Newsमप्र छत्तीसगढ़

मिहिर भोज प्रतिमा विवाद को लेकर 25 सितम्बर को हजारों युवा एकत्र होंगे, गुर्जर-क्षत्रिय महासभा में लिया निर्णय

ग्वालियर. बुधवार की शाम को सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा-समाज के गौरव से जुड़े लम्बे वक्त से चले आ रहे विवाद को लेकर गुर्जर-क्षत्रिय महासभा की एक बैठक आयोजित की गयी। बैठक में समाज के वरिष्ठ बुजुर्गो, प्रबुद्धजनों और युवाओं की भारी मौजूदगी रहीं। 5 सालों से प्रशासनिक लापरवाही और टालमटोल की नीति का शिकार हो रहे इस मुद्दे पर अब समाज ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लियाहै। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि यदि संभागायुक्त और स्थानीय प्रशासन ने 25 सितम्बर तक समाज की जायज मांगों पर अमल नहीं किया गया तो पूरा गुर्जर समाज एक बड़े लोकतांत्रिक आन्दोलन के लिये सड़क पर उतरने के लिये मजबूर होगा।
प्रशासनिक अफलता -अदालती आदेश
बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस ग्रामीण विधायक साहबसिंह गुर्जर ने बताया है कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिये थे कि संभागायुक्त दोनों पक्षों (दोनों समुदाय) का एक साथ बैठाकर मामले का सौहादपूर्ण माहौल में समाधान निकालें। यदि दोनों पक्षोंके बीच कोई सहमति नहीं बनती है तो प्रशासन को अपनी निष्पक्ष जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी थी। आगे उन्होंने कहा कि विस्मय की बात यह है कि पूरे 5 वर्ष निकलजाने के बाद भी प्रशासन अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल नहीं कर पाया। प्रशासनिक तंत्र की इस ढुलमुल कार्यशैली की वजह से समाज में गहरा रोष व्याप्त है। यही आक्रोश इस आपात बैठक का मुख्य कारण बना है।
​आंदोलन की तैयारी, प्रतिमा स्थल पर जुटेंगे हजारों कार्यकर्ता
​25 सितंबर को दिए जाने वाले अल्टीमेटम के बाद की रणनीति पर चर्चा करते हुए समाज के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि दी गई समय-सीमा में सुनवाई नहीं होती है, तो समाज उग्र प्रदर्शन और जन-आंदोलन की राह चुनेगा। यदि प्रशासन प्रतिमा के समक्ष न्यायोचित फैसला नहीं करता, तो समाज के लोग सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के करीब एकत्र होकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। वक्ताओं ने कहा कि भारत की आजादी के बाद से गुर्जर समाज हमेशा स्वतंत्र और स्वाभिमानी रहा है। अपने महापुरुषों के सम्मान को बंदी या विवादित बनाए रखने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।
फर्जी मुकदमों की वापसी की मांग
​बैठक के दौरान मीडिया के माध्यम से प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए प्रतिनिधियों ने कहा कि पूर्व में हुए घटनाक्रम के दौरान समाज के निर्दोष युवाओं और प्रमुख नेताओं पर कई झूठे मामले दर्ज किए गए थे।
​प्रशासनिक अधिकारियों ने पूर्व में यह आश्वासन दिया था कि ये मुकदमे वापस ले लिए जाएंगे, परंतु धरातल पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। समाज के वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक हमारे युवाओं को इन झूठे मुकदमों से मुक्ति नहीं मिलती और अदालत में स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती, तब तक समाज चुप नहीं बैठेगा।
मुख्य मांगें
​पांच साल से लंबित मामला: कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पुलिस व जिला प्रशासन अपनी रिपोर्ट पेश करने में विफल रहा।
​25 सितंबर की समय-सीमा: महासभा ने संभागायुक्त (कमिश्नर) को दिया अल्टीमेटम; मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की घोषणा।
​फर्जी मुकदमों का विरोध: आंदोलन के दौरान समाज के युवाओं पर दर्ज झूठे केस तत्काल वापस लेने की मांग।
​लोकतांत्रिक आंदोलन: प्रतिमा स्थल के समीप शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से न्याय की लड़ाई लड़ने का संकल्प।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *