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वायु प्रदूषण कम करने इलेक्ट्रिक व्हीकल एवं स्वच्छ वायु दिवस पर निकाली ईवी रैली

ग्वालियर – इलेक्ट्रिक व्हीकल एवं स्वच्छ वायु दिवस पर शहर के नागरिकों को वायु प्रदूषण के प्रति जागरूक करने के लिए नगर निगम ग्वालियर द्वारा इलेक्ट्रिक वाहन रैली निकाली गई। इलेक्ट्रिक वाहन रैली को महापौर डॉ. शोभा सिकरवार एवं सभापति मनोज सिंह तोमर ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर पार्षद अपर्णा पाटिल, अपर आयुक्त प्रदीप तोमर, नोडल अधिकारी आईईसी, सहायक नोडल अधिकारी आईईसी शैलेन्द्र सक्सैना, सहायक नोडल खेल अधिकारी विजेता सिंह चौहान, दिव्य ज्योति संस्थान, रमन शिक्षा समिति से हरिओम गौतम, अर्चना शर्मा, श्रीमती रहमान, ज्योति चौहान, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से रागिनी, सुभम, एनकैप से दीपाली सहित बड़ी संख्या में शहर वासी इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ उपस्थित रहे।
इलेक्ट्रिक व्हीकल एवं स्वच्छ वायु दिवस पर लगभग 200 इलेक्ट्रिक वाहनों द्वारा रैली बैजाताल से प्रारंभ होकर, नदी गेट, ज्येन्द्रगंज, पाटनकर बाजार, दौलतगंज, महाराजबाडा, सराफा बाजार, डीडवाना ओली, राम मंदिर, छप्पर वाला पुल, शिंदे की छावनी, फूलबाग चौराहा, लक्ष्मीबाई समाधि स्थल, पडाव न्यू ब्रिज, मोटल तानसेन, निगम मुख्यालय सिटी सेंटर होते हुए समापन बाल भवन पर हुआ। समापन के अवसर पर महापौर ने सभी को नशा मुक्ति, वायु प्रदूषण एवं स्वच्छता की शपथ दिलाई गई एवं सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
इलेक्ट्रिक वाहन रैली का उद्देश्य शहरी क्षेत्र में डीजल, पेट्रोल चलित वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण वायु में कार्बन मोनो ऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड इत्यादि गैसों के घुलने के कारण शहरी वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव देखा जा रहा है। वायु सुधार की दृष्टि से शहरी सीमा के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जनमानस को जागरूक करने व अधिकतम इलेक्ट्रिक एवं सीएनजी चलित वाहनों अथवा सार्वजनिक वाहनों से आवागमन करने के लिए प्रेरित हेतु नगर निगम द्वारा इलेक्ट्रिक वाहन रैली का आयोजन किया किया।

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खनिज का अवैध परिवहन करने पर दो वाहन जब्त 

ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर खनिज विभाग द्वारा जिले में निरंतर जाँच अभियान चलाया जा रहा है। सहायक खनिज अधिकारी रमाकांत तिवारी ने दल के साथ मंगलवार को आकस्मिक निरीक्षण के दौरान खनिज का परिवहन करने वाले वाहन डम्फर क्रमांक-एमपी-07-जीए-4218 गिट्टी का अवैध परिवहन करते पाए जाने पर थाना बिलौआ एवं वाहन डम्फर क्रमांक-आरजे-34-जीए-3380 खनिज डस्ट का अवैध परिवहन करते पाए जाने पर जब्त कर मय खनिज थाना सिरोल की अभिरक्षा में सुरक्षित रखवाया गया।
सहायक खनिज अधिकारी ने बताया कि दोनों वाहनों एवं मशीन पर मध्यप्रदेश खनिज अवैध खनन, परिवहन व भण्डारण निवारण नियम 2022 के तहत अर्थदण्ड की कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
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आईजी, डीआईजी एवं ग्वालियर, भिण्ड़ व दतिया जिले के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षकों की मौजूदगी में हुई बैठक 

