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प्रकृति संरक्षण के लिए वृक्षारोपण के विचार का अंकुरण जरूरी – न्यायाधिपति 

शहर की पहाड़ियों को सिटी फॉरेस्ट विकसित कर पहनाया जा रहा है हरा आवरण 
ग्वालियर -उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति आनंद पाठक ने कहा कि प्रकृति संरक्षण के लिये केवल वृक्षारोपण ही नहीं, सभी में वृक्षारोपण के विचार का अंकुरण होना भी जरूरी है। खुशी की बात है ग्वालियर में यह विचार अंकुरित हो रहा है। आशा है कि आने वाले समय में ग्वालियर के आसपास की पहाड़ियाँ सिटी फॉरेस्ट से सुसज्जित होंगीं। न्यायाधिपति शुक्रवार की शाम उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर के न्यायमूर्तिगणों के साथ “आनंद पर्वत” पर वृक्षारोपण करने पहुँचे थे। उन्होंने इस अवसर पर अपील की कि हम सब अपना मूल कर्तव्य समझकर पेड़ लगाएं और उनका पोषण भी करें। न्यायाधिपति श्री पाठक के नेतृत्व एवं नव नियुक्त प्रशासनिक न्यायाधिपति श्री जी एस अहलूवालिया की मौजूदगी में आनंद पर्वत पर फलदार प्रजातियों के लगभग एक हजार पौधे रोपे गए।
अलापुर तिराहे के समीप “हरि पर्वत” के सामने स्थित “आनंद पर्वत” पर प्रशासनिक न्यायाधिपति श्री पाठक ने रुद्राक्ष का पौधा रोपकर इस पहाड़ी को सिटी फॉरेस्ट के रूप में हरीतिमा का आवरण पहनाने के काम को आगे बढ़ाया। इस अवसर पर उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर के न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया ने आम की आम्रपाली प्रजाति का पौध रोपा। साथ ही न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के, न्यायमूर्ति हृदेश, न्यायमूर्ति आशीष श्रोती, न्यायमूर्ति अमित सेठ, न्यायमूर्ति पुष्पेन्द्र यादव, न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत व न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता ने भी पौधे रोपे। साथ ही प्रधान जिला न्यायाधीश ललित किशोर, अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेड़कर व दीपेन्द्र सिंह कुशवाह, पुलिस महानिरीक्षक अरविंद सक्सेना, पुलिस उप महानिरीक्षक अमित सांघी, कलेक्टर रुचिका चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय व वन मण्डलाधिकारी मुकेश पटेल व सहित अन्य अधिकारियों ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे।
प्रशासनिक न्यायाधिपति श्री पाठक ने कहा कि स्कूली बच्चों को शुरू से ही आनंद पर्वत जैसे प्रकल्पों से जोड़ें, जिससे उनमें भी बचपन से ही वृक्षारोपण का विचार अंकुरित हो सके। साथ ही बच्चे जान सकें कि बंजर भूमि को हम किस प्रकार हरा-भरा कर सकते हैं। उन्होंने विभिन्न नागरिक समूहों और संगठनों को भी इस प्रोजेक्ट से जोड़ने के लिये कहा। उच्च न्यायालय द्वारा गठित की गई कमेटी के सहयोग से निश्चित ही ग्वालियर शहर की पहाड़ियों को सिटी फॉरेस्ट के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी। न्यायमूर्ति श्री पाठक ने “हरि पर्वत एवं आनंद पर्वत” विकसित करने में अहम योगदान देने के लिये जिला प्रशासन, नगर निगम व वन विभाग एवं राम आस्था मिशन की भी सराहना की।
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया ने कहा कि धरती पर जितना अधिकार मानव का है, उतना ही अधिकार अन्य जीवों का है। इसलिये हमें प्रकृति का उतना ही उपयोग करना चाहिए, जितना हमारे हिस्से में है। उन्होंने मानव द्वारा प्रकृति के प्रति की गईं पिछली गलतियों से सबक लेकर प्रकृति संरक्षण में योगदान देने का आह्वान भी इस अवसर पर किया। साथ ही कहा कि न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक ने सिटी फॉरेस्ट के रूप में ग्वालियर में प्रकृति संरक्षण का जो बीड़ा उठाया है उसे आगे बढ़ाने के हर संभव प्रयास किए जायेंगे।
मील का पत्थर भी लगाया 
आनंद पर्वत पर वृक्षारोपण करने से पहले प्रशासनिक न्यायाधिपति आनंद पाठक व न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया सहित अन्य न्यायमूर्तिगणों ने मील का पत्थर भी लगाया। यह पत्थर प्रकृति संरक्षण का संदेश देने के लिये लगाया गया है।
“हरि पर्वत” पर लगभग 8 हजार पौधे पेड़ बने, “आनंद पर्वत” पर लहलहायेंगे 4 हजार पेड़
प्रशासनिक न्यायाधिपति आनंद पाठक की पहल पर जिला प्रशासन द्वारा राम आस्था मिशन एवं नगर निगम व अन्य विभागों के सहयोग से “हरि पर्वत” व “आनंद पर्वत” को सिटी फॉरेस्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। हरि पर्वत पर रोपे गए लगभग 8 हजार पौधों ने पेड़ों का रूप ले लिया है। इसी तरह “आनंद पर्वत” पर कुल लगभग 4 हजार पेड़ लगाए जा रहे हैं। इनमें से लगभग 2 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं। शेष पौधे लगाने का अंतिम चरण चल रहा है।

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