MP में 4 माह में सभी कर्मचारियों को मिल सकती है पदोन्नति
भोपाल. पदोन्नति के नए नियम को लेकर हाई कोर्ट जबलपुर में सुनवाई होनी है। सरकार को उम्मीद है कि इसमे पदोन्नति का रास्ता निकल सकता है। अगर ऐसा होता है तो 4 माह के भीतर सभी विभागों में पात्र अधिकारियों व कर्मचारियों को पदोन्नत कर दिया जाएगा। ये सभी पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होंगी यानी पदोन्नति सशर्त रहेगी।
प्रदेश में न्यायालयीन मामलों को छोडकर 2016 से पदोन्नतियां बंद है। तब से अब तक लगभग 80 हजार कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो चुके है। इससे कर्मचारियों में बढ रहे असंतोष को देखते हुए मोहन सरकार ने सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श करके पदोन्नति नियम 2025 तैयार किए लेकिन इसमें भी 2002 के नियम की तरह ही सामान्य वर्ग की उपेक्षा हुई। इस नियम को सामान्य पिछडा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संस्था की ओर से हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।
न्यायालय ने राज्य सरकार को पुराने और नए नियम के अंतर के साथ यह बताने के निर्देश दिए है कि 2002 के नियम को समाप्त करने के हाई कोर्ट के निर्णय को जब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई तो फिर उस याचिका को वापस क्यों नहीं लिया गया। सरकार हाई कोर्ट में अपना पक्ष रख चुकी है।
इस मामले में अब मंगलवार को सुनवाई प्रस्तावित है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नियम में ही यह स्पष्ट किया गया है कि नए नियम से जो भी पदोन्नति दी जाएगी वह सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन प्रकरण के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी यानी पदोन्नति सशर्त रहेगी।

