ग्वालियर में लव जिहाद के विरोध में हिन्दू समाज ने जिलाधीश को सौंपा ज्ञापन
ग्वालियर. मध्य प्रदेश में लव जिहाद की बढती घटनाओं को रोकने एवं महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के लिय सकल हिन्दू समाज द्वारा माननीय मुख्यमंत्री शासन के नाम जिलाधीश महोदया ग्वालियर को समाज की मात्शक्ति के नेतृत्व में विभिन्न सामाजिक संगठनों से आये प्रतिनिधियों एवं सैकडों लोगों द्वारा पैदल मार्च कर नारेबाजी लव जिहाद मुर्दाबाद के नारे लगाते हुये जिलाधीश महोदया के प्रतिनिधि के रूप में ज्ञान लेने आये श्री डी.एन. सिंह, संयुक्त कलेक्टर को कलेक्ट्रेट कार्यालय परिसर ग्वालियर में ज्ञापन सौपा। ज्ञापन सौपने से पूर्व उसका वाचन कर श्रीमती वंदना नरवरिया द्वारा बताया गया कि सकल हिन्दू समाज संगठित रूप से विधर्मियों के द्वारा चलाये जा रहे संगठित अपराध लव जिहाद को समूल नष्ट करने और आरोपियों के मन में भय में पैदा हो सके इसके लिये प्रमुख मांगों के रूप में राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ही एकमात्र सक्षम संस्था है जो इन अंतरराज्यीय व संगठित अपराधों की तह तक जाकर अपराधियों के नेटवर्क को उजागर कर सकती है।

भोपाल, उज्जैन सहित अन्य जिलों में पोर्न विडियो के रूप में दुष्कर्म के साक्ष्य मौजूद
यह दृढ प्रबल और पुनरावृत्त अनुशंसा है कि आप इस विषय में शीघ्र भारत सरकार से संस्तुति कर इन प्रकरणों को एनआईए को सौंपे। अपराध में सम्मिलित व्यक्तियों को अपराधी बनाया जाए। भोपाल, उज्जैन, मुरैना सहित अन्य जिलों में भी पोर्न विडियो के रूप में दुष्कर्म के साक्ष्य मौजूद होते हुए भी पीडित एवं पीडिता का परिवार भय एवं बदनामी के डर से एफआईआर करने सामने नहीं आ रहे है। ऐसी स्थिति में शासन की ओर से मामला दर्ज कराया जाना चाहिए। अधिकांश मामलों में यह संगठित अपराध सिद्ध हो चूका है लेकिन संगठित अपराध के अंतर्गत मामला दर्ज कराया जाना चाहिए। अधिकांश मामलों में यह संगठित अपराध सिद्ध हो चूका है लेकिन संगठित अपराध के संतर्गत मामला दर्ज नहीं किया गया इसलिए जहां यह स्पष्ट दिख रहा है कि एक से अधिक पीडिताओं के साथ दुष्कृत्य को संगठित अपराध के रूप में अंजाम दिया गया है। वहां इसकी धराओं का इजाफा किया जाए।
बालिकाओं के लाइसें बनवाने के लिए दस्तावेजों का दुरूपयोग किया
इंदौर में टेलीपरफॉरमेंस कर्मचारी द्वारा किया गया कांड से स्पष्ट है कि बालिकाओं के लाइसें बनवाने के लिए दिए गए दस्तावेजों का दुरूपयोग किया गया है इसलिए भविष्य में किसी भी योजना के अंतर्गत दस्तावेजों को डिजिटल रूप में मांगा जाए। जैसा कि भोपाल के टीआईटी कॉलेज मामले में सामने आया है कि पीडिताएं नाबालिग और अनाथ भी है ऐसी स्थिति में उनकी सुरक्षा और आर्थिक सहायता के लिए विशेष मद की व्यवस्था की जाये। मध्य प्रदेश स्वतंत्रता अधिनियम 2021 केवल कागजों में ही रह गया है। 2021 से अभी तक इसके अंतर्गत ना के बराबर अपराध दर्ज किये गए है। इसकी उपयोगता बनी रहे इसके लिए ऐसे सभी मामले जहां विधर्मी द्वारा गलत बयानी, धमकी या बल का उपयोग, धोखाधडी, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती प्रलोभन या विवाह के माध्य से धर्म परिवर्तन के प्रयास किये वहा प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का भी पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाना सुनिश्चित करें।

