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संभल में सरकारी जमीन पर बनी ईदगाह पर गजरा बुलडोजर किया जमींदोज

संभल. मढ़न गांव में मंगलवार को कब्रिस्तान की 70 वर्गमीटर सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनाई गयी ईदगाह को बुलडोजर चलाकर पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया। इस काम को राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया है। स्थानीय ग्रामीण की शिकायत पर तहसीलदार धींरेन्द्र कुमार सिंह ने जांच कराई थी। जिसमें अवैध कब्जे की पुष्टि हुई थीं इसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट आशुतोष तिवारी ने बेदखली का आदेश जारी किया था। इस आदेश के अनुपालन में टीम ने मौके पर पहुंचकर धारा 67 के तहत कार्यवाही की ओर सरकारी जमीन को भूमाफियाओं के चंगुल से पूरी तरह से मुक्त कराया।
भूमाफियाओं की बड़ी साजिश नाकाम
हसीलदार ने बताया कि जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल के सख्त निर्देशों के तहत यह कार्रवाई हुई है। जानकारी के अनुसार, कुछ लोग कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध कब्जा करके प्लॉटिंग करने की फिराक में थे। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि जिले में सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने का अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसे भूमाफियाओं को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आपको बता दें कि संभल के मढ़न गांव में कब्रिस्तान की जमीन पर बनी अवैध ईदगाह के विध्वंस के दौरान डीएम अंकित खंडेलवाल और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई खुद मौके पर पहुंचे।  उन्होंने तहसीलदार धीरेंद्र सिंह से घटना की पूरी जानकारी ली। इस दौरान डीएम ने तहसीलदार को क्षेत्र की अन्य सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों को चिन्हित कर कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

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सत्ता परिवर्तन होते ही तसलीमा नसरीन की बंगला वापिसी, 20 वर्षो के बाद कोलकाता आयेगी बांग्लादेशी लेखिका

नई दिल्ली. बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन करीब 20 सालों के बाद कोलकाता लौट रही है। वह 1 अगस्त से रवीन्द्र सदन में कट्टरपंथ -विरोधी एक कार्यक्रम में शिरकत करेगी। इस कार्यक्रम में कवि और लेखक शिरकत कर रहे हैं। तस्लीमा ने स्वयं सोशल मीडिया पर इस खुशखबरी की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद से साहित्यक और सांस्कृतिक जगत में एक नयी बहस छिड़ गयी है।
आपको बता दें कि तत्कालीन लेफ्ट की सरकार की दौरान तसलीमा नसरीन के खिलाफ तीव्र विरोध प्रदर्शन हुआ था। स्थिति हो गयी थी कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो गयी थी। इस वजह से 2007 में तसलीमा नसरीन को शहर छोड़ना पड़ा था। इसके बाद से तस्लीमा नसरीन ने कोलकाता लौटने के बाद कई प्रयास किये हैं। लेकिन सुरक्षा वजहां का हवाला देते हुए उनके कई कार्यक्रम रद्द कर दिये गये। इस का परिणाम यह रहा है कि वह करीब 20 वर्षो से कोलकाता लौट नहीं पाई। अब पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद तसलीमा नसरीन के कोलकाता लौटने का संयोग बना है।

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MP भोजशाला परिसर के नजदीक हर शुक्रवार होगी नमाज, मुस्लिम पक्ष को अलग से दे जगह

