जाट राजाओं द्वारा निर्माण कराया गया किला है हिम्मतगढ़, किसानों के लिये तालाब बनाया गया जो 20 वर्षो के बाद भरा है लबालब पानी से किसान खुश
ग्वालियर. शहर से 22 किमी दूर स्थित हिम्मतगढ़ तालाब मूलतः सिंचाई के उद्देश्य को लेकर इसका निर्माण पिचोरे के जाट राजाओं द्वारा कराया गया था। समय के साथ यह पंचायत किसानों के लिये जीवन दायिनी स्त्रोत बन गया है। हांलाकि 2023 में क्षतिग्रस्त हुआ था। इसके बाद स्थानीय समाज ने इसे बनाये रखने का प्रयास किया था। अब शासन स्तर पर पुनः इसे बनाये के प्रयास जारी है।
जिससे भविष्य में सिंचाई संबंधी संकट से बचा जा सके। अनुमान है कि शासन की स्वीकृति मिलने पर मरम्मत का कार्य शीघ्र किये जाने जाने का प्रयास है।यदि आप इस तालाब से जुड़ी स्थानीय शिलालेख, पुरातात्विक स्तर का विवरण की तलाश जारी है। हिम्मतगढ़ किला वर्तमान में कोई रखाव नहीं किया जा रहा है इस वजह से खण्डहर हो चुका है। किले के अन्दर माता और भोलेनाथ का मंदिर है। इसके अंदर प्रवेश करने पर वर्षा 1857 की बनी आपको अष्टधातु की बनी एक तोप पड़ी हुई है। आंदोलन के समय में गोले और बारूद रखे जाते थे।
जलाश्य
हिम्मतगढ़ गांव तो चीनौर में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण जलाश्य है। जिसे स्थानीय रूप से हिम्मतगढ़ तालाब के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में जल संसाधन विभाग इसकी देखरेख कर रहा है। आपको बता दें कि यह तालाब 20 वर्षो के बाद भरा है। जिससे यहां किसानों के खेतों में पानी पहुंचता है। इसी खेतों में कृषि की पैदावार होती है। हालांकि तालाब के निर्माण की तारीख स्पष्ट नहीं मिली है। लेकिन यह तालाब सिंचाई के लिये बनाया गया था। आसपास के खेतों के लिये मुख्य जलस्त्रोत रहा है।
19 किमी लम्बी नहर बनाने का प्रस्ताव लंबित है
मानसून की कमी से सूखे रहने वाले घाटीगांव ब्लॉक के हिम्मतगढ़ इलाके में सिंचाई के लिये करीब 149 किमी लम्बी नहर के निर्माण का प्रस्ताव शासन को मंजूरी के लिये भेजा गया था। इस नहर के निर्माण पर तत्कालीन वर्ष 240.99 करोड़ रूपये खर्च होने का अनुमान था। नहर से हिम्मतगढ़ के अतिरिक्त आरोन और पाटई इलाके की लगभग 9500 हेक्टर भूमि की सिंचाई हो सकेगी। प्रस्ताव शासन के पास लंबित है। लेकिन नहर के लिये पानी उपलब्धता का मामला अटका हुआ है। प्रस्ताव में कहा गया है कि आरबीसी, एलबीसी 2 नहरें व इनसे 88 मायनर का निर्माण किया जाना है। इस नहर से हिम्मतगढ़ इलाके की 565 हेक्टर व आरोन, पाटई की 4136 हेक्टर भूमि की सिंचाई की जायेगीं। इस नहर से हिम्मतगढ़, आरोन, पाटई क्षेत्र के करीब 37 गांवों को नहर के पानी का लाभ मिल सकेगा।
हिम्मतगढ़ का ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि
हिम्मतगढ़ ग्राम पंचायत -ग्वालियर जिले के चीनोर तहसील में स्थित है। यह गांव ग्वालियर से करीब 32 किमी दक्षिण में स्थित हैं हिम्मतगढ़ एक जाट किले की भूमि है। जिसे पिचोरे के महाराजा हमीर देव ने निर्माण कार्य कराया था। इसे बाद में श्रीप्रताप जाट ने संभाला था। उस वक्त यह ग्वालियर के जीवाजी राव सिंधिया के अधीन था।