ई-दर्शन गाईड के माध्यम से श्रृद्धालु घर बैठे कर सकेंगे माता के दर्शन 
ग्वालियर – हर परिस्थिति एवं पूर्व के अनुभवों को ध्यान में रखकर पुख्ता व पर्याप्त व्यवस्थायें करें, जिससे श्रद्धालु सुविधाजनक तरीके से माँ रतनगढ़ व कुँअर बाबा के दर्शन कर सकुशल अपने घर जा सकें। इस आशय के निर्देश संभागीय आयुक्त मनोज खत्री ने नवरात्रि एवं दीपावली दौज पर सुप्रसिद्ध रतनगढ़ माता मंदिर में आयोजित होने जा रहे विशाल मेले की तैयारियों को लेकर आयोजित हुई बैठक में संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा मेले की प्रत्येक व्यवस्था को गंभीरता से लें और जरा सी भी ढ़िलाई न हो। इस अवसर पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा रतनगढ़ माता मंदिर ई-दर्शन गाईड का विमोचन भी किया। ई-दर्शन गाईड पर प्रदर्शित क्यूआर कोड के माध्यम से श्रद्धालु रतनगढ़ माता मंदिर से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
समीक्षा बैठक में संभाग आयुक्त द्वारा मंदिर परिसर में निर्माणाधीन कोरीडोर, रिटेनिंग वॉल, मंदिर तक के पहुंच मार्गों, पार्किंग, विद्युत, पेयजल व शौचालय तथा अस्थायी अस्पतालों की तैयारियों की जानकारी ली। 18 सितम्बर तक मंदिर को जोड़ने वाली सभी सड़कों को पूरी तरह दुरूस्त कर लें। उन्होंने विद्युत वितरण कंपनी के महाप्रबंधक को खासतौर पर निर्देशित किया कि मेले के दौरान सुचारू विद्युत आपूर्ति के लिये पर्याप्त वैकल्पिक इंतजाम रहें। किसी भी स्थिति में बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होना चाहिए।
संभाग आयुक्त ने कहा कि मेले को जोड़ने वाले सभी मार्गों पर श्रद्धालुओं के लिये पर्याप्त संख्या में पार्किंग बनाई जाएं। साथ ही हर पार्किंग पर पर्याप्त रोशनी, पेयजल, शौचालय इत्यादि की व्यवस्था की जाए। पार्किग के सांकेतिक चिन्ह जगह-जगह लगाये जाए ताकि श्रृद्धालुओं को पार्किग स्थल ढूडने में किसी समस्या का सामना ना करना पड़े। पार्किंग स्थल से मंदिर के नजदीक तक बुजुर्ग, महिलाओं एवं चलने में असमर्थ श्रद्धालुओं को पहुँचाने के लिये ई-रिक्शा की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने अनाउंसमेंट व कंट्रोल रूम का संचालन अनुभवी व्यक्तियों से कराने के निर्देश दिए। साथ कहा कि लाउड स्पीकर की आवाज मेले के प्रत्येक कोने तक स्पष्ट रूप से पहुंचे यह सुनिश्चित किया जाये।
गोताखारों की तैनाती स्नान घाट पर कराना सुनिश्चित करें। नवरात्रि के दौरान 20 तैराकों सहित एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की 3 टीमें व दीपावली दौज मेले के अवसर पर 50 तैराकों सहित 6 टीमें तैनात रहेंगीं।  जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि मड़ीखेड़ा सहित अन्य बांधों के जल स्तर पर विशेष ध्यान रखें। यदि पानी निकालने की जरूरत हो तो वह मेले से पहले ही निकाल दिया जाए, जिससे रतनगढ़ मेले के दौरान नदी का जल स्तर बढ़ने से श्रद्धालुओं को असुविधा न हो। इस बात को पूरी गंभीरता से लें।
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भारत के 17वें उपराष्ट्रपति पद पर विजयी सीपी राधाकृष्णनन

नई दिल्ली. देश के 17वें उपराष्ट्रपति चुनाव के लिये आज संसद भवन में मतदान किया गया। मतदान प्रकिया सुबह 10 बजे प्रारंभ की गयी तो शाम 5 बजे तक चली। पीएम नरेन्द्र मोदी ने सबसे पहले सुबह 10 बजे वोट डाला ।मतदान शुरू होने से पहले सभी एनडीए सांसद सुबह 9.30 बजे ब्रेक फास्ट बैठक में हिस्सा लिया। मुकाबल एनडीए के उम्मीदवार सीसी राधाकृष्णनन और इंडिया ब्लॉक के प्रत्याशी बी सुदर्शन रेड्डी के बीच है। लोक सभा के 542 और राज्यसभा के 237 सदस्य वोट डालेंगे ।सीपी राधाकृष्णनन को विजयी उम्मीदवार घोषित किये गये है।

