MP में UCC बिल को कैबिनेट से मिली मंजूरी, विधानसभा में पेश करने की तैयारी, UCC विधेयक पारित होते ही होगा लागू
भोपाल. मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रविवार को सीएम की अध्यक्षतता में हुई कैबिनेट की बैठक में यूसीसी विधेयक-2026 के ड्राफ्ट को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गयी। अब इसे विधानसभा में पेश किया जायेगा। विधानसभा का सत्र कल से शुरू हो रहा है।

कैबिनेट की बैठक के बाद सीएम मोहन यादव ने कहा है कि सरकार विधेयक का विधानसभा में पेश करने के लिये पूरी तरह से तैयार है। समानता भारतीय संस्कृति और मूल्यों का अभिन्न हिस्सा रही है। इसी भावना के अनुरूप् सरकार ने यह कदम उठाया है। देश में उत्तराखं डमें यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य है। जबकि गुजरात और असम में यूसीसी विधेयक पारित हो चुका है।
इतिहास का किया उल्लेख
कैबिनेट की बैठक के बाद सीएम ने भोपाल के गौरवशाली इतिहास का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा है कि भोपाल का इतिहास परमार राजवंश और राजा भोज से जुड़ा हे। यह क्षेत्र प्राचीनकाल से सनातन संस्कृति का केन्द्र रहा है। उन्होंने कहा है कि भोपाल का गहरा संबंध गौंड राजवश से भी है। मदन शाह और संग्राम शाह जैसे शासकों ने क्षेत्र के विकास में योगदान दिया। सीएम ने कहा है कि इतिहास में राजा निजाम शाह की विष देकर हत्या और उसके बाद रानी कमलापति द्वारा अपने पुत्र एवं प्रजा की रक्षा के लिये किये गये संघर्ष का भी विशेष महत्व है। उन्होंने अफगान सरकार दोस्त मोहम्मद खान के दौर और बाद के शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा है कि भोपाल का इतिहास विभिन्न शासकों और सांस्कृतियों से समृद्ध रहा है।
आजाद भारत से पहले गोवा में UCC
गोवा में पहले से ही UCC लागू है, लेकिन वहां इसे पुर्तगाली सिविल कोड के तहत लागू किया गया था। उत्तराखंड आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य है। सन् 1835 में, ब्रिटिश सरकार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें आपराधिक साक्ष्य और अनुबंधों के संबंध में देश भर में एक समान कानून बनाने का आह्वान किया गया था। इसे सन् 1840 में लागू भी किया गया, लेकिन धर्म के आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को अलग रखा गया। यहीं से समान नागरिक संहिता की मांग शुरू हुई।
1941 में बीएन राव समिति का गठन किया गया था, जिसने हिंदुओं के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने की बात कही थी। आजादी के बाद, हिंदू संहिता विधेयक पहली बार 1948 में संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य हिंदू महिलाओं को बाल विवाह और सती प्रथा जैसी गलत प्रथाओं से मुक्त करना था।

