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हाईकोर्ट ने कलेक्टर से 5 साल अवैध खनन और पुलिस से मांगी FIR और केस डायरी

अशोक यादव की तीनों खदानें बंद; कोर्ट पहले कह चुका- मूल रिकॉर्ड छिपाया
ग्वालियर- बिलौआ-जाफरपुर क्षेत्र में अवैध खनन के आरोपों की जांच अब पिछले 5 साल के पुलिस रिकॉर्ड तक पहुंच गई है। हाईकोर्ट ने SSP  धर्मवीर सिंह और बिलौआ थाना प्रभारी से पूछा है कि पिछले 5 साल में अवैध खनन या खननकर्ताओं के खिलाफ कितनी FIR दर्ज हुईं और उनकी मौजूदा स्थिति क्या है। FIR दर्ज हुई है तो उसकी केस डायरी भी कोर्ट में पेश करनी होगी।
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ के सामने अशोक यादव की ओर से बताया गया कि 7 अगस्त के अंतरिम आदेश के बाद उनकी 3 खदानें बंद हैं और उत्खनन नहीं हो रहा। हालांकि, उन्हें अभी यह बताना है कि खदानों का रिकॉर्ड कहां से क्यों हटाया गया था। कोर्ट ने खदानों पर अंतरिम रोक अगले आदेश तक बढ़ा दी है।
रिकॉर्ड को लेकर कोर्ट पहले ही सख्त टिप्पणी कर चुका है। 7 अगस्त को अशोक यादव की ओर से 1 जुलाई से शुरू होने वाला रजिस्टर पेश किया गया, लेकिन 2  अन्य खदानों का रिकॉर्ड नहीं दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा था कि अशोक यादव अभी भी मूल रिकॉर्ड छिपा रहे हैं और उनकी सदाशयता गहरे संदेह के घेरे में है। इसके बाद तीसरी खदान में भी ब्लास्टिंग, उत्खनन और पहले से निकाले गए खनिज के परिवहन पर रोक लगा दी गई थी।
ड्रोन में दिखे रास्ते, डंपरों पर निगरानी नहीं
11 अगस्त को कलेक्टर रुचिका चौहान की मौजूदगी में हाईकोर्ट ने खनन क्षेत्र की ड्रोन वीडियोग्राफी देखी थी। कोर्ट के सामने ऐसे रास्ते सामने आए जो मुख्य सड़कों से मिलते हैं। आदेश में दर्ज है कि डंपरों की आवाजाही दर्ज करने के लिए जांच व्यवस्था नहीं थी और बाहर जा रहे खनिज की मात्रा दर्ज करने के लिए तौल कांटे भी नहीं थे। कलेक्टर को अब पूरी वीडियोग्राफी और जमीनी स्थिति देखकर विस्तृत रिपोर्ट 30 सितंबर तक पेश करनी है।
खनिज अधिकारी के तीसरे बच्चे पर सरकार से जवाब
खनिज अधिकारी पंकज राज मिश्रा 25 अगस्त को स्वयं हाईकोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, क्योंकि न उन्हें दोषी ठहराया गया है, न सजा हुई है। उन्होंने माना कि उनके खिलाफ अभी कोई FIR  नहीं है। बच्चे की ट्यूशन फीस ननिहाल पक्ष के रिश्तेदारों द्वारा दिए जाने की बात कही, लेकिन फीस जमा करने वाले व्यक्ति का विवरण नहीं दिया। सरकार ने बताया कि नियुक्ति के समय अभ्यर्थी के 2  से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए।
इस पर हाईकोर्ट ने पूछा- क्या सरकारी कर्मचारी नौकरी में आने के बाद तीसरा बच्चा कर सकता है? यदि ऐसा है तो नियुक्ति के समय 2 बच्चों की सीमा लगाने का उद्देश्य ही प्रभावित होगा। सरकार को 2 सप्ताह में नियम की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

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