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खाद के अभाव में किसानों ने किया चक्काजाम, सुबह से लाइन में लगे हुए थे

ग्वालियर. डबरा अनुविभाग के पिछोर में खाद वितरण को लेकर मंगलवार को तनाव की स्थिति बन गयी है। सुबह 5 बजे से ही 100 से ज्यादा की संख्या में किसान और महिलायें खाद वितरण केन्द्र पर पहुंच गये। खाद की कमी की वजह से वितरण न होने पर किसानों ने सड़क पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया है। चक्काजाम की खबर मिलते ही नायब तहसीलदार पूजा यादव और पिछोर थाना टीआई बलविंदन ढिल्लन घटनास्थल पर पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था के लिये थाने की पुलिस बल को तैनात किया गया है। प्रशासन के हस्तक्षेप से स्थिति को नियंत्रित किया गया है।
भविष्य में खाद की कमी न होने का मिला आश्वासन
किसानों की मांग पर तुरंत खाद का स्टॉक उपलब्ध कराया गया। नायब तहसीलदार पूजा यादव की निगरानी में खाद का वितरण शुरू हुआ। अधिकारियों ने किसानों को भविष्य में खाद की कमी न होने का आश्वासन दिया। किसानों का कहना है कि मौसमी फसल के लिए खाद जरूरी है। आपूर्ति में देरी से सब परेशान थे। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से हालात सामान्य हो गए हैं। अब किसान व्यवस्थित रूप से लाइन में लगकर खाद प्राप्त कर रहे हैं।

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हाईकोर्ट से रिश्वत के मामले में सेवानिवृत्त सहायक श्रमायुक्त को लगा झटका, 8.40 लाख की रिश्वत के आरोप हरीशचंद्र मिश्रा की याचिकायें खारिज

ग्वालियर.हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त सहायक श्रमायुक्त हरीशचन्द्र मिश्रा की 2 याचिकाओं को खारिज कर दिया है। हरीश मिश्रा ने 8.40 लाख रूपये की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप है। एचसी मिश्रा ने 18 जुलाई 2022 को जारी विभागीय चार्जशीट को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि चार्जशीट 4 वर्ष की सीमा से बाहर है आरोप अस्पष्ट है कि न्यायालय ने कहा है कि आरोप अस्पष्ट है। न्यायालय ने कहा है कि आरोप वर्ष 2019-20 के है। चार्जशीट 2022 में जारी की गयी है। ऐसे में यह समय सीमा से बाहर नहीं मानी जा सकती है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि रिश्वत मांगने जैसे आरोप की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। चार्जशीट को केवल बताकर निरस्त नहीं किया जा सकता है।
पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण पर रोक
मिश्रा मार्च 2019 से जुलाई 2020 तक ग्वालियर में पदस्थ रहे। आरोप हैं कि 2019 में उन्होंने रिश्वत मांगी थी। इस मामले में सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले (31 जुलाई 2020) को उन्हें निलंबित कर इंदौर मुख्यालय भेजा गया था। निलंबन के बाद उन्हें पहले 50 प्रतिशत और बाद में 90 प्रतिशत पेंशन मिलने लगी। जीपीएफ और बीमा की राशि जारी कर दी गई थी, लेकिन पूरी पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण रोक दिया गया। मिश्रा ने सेवानिवृत्ति के बाद स्वायत्वों के भुगतान के लिए 2021 में हाईकोर्ट में पहली याचिका दायर की थी। इसके बाद मंत्रिपरिषद की स्वीकृति पर 18 जुलाई 2022 को श्रम विभाग ने चार्जशीट जारी की। मिश्रा ने दूसरी याचिका में चार्जशीट को चुनौती देते हुए कहा कि यह चार साल की सीमा से बाहर है और आरोप अस्पष्ट हैं।

