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ग्वालियर रेलवे स्टेशन का नाम अटल या माधवराव के नाम पर हो का मुद्दा संसद में गूंजा

ग्वालियर. मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चम्बल संभाग में एक बार फिर राजनीतिक गुटबाजी खुलकर सामने आ गयी है। ग्वालियर रेलवे स्टेशनके नामकरण को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेन्द्र सिंह तोमर समर्थकों के बीच खींचतान तेज हो गयी है। यह मुद्दा अब स्थानीये के दायरे से निकल कर संसद भवन तक पहुच गया। ग्वालियर के सांसद भारतसिंह कुशवाह (तोमर गुट) ने रेल बजट पर चर्चा के दौरान 11 मार्च को ग्वालियर की कनेक्टिविटी और विकास के मामले उठाने के साथ इस रेलवे स्टेशन का नाम अटलबिहार बाजपेई के नाम रखने की मांग उठाई। उनके प्रस्ताव पर सदन में कई सांसदों ने मेज थपथपाकर समर्थन भी किया।
सिंधिया गुट की ओर से माधवराव सिंधिया के नाम पर भी चर्चा
वहीं सिंधिया गुट की तरफ से पहले से ही माधवराव सिंधिया के नाम पर स्टेशन का नामकरण करने की चर्चा चल रही थी। हालाकि आधिकारिक मांग नहीं आयी ।लेकिन समर्थक इसे लेकर लगातार आवाज उठा रहे है। इसका समर्थन करते हुए सिंधिया परिवार केक नजदीकी नेता बाल खांडे का कहना हैकि स्वर्गीय माधवराव सिंधिया ने रेलमंत्री रहते ग्वालियर रेलवे स्टेशन के उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
मंच भी अलग-अलग, सियासी दूरी साफ
सिंधिया और तोमर गुट के बीच दूरी अब सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी नजर आ रही है। हाल ही में मोहन यादव की मौजूदगी में हुए कार्यक्रमों में दोनों गुटों के नेता एक साथ नजर नहीं आए। कई मौकों पर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के मंच से दूरी बनाई।
केंद्रीय मंत्री सिंधिया व विधानसभा अध्यक्ष तोमर गुट कार्यक्रमों में भी मंच साझा नहीं करते हैं। हाल ही में प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में घाटीगांव में आयोजित लाड़ली बहना योजना के राज्य स्तरीय सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष और ग्वालियर सांसद शामिल नहीं हुए। जानकारों का कहना है कि सांसद कुशवाह के लोकसभा क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्हें बुलाया गया था। इससे पहले ग्वालियर सांसद ने तिघरा के कुलैथ में किसान सम्मेलन कराया था। जिसमें सीएम डॉ. मोहन यादव आए थे। लेकिन केन्द्रीय मंत्री सिंधिया शामिल नहीं हुए। इसके अलावा सिंधिया व सांसद के बीच पत्रों की होड़ भी खूब चर्चा में रह चुकी है।

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