आपदा प्रबंधन कार्ययोजना के आधार पर जरूरत पड़ने पर तत्काल मदद पहुँचाई जा सके– संभागीय आयुक्त
ग्वालियर – बाँधों व जलाशयों से जल निकासी की सूचना एवं चेतावनी प्रणाली पुख्ता हो। साथ ही जल संसाधन विभाग के सभी अधिकारी जिला प्रशासन व पुलिस के साथ सतत एवं बेहतर कम्युनिकेशन (संवाद) बनाए रखें, जिससे पानी निकासी संबंधी सूचनायें जल्द से जल्द जमीनी स्तर तक पहुँच सकें। इसमें कोई ढ़िलाई न हो। इस आशय के निर्देश संभागीय आयुक्त ने ग्वालियर – चंबल संभाग की सिंचाई परियोजनाओं से डाउन स्ट्रीम में जल निकासी की सूचना एवं चेतावनी प्रणाली तंत्र तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित हुई संभाग स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में दिए।
बरसात को ध्यान में रखकर बनाई गई आपदा प्रबंधन कार्ययोजना के आधार पर जरूरत पड़ने पर तत्काल मदद पहुँचाई जा सके। इसके लिये अगले 10 दिन के भीतर अभ्यास कर लें। कार्ययोजना में शामिल कॉन्टेक्ट नम्बर पर अभ्यास के दौरान अवश्य संपर्क किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नदियों व जलाशयों के किनारे होने वाले धार्मिक आयोजनों व मेलों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें।
गुरुवार को संभाग आयुक्त कार्यालय के सभागार में आयोजित हुई बैठक में पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर रुचिका चौहान व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह व मुख्य अभियंता जल संसाधन एसके वर्मा सहित जल संसाधन विभाग व होमगार्ड के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। ग्वालियर व चंबल संभाग के अन्य जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक व जल संसाधन विभाग के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस बात का स्पष्ट आंकलन हो कि कितना पानी छोड़ने से कौन-कौन से क्षेत्र किस स्तर तक प्रभावित होंगे, जिससे राहत व बचाव के पहले से ही पुख्ता इंतजाम किए जा सकें। उन्होंने कहा कि कल्वर्ट व पुल-पुलियों से पानी छोड़ने की जानकारी देने के लिये अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही जल संसाधन विभाग के दोनों संभागों के सभी जिलों के अधिकारी अपने-अपने जिले के बाँधों व जलाशयों के कैचमेंट एरिया पर बरसात के दौरान विशेष निगाह रखें और इसकी जानकारी प्रशासन व पुलिस से साझा करते रहें।