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नेपाल में हिंसक प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री ओली ने दिया इस्तीफा, पूर्व पीएम और राष्ट्रपति और गृहमंत्री का घर किया आग के हवाले

नई दिल्ली. पिछले 3 वर्षो में भारत के पड़ोस में बड़े भू-राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। श्रीलंका का आर्थिक संकट हो, पाकिस्तान में इमरान खान की सत्ता से विदाई या बांग्लादेश में सत्ता परिवत्रन, हर जगह एक जैसी कहानी दिखाई दे रही है। बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और अंततः सरकारों का गिरना। अब इस सूची में नेपाल का नाम भी जुड़ गया है। जहां सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रतिबंध लगाने के कदम से भड़के विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया और लगभग 20 लोगों की जान चली गयी।
नेपाल में यह विरोध भी उसी पैटर्न पर चला, शुरूआत सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ हुई है। लेकिन जल्द ही भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों में बदल गयी। अंततः पीएम केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। सूत्रों के अनुसार ओली अब दुबई भागने की तैयारी में है। बीच प्रॉक्सी वॉर का नया मैदान बन गया है।
नेपाल में भीषण प्रदर्शन
दरअसल, नेपाल में फैली अशांति के पीछे बाहरी हाथ होने की थ्योरी मजबूती पकड़ रही है. सरकार ने सोशल मीडिया बैन वापस ले लिया, फिर भी प्रदर्शन शांत नहीं हुए. राजधानी की सड़कों पर ‘केपी चोर, देश छोड़’ के नारे गूंजते रहे.
मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, प्रधानमंत्री ओली और अन्य मंत्रियों के निजी घरों को तोड़फोड़ कर आग के हवाले कर दिया. सत्ताधारी पार्टी के एक नेता के स्वामित्व वाला काठमांडू का मशहूर हिल्टन होटल भी भीड़ ने जला दिया.
ठीक ऐसा ही दृश्य 2024 में बांग्लादेश और 2022 में श्रीलंका में देखने को मिला था, जहां घरेलू मुद्दों पर शुरू हुए प्रदर्शनों ने भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन का रूप ले लिया. दोनों देशों में अचानक भड़की युवा-नेतृत्व वाली भीड़ ने नेताओं के घरों पर धावा बोला और जमकर तोड़फोड़ की.
टीवी पर वही तस्वीरें दिखीं जिनमें भीड़ घरों से सामान लूट रही है, फर्नीचर तोड़ रही है, बेडरूम में आराम कर रही है और स्विमिंग पूल में नहा रही है. अंततः श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को मालदीव और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत भागना पड़ा.
नेपाल अशांति में बाहरी हाथ?
लेकिन इन सत्ता परिवर्तनों को असल में कौन भड़का रहा है? कारण, इसकी गहराई में जाएं तो कई कारक दिखाई देते हैं. दरअसल, नेपाल में पिछले कई महीनों से असंतोष की लहर साफ नजर आ रही थी. 2008 में गणराज्य बनने के बाद से सत्ता बार-बार उन्हीं नेताओं के बीच घूमती रही है- ओली (जिन्हें pro-China माना जाता है), माओवादी केंद्र के नेता प्रचंड और पांच बार प्रधानमंत्री रह चुके शेर बहादुर देउबा. तीनों नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और नेपाल का युवा धीरे-धीरे राजनीतिक व्यवस्था से मोहभंग कर बैठा है. बेरोजगारी और आर्थिक ठहराव ने आग में घी डालने का काम किया.

नेपाल में हिंसक विरोध की 8 तस्वीरें

1. संसद भवन

प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को नेपाल की संघीय संसद को आग के हवाले कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को नेपाल की संघीय संसद को आग के हवाले कर दिया।

2. पीएम ओली का निजी आवास

प्रधानमंत्री ओली के घर में मंगलवार को आग लगा दी। इसके बाद धुएं का गुबार उठता नजर आया।
प्रधानमंत्री ओली के घर में मंगलवार को आग लगा दी। इसके बाद धुएं का गुबार उठता नजर आया।

3. राष्ट्रपति का निजी आवास

राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल के निजी घर में प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को आग लगा दी।
राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल के निजी घर में प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को आग लगा दी।

