मप्र में ओबीसी आरक्षण को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में सीनियर वकील रविशंकर प्रसाद, तुषार मेहता 1 सितम्बर को करेंगे पैरवी
भोपाल. मप्र में ओबीसी आरक्षण को लेकर मंत्रालय में चल रही बैठक खत्म हो गयी है। सीएम शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया हैं। हाईकोर्ट में राज्य सरकार का पक्ष रखने के लिये पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील तुषार मेहता को बुलायेंगे। हाईकोर्ट में 1 सितम्बर को होने वाली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से प्रकरण की अंतिम सुनवाई कर फैसला करने का आवेदन दिया जायेगा।
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ने बताया कि बैठक 3 घंटे चली। इसमें इस रणनीति पर मंथन किया गया है कि किस तरह प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण देना सुनिश्चित किया जाये। बैठक में तय हुआ है। आरक्षण के संबंध में न्यायालय में होने वाली अगली सुनवाई में देश के दिग्गज वकीलों की सेवायें ली जायेगी। सुनवाई में स्वयं एडवोकेट जनरल न्यायालय में आग्रह करेंगे कि इसी सुनवाई को अंतिम मानकर पिछड़ा वर्ग के हित में 27 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दी जाये।
क्या है मामला
2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण देने का विधेयक लेकर आई थी, लेकिन फैसले पर तत्काल ही हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया था। इसके बाद प्रदेश में ओबीसी को 14% आरक्षण ही दिया जा रहा है। हाल ही में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ओबीसी को 27% आरक्षण ना मिल पाने के लिए मौजूदा शिवराज सरकार को घेरा था। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि सरकार आरक्षण पर कोर्ट में ठीक तरह से पक्ष नहीं रख रही है। इसी का काउंटर करने के लिए बीजेपी एक्टिव हुई। अब बीजेपी की ओर से ये आरोप लगाया जा रहा है कि कांग्रेस आरक्षण का विधेयक सिर्फ वोट बैंक के लिए लेकर आई थी। खुद सीएम शिवराज ने मंगलवार को कहा था कि कमलनाथ सरकार ने कोर्ट में समय पर जवाब पेश नहीं किया था, इसलिए उस पर कोर्ट ने स्टे लगा दिया था।
हाईकोर्ट 1 सितंबर को करेगा सुनवाई
बता दें कि मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने OBC वर्ग को 27% आरक्षण देने के मामले को लेकर सुनवाई की। हाईकोर्ट ने OBC आरक्षण के संबंध में सरकार के आदेश पर रोक बरकरार रखी है। 1 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई होगी।

