मास्टर प्लान के इंतजार में अटके भोपाल-इंदौर और ग्वालियर जैसे बड़े शहर, कागजों में सिमटा भूमि विकास नियम
ग्वालियर. प्रदेश में भले ही भूमि विकास नियम का मसौदा तैयार किया जा रहा हो लेकिन शहरों का मास्टर प्लान बनाकर लागू होने के बाद ही भूमि का उपयोग निर्धारित किया जा सकेगा। दरअसल भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसेस महानगरों का मास्टर प्लान अब तक नहीं बनाया जा सका। मास्टर प्लान न होने से शहरों का अनियोजित विकास हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए मध्य प्रदेश मेट्रोपालिटन रीजन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट के तहत बडे शहरों के सुनियोजित विकास के लिए नए ड्राफ्अ तैयार किए जा रहे है लेकिन मास्टर प्लान में एक बार जो लैंड यूज (आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक या ग्रीन एरिया) तय हो जाता है उसे बिना वैधानिक सरकारी प्रक्रिया के बदलना संभव नहीं होता है।
ग्वालियर के मास्टर प्लान की समय अवधि 2021 में समाप्त हो गई
यही वजह है कि मध्य प्रदेश में मास्टर प्लान लागू होने के बाद ही भूमि का वास्तविक उपयोग लैंड यूज तय हो सकेगा। इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के मास्टर प्लान की समय अवधि 2021 में समाप्त हो गई थी। भोपाल का मास्टर प्लान 1995 में आया था उस समय भोपाल की आबादी 10 से 15 लाख थी। मास्टर प्लान की अवधि दिसंबर 2005 को ही समाप्त हो चुकी है। इधर वर्ष 1975 से शासन ने केवल भोपाल के दो मास्टर प्लान को मंजूरी दी है।

