कैडबरी में फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम व्यापारी से ठगे 5.70 लाख रूपये, ठग दिल्ली और हरियाणा से कॉलसेंटर चला रहे थे, 2 ठग गिरफ्तार
ग्वालियर. मालनपुर स्थित कैडबरी की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले 2 शातिर ठगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गये ठग बिहार निवासी लेकिन दिल्ली-हरियाणा से ठगी के कॉल सेंटर चला रहे थे। राज्य साइबर सेल जोन ग्वालियर ने इन दोनों आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बेहद शातिर है।
इंटरनेट पर जो लोग किसी भी कम्पनी की फ्रेंचाइजी लेने के लिये तलाश करते थे। यह उनका डेटा वहां से चोरी कर लेते थे। इसके बाद ट्रु कॉलर पर उसनी कम्पनी के नाम से आईडी बनाकर टारगेट को कॉल कर जाल में फंसाकर ठगी को अंजाम देते थे। एक साल से साइबर पुलिस इनके पीछे लगी थी। यह अब पुलिस के हाथ लगे हैं।
क्या है मामला
प्रदीप सेन ने कैडबरी की फ्रेंचाइजी के लिये इंटरनेट पर तलाश किया था। जिसके एक घंटे के बाद ही उनके पास कॉल आया, कॉल करने वालेने बताया कि आपने कैडबरी कम्पनी को सर्च किया था। जिसका मैसेज उनके पास आया था। इसके बाद कम्पनी की पॉलिसी समझाकर उनको आसानी से फ्रेंचाइजी ऑफर की। इस बीच कुछ डिपोजिट कराने के बहाने 5.70 लाख रूपये ठग लिये थे। इस मामले की जांच की तो पता चला कि यह रैकेट दिल्ली के साथ ही सोनीपत, हरियाणा और बिहार से संचालित है। डीएसपी राज्यसाइबर सेल संजीव नयन शर्मा ने बताया कि ग्वालियर निवासी प्रदीप सेन व्यापारी है। एक वर्ष पूर्व उन्होंने एक शिकायत की थी कि उन्हें कैडबरी चॉकलेट की फ्रेंचाइजी दिलाने नाम पर ठगों ने 5 लाख 70 हजार रूपये की ठगी की है।
ठगी का तरीका बिहार के छपरा से सीखा
राज्य साइबर सेल जोन ग्वालियर के डीएसपी संजीव नयन शर्मा ने बताया कि कैडबरी की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले 2 शातिर आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। फिलहाल पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में पता चला है कि पकड़े गये आरोपी ने बिहार के छपरा से ठगी का तरीका सीखा है पैसे निकालने के लिये बिहार के अलग-अलग जिलों में अपने दलाल तैनात किये हैं। जिससे पुलिस उन तक पहुंच नहीं पाये। अब राज्य साइबर सेल की टीम उनके साथियों के संबंध में पूछताछ कर रही है।
एक साल की मेहनत तब मिले आरोपी
पिछले एक साल से उप निरीक्षक हिमानी पाठक, शैलेन्द्र सिंह राठौर, प्रधान आरक्षक पवन शर्मा और आरक्षक पुष्पेंन्द्र सिंह मामले की जांच में लगे थे और जांच की तो पता चला कि इस गिरोह का सरगना मनीष गुप्ता निवासी बिहार है। उसके लिए बिहार निवासी दीपक कुमार डेटा कलेक्ट करने का काम करता है। इसके बाद यह दूसरे राज्यों से नौकरी के नाम पर कुछ युवकों को हायर कर उनकी मदद से ठगी की वारदात को अंजाम देते है और रुपयों का ट्रांजैक्शन बिहार में कराते थे, जिससे पुलिस को गुमराह कर सके।