धार. सुप्रीमकोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार को धार के भोजशाला मंदिर से सटे किसी खुले स्थान पर नमाज के लिये जगह देने के लिये कहा है कि यह आदेश प्रति शुक्रवार की दोपहर 1-3 बजे के बीच होनी वाली नमाज के लिये है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह आदेश एमपी हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुएदिया है। जिसमें परिसर को मंदिर करार दिया गया है। सुप्रीम ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से यह भी कहा है कि बिना न्यायालय की मंजूरी से परिसर में किसी भी तरह का बदलाव न करें।
सुनवाई के बाद भोजशाला संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक भोजशाला में नियमित पूजा-अर्चना जारी रहेगी। वहीं तय जगह पर मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से किया इंकार
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमला मौला परिसर को लेकर मुस्लिम पक्षों की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है। इन याचिकाओं में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गयी है। जिसमें भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर माना गया था। परिसर में नमाज अदा करने पर रोक लगा दी गयी थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई की। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरित राहत देने से मना कर दिया। यानी पहले जैसी व्यवस्था बहाल नहीं होगी। जिसके तहत शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय का नमाज और निर्धारित दिनों में हिन्दू पक्ष को पूजा की अनुमति थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सभी पक्षों से जसवाब मांगा है। अब इस विवाद पर आगे की सुनवाई बाद में होगी।
भोजशाला परिसर में नहीं होगा बदलाव
मुस्लिम पक्ष की तरफ से सीनियर वकील हुजैफा अहमदी की मांग स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) सुप्रीम कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना भोजशाला परिसर में कोई भी संचरनात्मक बदलाव नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि मामले की अंतिम सुनवाई लगभग 3 सप्ताह बाद की जायेगी। मामले की सुनवाई शुरू होते ही मुख्य न्यायधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर नोटिस जारी करने का फैसला किया और साथ ही मामले को अंतिम सुनवाई के लिये सूचीबद्ध करने के निर्देश दिये है।
पूजा स्थल अधिनियम का दिया गया हवाला
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी मुस्लिम पक्ष की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 की भावना और प्रावधानों के विपरीत है। उनका कहना था कि परिसर में लंबे समय से नमाज अदा की जाती रही है और इसके समर्थन में कई सरकारी अभिलेख भी उपलब्ध हैं। ऐसे में लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था को बदलना कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने पूरे मामले को शांतिपूर्ण ढंग से संभाला है। उन्होंने कहा कि आदेश लागू होने के बाद क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या सामने नहीं आई और प्रशासन ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखा है।
अब सुप्रीम कोर्ट में होगी अंतिम कानूनी लड़ाई
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अब सर्वोच्च अदालत सभी पक्षों की दलीलें, एएसआई रिपोर्ट, ऐतिहासिक अभिलेख और कानूनी पहलुओं का परीक्षण करेगी। अदालत ने संकेत दिए हैं कि मामले की विस्तृत सुनवाई अगले दो से तीन सप्ताह के भीतर की जा सकती है। इस फैसले पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका प्रभाव केवल भोजशाला विवाद तक सीमित नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों से जुड़े अन्य मामलों पर भी पड़ सकता है।

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ADG रेल द्वारा गठित की गयी SIT से ट्रेन में हुई ज्वेलरी का खुलासा, 7 शातिर गिरफ्तार, 15 लाख की ज्वेलरी जब्त

बदमाश CCTV में भी कैद हो गए थे।

गुना. ग्वालियर-बीना पैसंजर ट्रेन में मुंगावली के एक परिवार से लाखों रूपये के सोने-चांदी की ज्वेलरी चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गैंग का गुना जीआरपी ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने यूपी के एटा और हाथरस निवासी 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 15 लाख रूपये के जेवर जब्त किये है। बाकी सामान की तलाश जारी है।
शादी के लिये ले जा रहे थे ज्वेलरी
13 जून का मुंगावली के ग्राम नरखेडा निवासी आबिद खान अपनी बेटी की शादी के लिये परिवार के साथ ग्वालियर-बीना पैसेंजर ट्रेन से म्याना जा रहे थे। आरोपियों ने पहले से उनकी रेकी कर ली थी। यात्रा के बीच बहाना बनाकर ट्रॉली बैग ऊपर रखवाया और चेन काटकर लगभग 290 ग्राम सोना व सवा किलो चांदी की ज्वेलरी चोरी कर शाढौरा स्टेशन पर उतरकर फरार हो गये।
साइबर ट्रेकिंग से हुआ खुलासा
एडीजी रेल राजाबाबू सिंह के निर्देशन में गठित एसआईटी और साइबर सेल ने कई रेलवे स्टेशनों व होटलाूें के सीसीटीवी फुटेज तलाशे। जांच के बीच पहले एक आरोपी राजकुमार जाटव को हिरासत में ले लिया गया। जिसके बाद पूरे गिरोह तक पुलिस पहुंच गयी।
चोरी के जेवर जमीन में गाड़े थे
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी चोरी के बाद म्याना रेलवे स्टेशन के आउटर पर जेवर जमीन में गाड़कर फरार हो गए थे। एक महीने बाद जब वे जेवर निकालने लौटे तो एसआईटी ने घेराबंदी कर सातों आरोपियों को दबोच लिया। मौके से करीब 15 लाख रुपये के आभूषण बरामद किए गए।पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के सदस्य यूपी के कई जिलों में वांछित हैं और पहले भी ऐसी वारदातें कर चुके हैं। चोरी के कुछ आभूषण अलीगढ़ के एक ज्वेलर को बेच दिए गए हैं, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