4. गृहमंत्री का निजी आवास

प्रदर्शनकारियों ने इस्तीफा दे चुके गृहमंत्री रमेश लेखक के घर पर मंगलवार को आगजनी और तोड़-फोड़ की।
प्रदर्शनकारियों ने इस्तीफा दे चुके गृहमंत्री रमेश लेखक के घर पर मंगलवार को आगजनी और तोड़-फोड़ की।

5. पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी को घर में घुसकर पीटा

प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी आरजू राणा को उनके घर में घुसकर पीटा।
प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी आरजू राणा को उनके घर में घुसकर पीटा।

6. वित्त मंत्री को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को वित्त मंत्री विष्णु पौडेल को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। उनके सीने पर लात मारी। (वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।)
प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को वित्त मंत्री विष्णु पौडेल को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। उनके सीने पर लात मारी। (वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।)

7. नेपाली कांग्रेस का पार्टी कार्यालय

प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को नेपाली कांग्रेस के ऑफिस में आग लगा दी।
प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को नेपाली कांग्रेस के ऑफिस में आग लगा दी।

8. केपी शर्मा ओली सुरक्षित जगह शिफ्ट हुए

सुरक्षा बलों ने पीएम ओली को हेलिकॉप्टर से सुरक्षित जगह पर शिफ्ट कर दिया। उन्हें कहां ले जाया गया है, इसकी जानकारी नहीं है।
सुरक्षा बलों ने पीएम ओली को हेलिकॉप्टर से सुरक्षित जगह पर शिफ्ट कर दिया। उन्हें कहां ले जाया गया है, इसकी जानकारी नहीं है।

 

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हनुमान बांध के गेट 40 वर्षो के बाद पहली बार खुले

ग्वालियर शहर में लगातार हुई वर्षा की वजह सभी बांध ओवरफ्लो हो चुके है। तिघरा बांध के जल संसाधन वभाग द्वारा 16 बार गेट खोले जा गये है। 1915 में निर्माण किये तिघरा बांध के वर्षा के मौसम में 16 बार गेट खोलना इतिहास में पहली बार हुआ है। वहीं वीरपुर बांध अधिक भरे जाने की वजह से इसका पानी 40 साल के बाद हनुमान बांध पानी छोड़ा गया है। लेकिन हनुमान बांध के चारों ओर अतिक्रमण हो गया। इस ओर जिला प्रशासन का ध्यान नहीं है। इसके साथ ही हनुमान बांध गेट खोलने इसमें सालों से जमी गाद और जल कुम्भी अब धीरे-धीरे साफ हो गयी । हनुमान बांध के 5 गेट खोल दिये जाने की वजह स्वर्ण रेखा नदी में जलस्तर बढ़ गया है।

