से मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भरपूर सप्लाई भी
ग्वालियर. चंबल के कई गांवों में हर दूसरे घर में मावा बनता है। मावे की मात्रा के हिसाब से दूध का उत्पादन यहां नहीं है। फिर भी यहां से मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में मावा सप्लाई होता है। दिवाली पर घर पर मिठाइयां बनाने के लिए मावा खरीदने जा रहे हैं तो सतर्कता बरतें। डिमांड बढ़ने के साथ ही नकली मावे की सप्लाई भी बढ़ गई है। चंबल के मुरैना-भिंड के कई गांवों में तो लगभग हर दूसरे घर नकली मावा बन रहा है। भट्टी पर एक एजेंट ने नकली मावा बनाकर दिखा दिया। उसने बताया कि यहां से बना यह मिलावटी मावा MP, UP और राजस्थान के कई शहरों में भेजा जाता है। ग्वालियर-चंबल अंचल का नकली मावा प्रदेश के शहरों और दूसरे राज्यों में पहुंचाने के लिए ग्वालियर ट्रांजिट पॉइंट है। उसने यह भट्टी से लेकर दुकानदार तक नकली मावा पहुंचाने का पूरा नेटवर्क भी बता दिया।
आधा लीटर दूध में बना दिया 300 ग्राम नकली मावा
एजेंट ने काले कारोबार के कई सारे भेद खोले। उसने बताया कि कुछ समय पहले तक वह भी नकली-मिलावटी मावा बनाता था। वह हमें एक जंगलनुमा खेत से टपरे में ले गया। वहां टीनशेड के नीचे उसने कढ़ाई में आधा लीटर दूध को खौलाकर इसमें SMP (स्किम्ड मिल्क पाउडर) और रिफाइंड ऑइल डाला। 2 मिनट तक इस मिश्रण को मध्यम आंच पर चलाया। कुल 7 मिनट में 300 ग्राम नकली मावा बन गया। उसने बताया कि भिंड और मुरैना के कई गांव में, बल्कि हर दूसरे घर में नकली मावा बनाने की भटि्टयां जल रही हैं। ये मावा थोक में 140 से 170 रुपए किलो के भाव से बिकता है। मार्केट में यही 300 रुपए किलो बेचा जाता है। मावा तैयार होकर ग्वालियर भेजा जाता है, वहां नकली-मिलावटी मावा के बड़े सौदागर बैठे हैं। वे इस माल को मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के कई शहरों मे सप्लाई करते हैं।
सबसे ज्यादा सैंपल ग्वालियर और मिठाई के मंडला में हुए
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार नवंबर 2020 से अब तक मावा के सबसे ज्यादा सैंपल ग्वालियर में हुए हैं। यहां बीते दो साल में मावा के 109 नमूने लिए गए हैं। जबकि, दूध से बनी मिठाइयों के सर्वाधिक 178 नमूने मंडला में लिए गए हैं। इन नमूनों को जांच के लिए स्टेट फूड लैबोरेटरी भेजा गया है।
605 मिलावटखोरों पर FIR, 45 पर रासुका
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की मिलावट से मुक्ति अभियान की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में दूध, मावा, पनीर, मसाले, घी, तेल, मिठाई और दूसरे खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाले 605 व्यापारियों के खिलाफ पुलिस में FIR कराई गई है। 45 व्यापारियों के विरुद्ध रासुका की कार्रवाई की गई है। यह अभियान नवंबर 2011 को शुरू किया गया था, जो अब तक जारी है।