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शताब्दी एक्सप्रेस में एक्सपायरी ब्रेड परोसने पर आईआरसीटीसी ने कैटरिंग वेंडर पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, मैनेजर समेत स्टाफ हटाया

भोपाल. नई दिल्ली-रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस मंे यात्रियों को एक्सपायरी डेट वाली ब्रेड परोसने के मामले में आईआरसीटीसी ने सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित कैटरिंग वेंडर पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जांच में लापरवाही सामने आने पर मैनेजर समेत जिम्मेदार कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है, लेकिन इस कार्रवाई के बाद भी रेलवे की खानपान व्यवस्था पर गंभीर सवाल बने हुए है। यात्रियों का कहना है कि जब रोजाना भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही है तो ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही है।
एजेंसी को दिए सख्त निर्देश
आईआरसीटीसी नार्थ जोन, नई दिल्ली के मैनेजर विवेक रावत के अनुसार, मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि कार्रवाई केवल आर्थिक दंड तक सीमित नहीं रखी गई है। जिम्मेदार कर्मचारियों को भी हटाया गया है। भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो इसके लिए संबंधित एजेंसी को सख्त निर्देश दिए गए है।
नाश्ता दिल्ली से लोड हुआ था
आईआरसीटीसी के अनुासर शताब्दी, एक्सप्रेस का नाश्ता दिल्ली स्थित बेस किचन से लोड किया गया था। भोजन की गुणवत्ता जांचने के लिए सुबह दो बार निरीक्षण और ट्रेन में लोडिंग के समय भी जांच की जाती है। इसके बावजूद एक्सपायरी ब्रेड यात्रियों तक कैसे पहुंच गई इसकी जांच अभी जारी है। शुरूआजी जांच में किसी पैकेट की जांच छूट जाने की आशंका जताई गई है।

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लापता लड़कियों को तलाशने में पुलिस गंभीर नहीं, हाईकोर्ट ने फटकारा तो जांच अधिकारियों का सिर्फ फेसबुक-इंस्टाग्राम का ही पता