110 वर्षो के इतिहास में 16 बार खोले गये गेट
ग्वालियर की पेयजल व्यवस्था को बनाने के लिये स्टेटकाल के समय तिघरा बांध का निर्माण किया गया था। तिघरा बांध के वर्ष 2012 में 11 अगस्त से 15 सितम्बर के बीच 14 बार गेट खोले गये हैं लेकिन इस साल अभी तक तिघरा बांध के 16 बार गेट खोले जा चुके है। वर्तमान समय में तिघरा बांध का जलस्तर 739-70 फीट पर स्थिर है। तिघरा बांध में वर्तमान समय में जितनी पानी की आवक हो रही है। उतने पानी की जल संसाधन विभाग द्वारा शहर को पेजजल के लिये सप्लाई की जा रही है। शहर के आसपास खेती की सिंचाई के लिये स्वर्णरेखा नदी पर हनुमान बांध, वीरपुर बांध, मामा का बांध, गिरवाई बांध, छोटा रायपुर एवं बड़ा रायपुर बांधों की श्रृंखला बनाई गयी थी। ग्वालियर में इस साल हुई तेज बारिश के कारण सभी बांध ओवरफ्लो हो चुके हैं। तिघरा बांध में लगातार बढ़ रहे पानी को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने बांध के लिये इस साल 16वीं बार गेट खोले गये हे। वहीं स्वर्णरेखा नदी पर बनाई गयी बांधों की श्रृखला में हनुमान बांध सबसे अंतिम हैं हनुमान बांध से शहर में स्वर्णरेखा नदी की शुरूआत होती हैं लेकिन हनुमान बांध के कैचमेंट एरिया में लगातार अतिक्रमण होंने और कम बारिश की वजह से वीरपुर बांध एवं हनुमान बांध के नहीं भरने की वजह से हनुमान बांध से लगातार 4 दशकों से पानी नहीं छोड़ा गया था। इस साल वीरपुर बांध की शहर को खोला गया है। जिससे हनुमान बांध में लगातार पानी आ रहा है। जिससे हनुमान बांध के 5 गेट खोले गये है। गेट खोले जाने से हनुमान बांध के अन्दर जमा गाद और जलकुंभी बहकर धीरे-धीरे साफ हो रही है।
तिघरा की गहराई 2 फीट घटी
तिघरा बांध का निर्माण साल 1915 में कराया गया था । तब बांध की गहराई 742 फीट थी। बांध में पानी ओवरफ्लो होने पर इसमें लगे 64 गेट अपने आप ही खुल जाते थे। लेकिन एक शताब्दी पुराने होने की वजह एवं बांध में कई जगह से लीकेज होने की वजह जल संसाधन विभाग ने इसको 2 फीट कम भरना प्रारंभ कर दिया है और साथ ही जल निकाली के लिये अलग से 7 गेट बनाये हैं।
शहर में आसपास हो खेती के लिये स्वर्ण रेखा पर बनाये गये बांध
स्टेटकाल में शहर के आसपास खेती के लिये स्वर्णरेखा के समय ग्वालियर की आबादी काफी कम थी। शहर के ग्रामीण इलाका था। जहां पर लोगों का मुख्य व्यापार खेती होता था। किसानों को खेती के लिये पर्याप्त मात्रा में पानी मिल सके। इसके लिये स्वर्णरेखा नदी पर छोटे-छोटे बांध बनाये थे। यह सभी बांध आपस में नहरों के जरिये एक दूसरे से जुड़े हुए है।
स्वर्णरेखा नदी ककेटो से जुड़ी है
स्वर्ण रेखा नदी के बांधों को भरने के लिये स्टेट काल के समय बनाये गये ककेटो बांध से नहर के जरिये जोड़ा गया है। ककेटो बांध से जाने वाली नहर का पानी रायपुर बांध में आता है। यहां से मामा का बांध, गिरवाई बांध के सीधे हनुमान बांध में आता है। गिरवाई बांध से आज भी हनुमान बांध में पानी लाने के लिये करीब 30 फीट चौड़ी और करीब 20 गहरी नहर बनी हुई है।

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ग्वालियर का बेटा सूर्यांश बना लेफ्टिनेंट , OTA से इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग ओवर ऑल अच्छा रहा प्रदर्शन

ग्वालियर. मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के सूर्यांश ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर अपने माता-पिता के साथ-साथ ग्वालियर संभाग अंचल का नाम रोशन किया है। उन्होंने बिहार स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) गया से इंजीनियरिंग कोर की ट्रेनिंग पूरी की। सूर्यांश ने ओवर ऑल अच्छा प्रदर्शन किया। पॉसिंग आउट परेड में भाग लेने के पश्चात् सूर्यांश को राष्ट्रपति ने लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन किया है।
आपको बता दें सूर्यांश ने पढाई के लिये मेहनत और समर्पण तथा देश के लिये कुछ करने का जज्बा दोनों अगर साथ है तो कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है ग्वालियर के सूर्यांश प्रताप सिंह ने। बिहार के आफीसर ट्रेनिंग सेन्टर गया में पासिंग आउट परेड में हिस्सा लेने के पश्चात सूर्यांश को राष्ट्रपति ने लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन किया है।
कामयाबी हासिल करने और ऊॅचाइयों को छूने के लिये हौंसला होना जरूरी है। सूर्यांश ने अपनी शिक्षा के दौरान भारतीय सेना में अधिकारी बनने की ठान ली और और कामयाब होने के लिये 2018 में NDA  की तैयारी शुरू की उसमें सिलेक्शन नहीं हुआ लेकिन हिम्मत नहीं हारी फिर इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद SSB की रात दिन तैयारी की और लेफ्टिनेंट के पद पर सिलेक्शन हो गया।
प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही सूर्यांश की पढाई के साथ साथ खेलों में रूचि रही है। एक तरफ जहॉ उन्होंने अपनी ऐकेडमी में ओवर ऑल अच्छा प्रदर्शन कर CMM . की रेंक हासिल की वही खेलों में क्रॉस कन्ट्री मेरिट सर्टिफिकेट एवं वेस्ट स्पोर्टस पर्सन का अवार्ड प्राप्त किया।  सूर्याश की इस उपलब्धि पर परिवार और गॉव में खुशी की लहर दौड गई है, गॉव और क्षेत्र के लोगों ने उन्हें बधाई देते हुये उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।
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ऐलिवेटड रोड़ बनाने वाली कंपनी को फिर मिला समय, फरवरी में पूर्ण करनी थी अभी 65% काम, 2026 तक का मांगा समय

