स्वर्ण रेखा नदी पुर्नजीवित करने पर सुनवाई करते हुए जस्टिस रोहित आर्या अधिकारियों से बोले-नालायक, डफर, अनपढ़
ग्वालियर. स्वर्ण रेखा नदी को पुर्नजीवित करने की मांग को लेकर मंगलवार को हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में सुनवाई की गयी। 45 मिनट चली सुनवाई में नगरीय प्रशासन विभाग के कार्यपालन यंत्री राकेश रावत डिवीजन बेंच के अधिकांश सवालों के उत्तर नहीं दे पाये। इस गैर जिम्मेदाराना रवैये पर न्यायमूर्ति रोहित आर्या नाराज हो गये और इसके बाद उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ तल्ख टिप्पणियां की। उन्होंने अधिकारियों को नालायक, अनपढ़ और डफर तक कह डाला।
इंजीनियर हो कि अनपढ़
जस्टिल रोहित आर्या बोले मिस्टर आप भोपाल से आये हो टीए-डीए लेकर, जो दस्तावेज थमाया, उसके आधार पर शपथ पत्र दे दिया और तुम्हें पढ़ना चाहिये। इंजीनियर हो कि अनपढ़? अपर आयुक्त विजयराज को हटाकर तुम्हें प्रभारी अधिकारी (ओआईसी) बनाया, किसी लायक समझा होगा ना तुमको कि तुम भी उतने ही नालायक हो? समझा पा नहीं रहे हो। यह नाम के इंजीनियर हैं, सब भूल गये भोपाल में बैठककर, समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई 5 मार्च को नियत की है।
दो अधिकारी बुलाने गए, तब आए कार्यपालन यंत्री
कोर्ट ने पूछा कि सीवर लाइन की डिटेल रिपोर्ट बनाने वाला अफसर यहां मौजूद है। उन्हें बताया गया कि रिपोर्ट कार्यपालन यंत्री ने बनाई है और वे कोर्ट परिसर में हैं। निगम अधिकारी उन्हें बुलाने गए। थोड़ी देर बाद जब वे नहीं लौटे तो एक अन्य अधिकारी बुलाने गए। करीब 4 मिनट बाद वे आए।
अफसरों को बताओ कि अंग्रेजी नहीं आती तो एप से अनुवाद कर लो
कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी से भी कहा- मिस्टर मोदी आप इनके साथ घर पर बैठकर होमवर्क क्यों नहीं करते? सरकारी काम है तो ऐसे ही चलेगा। जब आदेश लिखा जाता है तो कुछ उद्देश्य होता है। दो दिन पहले बुलाओ, समझो क्या है। होमवर्क कोर्ट में होगा? हम आपको सपोर्ट करते हैं, इसका मतलब ये नहीं कि कोई काम नहीं होगा। हमारी आर्डर शीट वेस्ट ऑफ पेपर नहीं है। जो लिखाते हैं कुछ सोचकर लिखाते हैं। इन अफसरों को समझाओ, एक एप है। अंग्रेजी नहीं आती तो उससे अनुवाद करा लेंं।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 5 मार्च की सुनवाई में निगम के वे सभी अधिकारी मौजूद रहें, जिन्होंने सीवर लाइन प्रोजेक्ट में सेवाएं दी हैं। कोर्ट का मानना है कि भोपाल से आया कोई अधिकारी सीवर नेटवर्क को इतने बेहतर ढंग से नहीं बता सकता, जितने अच्छे से स्थानीय अधिकारी बता सकते हैं।