ग्वालियर. मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर बेंच के युगल पीठ ने राज्य में गायब लड़कियों और गुमशुदा इंसानों की बरामदगी को लेकर पुलिस प्रशासन के ढीले रवैया पर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया है। हाईकोर्ट ने बेहद सख्त लहजे में कहा है कि पुलिस ऐसे मामलों में अत्यंत हल्के में ले रही है जांच का जिम्मेा ऐसे लापरवाह और अक्षम अधिकारियों को सौंप दिया जाता है। जिन्हें आधुनिक या प्रभावी तफ्तीश का क…ख….ग तक नहीं मालूम।
भिंड के आलमपुर थाने में दर्ज एक गुम इंसान मामले में गंभीरता से कार्यवाही नहीं करने के केस पर हाईकोर्ट की युगल बेंच सुनवाई कर रही थी। माममले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने भिंड एसपी का वर्तमान जांच अधिकरी का तत्काल हटाने और मामले की कमान ‘‘एएसपी’’ स्तर के सीनियर अधिकारी को सौंपने के कड़े निर्देश दिये है।
इंस्टाग्राम-फेसबुक देख लिया नहीं मिला सुराग
पूरा मामला भिंड जिले के आलमपुरा थाने से जुडा हुआ है। जहां एक पिता ने अपनी लापता बेटी की बरामदगी के लिये हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गयी है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया-न्यायमूर्ति अनुराधा शंुक्ला युगल पीठ के समझ आलमपुर थाने में तैनात एएसआई ओंकार सिंह तोमर केस डयरी लेकर व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे। हाईकोर्ट ने जब उनसे लड़की की तलाश को लेकर किये गये प्रयासों पर सवाल दागे तो एएसआई को जवाब देते नहीं बना। उन्होंने हाईकोर्ट को बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब दते हुए कहा कि मैंने लड़की का इंस्टाग्रम और फेसबुक में तलाश किया उसमें कोई सुराग नहीं मिला। वैसे संदिग्ध को गांव में ही देखा गया था।
भिंड एसपी से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा
हाईकोर्ट ने केवल निचले स्तर के अधिकारी को ही नहीं, बल्कि भिंड पुलिस अधीक्षक को भी आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि एसपी खुद जांच अधिकारियों की सक्षमता को परखे बिना ही लापरवाही से केस सौंप रहे हैं। अदालत ने भिंड एसपी से अगली सुनवाई तक व्यक्तिगत हलफनामा मांगते हुए 3 बिंदुओं पर जवाब तलब किया है।
24 घंटे के भीतर जांच अधिकारी को हटाएं
इस पर कोर्ट ने काफी नाराजगी जताई और कहा कि विवेचना अधिकारी सिर्फ फेसबुक व इंस्टाग्राम तक ही सीमित हैं। ASI के इस जवाब पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि आईओ जांच करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। क्या पुलिस की तफ्तीश अब सिर्फ सोशल मीडिया स्क्रॉल करने तक सीमित रह गई है? बेंच ने सख्त संदेश देते हुए निर्देशित किया है।
गुम इंसान की रिपोर्ट दर्ज होने पर पुलिस उसे कतई हल्के में न ले।
लापता व्यक्ति को ढूंढने के लिए हर संभव, वैज्ञानिक और गंभीर प्रयास किए जाएं।
भिंड एसपी 24 घंटे के भीतर वर्तमान जांच अधिकारी को हटाएं।
किसी एडिशनल एसपी रैंक के अधिकारी को केस सौंपें, जो अपनी पूरी ताकत लड़की को बरामद करने में झोंके।

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साइबर ठगी 21 करोड़ 6 में चेन्नई से लेकर कश्मीर कनेक्शन, देश की 20 हजार बैंकों में किया ट्रांजेक्शन

