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भारतीय रेलवे के नये सिस्टम से बुलेट की रफ्तार से दौड़ेंगी MP की 236 ट्रेनें

ग्वालियर. भारतीय रेलवे ने अपनी पारंपरिक कछुआ चाल को अलविदा कहकर डिजिटल और हाईस्पीड युग में कदम रख दिया है। झांसी-हेतमपुर रेलखंड पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम स्वचालित सिग्नल प्रणाली के लागू होने से ट्रनों के संचालन का पूरा गणित ही बदल गया है। लगभग 155 किलोमीटर लंबे इस व्यस्त रूट पर अब ट्रैक के हर एक किलोमीटर पर रेलवे की तीसरी आंख तैनात है। पहले जहां इस दूरी में केवल 34 सिग्नल थे वहीं अब इनकी संख्या बढाकर 162 कर दी गई है। इस बदलाव से न केवल ट्रनों की रफ्तार बढेगी बल्कि यात्रियों को स्टेशन के बाहर बेवजह खडे रहने की झंझट से भी मुक्ति मिल जाएगी।
क्या है नया सिस्टम
एक के पीछे एक दौडेंगी ट्रनें पुरानी व्यवस्था में एक स्टेशन से दूसरी ट्रेन तब तक रवाना नहीं की जाती थी जब तक कि आगे चल रही ट्रेन अगले स्टेशन तक न पहुंच जाए।
ग्वालियर में ट्रैक लोड हर दिन गुजरती है 236 ट्रेनें
ग्वालियर से गुजरने वाले ट्रैफिक का दबाव इतना ज्यादा है कि यह सिस्टम लाइफलाइन साबित होगा।
हर किलोमीटर पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम
रेलवे ट्रैक के हर किलोमीटर पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाया जा रहा है। इससे ट्रैक की कैपेसिटी और ट्रेनों की स्पीड दोनों बढ़ती है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि ट्रेनों को अब किसी स्टेशन या आउटर पर बेवजह इंतजार नहीं करना पड़ता। झांसी मंडल में यह काम लगभग पूरा हो चुका है।

 

 

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