ग्वालियर. ड्रीम प्रोजेक्टर एलिवेटेड रोड़ कंस्ट्रक्शन कंपनी श्री मंगलम बिल्डकॉन इंडिया प्रायवेट लिमिटेड गुजरात की ढिलाई की वजह से यह प्रोजेक्ट लगतार बिलंब हो रहा है। निर्माण एजेंसी लोक निर्माण सेतु संभाव से हुए अनुबंध के मुताबिक कंपनी का पहले चरण (6.5किमी) जलालपुर चौराहे के पास से लक्ष्मीबाई समाधिस्थल के पास का काम फरवरी 2025 में पूरा करना था। लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है।

कम्पनी ने शासन स्तर से दिसम्बर तक का समय बढ़वा लिया और अभी तक कम्पनी 65प्रतिशत काम कर पायी है। अब कम्पनी प्रबंधन ने कए बार फिर जून 2026 तक का समय मांगा है। जिसके पीछे मानसून को वजह बताया है। इससे पहले मंगलम बिल्डकॉन ने पड़ाव का नया आरओबी का निर्माण कार्य भी कई वर्ष देरी से पूरा किया था।
बार-बार समय
23 जून 2022 के अनुबंध अनुसार 30 माह यानी कि 17 फरवरी 2025 तक काम पूरा होना था। लेकिन तब तक 50% भी काम न कर सकी कंपनी ने दिसंबर 2025 तक का वक्त लिया।कंस्ट्रक्शन कंपनी ने 38 महीने से अधिक समय बीतने के बाद अब फिर सेतु संभाग में आवेदन देकर निर्माण कार्य पूरा करने के लिए जून 2026 तक का समय मांगा है।
कहीं बारिश तो कहीं अतिक्रमण-अधिग्रहण का पेंच
बारिश: कंस्ट्रक्शन कंपनी श्री मंगलम बिल्डकॉन काम न कर पाने के लिए बारिश को कारण बता रही है। जबकि अनुबंध के वक्त इसको लेकर कोई परेशानी नहीं बताई थी।
अतिक्रमण: महलगांव मौजे के सर्वे नंबर 212/1, 212/2, 213, 214, 251, 264 एवं 220/1765 में अतिक्रमण कर पक्के मकान बन गए हैं। कंपनी प्रबंधन का कहना है कि प्रशासन द्वारा ये अतिक्रमण नहीं हटाने के कारण काम नहीं हो पा रहा।
अधिग्रहण: मोहम्मदपुर, महलगांव, गौसपुरा, रमटापुरा, रानीपुरा और मानपुर गिर्द में 2300 मीटर से अधिक जमीन का अधिग्रहण होना है। जिसमें से अब तक 3 मौजे में ही अधिग्रहण हो सका है।
ये है कंपनी के काम की हालत
38 महीने से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी कंपनी अब तक मुख्य कॉरिडोर के 229 पिलर में से 195 का काम ही पूरा कर सकी है।
228 स्लैब में से अब तक 122 डाले जा सके हैं।
13 लूप बनाए जाने हैं जिनमें से सिर्फ 5 लूप का काम शुरू हो सका है और 8 पर काम ही नहीं हो रहा।

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