ग्वालियर. मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट और चेम्बर ऑफ कॉमर्स एड इंडस्ट्रीजल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी 70 वर्षीय अशोक विजयवर्गीय से हुई 31 करोड़ 6 लाख रूपये की साइबर ठगी ने देश की जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। ग्वालियर की राज्य साइबर सेल की शुरूआती जांच में सामने आया है कि अंर्त राष्ट्रीय साइबर ठगों ने इस पूरी रकम को 4 लेयर में 20 से अधिक बैंक ट्रांजेक्शन के माध्यम से कन्याकुमार से कश्मीर तक फैले हजारों बैंक खातों में खपा दिया है। जांच में सामने आये 99 फर्स्ट लेयर बैंक अकाउंट अब साइबर टीम के रडार पर है। राहत की बात यही रही है कि पुलिस ने अभी तक लगभग 2 करोड़ रूपये फ्रीज (हॉल्ड) कराने में कामयाब रही है।
साइबर ठगों का देशभर में फैला नेटवर्क
सइबर जांच मंें मालूम पड़ा है कि ठगों ने रकम को एक-दो शहरों तक सीमित नहीं रखा है बल्कि पैसा कन्याकुमारी से कश्मीर और गुजरात से कोलकाता तक फैले हजारों बैंक खातों में ट्रांसफर किया है। इसके बाद रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर आगे भेजा है। ताकि जांच एजेंसियों के लिये उसकी ट्रेल को पकड़ना मुश्किल हो जाये।
ठगों का ‘फोर-लेयर’ चक्रव्यूह
सायबर एक्सपर्ट्स और जांच अधिकारियों के अनुसार, ठगों ने इस पूरी राशि को पुलिस की पकड़ से दूर रखने के लिए एक जटिल ‘फोर-लेयर’ (चार स्तरीय) बैंकिंग नेटवर्क का इस्तेमाल किया।
20,000 से ज्यादा ट्रांजेक्शन: पिछले 7 महीनों के भीतर (दिसंबर 2025 से जुलाई 2026) पीड़ित के खाते से निकले पैसों को 20 हजार से अधिक छोटे-बड़े ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए देश भर में घुमाया गया।
फर्स्ट लेयर के 99 खाते रडार पर: खातों से रकम सबसे पहले सीधे तौर पर 99 बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर हुई थी। यह फर्स्ट लेयर मानी गई है। सायबर सेल टीम ने सबसे पहले इन 99 खातों की सूची तैयार कर उन्हें ब्लॉक कराने की प्रक्रिया शुरू की है।
हजारों खातों का जाल: 99 खातों से पैसे तुरंत सेकंड, थर्ड और फोर्थ लेयर के तहत देश के कोने-कोने में मौजूद कई हजार संदिग्ध व फर्जी (म्यूल खातों) खातों में ट्रांसफर कर एटीएम, शॉपिंग वाउचर, कैश वाउचर और क्रिप्टो करंटी (यूएसडीटी) के जरिए निकाल लिए गए।
चार लेकयर 20049 ट्रांजेक्शन: ठगों ने फर्स्ट लेयर-99, सेकंड लेयर-450, थर्ड लेयर-12 हजार, फोर्थ लेयर-7500 ट्रांजेक्शन में यह पूरी रकम ट्रांसफर की है।

 

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“एक पेड़ माँ के नाम” के तहत कृषि विज्ञान केंद्र में हुआ करंज एवं खमेर के पौधरोपण

ग्वालियर, – पर्यावरण संरक्षण एवं हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, परिसर में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर केंद्र के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने करंज एवं खमेर (सफेद टीक) के पौधों का रोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लिया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. शैलेन्द्र सिंह कुशवाह ने कहा कि करंज एवं खमेर दोनों ही पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा इमारती एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्ष हैं। कृषि वानिकी की वैज्ञानिक डॉ. अमिता शर्मा ने कहा कि “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान मातृ सम्मान के साथ-साथ धरती माँ के संरक्षण का भी प्रेरक संदेश देता है।
कार्यक्रम में रोपे गए पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण का दायित्व केंद्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा लिया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस.पी.एस. तोमर, डॉ. रश्मि बाजपेई, डॉ. राजीव सिंह चौहान सहित केंद्र के अन्य वैज्ञानिक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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अब ट्रेन में नहीं चलेगा टिकट का स्क्रीनशॉट, रेलवे ने बदला यह जरूरी नियम

ग्वालियर. यदि आप भी ट्रेन में सफर करते समय टीटीई को मोबाइल पर टिकट का स्क्रीनेशॉट, पीडीएफ फाइल या वाट्सएप् पर फॉरवर्ड किया गया मैसेज दिखाते है तो अब आपको बेहद सावधान होने की जरूरत है। भारतीय रेलवे ने अपने आधिकारिक इंटरनेेश मीडिया प्लेटफार्म पर एक महत्वपूर्ण पोस्ट साझा करते हुए अनारक्षित टिकटों को लेकर नियमों में बदलाव किया है।
एप के भीतर मौजूद ओरिजिनल डिजिटल टिकट ही वैध माना जाएगा
नए नियमों के अनुसार रेल वन से बुक किए गए अनारक्षित टिकटों के मामले में अब यात्रा के दौरान सिर्फ और सिर्फ एप के भीतर मौजूद ओरिजिनल डिजिटल टिकट ही वैध माना जाएगा। यदि कोई यात्री टिकट की फोटोकॉपी, स्क्रीनशॉट या किसी अन्य मैसेजिंग एप पर आई कॉपी दिखाता है तो रेलवे उसे बिना टिकट मानकर जुर्माना वसूला जा सकता है।
रेलवे ने क्यों लिया यह फैसला
अक्सर देखा गया है कि रेल यात्रा के दौरान कई लोग एक ही टिकट का स्क्रीनशॉट या पीडीएफ अलग-अलग मोबाइल पर फॉरवर्ड कर कई लोगों को यात्रा करा देते है। रेलवे बोर्ड के अनुसार स्क्रीनशॉट और वाट्सएप् के जरिए टिकट शेयर करने की इस आदत से धोखाधडी और राजस्व की हानि की चिंताएं काफी बढ गई थी। इसी डिजिटल जालसाजी और टिकटों के दुरूपयोग को रोकने के लिए रेलवे ने अब केवल ओरिजिनल रेल वन एप टिकट और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को ही मान्यता देने का फैसला किया है।

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एक नेटवर्क से जुड़ेंगे MP के 149 टोल प्लाजा, गड़बड़ियों पर लगेगी रोक

ग्वालियर. ग्वालियर चंबल अंचल के 19 सहित प्रदेश के 149 टोल प्लाजा अब एक ही सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क से जुडेंगे। मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंश कॉर्पोरेशन ने सभी टोल प्लाजाओं को भोपाल मुख्यालय से मैनेज्ड मल्टी प्रोटोकॉल लेबल स्विचिंग नेटवर्क के जरिए जोडने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भोपाल मुख्यालय से हर टोल प्लाजा की रियल टाइम निगरानी की जा सकेगी। किसी भी टोल प्लाजा पर नेटवर्क डाउन होने, कनेक्टिविटी बाधित होने, डेटा ट्रांसफर में गडबडी या बैंडविड्थ कम मिलने की सूचना तत्काल मुख्यालय तक पहुंच जाएगी। इस कार्य के लिए 3.81 करोड रुपए की लागत आएगी।
ग्वालियर संभाग के टोल प्लाजा भी इस नेटवर्क से जुडेंगे
इससे टोल संचालन में पारदर्शिता बढेगी, राजस्व संग्रह की निगरानी अधिक प्रभावी होगी और तकनीकी गडबडियों का समय रहते समाधान किया जा सकेगा। ग्वालियर संभाग के टोल प्लाजा भी इस नेटवर्क से जुडेंगे जिससे यहां के टोल संचालन पर भी भोपाल से सीधी नजर रखी जा सकेगी। परियोजना के तहत प्रत्येक टोल प्लाजा को समर्पित एमपीएलएस नेटवर्क से जोडा जाएगा जबकि भोपाल स्थित मुख्यालय को हाई-स्पीड नेटवर्क हब के रूप् में विकसित किया जाएगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद प्रदेश के सभी टोल प्लाजा एक केंद्रीकृत डिजिटल नेटवर्क के दायरे में आ जाएंगे।
किस डिवीजन के कितने टोल दायरे में आएंगे
एमपीआरडीसी ने अपने भोपाल डिवीजन के 20, ग्वालियर डिवीजन के 19, छिंदवाडा के 8, धार के 20, इंदौर के 9, जबलपुर के 10, नर्मदापुरम के 3, रीवा के 13, सागर के 15, शहडोल के 9 और उज्जैन के 23 टोल प्लाजा को इसमें शामिल किया है।
ग्वालियर डिवीजन के चिह्नित टोल प्लाजा
ग्वालियर डिवीजन के उमरी टोल प्लाजा, देवखेडी, बिलौआ, लुक्की, बसवाहा, भीमपुरा, पंडोला, बरेठा, फूप, पलोथर, पगारा, फुटेरा, रतवाई, चितोरा, धनेली, सौास, मौ, मगरौनी और केरूआ टोल प्लाजा को इस प्रोजेक्ट में चिह्नित किया है।

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